Wisdom (17052)

*कौन कहता हैं कि*
*ख़ाली हाथ आयें थे*
*ख़ाली हाथ जाएँगे*
*अरे मानस*
*पूर्व जन्म के कर्म लेकर आयें थे*
*इस जन्म के भी साथ लेकर जाएँगे*

 
77
 
9 hours
 
Veeshal.joshee

*भीड़ में सब लोग अच्छे नही होते*

*और*

*अच्छे लोगों की भीड़ नही होती.*🙏

 
138
 
13 hours
 
anil Manawat

पानी बचाया जा सकता है, लेकिन बनाया नहीं जा सकता ।
दादा जी ने नदी में पानी देखा । पिता जी ने कुएं में। हमने नल में देखा । बच्चों ने बोतल में । अब उनके बच्चे कहाँ देखेंगे..?

*जरूर विचार करें एवं*
*पानी को व्यर्थ न करें.✍ ✍
🙏🏻🙏🏻

 
192
 
23 hours
 
Smartest19

ईश्वर को मंदिर से ज्यादा
इंसान का दिल अच्छा लगता है

क्योंकि, मंदिर में
इंसान का दिया चलता है

लेकिन दिल में
भगवान का दिया चलता है

 
145
 
a day
 
Jasmine

Remember, most of your stress comes from the way you respond, not the way life is. Adjust your attitude, and all that extra stress is gone..

