Encourage (1940)

*हृदय को छू लेने वाली*
सत्य कथा
*Heart touching*
Real story

" टिकट कहाँ है ? " -- टी सी ने बर्थ के नीचे छिपी लगभग तेरह - चौदह साल की लडकी से पूछा ।
" नहीं है साहब।"काँपती हुई हाथ जोड़े लडकी बोली।
"तो गाड़ी से उतरो।" टी सी ने कहा ।
इसका टिकट मैं दे रहीं हूँ ।
............पीछे से ऊषा भट्टाचार्य की आवाज आई जो पेशे से प्रोफेसर थी ।
"तुम्हें कहाँ जाना है ?" लड़कीसे पूछा
" पता नही मैम ! "
" तब मेरे साथ चल बैंगलोर तक ! "
" तुम्हारा नाम क्या है ? "
" चित्रा ! "
बैंगलोर पहुँच कर ऊषाजीने चित्रा को अपनी ऐक पहचान के स्वंयसेवी संस्थान को सौंप दिया ।
जल्द ही ऊषा जी का ट्रांसफर दिल्ली होने की वजह से चित्रा से कभी कभार फोन पर बात हो जाया करती थी ।
करीब बीस साल बाद ऊषाजी को एक लेक्चर के लिए सेन फ्रांसिस्को ( अमरीका) बुलाया गया ।
लेक्चर के बाद जब वह होटल का बिल देने रिसेप्सन पर गई तो पता चला पीछे खड़ी एक खूबसूरत दंपत्ति ने बिल भर दिया था ।
"तुमने मेरा बिल क्यों भरा ? ? "
" मैम साहब, यह बम्बई से बैंगलोर तक के रेल टिकट के सामने कुछ नहीं है । "
"अरे चित्रा ! ! ? ? ? . . . .
( चित्रा कोई और नहीं इंफोसिस फाउंडेशन की चेयरमैन सुधा मुर्ति जी थी।)
यह उन्ही की लिखी पुस्तक "द डे आई स्टाॅप्ड ड्रिंकिंग " से लिया गया कुछ अंश )
*देखा आपने!............*
कभी आपके द्वारा भी की गई *सहायता* किसी की जिन्दगी बदल सकती है।
*सहायता करने की समर्थता* प्रदान करें इन्हीं मनोभावों और आप की प्यारी सी *मुस्कान*😊😊की अपेक्षा
के साथ
💐 🙏💐

 
142
 
11 days
 
DDLJ143

*एक स्त्री और उसका पति सर्कस में काम करते थे। स्त्री स्टेज में एक जगह खड़ी हो जाती थी और पति बिना देखे तीर उसकी ओर मारता था जिससे उसके चारो ओर तीरों की डिजाइन बन जाती थी। उसके हर तीर के साथ तालियाँ बजती थी। एक दिन दोनों में तकरार हो गई। पति को इतना गुस्सा आया कि उसने सर्कस के खेल में उसे मारने का मन बना लिया। रोज़ की तरह तमाशा शुरू हुआ। व्यक्ति ने स्त्री को मारने के लक्ष्य करके तीर मारा। पर यह क्या, फिर तालियों की गडगड़ाहट। उसने आँखे खोली तो हैरान रह गया। तीर पहले की तरह ही स्त्री को छूते हुए किनारे लग जाता था।*
*यह है अभ्यास। उसको ऐसे ही अभ्यास था तो वह चाहकर भी गलत तीर नही मार सका। इस प्रकार जब सकारात्मक सोचने का अभ्यास हो जाता है तो मन अपने आप ही वश में रह कर परमात्मा की ओर लग जाता है। और चाह कर भी गलत रास्ते पर नहीं चलता।*
*ठीक इसी तरह हम ये भूल गए हैं कि वास्तव में हम आत्मा है, इस शरीर को चलाने वाली हैं, परमात्मा की सन्तान हैं, सुख, शांति, प्रेम, आनन्द, पवित्र, शक्ति और ज्ञान स्वरूप हैं ,इस धरा पर खेल खेलने आते है। इसलिए सदैव सकारात्मक रहे और खुश रहे।*
👌

 
156
 
14 days
 
DDLJ143

✍ *कामयाबी के सफ़र में धुप बड़ी काम आयी......*

*छाँव अगर होती तो कबके सो गए होते !!*
.

 
279
 
15 days
 
Veeshal.joshee

*ज़िन्दगी ज़बरदस्त है*

*इसे ज़बरदस्ती ना जिएं*

*ज़बरदस्त तरीक़े से जीएं*

 
358
 
18 days
 
DDLJ143

I attended a Party with a gathering of about 30 people and sat in the front row.

A Lady started distributing snacks from the back and unfortunately, it didn't get to us sitting at the front.

Another Lady started handing out Drinks, from the front. But by then I had already moved to the Back. So the drink didn't get to me.

I was irritated and stood up to leave.

But then I saw three ladies each with A Big Bowl of vegetable Manchurian dry. This time, I tried to be Wise by sitting at the Middle. One of the Ladies started the sharing from the Front, and the second Lady started distributing from the back. When they got to the middle where I was seated, it got over again!

Feeling frustrated, I bent my head, putting my Face in My Hands.

But then the third Lady tapped me and held out her Bowl.
I stretched out my Hand and guess what was in the Bowl?

Toothpicks !!!

