Shayari (20 in 1 month | sorting by most liked)

*भुलाना और 👉 भूल जाना तो बस एक वहम है दिल ❤ का,*

*भला कौन निकलता है दिल से, एक बार ☝ बस जाने के बाद..*

 
316
 
22 days
 
DDLJ143

अगर हवाओं के रुख मेहरबाँ नहीं होते
तो बुझती आग के तेवर जवाँ नहीं होते
वफा का ज़िक्र चलाया तो हँस के बोले वो
ये फिज़ूल काम हमारे यहाँ नहीं होते

 
177
 
22 days
 
amit 19

आजकल ,ये रस्में मोहब्बत, कुछ इस तरह से अदा हो रही है ,
कभी तुमसे लाखो शिकवे, कभी जिंदगी तुमपे ही फ़ना हो रही हैं ।
😊😊😊😊😊

 
164
 
25 days
 
amit 19

धारा ए तीन सौ सात लगनी चाहिए तेरी निगाहों पर..

यूँ देखना भी कत्ल की कोशिशों में शुमार होता है...😃

 
130
 
9 days
 
Navsad Chariya

थोड़ा सा हम जो हंस हंसा लिए,
लोगों ने अपने हाथ में पत्थर उठा लिए.
फेंके जो हम पर पत्थर लोगों ने बेशुमार,
उन पत्थरों को जोड़कर कुछ घर बना लिए..😓😓😓😌😌

 
123
 
23 days
 
amit 19

ख़त में उसने लिखा था बाकी बातें मिलने पर

मिलने पर नजर झुका ली बोली बाकि बाते खत में..

 
120
 
10 days
 
aaakash

जो दिया खुदा ने उसी में ख़ुश रहना सिख ऐ बंदे....
यू तो चाँद को भी धरा का साथ नसीब नहीं है .....

 
108
 
23 days
 
Abhilekh.......

अब आ गए हैं आप तो आता नहीं है याद; वर्ना कुछ हम को आप से कहना ज़रूर था~

 
103
 
19 days
 
amit 19

💞 *मेरे लफ्ज मेरी शायरी* 💞

*सो गई हैं शहर की सारी गलिया,*


*अब रात भर जागने की बारी मेरी है......!!*

 
102
 
29 days
 
Mits9022

बहुत दिनों की बात है
फिज़ा को याद भी नहीं
ये बात आज की नहीं
बहुत दिनों की बात है

शबाब पर बहार थी
फिज़ा भी ख़ुशगवार थी
ना जाने क्यूँ मचल पड़ा
मैं अपने घर से चल पड़ा

किसी ने मुझको रोक कर
बड़ी अदा से टोक कर
कहा था लौट आईये
मेरी क़सम ना जाईये

पर मुझे ख़बर न थी
माहौल पर नज़र न थी
ना जाने क्यूँ मचल पड़ा
मैं अपने घर से चल पड़ा

मैं शहर से फिर आ गया
ख़याल था कि पा गया
उसे जो मुझसे दूर थी
मगर मेरी ज़रूर थी

और एक हसीन शाम को
मैं चल पड़ा सलाम को
गली का रंग देख कर
नई तरंग देख कर

मुझे बड़ी ख़ुशी हुई
मैं कुछ इसी ख़ुशी में था
किसी ने झांक कर कहा
पराये घर से जाईये

मेरी क़सम न आईये
वही हसीन शाम है
बहार जिसका नाम है
चला हूँ घर को छोड़ कर

न जाने जाऊँगा किधर
कोई नहीं जो टोक कर
कोई नहीं जो रोक कर
कहे कि लौट आईये

मेरी क़सम न जाईये

 
65
 
15 days
 
amit 19
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