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धरती की वह रहस्यमयी जगहें जहां काम नहीं करता गुरुत्वाकर्षण



गुरुत्वाकर्षण एक ऐसी चीज है जिसके बगैर धरती पर चल पाना मुमकिन नहीं है गुरुत्वाकर्षण धरती पर हर जगह मौजूद है गुरुत्वाकर्षण से सिर्फ तभी बचा जा सकता है जब आप पृथ्वी से दूर अंतरिक्ष में पहुंच जाएं। गुरुत्वाकर्षण के कारण ही हम पृथ्वी पर टिके रह पाते हैं परंतु क्या आप जानते हैं कि धरती पर ऐसी भी कुछ रहस्यमयी जगह है जहां गुरुत्वाकर्षण काम नहीं करता।

1. Mystery Spot, California - इस जगह को 1939 में खोजा गया था यह 150 वर्ग मीटर का एक छोटा सा भू भाग है जहां पर चुंबकीय क्षेत्र और गुरुत्वाकर्षण अलग तरीके से काम करता है।



2. Magnetic Hill, Leh - लेह में मोजूद यह एक छोटी सी सड़क है जो कारगिल से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है इस सड़क पर गाड़ियां अपने आप ऊपर की तरफ बढ़ने लगती हैं यदि आप इंजन बंद कर देते हैं तो भी गाड़ी ऊपर की तरफ बढ़ती रहती है धीमे धीमे यह 20 किलोमीटर की स्पीड पकड़ लेती

3. Spook Hill, Florida - यह जगह भी बिल्कुल भारत के लेह जैसी है यहां पर यदि आप अपनी गाड़ी का इंजन बंद कर देते हैं तो आपकी गाड़ी ऊपर की ओर चलने लगती हैं।


4. Cosmos Mystery Area, south Dakota - जब आप इस जगह पर पहुंचेंगे तो यहां पर आपको पेड़ पौधे एक तरफ झुके हुए दिखाई देंगे। यहां आप एक खास कोण बिना गिरे खड़े रह सकते हैं इस जगह की खोज 1950 में की गई थी।


5.Mystery Spot, Michigan - लगभग 300 वर्ग मीटर का यह एरिया रहस्यमयी माना जाता है क्योंकि यहां पर ग्रेविटी काम नहीं करती। यहां पर जानवर भी आने से डरते हैं यहां पर आप खड़ी दीवार पर भी चल सकते हैं

 
43
 
a day
 
User27605

*Avengers 4 में क्या होने वाला है*


जाल निकल नहीं रहा लेकिन फिर भी ये शॉ ऑफ कर दूं कि मैं अवेंजर्स इन्फिनिटी वॉर देख आया हूं और उम्मील है मार्वेल के सारे फैन्स देख चुके होंगे. अगर नहीं देखा है तो प्लीज लौट जाओ क्योंकि आगे स्पॉइलर हैं. पहला स्पॉइलर ये है कि वीकेंड पर सिर्फ तीन दिन में फिल्म 90 करोड़ की कमाई पार कर चुकी है. अब काम की बात की आने वाली अवेंजर में क्या होगा.


1. बात ये है कि जैसे सारे लोग धूल में मिल गए हैं उससे आप पूछ सकते हैं अमा ऐसे भी कोई मरता है क्या? आधी से ज्यादा अवेंजर्स की फौज गायब हो गई. उनकी जगह लोकी, गमोरा और विजन का मरना ज्यादा नेचुरल लगता है. तो हकीकत के सबसे नजदीक थ्योरी ये है कि टाइम का खेल खेला गया है. डॉक्टर स्ट्रैंज ने आगे जाकर देख लिया था कि क्या लोचा होने वाला है. लाखों फ्यूचर लड़ाइयों के बीच जिस एक जीत की बात डॉक्टर ने की थी वो शायद यही हो कि टाइम में आगे पीछे घुसकर सब माहौल सेट किया गया है.

