No Fit (98 | sorted randomly)

#चाय_पियेंगे?

जब कोई पूछता है "चाय पियेंगे..?"

तो बस नहीं पूछता वो तुमसे
दूध ,चीनी और चायपत्ती
को उबालकर बनी हुई एक कप चाय के लिए।

वो पूछता हैं...
क्या आप बांटना चाहेंगे
कुछ चीनी सी मीठी यादें
कुछ चायपत्ती सी कड़वी
दुःख भरी बातें..?

वो पूछता है..
क्या आप चाहेंगे
बाँटना मुझसे अपने कुछ
अनुभव ,मुझसे कुछ आशाएं
कुछ नयी उम्मीदें..?

उस एक प्याली चाय के
साथ वो बाँटना चाहता हैं..
अपनी जिंदगी के वो पल
तुमसे जो "अनकही" है अब तक
वो दास्ताँ जो "अनसुनी" है अब तक

वो कहना चाहता है..
तुमसे ..तमाम किस्से
जो सुना नहीं पाया अपनों
को कभी..

एक प्याली चाय
के साथ को अपने उन टूटें
और खत्म हुए ख्वाबों को
एक और बार जी लेना
चाहता है।

वो उस गर्म चाय
के प्याली के साथ उठते हुए धुओँ के साथ
कुछ पल को अपनी
सारी फ़िक्र उड़ा देना चाहता है।

वो कर लेना चाहता है
अपने उस एक नजर वाले हुए
प्यार का इजहार,
तो कभी उस शिद्दत से की
गयी मोहब्बत का इकरार..

कभी वो देश की
राजनीतिक स्थिति से
अवगत कराना चाहता है
तुम्हें..
तो कभी बताना चाहता है
धर्म और मंदिरों के
हाल चाल..

इस दो कप चाय के
साथ शायद इतनी बातें
दो अजनबी कर लेते हैं
जितनी कहा सुनी तो
अपनों के बीच भी नहीं हो पाती।

तो बस जब पुछे कोई
अगली बार तुमसे
"चाय पियेंगे..?"

तो हाँ कहकर बाँट लेना उसके साथ
अपनी चीनी सी मीठी यादें
और चायपत्ती सी कड़वी दुखभरी बातें..!!

चाय सिर्फ़ चाय ही नहीं होती...

 
80
 
105 days
 
Jasmine

✍ _नाराज न होना कभी,_
_यह सोचकर कि._
_काम मेरा_
_और_
_नाम किसी का_
_हो रहा है.._?

_*घी और रुई सदियों से,*_
_*जलते चले आ रहे हैं.,*_
_*और*_
_*लोग कहते हैं.,*_
_*दिया जल रहा है।*_

प्रणाम आप सभी पुजनीयो को 🌹🌹🌹🌹.........

जय श्री राम
🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

 
777
 
578 days
 
ASHUPUMI

भले ही पार कर गयी 40 को मैं

चेहरे पर नूर है हल्का सा गुरुर है

नही करती अब परवाह मैं
किसी के भी तानों की, उल्हानो की
वो दिन अब लद गये
जब आँखों के कोने पानी था
छुप कर् के मैं रोती थी
होठों पर ले नकली मुस्कान

अब रहती हूँ मस्त अपने में
निहारती हूँ खुद को, सँवारती हूँ खुद को देख आईने में
भजन भी मैं गाती हूँ तो गजल भी मै गाती हूँ

जरूरत नही मुझे रिझाने की अब सजन को
नजर मुझे आता है आँखों में उनकी अपना अक्स
मेरे बिन कहे पढ़ लेते वो मेरी जुबाँ

काम वो करती हूँ मैं जो मुझे भाता है
कलम भी चलाती हूँ तो कड़छी भी चलाती हूँ
पार्लर भी जाती हूँ तो मंदिर भी जाती हूँ
बगियाँ मे देख तितली बच्चो सी मचल जाती हूँ

सब कुछ होते भी कमी महसूस करती हूँ
अपने दिल के टुकड़ों की
बात उनसे करके कुछ पल, हो लेती हूँ खुश मैं
देख कर खुश उनको भूल जाती हूँ गम अपने

40 पार करके मैं जीवन की नयी पारी खेल रही मैं
जीवन के एक एक पल को जी रही मैं
जो नही कर पायी अभी तक
वो सब कर रही मैं
40 को पार करने का गम नही कर रही मैं
सभी 40 पार महिलाओ को समर्पित

 
114
 
318 days
 
Jasmine

Positive attitude
🙏बहुत शानदार,जानदार सीख🙏
एक घर के पास काफी दिन एक बड़ी इमारत का काम चल रहा था।
वहा रोज मजदुरोंके छोटे बच्चे एकदुसरोंकी शर्ट पकडकर रेल-रेल का खेल खेलते थे।

रोज कोई इंजिन बनता और बाकी बच्चे डिब्बे बनते थे...

