Wisdom (17 in 1 week | sorting by most liked)

*हमको कितने लोग पहचानते है ?*
*उसका महत्व नहीं है,*
*मगर क्यों पहचानते है ?*
*इसका महत्व है. . .*🙏

 
426
 
6 days
 
anil Manawat

*खुद से बहस करोगे*
*तो सारे सवालों के*
*जबाब मिल जायेगे......*
*और दूसरों से करोगे*
*तो कई सवाल*
*और खड़े हो जायेगे...*🙏

 
327
 
2 days
 
anil Manawat

*आखिर क्यों रिश्तों की गलियाँ इतनी तंग हैं...*

*शुरूआत कौन करे, यही सोच कर बात बंद है...*🙏

 
321
 
4 days
 
anil Manawat

*मित्र के साथ बैठना* ::
बहुत *आसान* है,

*परन्तु खड़े रहना* !!
बहुत ही *मुश्किल* है... !!🙏

 
307
 
5 days
 
anil Manawat

कुदरत का नियम है...
*मित्र और चित्र*
दिल से बनाओगे तो उनके
रंग जरूर निखर आयेंगे!🙏🏼💐

 
259
 
a day
 
anil Manawat

किसी भी व्यक्ति व परिस्थिति की वजह से
उदास नहीं होइये..
क्योंकि..,.
आपकी प्रतिक्रिया के बिना ये दोनों ही
शक्तिहीन है...

 
174
 
6 days
 
"Ipsh!t@"

!! भय कैसा !!
मैंने सुना है, एक युवक,
एक राजपूत युवक विवाह करके लौट रहा है।
नाव में बैठा है, जोर का तूफान उठा है।
उसकी नववधू कंपने लगी, घबड़ाने लगी;
लेकिन वह निश्चिंत बैठा है।
उसकी पत्नी ने कहा: आप निश्चिंत बैठे हैं!
तूफान भयंकर है,
नाव अब डूबी तब डूबी हो रही है,
आप भयभीत नहीं हैं?
उस राजपूत युवक ने म्यान से तलवार निकाली——
चमचमाती नंगी तलवार——
अपनी पत्नी के गले के पास लाया,
ठीक गले में छूने लगी तलवार;
और पत्नी हंसने लगी।
उस राजपूत ने कहा: तू डरती नहीं!
तलवार तेरी गर्दन के इतने करीब है,
जरा—सा इशारा कि गर्दन अलग हो जाए,
तू डरती नहीं है?
उसने कहा: जब तलवार तुम्हारे हाथ में है,
तो भय कैसा! जहां प्रेम है, वहां भय कैसा!
उस युवक ने कहा कि
यह तूफान भी परमात्मा के हाथ में है।
यह तलवार बिलकुल गर्दन के करीब है,
लेकिन परमात्मा के हाथ में है, तो भय कैसा?
जो होगा, ठीक ही होगा।
अगर गर्दन कटने में ही हमारा लाभ होगा,
तो ही गर्दन कटेगी;
तो हम धन्यवाद देते ही मरेंगे।
अगर यह तूफान हमें डुबाता है,
तो उबारने के लिए ही डुबाएगा।
उसके हाथ में तूफान है, भय कैसा?
मेरे हाथ में तलवार है, तू भयभीत नहीं;
यह तलवार किसी और के हाथ में होती,
तू भयभीत होती।
तेरा परमात्मा से प्रेम का नाता नहीं है,
इसलिए भयभीत हो रही है।
तूफान के कारण भयभीत नहीं हो रही है,
परमात्मा से प्रेम नहीं है
इसलिए भयभीत हो रही है।
ख्याल रखना, जब भी तुम भयभीत होते हो,
तो असली कारण सिर्फ एक ही होता है:
परमात्मा से प्रेम नहीं है।
जिसका परमात्मा से प्रेम है,
उसके लिए सारे भय विसर्जित हो जाते हैं।
🙏🙏🙏🙏

 
165
 
4 days
 
Dubey Ji

‼🙌‼
*मनुष्य की चाल धन से भी बदलती*
*है और** *धर्म से भी बदलती है..*
*जब धन संपन्न होता है तब अकड़*
*कर चलता है जब धर्म संपन्न होता हे..!!*
*तो विनम्र होकर चलता है..*
*मनुष्य वास्तविक पूंजी धन नही, बल्कि*
*उसके विचार हैं क्यों कि धन तो खरीदारी में*
*दूसरों के पास चला जाता है पर विचार अपने*
*पास ही रहते हैं..!!*

 
159
 
a day
 
DDLJ143

भाव के भूखे हैं प्रभू,
भाव ही सबका सार है ...
भाव बिना अकबर का स्वर्ण छत्र भी मिट्टी,
और भाव से उसे झूठा बेर भी स्वीकार है॥

 
126
 
4 days
 
Heart catcher

Sometimes you have to be mature with your situation.. accept the reality.. and forget it.. 👍🏻

 
120
 
2 days
 
jit3npatel
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