2. डॉक्टर स्ट्रैंज, ब्लैक पैंथर, स्पाइडर मैन नहीं मर सकते. इन सबकी फिल्में आने वाली हैं यार अभी जुम्मे जुम्मे चार रोज तो हुए इनको आए हुए. स्पाइडरमैन की होमकमिंग का सीक्वल, ब्लैक पैंथर 2 और डॉक्टर स्ट्रैंज 2 आने वाली हैं. सारे पावरफुल सुपरहीरोज हैं, डॉक्टर स्ट्रैंज की फैन फॉलोविंग एशिया में बहुत ज्यादा है जहां से मार्वेल की कमाई का बड़ा हिस्सा जाता है. उसको ये लोग मार नहीं सकते बताए देते हैं.

3. गार्डियन्स ऑफ गैलेक्सी की पूरी टीम साफ हो गई है जो कि इम्पॉसिबल है यार. एडम वॉरलाक गार्डियन्स से बदला लेने के लिए तैयार किया जा रहा है तो ऐसा कैसे हो सकता है. रॉकेट थॉर का रैबिट दोस्त बन गया है वो लौटेगा जरूर.

4. टेंसन लेने का नहीं अभी एंट मैन, हॉक आई जिंदा हैं, हो सकता है कि अगली अवेंजर्स में ये लोग भी दिख जाएं भौकाल दिखाते हुए.

5. ऐस्गार्ड की आधी जनता मरी है ये बात थॉर खुद अपने श्री मुख से बता चुके हैं लेकिन अभी आधी तो बाकी है न. ऐस्गार्ड के लोग सालों साल जीते हैं और महा पावरफुल होते हैं ये बात भी पता है इसलिए इधर से भी उम्मीद का कीड़ा काट रहा है.
खैर अवेंजर्स 4 का नाम भी काफी कुछ डिसाइड कर देगा इसलिए टेंसन लेने की जरूरत नहीं है नाम आने दो.

6. एक और सबसे खास बात, फिल्म के पोस्ट क्रेडिट सीन में निक फ्यूरी पेजर जैसे यंत्र से जो संदेश भेज रहे हैं वो कैप्टन मार्वेल के पास जाने वाला है. लोगों को लग सकता है कि अब अवेंजर्स में कैप्टन मार्वेल देखने को मिलेगी लेकिन हाथ जोड़ रहे हैं. ये सपना मत देखो यार काहे कि सपने जब टूटते हैं न तो बहुत दर्द होता है. कैप्टन मार्वेल मार्वेल के सबसे ज्यादा पावरफुल सुपर हीरो होने वाली है ऐसा मार्वेल के प्रेसिडेंट केविन फेज ने 2016 के एक इंटरव्यू में बताया था.

7. एक और प्वाइंट है हाइड्रा की वापसी. कैप्टन अमेरिका विंटर सोल्जर और अवेंजर्स- एज ऑफ़ अल्ट्रान के बाद हाइड्रा का उतना जिक्र नहीं आया है. न हालिया स्पाइडर मैन होम कमिंग या ब्लैक पैंथर में, लेकिन इनफिनिटी वॉर में हाइड्रा का लीडर रेड स्कल उस ग्रह में नज़र आता है. जहाँ थानोस सोल स्टोन लेने गया था. रेड स्कल को कैप्टन अमेरिका-फर्स्ट अवेंजर के अंत के बाद से नहीं देखा गया था. उस फिल्म में वो क्रैश होते प्लेन से हाथ में टेसेरेक्ट उठाने के चक्कर में कहीं गायब हो गया था. अब पता लगा वो अब तक ज़िंदा है और कई चीजें जानता है. साथ ही इनफिनिटी स्टोन के पास रहा है. ये बातें भले उसे शक्तिशाली न बनाती हों लेकिन ये दिखाती हैं कि वो अब भी इम्पोर्टेंस रखता है. तो कल को मार्वल की फिल्मों में हाइड्रा की वापसी या रेड स्कल का और ज्यादा रोल और योगदान तो तय है. और कुछ नहीं तो रेड स्कल की मौत तो दिखानी ही चाहिए, अब ये अवेंजर्स 4 में होता है या और किसी फिल्म में ये देखना है.

