Wisdom (16897)

Don\'t be worry in life because trouble
and ease are some parts of life
To judge ourselves for future times😊

 
28
 
15 hours
 
Shubhiii

रिश्ते निभाना तो कोई उस बूढ़े घर से सीखे..
खंडर बनके भी..वो ज़मीन का साथ नही छोड़ता..।।😐

 
66
 
15 hours
 
"Am@rdeep"#

पाप हमारी सोच से होता हैं, शरीर से नही और तीर्थों का जल, हमारे शरीर को साफ करता हैं, हमारी सोच को नही ।।

 
75
 
15 hours
 
"Am@rdeep"#

ख़ुशी अक्सर
उस #दरवाजे से
#चुपके से
अंदर आ जाती है
जिसके बारे में
आपको पता भी
नहीं रहता कि
आपने खुला छोड़ रखा है¡

 
114
 
a day
 
DDLJ143

कुदरत का नियम है...
*मित्र और चित्र*
दिल से बनाओगे तो उनके
रंग जरूर निखर आयेंगे!🙏🏼💐

 
265
 
a day
 
anil Manawat

‼🙌‼
*मनुष्य की चाल धन से भी बदलती*
*है और** *धर्म से भी बदलती है..*
*जब धन संपन्न होता है तब अकड़*
*कर चलता है जब धर्म संपन्न होता हे..!!*
*तो विनम्र होकर चलता है..*
*मनुष्य वास्तविक पूंजी धन नही, बल्कि*
*उसके विचार हैं क्यों कि धन तो खरीदारी में*
*दूसरों के पास चला जाता है पर विचार अपने*
*पास ही रहते हैं..!!*

 
160
 
a day
 
DDLJ143

Sometimes you have to be mature with your situation.. accept the reality.. and forget it.. 👍🏻

 
122
 
2 days
 
jit3npatel

*खुद से बहस करोगे*
*तो सारे सवालों के*
*जबाब मिल जायेगे......*
*और दूसरों से करोगे*
*तो कई सवाल*
*और खड़े हो जायेगे...*🙏

 
327
 
2 days
 
anil Manawat

*आखिर क्यों रिश्तों की गलियाँ इतनी तंग हैं...*

*शुरूआत कौन करे, यही सोच कर बात बंद है...*🙏

 
322
 
4 days
 
anil Manawat

!! भय कैसा !!
मैंने सुना है, एक युवक,
एक राजपूत युवक विवाह करके लौट रहा है।
नाव में बैठा है, जोर का तूफान उठा है।
उसकी नववधू कंपने लगी, घबड़ाने लगी;
लेकिन वह निश्चिंत बैठा है।
उसकी पत्नी ने कहा: आप निश्चिंत बैठे हैं!
तूफान भयंकर है,
नाव अब डूबी तब डूबी हो रही है,
आप भयभीत नहीं हैं?
उस राजपूत युवक ने म्यान से तलवार निकाली——
चमचमाती नंगी तलवार——
अपनी पत्नी के गले के पास लाया,
ठीक गले में छूने लगी तलवार;
और पत्नी हंसने लगी।
उस राजपूत ने कहा: तू डरती नहीं!
तलवार तेरी गर्दन के इतने करीब है,
जरा—सा इशारा कि गर्दन अलग हो जाए,
तू डरती नहीं है?
उसने कहा: जब तलवार तुम्हारे हाथ में है,
तो भय कैसा! जहां प्रेम है, वहां भय कैसा!
उस युवक ने कहा कि
यह तूफान भी परमात्मा के हाथ में है।
यह तलवार बिलकुल गर्दन के करीब है,
लेकिन परमात्मा के हाथ में है, तो भय कैसा?
जो होगा, ठीक ही होगा।
अगर गर्दन कटने में ही हमारा लाभ होगा,
तो ही गर्दन कटेगी;
तो हम धन्यवाद देते ही मरेंगे।
अगर यह तूफान हमें डुबाता है,
तो उबारने के लिए ही डुबाएगा।
उसके हाथ में तूफान है, भय कैसा?
मेरे हाथ में तलवार है, तू भयभीत नहीं;
यह तलवार किसी और के हाथ में होती,
तू भयभीत होती।
तेरा परमात्मा से प्रेम का नाता नहीं है,
इसलिए भयभीत हो रही है।
तूफान के कारण भयभीत नहीं हो रही है,
परमात्मा से प्रेम नहीं है
इसलिए भयभीत हो रही है।
ख्याल रखना, जब भी तुम भयभीत होते हो,
तो असली कारण सिर्फ एक ही होता है:
परमात्मा से प्रेम नहीं है।
जिसका परमात्मा से प्रेम है,
उसके लिए सारे भय विसर्जित हो जाते हैं।
🙏🙏🙏🙏

 
165
 
4 days
 
Dubey Ji
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