इंजिन और डिब्बे वाले बच्चे रोज बदल जाते,
पर...
केवल चङ्ङी पहना एक छोटा बच्चा हाथ में रखा कपड़ा घुमाते हुए गार्ड बनता था।

उनको रोज़ देखने वाले एक व्यक्ति ने कौतुहल से गार्ड बननेवाले बच्चे को बुलाकर पुछा,

"बच्चे, तुम रोज़ गार्ड बनते हो। तुम्हें कभी इंजिन, कभी डिब्बा बनने की इच्छा नहीं होती?"

इस पर वो बच्चा बोला...

"बाबूजी, मेरे पास पहनने के लिए कोई शर्ट नहीं है। तो मेरे पिछले वाले बच्चे मुझे कैसे पकड़ेंगे? और मेरे पिछे कौन खड़ा रहेगा?

इसिलए मैं रोज गार्ड बनकर ही खेल में हिस्सा लेता हुँ।

"ये बोलते समय मुझे उसके आँखों में पानी दिखाई दिया।

आज वो बच्चा मुझे जीवन का एक बड़ा पाठ पढ़ा गया...

*अपना जीवन कभी भी परिपूर्ण नहीं होता। उस में कोई न कोई कमी जरुर रहेगी।*

वो बच्चा माँ-बाप से ग़ुस्सा होकर रोते हुए बैठ सकता था। वैसे न करते हुए उसने परिस्थितियों का समाधान ढूंढा।

हम कितना रोते है?
कभी अपने साँवले रंग के लिए, कभी छोटे क़द के लिए, कभी पड़ौसी की कार, कभी पड़ोसन के गले का हार, कभी अपने कम मार्क्स, कभी अंग्रेज़ी, कभी पर्सनालिटी, कभी नौकरी मार तो कभी धंदे में मार...

हमें इससे बाहर आना पड़ता है।

*ये जीवन है... इसे ऐसे ही जीना पड़ता है।*

lets be positive

 
765
 
553 days
 
Jasmine

किसी ने मुझसे पूछा आजकल क्या काम कर रहे हो मैंने जवाब दिया दुनिया का सबसे मुश्किल काम करने लगा हूँ मैं,
बस अपने काम से काम रखने लगा हूँ मैं !

 
1100
 
596 days
 
J_sT@R.

SAI SHRADHA
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
साँई है जीवन, जीवन शिर्डी के साँई
साँई मेरा जीवन सहारा
साँई है जीवन, जीवन शिर्डी के साँई
तेरे बिना साँई सब है अन्धेरा
पार करो मेरी जीवन नईयाँ
चरण लगा लो मुझे साँई कन्हैया
🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻

 
15
 
107 days
 
Sunil

​*गाँव को गाँव् ही रहने दो क्यों शहर बनाने में तुले हुवे हो,*

*गांव में रहोगे तो पिता के नाम से जाने जाओगे*

*शहर में रहोगे तो मकान नंबर से पहचाने जाओगे.🙏

 
1086
 
622 days
 
anil Manawat

सारी दुनिया पूछती है मुझे,
इस साईं महोब्बत में क्या मिलेगा ?
मैंने कहा अभी तो इबादत शुरू हुई है,
थोडा सा सब्र करो खुद साईं मिल जाएगा।
​।।।...ॐ साईराम...।।।​
🌹🌹 🌹🌹

 
25
 
111 days
 
Sunil

बेटी और बेटी (बुआ)
°°°°°°°°°°°°°°°°°°
कल फोन आया था, वो एक बजे ट्रेन से आ रही है..!
किसी को स्टेशन भेजने की बात चल ऱही थी।

आज रिया ससुराल से.. दूसरी बार दामाद जी के साथ.. आ रही हैं, घर के माहौल में एक उत्साह सा महसूस हो रहा है।

इसी बीच .....एक तेज आवाज आती हैं ~ @इतना सब देने की क्या जरूरत है ? बेकार फिजूलखर्ची क्यों करना ? और हाँ आ भी रही है तो कहो कि टैक्सी करके आ जाये स्टेशन से।"
(बहन के आने की बात सुनकर अश्विन भुनभुनाया )

माँ तो एक दम से सकते में आ गई कि आखिर यह हो क्या रहा हैं ?

माँ बोली- @जब घर में दो-दो गाड़ियाँ हैं तो टैक्सी करके क्यों आएगी मेरी बेटी ? और दामाद जी का कोई मान सम्मान है कि नहीं ?

