Shayari (20 in 1 month | sorting by most liked)

होना चाहिए_एक साथी
ऐसा भी ज़िन्दगी मे

जो अलग हो दायरों से
सामाजिक रिवाज़ों से

बांटते हर वख्त
जिससे अपना अंतर्मन

ये ख़्याल ही न आये
की वो सखी है_या सखा

जो समझे आपको
आपकी ही तरह

मिलकर जिससे लगे
जैसे हो गयी हो
ख़ुद से ही_ख़ुद की मुलाकात
🌴🌹

 
158
 
27 days
 
anika

फ़लक तक साथ चलने की दुआ बाद में कीजिए...

ज़िन्दा हूं जमीं पे मैं पहले यहां तो वफा कीजिए !!

 
128
 
24 days
 
anika

खुद को तुझसे जोड़ दिया है ...!!!
+
बाकि सब तुझ पर छोड़ दिया है ...!!!
🍁

 
124
 
7 days
 
Paraskumar Pande

"पलकें झुकें, और सलाम हो जाए....

पेशानी झुके और सजदा हो जाए...

ऐसी नज़र, कंहाँ से लाऊँ, जो...

आपको याद करूँ और आपका दीदार हो जाए"!!!....
💕💕

 
115
 
25 days
 
anika

साँसे तो यूँ भी चलती है, और चल ही रही है,
पर जीता में तब हुँ, जब तू क़रीब होती है 💕

 
106
 
27 days
 
Almost shayar

ए खुदा, आखिर तू क्या चाहता है,
ना उसके करीब करता है, ना अपने पास बुलाता है
🌹🌹

 
99
 
23 days
 
Almost shayar

*छत पे सोये बरसों बीते*
*तारों से मुलाक़ात किये*
*और चाँद से किये गुफ़्तगू*
*सबा से कोई बात किये।*

*न कोई सप्तऋिषी की बातें*
*न कोई ध्रुव तारे की*
*न ही श्रवण की काँवर और*
*न चन्दा के उजियारे की।*

*देखी न आकाश गंगा ही*
*न वो चलते तारे*
*न वो आपस की बातें*
*न हँसते खेलते सारे।*

*न कोई टूटा तारा देखा*
*न कोई मन्नत माँगी*
*न कोई देखी उड़न तश्तरी*
*न कोई जन्नत माँगी।*

*अब न बारिश आने से भी*
*बिस्तर सिमटा कोई*
*न ही बादल की गर्जन से*
*माँ से लिपटा कोई।*

*अब न गर्मी से बचने को*
*बिस्तर कभी भिगोया है*
*हल्की बारिश में न कोई*
*चादर तान के सोया है।*

*अब तो तपती जून में भी न*
*पुर की हवा चलाई है*
*न ही नानी माँ ने कथा*
*कहानी कोई सुनाई है।*

*अब न सुबह परिन्दों ने*
*गा गा कर हमें जगाया है*
*न ही कोयल ने पंचम में*
*अपना राग सुनाया है।*

*बिजली की इस चकाचौंध ने*
*सबका मन भरमाया है*
*बन्द कमरों में सोकर सबने*
*अपना काम चलाया है।*

*तरस रही है रात बेचारी*
*आँचल में सौग़ात लिये*
*कभी अकेले आओ छत पे*
*पहले से जज़्बात लिये!!!*

 
83
 
18 days
 
"Chaand"

खफा हो लेते हैं खुद से ही अक्सर,
हमारा जोर चलता है हमी तक.!

 
74
 
4 days
 
Paraskumar Pande

ज़िन्दगी की हक़ीक़त अब समझ आने लगी है,
जिस "चाँद" से पहुंचती थी ठंडक कभी,
उसकी रोशनी अब दिल जलाने लगी है।

 
68
 
25 days
 
"Chaand"

बहुत मिठा है सनम तेरे लफ्जो का सूरूर

होश में रह कर भी हम मदहोश रहा करते हैं.😘

 
67
 
11 days
 
Paraskumar Pande
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