 
26
 
24 days
 
Sam's Son

जन्मदिन मुबारक बीकानेर
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ऊंठ मिठाई इस्त्री सोनो गेणो साह
पांच चीज पिरथी सिरै वाह बीकाणा वाह।

रेगिस्तानी जहाज ऊंठ ,मिठाई ,स्त्री ,सोना गहना और साहूकारों के लिए कवि को पृथ्वी पर श्रेष्ठ शहर लगने वाला बीकानेर आज अपना 531 वां जन्मदिन मना रहा है।

पनरे सौ पैंताळवे सुद बैसाख सुमेर
थावर बीज थरपियो बीके बीकानेर।

अल्हड़ अलबेला मस्ताना शहर अपने संस्थापक राव बीका के हठ को आज भी अपने स्वभाव में थामे हुए है।पिता राव जोधा के ताने को चुनोति मान बीका अपने काका राव कांधल के साथ राज बनाने निकले तो रेतीले धोरो को फतेह करते हुए जांगळ प्रदेश में विक्रम संवत् 1545 में माँ करनी के आशीर्वाद से एक भेड़पालक किसान के कहे स्थान पर इस नगर की नींव थरपी।

राजशाही के काल में राव बीका से लेकर महाराजा सादुल सिंह तक के काल में कुल 23 शासको में महाराजा गंगा सिंह सर्वाधिक विजनरी शासक रहे। अक्तुबर 1931 में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में जाने के लिए महात्मा गांधी को सहमत करने वाले गंगा सिंह ही थे जिन्होंने गांधी जी की यात्रा की सारी व्यवस्था की। गंग नहर ,बीकानेर रेलवे जैसे जन हितेषी काम करवाने वाले महाराजा को शहर के जन्मदिन के दिन याद करना लाजमी है।

531 सालो के इतिहास में इस शहर का साम्प्रदायिक सौहार्द गौर करने लायक है। सूरज निकलने से पहले मन्दिर की घण्टियाँ और मस्जिदों में अजान के स्वर एक साथ मिलकर इस शहर का संगीत बुनते है वही गिरजाघरों में प्रार्थना के लिए बुदबुदाते होठ और गुरूद्वारे में अरदास के लिए पलटते पन्ने फिजाओ में प्रेम और आध्यात्म का राग अलापते है। कोटगेट के भीतरी सड़क दाऊ जी रोड पर नोगजा की दरगाह और दाऊ जी मन्दिर में एकसाथ दोनों धर्म के लोग मत्था टेकते है। इसीलिए तो कहा है-

बीकानेर की संस्कृति जैसी सांझी खीर
नोगजा मेरे देवता दाऊजी मेरे पीर ।

इतिहास गवाह है इन सवा पांच सौ सालो में कोई इस संस्कृति को क्षति नही पहुंचा पाया। आजादी से पहले के साम्प्रदायिक दंगे हो चाहे विभाजन की विभीषिका या फिर बाबरी मस्जिद टूटने की घटना इस शहर ने अपने परकोटे में बाहरी अजनबी हवा को घुसने नही दिया। यहां तक कि यहां के राजनेताओ की जोड़ी मक्खन अली (मक्खन जोशी) और महबूब जोशी(महबूब अली) को इसी नाम से जाना जाता रहा।

