Encourage (1948)

The expectation to deliver often leads an individual to give up on his dreams but one who manages to deliver along with fulfilling his dream becomes a legend (y)

 
44
 
4 days
 
ankur2308

Don't let anyone treat you like "elaichi" in Biryani,
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you are chicken in Biryani..

 
48
 
7 days
 
mumbai..

गुलाम थे तो हम सब #हिंदुस्तानी थे,
आज़ादी ने हमको हिन्दू,मुस्लमान बना दिया।
😕

 
95
 
8 days
 
Veeshal.joshee

*पूर्ण विश्वास*
*कृष्ण भोजन के लिए बैठे थे। एक दो कौर मुँह में लेते ही अचानक उठ खड़े हुए। बड़ी व्यग्रता से द्वार की तरफ भागे, फिर लौट आए उदास और भोजन करने लगे।*
*रुक्मणी ने पूछा," प्रभु,थाली छोड़कर इतनी तेजी से क्यों गये ? और इतनी उदासी लेकर क्यों लौट आये?"*
*कृष्ण ने कहा, " मेरा एक प्यारा राजधानी से गुजर रहा है। नंगा फ़कीर है। इकतारे पर मेरे नाम की धुन बजाते हुए मस्ती में झूमते चला जा रहा है। लोग उसे पागल समझकर उसकी खिल्ली उड़ा रहे हैं। उस पर पत्थर फेंक रहे हैं। और वो है कि मेरा ही गुणगान किए जा रहा है। उसके माथे से खून टपक रहा है। वह असहाय है, इसलिए दौड़ना पड़ा "*
*" तो फिर लौट क्यों आये?"*
*कृष्ण बोले, " मैं द्वार तक पहुँचा ही था कि उसने इकतारा नीचे फेंक दिया और पत्थर हाथ में उठा लिया। अब वह खुद ही उत्तर देने में तत्पर हो गया है। उसे अब मेरी जरूरत न रही। जरा रूक जाता, *पूर्ण विश्वास* करता तो मैं पहुँच गया होता।"
जय श्री कृष्ण🌹🌹

 
150
 
11 days
 
DDLJ143

🍁
Dance a little slower
Sing a little louder
Kiss a little softer
Look a little deeper
Dream a little harder
Love a little longer
Be a little better
🍁

 
38
 
12 days
 
Jasmine

IT\'S NEVER TOO LATE

Happiness is not something to postpone for later it is a choice you design in the present.

It is never too late to know better, to do better, to feel better, to be better, to eat better, to live better, to love better. The most amazing story is the story of a transformation.

Transforming into a new and improved version of yourself is painful and uncomfortable. It brings up old insecurities and past words we have said or heard about ourselves. But overcoming these beliefs is essential if we want to heal it permanently.

Doing better is addictive, being better is addictive, living and feeling better is a high unlike no other.

 
73
 
19 days
 
Jasmine

✍🏻✍🏻 "मुमकिन" नहीं की वक्त "मेहरबां" रहे "उम्र" भर...!!
✍🏻✍🏻 कुछ लम्हें "जीने" का "तजुर्बा" भी "सिखाते" है...!!

 
392
 
21 days
 
Veeshal.joshee

ऋषिकेश में गंगा जी के किनारे एक संत रहा करते।। वह जन्मांध थे ।

और उनका नित्य का एक नियम था कि वह शाम के समय ऊपर गगन चुंबी पहाड़ों में भृमण करने के लिये निकल जाते और हरी नाम का संकीर्तन करते जाते।।

एक दिन उनके एक शिष्य ने उनसे पूछा

बाबा आप हर रोज इतने ऊंचे ऊंचे पहाड़ों पर भृमण हेतु जाते हैं

वहां बहुत गहरी गहरी खाइयां भी हैं और आपको आंखों से दिखलाई नहीं देता।।

क्या आपको डर नहीं लगता ?

अगर कभी पांव लड़खड़ा गये तो ?

बाबा ने कुछ नहीं कहा और शाम के समय शिष्य को साथ ले चले।।

पहाड़ों के मध्य थे तो बाबा ने शिष्य से कहा जैसे ही कोई गहरी खाई आये तो बताना।।

दोनों चलते रहे और जैसे ही गहरी खाई आयी
शिष्य ने बताया कि बाबा गहरी खाई आ चुकी है।।

बाबा ने कहा मुझे इसमें धक्का दे दे।।

अब तो शिष्य इतना सुनते ही सकपका गया।।
उसने कहा बाबा मैं आपको धक्का कैसे दे सकता हूँ।।

मैं ऐसा हरगिज नहीं कर सकता।।

आप तो मेरे गुरुदेव हैं

मैं तो किसी अपने शत्रु को भी इस खाई में नहीं धकेल सकता।।

बाबा ने फिर कहा

मैं कहता हूं कि मुझे इस खाई में धक्का दे दो।।

यह मेरी आज्ञा है

और मेरी आज्ञा की अवहेलना करोगे तो नर्क गामी होगे।।
शिष्य ने कहा बाबा मैं नर्क भोग लूंगा मगर आपको हरगिज इस खाई में नहीं धकेल सकता।।