पिता जी ने कहा कि "ससुराल में उसे कुछ सुनना न पड़े। मैं खुद चला जाऊंगा उसे लेने, तुम्हें तकलीफ है तो तुम रहने दो।"
पिता गुस्से से.. एक सांस में यह सब बोल गए !!

"और ये इतना सारा सामान का खर्चा क्यों? शादी में दे दिया न। अब और पैसा फूँकने से क्या मतलब।"
अश्विन ने बहन बहनोई के लिए आये कीमती उपहारों की ओर देखकर ताना कसा ....

पिता जी बोले "बकवास बंद कर, तुमसे तो नहीं माँग रहे हैं। मेरा पैसा है, मैं अपनी बेटी को चाहे जो दूँ। तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है क्या जो ऐसी बातें कर रहे हो।" पिता फिर से गुस्से में बोले।

अश्विन दबी आवाज में फिर बोला - "चाहे जब चली आती है मुँह उठाये।"

पिता अब अपने गुस्से पर काबू नही कर पाये और चिल्ला कर बोले- "क्यों न आएगी ? हाँ इस घर की बेटी है वो।

तभी.. माँ भी बीच में टोकते हुए वोलीं - "मेरी बेटी हैं वो, ये उसका भी घर है। जब चाहे जितने दिन के लिए चाहे वह रह सकती हैं। बराबरी का हक है उसका।
आखिर तुम्हे हो क्या गया है ? जो ऐसा अनाप-शनाप बके जा रहे हो।"

अब बारी अश्विन की थी ,"मुझे कुछ नही हुआ है.. माँ !! आज मैं बस वही बोल रहा हूँ, जो आप हमेशा बुआ के लिए बोलते थे।
आज अपनी बेटी के लिए आज आपको बड़ा दर्द हो रहा है लेकिन कभी दादाजी के दर्द के बारे में सोचा है?

कभी बुआ की ससुराल और फूफाजी के मान-सम्मान की बात नहीं सोची ?

माँ और पिता जी एक दम से सन्नाटे में चले गए। अश्विन लगातार बोल जा रहा है।

"दादाजी ने कभी आपसे एक धेला नहीं मांगा। वो खुद आपसे ज्यादा सक्षम थे। फिर भी आपको बुआ का आना, दादाजी का उन्हें कुछ देना नहीं सुहाया। क्यों ?
और हाँ बात अगर बराबरी और हक की ही है, तो आपकी बेटी से भी पहले बुआ का हक है इस घर पर।"
अश्विन की आवाज आंसूओ की भर्रा सी गई थी अफसोस भरे स्वर में बोला।

माँ-पिता की गर्दन शर्म से नीची हो गयी पर अश्विन नही रूका। "आपके खुदगर्ज स्वभाव के कारण
बुआ ने यहाँ आना ही छोड़ दिया।दादाजी इसी गम में घुलकर मर गए। और हाँ में खुद जा रहा हूँ स्टेशन
रिया को लेने पर मुझे आज भी खुशी है कि मैं कम से कम आपके जैसा खुदगर्ज भाई तो नहीं हूँ।"

कहते हुए अश्विन कार की चाबी उठाकर स्टेशन जाने के लिए निकल भी गया था। पिता आसूँ पौंछते हुए अपनी बहन सरिता को फोन लगाने लगे।
दीवार पर लगी दादाजी की तस्वीर मानो मुस्कुराकर अश्विन को आशीर्वाद दे रही थी।

मित्रो, यह आज की पीढ़ी की सकारात्मक सोच है जो विचारणीय है,सराहनीय है,यदि हम भी ऐसी ही सोच रखेंगे तो घर की हर बेटी का सम्मान होगा और रिश्तों के बंधन और भी मजबूत बनेंगे।रक्षाबंधन के पावन पर्व पर यह मनन करने लायक है।

 
108
 
293 days
 
Jasmine

अगर चूहा पत्थर का हो तो सब उसे पूजते हैं, मगर जिन्दा हो तो मारे बिना साँस नहीं लेते...|
सांप अगर पत्थर का हो, तो सब पूजते हैं मगर जिन्दा हो तो उसे पकड़वा कर जंगल में छोड़ने की बजाय मार देते है...।
औरत अगर पत्थर की हो तो देवी समझ कर सब पूजते हैं, माँ कहते है मगर जिन्दा है तो मारते हैं नोचते हैं, रेप करते हैं.!
बस यही समझ में नहीं आता कि जिंदगी से इतनी नफरत क्यों.....
और पत्थरों से इतनी मोहब्बत क्यों..?

 
258
 
301 days
 
Jasmine
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