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इंसान जितना ऑनलाइन होता जा रहा है..!
इंसानियत उतनी ही ऑफलाइन होती जा रही है..!

 
170
 
357 days
 
aaakash

खतरे के
निशान से ऊपर बह रहा है
उम्र का पानी...

वक़्त की बरसात है कि
थमने का नाम नहीं
ले रही...

आज दिल कर रहा था,
बच्चों की तरह रूठ ही जाऊँ,
पर...

फिर सोचा,
उम्र का तकाज़ा है,
मनायेगा कौन...

रखा करो नजदीकियां,
ज़िन्दगी का कुछ भरोसा
नहीं...

फिर मत कहना
चले भी गए
और बताया भी नहीं...

चाहे जिधर से गुज़रिये,
मीठी सी हलचल
मचा दीजिये...

उम्र का हरेक दौर मज़ेदार है,
अपनी उम्र का
मज़ा लिजिये...

"सदा मुस्कुराते रहिये"

 
170
 
269 days
 
Jasmine

बहुत अच्छा लगा यह छोटा सा लेख पढ़कर !!

"रात के ढाई बजे था, एक सेठ को नींद नहीं आ रही थी,
वह घर में चक्कर पर चक्कर लगाये जा रहा था।
पर चैन नहीं पड़ रहा था ।
आखिर थक कर नीचे उतर आया और कार निकाली
शहर की सड़कों पर निकल गया। रास्ते में एक मंदिर दिखा सोचा थोड़ी देर इस मंदिर में जाकर भगवान के पास बैठता हूँ।
प्रार्थना करता हूं तो शायद शांति मिल जाये।

वह सेठ मंदिर के अंदर गया तो देखा, एक दूसरा आदमी पहले से ही भगवान की मूर्ति के सामने बैठा था, मगर उसका उदास चेहरा, आंखों में करूणा दर्श रही थी।

सेठ ने पूछा " क्यों भाई इतनी रात को मन्दिर में क्या कर रहे हो ?"

आदमी ने कहा " मेरी पत्नी अस्पताल में है, सुबह यदि उसका आपरेशन नहीं हुआ तो वह मर जायेगी और मेरे पास आपरेशन के लिए पैसा नहीं है "

उसकी बात सुनकर सेठ ने जेब में जितने रूपए थे वह उस आदमी को दे दिए। अब गरीब आदमी के चहरे पर चमक आ गईं थीं ।

सेठ ने अपना कार्ड दिया और कहा इसमें फोन नम्बर और पता भी है और जरूरत हो तो निसंकोच बताना।

उस गरीब आदमी ने कार्ड वापिस दे दिया और कहा
"मेरे पास उसका पता है " इस पते की जरूरत नहीं है सेठजी

आश्चर्य से सेठ ने कहा "किसका पता है भाई
"उस गरीब आदमी ने कहा
"जिसने रात को ढाई बजे आपको यहां भेजा उसका"

इतने अटूट विश्वास से सारे कार्य पूर्ण हो जाते है

घर से जब भी बाहर जाये*

*तो घर में विराजमान अपने प्रभु से जरूर मिलकर जाएं*
*और*
*जब लौट कर आए तो उनसे जरूर मिले*
*क्योंकि*
*उनको भी आपके घर लौटने का इंतजार रहता है*

"घर" में यह नियम बनाइए की जब भी आप घर से बाहर निकले तो घर में मंदिर के पास दो घड़ी खड़े रह कर "प्रभु चलिए..आपको साथ में रहना हैं"..!

ऐसा बोल कर ही निकले क्यूँकि आप भले ही *"लाखों की घड़ी" हाथ में क्यूँ ना पहने हो पर "समय" तो "प्रभु के ही हाथ" में हैं न*"

 
146
 
171 days
 
Thakur Saab

😊एक कप #चाय☕*
*उसके नाम...*

*जिस के #सर में मेरी*
*वजह से #दर्द रहता है....😜😉😂😂*

 
122
 
103 days
 
V!shu

वो माचिस की सीली डब्बी,
वो साँसों में आग..
बरसात में सिगरेट सुलगाये *बड़े दिन हो गए*...।

एक्शन का जूता
और ऊपर फॉर्मल सूट...
बेगानी शादी में दावत उड़ाए *बड़े दिन हो गए*...।

ये बारिशें आजकल
रेनकोट में सूख जाती हैं...
सड़कों पर छपाके उड़ाए *बड़े दिन हो गए*.... ।

अब सारे काम सोच समझ कर करता हूँ ज़िन्दगी में....
वो पहली गेंद पर बढ़कर छक्का लगाये *बड़े दिन हो गए*...।

वो ढ़ाई नंबर का क्वेश्चन पुतलियों में समझाना...
किसी हसीन चेहरे को नक़ल कराये *बड़े दिन हो गए*.... ।

जो कहना है
फेसबुक पर डाल देता हूँ....
*किसी को* चुपके से चिट्ठी पकड़ाए *बड़े दिन हो गए*.... ।

बड़ा होने का शौक भी
बड़ा था बचपन में....
काला चूरन मुंह में तम्बाकू सा दबाये *बड़े दिन हो गए*.... ।

आजकल खाने में मुझे
कुछ भी नापसंद नहीं....
वो मम्मी वाला अचार खाए
*बड़े दिन हो गए*.... ।

सुबह के सारे काम
अब रात में ही कर लेता हूँ....
सफ़ेद जूतों पर चाक लगाए *बड़े दिन हो गए*..... ।

लोग कहते हैं
अगला बड़ा सलीकेदार है....
दोस्त के झगड़े को अपनी लड़ाई बनाये
*बड़े दिन हो गए*..... ।

वो साइकल की सवारी
और ऑडी सा टशन...
डंडा पकड़ कर कैंची चलाये
*बड़े दिन हो गए*.... ।

किसी इतवार खाली हो तो
आ जाना पुराने अड्डे पर...
दोस्तों को दिल के शिकवे सुनाये
*बड़े दिन हो गए*...........