तब बाबा ने शिष्य से कहा

रे नादान बालक

जब तुझ जैसा एक साधारण प्राणी मुझे खाई में नहीं धकेल सकता तो बता

मेरा मालिक भला कैसे मुझे खाई में गिरने देगा।।

उसे तो सिर्फ गिरे हुओं को उबारना आता है

गिरे हुओं को उठाना आता है

वह कभी भी किसी को गिरने नहीं देता।।

वह पल पल हमारे साथ है

बस हमें विश्वास रखना होगा उस पर।

 
162
 
21 days
 
DelhiDude

*हृदय को छू लेने वाली*
सत्य कथा
*Heart touching*
Real story

" टिकट कहाँ है ? " -- टी सी ने बर्थ के नीचे छिपी लगभग तेरह - चौदह साल की लडकी से पूछा ।
" नहीं है साहब।"काँपती हुई हाथ जोड़े लडकी बोली।
"तो गाड़ी से उतरो।" टी सी ने कहा ।
इसका टिकट मैं दे रहीं हूँ ।
............पीछे से ऊषा भट्टाचार्य की आवाज आई जो पेशे से प्रोफेसर थी ।
"तुम्हें कहाँ जाना है ?" लड़कीसे पूछा
" पता नही मैम ! "
" तब मेरे साथ चल बैंगलोर तक ! "
" तुम्हारा नाम क्या है ? "
" चित्रा ! "
बैंगलोर पहुँच कर ऊषाजीने चित्रा को अपनी ऐक पहचान के स्वंयसेवी संस्थान को सौंप दिया ।
जल्द ही ऊषा जी का ट्रांसफर दिल्ली होने की वजह से चित्रा से कभी कभार फोन पर बात हो जाया करती थी ।
करीब बीस साल बाद ऊषाजी को एक लेक्चर के लिए सेन फ्रांसिस्को ( अमरीका) बुलाया गया ।
लेक्चर के बाद जब वह होटल का बिल देने रिसेप्सन पर गई तो पता चला पीछे खड़ी एक खूबसूरत दंपत्ति ने बिल भर दिया था ।
"तुमने मेरा बिल क्यों भरा ? ? "
" मैम साहब, यह बम्बई से बैंगलोर तक के रेल टिकट के सामने कुछ नहीं है । "
"अरे चित्रा ! ! ? ? ? . . . .
( चित्रा कोई और नहीं इंफोसिस फाउंडेशन की चेयरमैन सुधा मुर्ति जी थी।)
यह उन्ही की लिखी पुस्तक "द डे आई स्टाॅप्ड ड्रिंकिंग " से लिया गया कुछ अंश )
*देखा आपने!............*
कभी आपके द्वारा भी की गई *सहायता* किसी की जिन्दगी बदल सकती है।
*सहायता करने की समर्थता* प्रदान करें इन्हीं मनोभावों और आप की प्यारी सी *मुस्कान*😊😊की अपेक्षा
के साथ
💐 🙏💐

 
249
 
38 days
 
DDLJ143

*एक स्त्री और उसका पति सर्कस में काम करते थे। स्त्री स्टेज में एक जगह खड़ी हो जाती थी और पति बिना देखे तीर उसकी ओर मारता था जिससे उसके चारो ओर तीरों की डिजाइन बन जाती थी। उसके हर तीर के साथ तालियाँ बजती थी। एक दिन दोनों में तकरार हो गई। पति को इतना गुस्सा आया कि उसने सर्कस के खेल में उसे मारने का मन बना लिया। रोज़ की तरह तमाशा शुरू हुआ। व्यक्ति ने स्त्री को मारने के लक्ष्य करके तीर मारा। पर यह क्या, फिर तालियों की गडगड़ाहट। उसने आँखे खोली तो हैरान रह गया। तीर पहले की तरह ही स्त्री को छूते हुए किनारे लग जाता था।*
*यह है अभ्यास। उसको ऐसे ही अभ्यास था तो वह चाहकर भी गलत तीर नही मार सका। इस प्रकार जब सकारात्मक सोचने का अभ्यास हो जाता है तो मन अपने आप ही वश में रह कर परमात्मा की ओर लग जाता है। और चाह कर भी गलत रास्ते पर नहीं चलता।*
*ठीक इसी तरह हम ये भूल गए हैं कि वास्तव में हम आत्मा है, इस शरीर को चलाने वाली हैं, परमात्मा की सन्तान हैं, सुख, शांति, प्रेम, आनन्द, पवित्र, शक्ति और ज्ञान स्वरूप हैं ,इस धरा पर खेल खेलने आते है। इसलिए सदैव सकारात्मक रहे और खुश रहे।*
👌

 
222
 
42 days
 
DDLJ143
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