 
92
 
a day
 
Jasmine

🌹🌻 मस्त फकीर 🌻🌹

एक मलंग फकीर वर्षा के जल में प्रेम और मस्ती से भरा चला जा रहा था..... कि इस दरवेश ने एक मिठाई की दुकान को देखा जहां एक कढ़ाई में गरम दूध उबला जा रहा था तो मौसम के हिसाब से दूसरी कढ़ाई में गरमा गरम जलेबियां तैयार हो रही थी मलंग फकीर कुछ क्षणों के लिए वहाँ रुक गया..... शायद भूख का एहसास हो रहा था या मौसम का असर था.... फकीर हलवाई की भट्ठी को बडे गौर से देखने लगा फकीर कुछ खाना चाहता था लेकिन फकीर की जेब ही नहीं थी तो पैसे भला कहां से होते.... फकीर कुछ पल भट्ठी से हाथ सेंकने के बाद चला ही जाना चाहता था..... कि नेक दिल हलवाई से रहा न गया और एक प्याला गरम दूध और कुछ जलेबियां फकीर को दें दी... मलंग ने गरम जलेबियां गरम दूध के साथ-धूम्रपान कीया और फिर हाथों को ऊपर की ओर उठाकर हलवाई के लिऐ प्रार्थना की..... फिर आगे चल दिया..... मलंग का पेट भर चुका था दुनिया के दुखों से बेपरवाह वे फिर इक नए जोश से बारिश के गदले पानी के छींटे उड़ाता चला जा रहा था....... वह इस बात से बेखबर था कि एक युवा नव ब्याहया जोड़ा भी वर्षा के जल से बचता बचाता उसके पीछे चला आ जा रहें है ......एक बार इस मस्त फकीर ने बारिश के गदले पानी में जोर से लात मारी..... बारिश का पानी उड़ता हुआ सीधा पीछे आने वाली युवती के कपड़ों को भिगो गया उस औरत के कीमती कपड़े कीचड़ से लथपथ हो गये..... उसके युवा पति से यह बात बर्दाश्त नहीं हुई.....
इसलिए वह आस्तीन चढ़ाकर आगे बढ़ा और मलंग को कॉलर से पकड़ कर कहने लगा अंधा है...... तुमको नज़र नहीं आता तेरी हरकत की वजह से मेरी पत्नी के कपड़े गीले हो गऐ हैं और कीचड़ से भर गऐ हैं..... मलंग हक्का-बक्का सा खड़ा था.... जबकि इस युवा को फकीर का चुप रहना नाखुशगवार गुजर रहा था..... महिला ने आगे बढ़कर युवा के हाथों से मलंग को छुड़ाना भी चाहा.... लेकिन युवा की आंखों से निकलती नफरत की चिंगारी देख वह भी फिर पीछे खिसकने पर मजबूर हो गई.....
राह चलते राहगीर भी उदासीनता से यह सब दृश्य देख रहे थे लेकिन युवा के गुस्से को देखकर किसी में इतनी हिम्मत नहीं हुई कि उसे रोक पाते और आख़िर जवानी के नशे मे चूर इस युवक ने एक जोरदार थप्पड़ मलंग के चेहरे पर जड़ दिया बूढ़ा मलंग थप्पड़ की ताब ना झेलता हुआ.... लड़खड़ाता हुऐ कीचड़ में जा पड़ा..... युवक ने जब मलंग को नीचे गिरता देखा तो मुस्कुराते हुए वहां से चल दीया.....बूढे मलंग ने आकाश की ओर देखा और उसके होठों से निकला वाह मेरे मालिक कभी गरम दूध जलेबियां और कभी गरम थप्पड़.... लेकिन जो तू चाहे मुझे भी वही पसंद है........यह कहता हुआ वह एक बार फिर अपने रास्ते पर चल दीया....दूसरी ओर वह युवा जोड़ा आपनी मस्ती को समर्पित अपनी मंजिल की ओर अग्रसर हो गया..... थोड़ी ही दूर चलने के बाद वे एक मकान के सामने पहुंचकर रुक गए......वह अपने घर पहुंच गए थे.... वे युवा अपनी जेब से चाबी निकाल कर अपनी पत्नी से हंसी मजाक करते हुए ऊपर घर की सीढ़ियों तय कर रहा था....बारिश के कारण सीढ़ियों पर फिसलन हो गई थी अचानक युवा का पैर फिसल गया और वह सीढ़ियों से नीचे गिरने लगा....महिला ने बहुत जोर से शोर मचा कर लोगों का ध्यान अपने पति की ओर आकर्षित करने लगी जिसकी वजह से काफी लोग तुरंत सहायता के लिये युवा की ओर लपके..... लेकिन देर हो चुकी थी युवक का सिर फट गया था और कुछ ही देर मे ज्यादा खून बह जाने के कारण इस नौजवान युवक की मौत हो चुकी थी कुछ लोगों ने दूर से आते मलंग फकीर को देखा तो आपस में कानाफुसी होने लगीं कि निश्चित रूप से इस मलंग बाबा ने थप्पड़ खाकर युवा को श्राप दिया है.... अन्यथा ऐसे नौजवान युवक का केवल सीढ़ियों से गिर कर मर जाना बड़े अन्चभे की बात लगती है..... कुछ मनचले युवकों ने यह बात सुनकर मलंग बाबा को घेर लिया एक युवा कहने लगा कि आप कैसे अल्लाह के बंदे हैं जो केवल एक थप्पड़ के कारण युवा को श्राप दे बैठे...... अल्लाह के बंदों मे रोष व गुसा हरगिज़ नहीं होता ....आप तो जरा सी असुविधा पर भी धैर्य न कर सकें..... मलंग फकीर कहने लगा ख़ुदा की क़सम मैंने इस युवा को कभीश्राप नहीं दिया....
अगर आप ने श्राप नहीं दिया तो ऐसा नौजवान युवा सीढ़ियों से गिरकर कैसे मर गया? तब मलंग ने दर्शकों से एक अनोखा सवाल किया कि आप मे से कोई इस सब घटना का चश्मदीद गवाह मौजूद है? एक युवक ने आगे बढ़कर कहा..... हाँ मैं इस सब घटना का चश्मदीद गवाह हूँ मलंग ने अगला सवाल किया.....मेरे क़दमों से जो कीचड़ उछला था क्या उसने युवा के कपड़े को दागी किया था? युवा बोला..... नहीं.... लेकिन महिला के कपड़े जरूर खराब हुए थे मलंग ने युवक की बाँहों को थामते हुए पूछा...., फिर युवक ने मुझे क्यों मारा? युवा कहने लगा...... क्योंकि वह युवा इस महिला का प्रेमी था और यह बर्दाश्त नहीं कर सका कि कोई उसके प्रेमी के कपड़ों को गंदा करे..... इसलिए उस युवक ने आपको मारा....,
युवा बात सुनकर मलंग ने एक जोरदार ठाहका बुलंद किया और यह कहता हुआ वहाँ से विदा हो गया.....तो ख़ुदा की क़सम मैंने श्राप कभी नहीं दीया लेकिन कोई है जो मुझ से प्रेम रखता है.... और वह इतना शक्तिशाली है कि दुनिया का बड़े से बड़ा राजा भी उसकी लाठी से डरता है .......।

🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻🌹🌻

 
88
 
2 days
 
ROHIT.BANSAL

*शब्द महके तो लगाव करते हैं*
*और*
*शब्द बहके तो घाव करते हैं*👏🏻💕
*🌹🙏🌹*

 
237
 
2 days
 
anil Manawat

सरला नाम की एक महिला थी । रोज वह और उसके पति सुबह ही काम पर निकल जाते थे ।

दिन भर पति ऑफिस में अपना टारगेट पूरा करने की \'डेडलाइन\' से जूझते हुए साथियों की होड़ का सामना करता था। बॉस से कभी प्रशंसा तो मिली नहीं और तीखी-कटीली आलोचना चुपचाप सहता रहता था ।

पत्नी सरला भी एक प्रावेट कम्पनी में जॉब करती थी । वह अपने ऑफिस में दिनभर परेशान रहती थी ।

ऐसी ही परेशानियों से जूझकर सरला लौटती है। खाना बनाती है।

शाम को घर में प्रवेश करते ही बच्चों को वे दोनों नाकारा होने के लिए डाँटते थे पति और बच्चों की अलग-अलग फरमाइशें पूरी करते-करते बदहवास और चिड़चिड़ी हो जाती है। घर और बाहर के सारे काम उसी की जिम्मेदारी हैं।

थक-हार कर वह अपने जीवन से निराश होने लगती है। उधर पति दिन पर दिन खूंखार होता जा रहा है। बच्चे विद्रोही हो चले हैं।

एक दिन सरला के घर का नल खराब हो जाता है । उसने प्लम्बर को नल ठीक करने के लिए बुलाया ।

प्लम्बर ने आने में देर कर दी। पूछने पर बताया कि साइकिल में पंक्चर के कारण देर हो गई। घर से लाया खाना मिट्टी में गिर गया, ड्रिल मशीन खराब हो गई, जेब से पर्स गिर गया...।

इन सब का बोझ लिए वह नल ठीक करता रहा।

काम पूरा होने पर महिला को दया आ गई और वह उसे गाड़ी में छोड़ने चली गई।

प्लंबर ने उसे बहुत आदर से चाय पीने का आग्रह किया।

प्लम्बर के घर के बाहर एक पेड़ था। प्लम्बर ने पास जाकर उसके पत्तों को सहलाया, चूमा और अपना थैला उस पर टांग दिया।

घर में प्रवेश करते ही उसका चेहरा खिल उठा। बच्चों को प्यार किया, मुस्कराती पत्नी को स्नेह भरी दृष्टि से देखा और चाय बनाने के लिए कहा।

सरला यह देखकर हैरान थी। बाहर आकर पूछने पर प्लंबर ने बताया - यह मेरा परेशानियाँ दूर करने वाला पेड़ है। मैं सारी समस्याओं का बोझा रातभर के लिए इस पर टाँग देता हूं और घर में कदम रखने से पहले मुक्त हो जाता हूँ। चिंताओं को अंदर नहीं ले जाता। सुबह जब थैला उतारता हूं तो वह पिछले दिन से कहीं हलका होता है। काम पर कई परेशानियाँ आती हैं, पर एक बात पक्की है- मेरी पत्नी और बच्चे उनसे अलग ही रहें, यह मेरी कोशिश रहती है। इसीलिए इन समस्याओं को बाहर छोड़ आता हूं। प्रार्थना करता हूँ कि भगवान मेरी मुश्किलें आसान कर दें। मेरे बच्चे मुझे बहुत प्यार करते हैं, पत्नी मुझे बहुत स्नेह देती है, तो भला मैं उन्हें परेशानियों में क्यों रखूँ । उसने राहत पाने के लिए कितना बड़ा दर्शन खोज निकाला था...!

यह घर-घर की हकीकत है। गृहस्थ का घर एक तपोभूमि है। सहनशीलता और संयम खोकर कोई भी इसमें सुखी नहीं रह सकता। जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं, हमारी समस्याएं भी नहीं। प्लंबर का वह \'समाधान-वृक्ष\' एक प्रतीक है। क्यों न हम सब भी एक-एक वृक्ष ढूँढ लें ताकि घर की दहलीज पार करने से पहले अपनी सारी चिंताएं बाहर ही टाँग आएँ

🙏

 
101
 
3 days
 
Jain Rajendra

🍃 *अगर नए रिश्ते न बनें तो,*
*मलाल मत करना*

*पुराने रिश्ते टूट ना जायें बस, इतना ख्याल रखना*🍃 🙏

 
272
 
4 days
 
anil Manawat

लोग कहते हैं जिन्दगी बक बक किये जा रही है
सोच के देखो साहब सबक दिये जा रही है

 
205
 
4 days
 
vinkatara
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