काशीनाथ सिंह के उपन्यास 'काशी का अस्सी' पढ़ते हुए आपको अहसास होता है कि बीकाणा बनारस का जुड़वा शहर सा है इसीलिए तो इसे छोटी काशी कहा जाता है।
शहर के भीतरी भाग में बसा पुराना शहर अपने पाटों पर पूरी रात जागता है।पाटों की हथाइयो में "क्या ल्यायो" और "पगे लागणा" से शुरू होकर गांव गवाड से ठेठ अमेरिका के ट्रम्प और रूस के पुतिन तक की चर्चाए होती है। ज्योतिषीय ज्ञान में शहर का हर तीसरा आदमी पारंगत है वही थियेटर से लेकर म्यूजिक ,पेंटिंग, पोएट्री ,नॉवेल और स्टोरी राइटर भी बड़ी संख्या में है तभी हर सप्ताह पुस्तक लोकार्पण से लेकर साहित्यिक चर्चाए तक के आयोजन भीड़ भरे रहते है।
स्व. हरीश भादाणी ,स्व. छगन मोहता और स्व. यादवेन्द्र शर्मा चन्द्र का यह शहर धीर गम्भीर नंदकिशोर आचार्य से लेकर नई पीढ़ी के कई नामी गिरामी लेखको विचारको को अपने में समेटे है जो इस जमी पर दर्शन विचार की नगर चेतना को बनाए हुए है।
यहां की होली तो जग प्रसिद्ध है ही । होलका के दिनों में अश्लील गीतों के बहाने कुंठा को निकालते अलबेले अलमस्त लोगो की बात ही निराली है।
रसगुल्लों की मिठास और भुजिया का तीखापन इस शहर में एक साथ मिलता है ।खाने खिलाने के शौकीन शहर के अंदरुनी भाग में आधी से अधिक दुकाने खाने पीने की चीजो की नजर आती है । यहां कि चाय पट्टी किसी बड़े शहर का कॉफ़ी हाउस सा है जहां कभी अज्ञेय अपने दोस्तों के साथ गम्भीर साहित्यिक चर्चाए करते थे। आजकल वहाँ दिन उगते ही आँख मलते लोग कचोरी समोसों से दिन की शुरुआत करने आते है। शायद अज्ञेय ने ही कहा था ," बीकानेर के आधे लोग कचोरी बनाते है और आधे लोग खाते है।"

इस खान पान और मस्ती के बीच भी लोग गहरे और गम्भीर है। इसी लिए तो कहा है -

जळ ऊँडा थळ उजळा पाता मैंगल पेस
बळिहारी उण देस री रायसिंघ नरेस ।
(पानी जितना गहरा है उतनी गहराई और सूझबूझ यहां के लोगो में है।ऐसे देश पर बलिहारी जानें का मन करता है।)

देश आजाद हुआ तो बीकानेर पहली रियासत थी जहां के शासक सादुल सिंह ने सबसे पहले भारत संघ में विलय पर हस्ताक्षर किए। लोकशाही के दौर में मुरलीधर व्यास जैसे जननेता हुए जिन्होंने तत्कालिक मुख्यमन्त्री को मांग न मानने तक शहर में घुसने न देने की चेतावनी दे डाली।
प्रजा परिषद से लेकर कांग्रेस ,समाजवाद और वामपंथ जैसे विचारो में रंगे अलग अलग खेमे के धुरन्धरो के बावजूद सामूहिक नगर चेतना कभी खण्डित न हुई।
एक ऐसे दौर में जब पुरे मुल्क में साम्प्रदायिक उन्माद चरम पर है और सियासत नफरत की खेती कर रही है यहां की फिजाए भी कुछ बदली सी नजर आती है बावजूद इसके सवा पांच सौ सालो की विरासत अटूट प्रेम को मजबूती से थामे हुए है , मरहूम शायर अजीज आजाद कहते है
मेरा दावा है सब जहर उतर जाएगा
तुम मेरे शहर में दो दिन तो ठहर के देखो।

आज अपने शहर के पांच सौ तीसवें जन्मदिन पर शहरवासी परम्परा को निभाते हुए बाजरे के खिचडे के 'सबड़के' लेते हुए इमली पानी के साथ घरो की छतो पर किनो(पतंग) के पेच लड़ाते हुए 'बोय काट्यो -बोय काट्यो' के हाके मचा रहे है।

इस यौम ए पैदाइश के दिन तुम्हे जन्मदिन मुबारक बीकानेर, बस यही दुआ है तुम्हे किसी की नजर न लगे।

 
17
 
40 days
 
Prashant jain

*अगर OK का मतलब All Correct है, तो इसे AC क्यों नहीं बोलते?*

हुत बड़ी पहेली थी. कि अंग्रेजी में जब All Correct होता है, तो उसका शॉर्ट कट (एब्रिविएशन) OK कैसे हो गया?
AC क्यों नहीं हुआ? इतनी बड़ी गलती अमेरिकियों ने कैसे कर दी? गलती की तो की, इसे सुधारा क्यों नहीं गया?


