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किस बात पर गर्व करूँ,
और किस पर गुमान करूँ ...
सब कुछ खत्म होना ही है,
तो किस पर मैं अभिमान करूँ ...

कभी काले घने बाल थे जहाँ,
अब श्वेत पड़ने लगे हैं ...
शरीर भी बेदम हो ही जाएगा,
कितना ही अच्छा खानपान करूँ ...

गोरी-चिकनी चमड़ी को,
वक्त बदल देगा झुर्रियों में ...
अपने गोरेपन और सुँदरता का,
तो मैं क्यूँ गुणगान करूँ ...

ना चाँद सा चेहरा बचेगा,
न मुँह के मोती से दाँत रहेंगे ...
तो रूप रंग से क्यों किसी,
व्यक्ति की मैं पहचान करूँ ...

मिट्टी से बना है शरीर मेरा,
और मिट्टी में ही मिल जाएगा एक दिन ...
फिर क्यों ज्यादा धन जोडूँ मैं,
क्यूँ महँगी गाड़ी और बड़ा मकान करूँ ...

अत्मा अमर है सुना है मैने,
क्यूँ ना इसके पोषण हेतु कुछ बलिदान करूँ ...
राम कृपा से जो भी मिला है,
क्यूँ ना उसका गुणगान करूँ॥

 
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14 hours
 
Heart catcher
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