Encourage (87 in 1 year | sorting by most liked)

*ज़िन्दगी ज़बरदस्त है*

*इसे ज़बरदस्ती ना जिएं*

*ज़बरदस्त तरीक़े से जीएं*

 
863
 
321 days
 
DDLJ143

✍🏻✍🏻 "मुमकिन" नहीं की वक्त "मेहरबां" रहे "उम्र" भर...!!
✍🏻✍🏻 कुछ लम्हें "जीने" का "तजुर्बा" भी "सिखाते" है...!!

 
826
 
297 days
 
Veeshal.joshee

सफलता की ऊंचाई पर हो तो धीरज रखना......

पक्षी भी जानते हैं कि आकाश में बैठने की जगह नहीं होती.....

 
811
 
220 days
 
Jasmine

✍ *कामयाबी के सफ़र में धुप बड़ी काम आयी......*

*छाँव अगर होती तो कबके सो गए होते !!*
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687
 
319 days
 
Veeshal.joshee

Dream and Dedication is a powerful combination!!🤘Remember it!!👍

 
607
 
260 days
 
Aawara_Dil

एक सुनार से लक्ष्मी जी रूठ गई ।

जाते वक्त बोली मैं जा रही हूँ

और मेरी जगह नुकसान आ रहा है ।

तैयार हो जाओ।

लेकिन मै तुम्हे अंतिम भेट जरूर देना चाहती हूँ।
मांगो जो भी इच्छा हो।

सुनार बहुत समझदार था।
उसने 🙏 विनती की नुकसान आए तो आने दो ।

लेकिन उससे कहना की मेरे परिवार में आपसी प्रेम बना रहे।
बस मेरी यही इच्छा है।

लक्ष्मी जी ने तथास्तु कहा।

कुछ दिन के बाद :-

सुनार की सबसे छोटी बहू खिचड़ी बना रही थी।

उसने नमक आदि डाला और अन्य काम करने लगी।

तब दूसरे लड़के की बहू आई और उसने भी बिना चखे नमक डाला और चली गई।

इसी प्रकार तीसरी, चौथी बहुएं आई और नमक डालकर चली गई ।

उनकी सास ने भी ऐसा किया।

शाम को सबसे पहले सुनार आया।

पहला निवाला मुह में लिया।
देखा बहुत ज्यादा नमक है।

लेकिन वह समझ गया नुकसान (हानि) आ चुका है।

चुपचाप खिचड़ी खाई और चला गया।

इसके बाद बङे बेटे का नम्बर आया।

पहला निवाला मुह में लिया।
पूछा पिता जी ने खाना खा लिया क्या कहा उन्होंने ?

सभी ने उत्तर दिया-" हाँ खा लिया, कुछ नही बोले।"

अब लड़के ने सोचा जब पिता जी ही कुछ नही बोले तो मै भी चुपचाप खा लेता हूँ।

इस प्रकार घर के अन्य सदस्य एक -एक आए।

पहले वालो के बारे में पूछते और चुपचाप खाना खा कर चले गए।

रात को नुकसान (हानि) हाथ जोड़कर

सुनार से कहने लगा -,"मै जा रहा हूँ।"

सुनार ने पूछा- क्यों ?

तब नुकसान (हानि ) कहता है, " आप लोग एक किलो तो नमक खा गए ।

लेकिन बिलकुल भी झगड़ा नही हुआ। मेरा यहाँ कोई काम नहीं।"

*निचोङ*

⭐झगड़ा कमजोरी, हानि, नुकसान की पहचान है।

👏जहाँ प्रेम है, वहाँ लक्ष्मी का वास है।

🔃सदा प्यार -प्रेम बांटते रहे। छोटे -बङे की कदर करे ।

जो बङे हैं, वो बङे ही रहेंगे ।

चाहे आपकी कमाई उसकी कमाई से बङी हो। 🙏🙏🙏🙏

अच्छा लगे तो आप जरुर किसी अपने को भेजें।

 
562
 
328 days
 
Veeshal.joshee

नाम एक दिन में कभी नहीं बनता.....
पर एक दिन ज़रूर बनता है ....

 
552
 
327 days
 
Abhilekh.......

*कोई भी मनुष्य किस बात को,*
*किस प्रकार से समझता है।*

*यह उसकी मानसिकता तय करती है।*

*कोई दूसरों की थाली में से भी,*
*छीन कर खाने में अपनी शान समझता है।*

*तो कोई अपनी थाली में से दूसरों को,*
*निवाले खिला कर संतुष्ट होता है।*

*सारा खेल संस्कारों, समझ,*
*और मानसिकता का है।*

*लेकिन एक बात तो तयशुदा है कि छीन कर,*
*खाने वालों का कभी पेट नहीं भरता।*

*और बाँट कर खाने वाले,*
*कभी भी भूखे नहीं रहते।*
*"स्वस्थ रहो... मस्त रहो"*

 
494
 
322 days
 
Veeshal.joshee

तोड़ा है वक़्त ने मुझे पर , पर अभी भी " थोड़ी " सी जान बाक़ी है .....
ना झुका था ना झुकूँगा , अभी " बहोत " ईमान बाक़ी है ....

 
485
 
261 days
 
Abhilekh.......

जोर से धक्का मारा लोगों ने,
मुझे डूबोने के लिए,
फायदा ये हुआ साहब,
मैं तैरना सीख गया..


छत से धक्का मारा लोगों ने,
मुझे गिराने के लिये
फायदा ये हुआ साहब,
मैं कूदना सीख गया..


अड़ंगा देकर मुझे राह में
गिराना चाहा लोगों ने,
फायदा ये हुआ साहब,
मैं संभलना सीख गया..

 
478
 
246 days
 
Jasmine
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