Shayari (19150)

मुद्दतों बाद वो बोले.. मरते हैं तुम पर...

और हम ये सुनकर ही मर गए.

 
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4 hours
 
Pankaj soni

किसी दिन तू भी आएगी दर-ए-दरबार पर मेरे,
बस लम्हा ऐ खुदा वो मेरी मौत से पहले का हो।।

 
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a day
 
Parveen Unlucky

कुछ तो खास बात है अदाओं मे तेरी...
युंही नहीं मैं तेरा गुलाम हुआ..

 
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a day
 
uk_express

दूर कर देता हु बुरे वक़्त में ख़ुद से हर उस शक्स को जो मुझे अज़ीज़ है ......
और वो ही शक्स मुझे बेवफ़ा कहे तो फिर वफ़ा क्या है ....

 
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2 days
 
Abhilekh.......

बारिश में इस बार की मज़ा कुछ कम सा है .....
दिल में इस बारी दर्द ज़रा कम जो है .....

 
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3 days
 
Abhilekh.......

ये रातें भी तो तेरी याद की पहरी हैं..
न जाने कब तू सरहदों की भोर को पार करके आएगी..

 
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4 days
 
uk_express

उसने इतना कह के फोन रख दिया कि कोई आ गया..!!
मै आजतक समझ ना पाआ घर मे या जिंदगी में..!!

 
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5 days
 
Parveen Unlucky

तेरी खुदाई मे ऐसा उलझा हुँ साथी मेरे...
ना दिन अपने हैँ.... ना रात मेरे..

 
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5 days
 
uk_express

हर बचपन मे तुझे ढुढंता हूं..
तुझे ढुढंने मे खुद का 'वजूद' ढुढंता हूं...

 
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6 days
 
vinkatara

मेरे हाथों में कुछ भी तो नहीं , फिर छूटता क्या है ?

कोई अपना बिछुड़ता है तो , भीतर टूटता क्या है ?

 
108
 
6 days
 
Jasmine
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