ग्रेजी का All Correct ओके कैसे बन गया, ये बड़ी पहेली थी. समझ नहीं आता था कि अंग्रेजी बोलने-लिखने वालों ने ये गलती कैसे कर दी. फिर पता चला कि ये असल में फैशन के मारे हुआ.

अंग्रेजी में तीन ऐसे शब्द हैं, जिन्हें करीब-करीब पूरी दुनिया जानती है. सॉरी, थैंक यू और ओके. 
23 मार्च एक तरह से OK का बर्थडे है.

23 मार्च, 1839 को इसी दिन बॉस्टन मॉर्निंग पोस्ट ने अपनी एक खबर में इसका इस्तेमाल किया था. लोगों के मुंह पर तो ये पहले से था. लेकिन ये पहला मौका था जब किसी पब्लिकेशन ने इसे यूज किया. ओके मतलब \'All Correct\'. हिंदी में कहिए, तो सब ठीक है. सब बढ़िया है. ऑल करेक्ट. अमेरिका ने दुनिया को कई चीजें दी हैं. लेकिन कोई और चीज शायद इतनी लोकप्रिय नहीं हुई. आप किसी दूर-दराज के छोटे से गांव में भी ओके बोलेंगे, तो सामने वाले को मतलब समझ आ जाएगा.


पहेली थी ये: OK क्यों कहते हैं, AC क्यों नहीं कहते?

ऑल करेक्ट के लिए तो AC इस्तेमाल होना चाहिए. क्योंकि स्पेलिंग तो All Correct है. फिर OK क्यों? ये सवाल बहुत लंबे समय तक पहेली बना रहा. समझ ही नहीं आता था. कि अंग्रेजी बोलने वालों ने इतनी बड़ी गलती कैसे की. स्पेलिंग जानते थे, फिर भी गलत शॉर्टकट क्यों बना दिया.

असल में जिस दौर की ये बात है, तब अमेरिका में ये फैशन होता था. लोग, खासतौर पर जवान-जहान लोग जान-बूझकर शब्दों का गलत उच्चारण करते थे. वो भी एक तरह से हमारी SMS और चैट करने वाली पीढ़ी जैसे थे. जैसे हम लोग फटाफट टाइप करते समय कितने सारे शब्दों का शॉर्टकट लिखते हैं. बॉयफ्रेंड BF हो जाता है. गर्लफ्रेंड GF हो जाती है. बेस्ट फ्रेंड्स फॉरेवर BFF हो जाता है. गुड नाइट GN हो जाता है. गुड मॉर्निंग GM हो जाता है.

ये हमारे टाइम का फैशन है. उस समय का फैशन था जानते-बूझते शब्दों को गलत बोलना. फिर उसी हिसाब से उसका शॉर्टकट (एब्रिविएशन) बनाकर स्लैंग की तरह इस्तेमाल करना. तो उनके लिए कूल (cool) हो जाता था क्यूल (kewl). These बिगड़कर हो जाता था DZ. तब ऐसे कुछ टर्म्स बड़े प्रचलित थे. जैसे एक था- KY. नो यूज का छोटा रूप.

इन सब एब्रिवेएशन्स (यानी शॉर्ट कट) में सबसे ज्यादा प्रचलित था OK. इसे कुछ इस तरह बोला जाता था - Oll Korrect. युवाओं के बीच इसके इस्तेमाल को देखते हुए बाकी लोगों ने भी ये बोलना शुरू कर दिया था. फिर इसका यूज बढ़ता चला गया. सब बोलने लगे. सब समझने लगे. और देखते ही देखते अमेरिका से बाहर निकलकर ये ओके दुनियाभर में फैल गया. आज भी आप पूछेंगे कि चैटिंह करते समय लोग सबसे ज्यादा क्या लिखते हैं, तो जवाब शायद OK ही होगा. बल्कि अब तो कई लोग इसका भी शॉर्टकट लिखने लगे हैं. *K*.

ये लिखो, तो लोग समझ जाते हैं कि OK लिखा जा रहा है.