Moral:
Don\'t try to Position yourself in Life. If you r doing your best then good things will come to you automatically, sooner or later.

Otherwise You will Wrongfully position Yourself

For Toothpicks Only !!!!💝💝

 
89
 
18 days
 
Veeshal.joshee

*कोई भी मनुष्य किस बात को,*
*किस प्रकार से समझता है।*

*यह उसकी मानसिकता तय करती है।*

*कोई दूसरों की थाली में से भी,*
*छीन कर खाने में अपनी शान समझता है।*

*तो कोई अपनी थाली में से दूसरों को,*
*निवाले खिला कर संतुष्ट होता है।*

*सारा खेल संस्कारों, समझ,*
*और मानसिकता का है।*

*लेकिन एक बात तो तयशुदा है कि छीन कर,*
*खाने वालों का कभी पेट नहीं भरता।*

*और बाँट कर खाने वाले,*
*कभी भी भूखे नहीं रहते।*
*"स्वस्थ रहो... मस्त रहो"*

 
228
 
18 days
 
Veeshal.joshee

. *अप्रतिम संदेश*
बरसात में एक घटना घटी. पेड़ पर से एक घोंसला हवा के थपेडे से अचानक गिर गया. गिर कर भी दोनों मौन बैठे रहे.

*चिडा* - "सुबह बात करते हैं"
*चिडी* - "हाँ"

रात गुजरने की राह दोनों देख रहे थे l सुबह का साफ वातवरण देख दोनों खुश हो गये.चिडा जोश से बोला, "क्या हम चले ? फिर से तिनके इकट्ठा करते हैं.
"उसकी आँख में पानी देखकर. चिडा - "अरे पागली रो क्यों रही ?, *गिराना उसके हाथ में हैं पर बनाना* अपने हाथ में हैं और मदद कि राह देखने के लिये हम इंसान थोडे ही हैं ! चल करते हैं शुरुआत " और उन दोनोने ऊँचे आसमान में छलाँग लगाई ...इसे ही कहते जीना.
*🙏सीखें-सिखाएँ🙏*

 
185
 
21 days
 
Veeshal.joshee

जब आप किसी एक काम के लिए शिद्दत से कूद पड़ते हो ,
तो सारी मुसीबते छोटी पड़ जाती है।

 
111
 
22 days
 
Sam's Son

नाम एक दिन में कभी नहीं बनता.....
पर एक दिन ज़रूर बनता है ....

 
276
 
23 days
 
Abhilekh.......

एक सुनार से लक्ष्मी जी रूठ गई ।

जाते वक्त बोली मैं जा रही हूँ

और मेरी जगह नुकसान आ रहा है ।

तैयार हो जाओ।

लेकिन मै तुम्हे अंतिम भेट जरूर देना चाहती हूँ।
मांगो जो भी इच्छा हो।

सुनार बहुत समझदार था।
उसने 🙏 विनती की नुकसान आए तो आने दो ।

लेकिन उससे कहना की मेरे परिवार में आपसी प्रेम बना रहे।
बस मेरी यही इच्छा है।

लक्ष्मी जी ने तथास्तु कहा।

कुछ दिन के बाद :-

सुनार की सबसे छोटी बहू खिचड़ी बना रही थी।

उसने नमक आदि डाला और अन्य काम करने लगी।

तब दूसरे लड़के की बहू आई और उसने भी बिना चखे नमक डाला और चली गई।

इसी प्रकार तीसरी, चौथी बहुएं आई और नमक डालकर चली गई ।

उनकी सास ने भी ऐसा किया।

शाम को सबसे पहले सुनार आया।

पहला निवाला मुह में लिया।
देखा बहुत ज्यादा नमक है।

लेकिन वह समझ गया नुकसान (हानि) आ चुका है।

चुपचाप खिचड़ी खाई और चला गया।

इसके बाद बङे बेटे का नम्बर आया।

पहला निवाला मुह में लिया।
पूछा पिता जी ने खाना खा लिया क्या कहा उन्होंने ?

सभी ने उत्तर दिया-" हाँ खा लिया, कुछ नही बोले।"

अब लड़के ने सोचा जब पिता जी ही कुछ नही बोले तो मै भी चुपचाप खा लेता हूँ।

इस प्रकार घर के अन्य सदस्य एक -एक आए।

पहले वालो के बारे में पूछते और चुपचाप खाना खा कर चले गए।

रात को नुकसान (हानि) हाथ जोड़कर

सुनार से कहने लगा -,"मै जा रहा हूँ।"

सुनार ने पूछा- क्यों ?

तब नुकसान (हानि ) कहता है, " आप लोग एक किलो तो नमक खा गए ।

लेकिन बिलकुल भी झगड़ा नही हुआ। मेरा यहाँ कोई काम नहीं।"

*निचोङ*

⭐झगड़ा कमजोरी, हानि, नुकसान की पहचान है।

👏जहाँ प्रेम है, वहाँ लक्ष्मी का वास है।

🔃सदा प्यार -प्रेम बांटते रहे। छोटे -बङे की कदर करे ।

जो बङे हैं, वो बङे ही रहेंगे ।

चाहे आपकी कमाई उसकी कमाई से बङी हो। 🙏🙏🙏🙏

अच्छा लगे तो आप जरुर किसी अपने को भेजें।

 
338
 
25 days
 
Veeshal.joshee
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