 
120
 
143 days
 
V!shu

#चाय_पियेंगे?

जब कोई पूछता है "चाय पियेंगे..?"

तो बस नहीं पूछता वो तुमसे
दूध ,चीनी और चायपत्ती
को उबालकर बनी हुई एक कप चाय के लिए।

वो पूछता हैं...
क्या आप बांटना चाहेंगे
कुछ चीनी सी मीठी यादें
कुछ चायपत्ती सी कड़वी
दुःख भरी बातें..?

वो पूछता है..
क्या आप चाहेंगे
बाँटना मुझसे अपने कुछ
अनुभव ,मुझसे कुछ आशाएं
कुछ नयी उम्मीदें..?

उस एक प्याली चाय के
साथ वो बाँटना चाहता हैं..
अपनी जिंदगी के वो पल
तुमसे जो "अनकही" है अब तक
वो दास्ताँ जो "अनसुनी" है अब तक

वो कहना चाहता है..
तुमसे ..तमाम किस्से
जो सुना नहीं पाया अपनों
को कभी..

एक प्याली चाय
के साथ को अपने उन टूटें
और खत्म हुए ख्वाबों को
एक और बार जी लेना
चाहता है।

वो उस गर्म चाय
के प्याली के साथ उठते हुए धुओँ के साथ
कुछ पल को अपनी
सारी फ़िक्र उड़ा देना चाहता है।

वो कर लेना चाहता है
अपने उस एक नजर वाले हुए
प्यार का इजहार,
तो कभी उस शिद्दत से की
गयी मोहब्बत का इकरार..

कभी वो देश की
राजनीतिक स्थिति से
अवगत कराना चाहता है
तुम्हें..
तो कभी बताना चाहता है
धर्म और मंदिरों के
हाल चाल..

इस दो कप चाय के
साथ शायद इतनी बातें
दो अजनबी कर लेते हैं
जितनी कहा सुनी तो
अपनों के बीच भी नहीं हो पाती।

तो बस जब पुछे कोई
अगली बार तुमसे
"चाय पियेंगे..?"

तो हाँ कहकर बाँट लेना उसके साथ
अपनी चीनी सी मीठी यादें
और चायपत्ती सी कड़वी दुखभरी बातें..!!

चाय सिर्फ़ चाय ही नहीं होती...

 
109
 
279 days
 
Jasmine

कर्जा भी अजीब होता है..​
अमीर पर चढ़ जाए
तो देश छोड़ देते हैं और....​
गरीब पर चढ़ जाए
तो शरीर छाेड़ देते हैं..​

 
105
 
271 days
 
Jasmine

न जाने क्यों महसूस नहीं होती वो गरमाहट,
इन ब्राँडेड वूलन गारमेंट्स में ,
जो होती थी
दिन- रात, उलटे -सीधे फन्दों से बुने हुए स्वेटर और शाल में.

आते हैं याद अक्सर
वो जाड़े की छुट्टियों में दोपहर के आँगन के सीन,
पिघलने को रखा नारियल का तेल,
पकने को रखा लाल मिर्ची का अचार.

कुछ मटर छीलती,
कुछ स्वेटर बुनती,
कुछ धूप खाती
और कुछ को कुछ भी काम नहीं,
भाभियाँ, दादियाँ, बुआ, चाचियाँ.

अब आता है समझ,
क्यों हँसा करती थी कुछ भाभियाँ ,
चुभा-चुभा कर सलाइयों की नोक इधर -उधर,
स्वेटर का नाप लेने के बहाने,

याद है धूप के साथ-साथ खटिया
और
भाभियों और चाचियों की अठखेलियाँ.

अब कहाँ हाथ तापने की गर्माहट,
वार्मर जो है.

अब कहाँ एक-एक गरम पानी की बाल्टी का इन्तज़ार,
इन्स्टेंट गीजर जो है.

अब कहाँ खजूर-मूंगफली-गजक का कॉम्बिनेशन,
रम विथ हॉट वॅाटर जो है.

सर्दियाँ तब भी थी
जो बेहद कठिनाइयों से कटती थीं,
सर्दियाँ आज भी हैं,
जो आसानी से गुजर जाती हैं.

फिर भी
वो ही जाड़े बहुत मिस करते हैं,
बहुत याद आते हैं.

 
99
 
359 days
 
Jasmine

हलके में मत लेना तुम सावले रंग को..👱🏽‍♂
दूध से कही ज्यादा देखे है मैंने शौक़ीन चाय के..☕

 
94
 
270 days
 
aaakash

कागज की *कश्ती* में..
सवार है हम

फिर भी *कल* के लिए
परेशान है हम।

 
90
 
160 days
 
Sunil
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