Wisdom (16 in 1 week | sorting by most liked)

*जिंदगी सिर्फ एक बार मिलती है...*

*ये एक झूठ है...!!!*

*जिंदगी तो हमे रोजाना मिलती है....*

*मौत ही सिर्फ एक बार मिलती है...!!!*🙏

 
350
 
4 days
 
anil Manawat

*भीड़ में सब लोग अच्छे नही होते*

*और*

*अच्छे लोगों की भीड़ नही होती.*🙏

 
309
 
5 days
 
anil Manawat

पानी बचाया जा सकता है, लेकिन बनाया नहीं जा सकता ।
दादा जी ने नदी में पानी देखा । पिता जी ने कुएं में। हमने नल में देखा । बच्चों ने बोतल में । अब उनके बच्चे कहाँ देखेंगे..?

*जरूर विचार करें एवं*
*पानी को व्यर्थ न करें.✍ ✍
🙏🏻🙏🏻

 
292
 
5 days
 
Smartest19

*किसी ने पूछा इस दुनिया में आपका अपना कौन हैं..,*

*मैंने हंसकर कहा,*
*जो मुझे पढ़ रहा है 😊🙏..*

 
239
 
2 days
 
anil Manawat

*कौन कहता हैं कि*
*ख़ाली हाथ आयें थे*
*ख़ाली हाथ जाएँगे*
*अरे मानस*
*पूर्व जन्म के कर्म लेकर आयें थे*
*इस जन्म के भी साथ लेकर जाएँगे*

 
225
 
5 days
 
Veeshal.joshee

वरदान, खुशी, आशीर्वाद तीनों एकसाथ मिल सकते हैँ जब..!

कोई बुजुर्ग निःशब्द तुम्हारे झुके सिर पर अपनी कांपती उँगलियाँ फेर दे तब..!!🙏🙏

 
215
 
3 days
 
anil Manawat

ईश्वर को मंदिर से ज्यादा
इंसान का दिल अच्छा लगता है

क्योंकि, मंदिर में
इंसान का दिया चलता है

लेकिन दिल में
भगवान का दिया चलता है

 
213
 
6 days
 
Jasmine

एक बार एक शिव भक्त धनिक शिवालय जाता है।
पैरों में महँगे और नये जूते होने पर सोचता है कि क्या करूँ?
यदि बाहर उतार कर जाता हूँ तो कोई उठा न ले जाये और अंदर पूजा में मन भी नहीं लगेगा; सारा ध्यान् जूतों पर ही रहेगा। उसे बाहर एक भिखारी बैठा दिखाई देता है। वह धनिक भिखारी से कहता है " भाई मेरे जूतों का ध्यान रखोगे? जब तक मैं पूजा करके वापस न आ जाऊँ" भिखारी हाँ कर देता है।

अंदर पूजा करते समय धनिक सोचता है कि " हे प्रभु आपने यह कैसा असंतुलित संसार बनाया है? किसी को इतना धन दिया है कि वह पैरों तक में महँगे जूते पहनता है तो किसी को अपना पेट भरने के लिये भीख तक माँगनी पड़ती है! कितना अच्छा हो कि सभी एक समान हो जायें!!" वह धनिक निश्चय करता है कि वह बाहर आकर भिखारी को 100 का एक नोट देगा।

बाहर आकर वह धनिक देखता है कि वहाँ न तो वह भिखारी है और न ही उसके जूते ही। धनिक ठगा सा रह जाता है। वह कुछ देर भिखारी का इंतजार करता है कि शायद भिखारी किसी काम से कहीं चला गया हो। पर वह नहीं आया। धनिक दुखी मन से नंगे पैर घर के लिये चल देता है। रास्ते में फुटपाथ पर देखता है कि एक आदमी जूते चप्पल बेच रहा है। धनिक चप्पल खरीदने के उद्देश्य से वहाँ पहुँचता है, पर क्या देखता है कि उसके जूते भी वहाँ रखे हैं। जब धनिक दबाव डालकर उससे जूतों के बारे में पूछता हो वह आदमी बताता है कि एक भिखारी उन जूतों को 100 रु. में बेच गया है। धनिक वहीं खड़े होकर कुछ सोचता है और मुस्कराते हुये
नंगे पैर ही घर के लिये चल देता है। उस दिन धनिक को उसके सवालों के जवाब मिल गये थे----

समाज में कभी एकरूपता नहीं आ सकती, क्योंकि हमारे कर्म कभी भी एक समान नहीं हो सकते। और जिस दिन ऐसा हो गया उस दिन समाज-संसार की सारी विषमतायें समाप्त हो जायेंगी। ईश्वर ने हर एक मनुष्य के भाग्य में लिख दिया है कि किसको कब और क्या और कहाँ मिलेगा। पर यह नहीं लिखा होता है कि वह कैसे मिलेगा। यह हमारे कर्म तय करते हैं। जैसे कि भिखारी के लिये उस दिन तय था कि उसे 100 रु. मिलेंगे, पर कैसे मिलेंगे यह उस भिखारी ने तय किया। हमारे कर्म ही हमारा भाग्य, यश, अपयश, लाभ, हानि, जय, पराजय, दुःख, शोक, लोक, परलोक तय करते हैं। हम इसके लिये ईश्वर को दोषी नहीं ठहरा सकते हैं।

ॐ नमः शिवाय

 
203
 
3 days
 
DDLJ143

योग करें या ना करें पर...
ज़रूरत पड़ने पर एक दूसरे का

*【सह+योग】* ज़रूर करें...

 
179
 
a day
 
Hey2naveen

Remember, most of your stress comes from the way you respond, not the way life is. Adjust your attitude, and all that extra stress is gone..

 
165
 
6 days
 
Jasmine
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