Shayari (19327)

कब तक ज़ुबां में क़ैद रखोगे..!!
💕💕
मेरे जिक्र को मुझ तक आने तो दो....!!!!

 
53
 
2 days
 
Paraskumar Pande

ज़मी पर रह कर भी आदमी आसमाँ की बात करता है,
वजूद मिट्टी का,पर जाने कहाँ की बात करता है।
"चाँद"

 
34
 
2 days
 
"Chaand"

मानता हूं, मरता हुँ तुम पर,
इसका मतलब ये तो नहीं कि मार ही दोगे 💕



eng. :-
manta hu, marta hu tum par,
iska matlab ye to nahi ki maar hi doge 💕

 
20
 
3 days
 
paglaa

#मोहब्ब्त की #आखरी किस्त #जिस्म है,,,!

#जिस्म मिल #जाए मोहब्बत #ख़तम,,,!!

 
53
 
3 days
 
Parveen Unlucky

इक तन्हा तकिये पर आँखें मलता है एक सवेरा,,,,!!!

मीलों दूर कहीं छत पर इक सूनी शाम टहलती है,,,,!!!

 
44
 
4 days
 
amit 19

_*लफ़्ज़ों को यू कम ना आकिए साहब,*_

_*चंद जो इक्कठे हो जाए तो 'शेर' हो जाते हैं..*_

 
64
 
4 days
 
ᵀᴬᴺᴴᴬ ᴬᵞᴬᴬᴺ

*न बोलूँ , न लिखूँ ...*
*तो ये मत समझना ...*
*कि भूल गए हम ...;*

*खामोशियों ने भी ...*
*कुछ जिम्मेदारी ले रखी है ...*

 
128
 
5 days
 
Paraskumar Pande

इसे इशक कहें या पागलपन.... ♥
हम तुम्हारे हिस्से की भी चाय बनाकर बैठे हैं..!

 
103
 
5 days
 
amit 19

❤"सितम कुछ निगाहों का था,और कुछ ....शौक ए-अल्फाजों का,
हम हुये दिवाने उनके,
और चल पडा दौर ..इश्क ए-अफसानों का"❤

 
54
 
6 days
 
Paraskumar Pande

ये दुनियां थोथी आस्थाओं का एक सूखा हुआ
समंदर है,
उतना ही गहरा बाहर,जितना अंदर है।
चिकने-चुपड़े लोग यहाँ,दोहरी-दोहरी बातें हैं-
खुरदरे से रिश्ते, जैसे कैक्टस गुलाब के अंदर है।
नीता "चाँद"

 
34
 
7 days
 
"Chaand"
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