 
80
 
64 days
 
Sam's Son

कब तक हम इस लानत को अपने सिर पर ढोएँगे? दुनिया के भ्रष्टाचार मुक्त देशों में शीर्ष पर गिने जाने वाले न्यूजीलैंण्ड के एक लेखक ब्रायन ने भारत में व्यापक रूप से फैंलें भष्टाचार पर एक लेख लिखा है। ये लेख सोशल मीडि़या पर काफी वायरल हो रहा है। लेख की लोकप्रियता और प्रभाव को देखते हुए विनोद कुमार जी ने इसे हिन्दी भाषीय पाठ़कों के लिए अनुवादित किया है। -

*न्यूजीलैंड से एक बेहद तल्ख आर्टिकिल।*

*भारतीय लोग होब्स विचारधारा वाले है (सिर्फ अनियंत्रित असभ्य स्वार्थ की संस्कृति वाले)*

भारत मे भ्रष्टाचार का एक कल्चरल पहलू है। भारतीय भ्रष्टाचार मे बिलकुल असहज नही होते, भ्रष्टाचार यहाँ बेहद व्यापक है। भारतीय भ्रष्ट व्यक्ति का विरोध करने के बजाय उसे सहन करते है। कोई भी नस्ल इतनी जन्मजात भ्रष्ट नही होती

*ये जानने के लिये कि भारतीय इतने भ्रष्ट क्यो होते हैं उनके जीवनपद्धति और परम्पराये देखिये।*

भारत मे धर्म लेनेदेन वाले व्यवसाय जैसा है। भारतीय लोग भगवान को भी पैसा देते हैं इस उम्मीद मे कि वो बदले मे दूसरे के तुलना मे इन्हे वरीयता देकर फल देंगे। ये तर्क इस बात को दिमाग मे बिठाते हैं कि अयोग्य लोग को इच्छित चीज पाने के लिये कुछ देना पडता है। मंदिर चहारदीवारी के बाहर हम इसी लेनदेन को भ्रष्टाचार कहते हैं। धनी भारतीय कैश के बजाय स्वर्ण और अन्य आभूषण आदि देता है। वो अपने गिफ्ट गरीब को नही देता, भगवान को देता है। वो सोचता है कि किसी जरूरतमंद को देने से धन बरबाद होता है।

*जून 2009 मे द हिंदू ने कर्नाटक मंत्री जी जनार्दन रेड्डी द्वारा स्वर्ण और हीरो के 45 करोड मूल्य के आभूषण तिरुपति को चढाने की खबर छापी थी। भारत के मंदिर इतना ज्यादा धन प्राप्त कर लेते हैं कि वो ये भी नही जानते कि इसका करे क्या। अरबो की सम्पत्ति मंदिरो मे व्यर्थ पडी है।*

*जब यूरोपियन इंडिया आये तो उन्होने यहाँ स्कूल बनवाये। जब भारतीय यूरोप और अमेरिका जाते हैं तो वो वहाँ मंदिर बनाते हैं।*

*भारतीयो को लगता है कि अगर भगवान कुछ देने के लिये धन चाहते हैं तो फिर वही काम करने मे कुछ कुछ गलत नही है। इसीलिये भारतीय इतनी आसानी से भ्रष्ट बन जाते हैं।*

*भारतीय कल्चर इसीलिये इस तरह के व्यवहार को आसानी से आत्मसात कर लेती है, क्योंकि*

1 नैतिक तौर पर इसमे कोई नैतिक दाग नही आता। एक अति भ्रष्ट नेता जयललिता दुबारा सत्ता मे आ जाती है, जो आप पश्चिमी देशो मे सोच भी नही सकते ।

2 भारतीयो की भ्रष्टाचार के प्रति संशयात्मक स्थिति इतिहास मे स्पष्ट है। भारतीय इतिहास बताता है कि कई शहर और राजधानियो को रक्षको को गेट खोलने के लिये और कमांडरो को सरेंडर करने के लिये घूस देकर जीता गया। ये सिर्फ भारत मे है

भारतीयो के भ्रष्ट चरित्र का परिणाम है कि भारतीय उपमहाद्वीप मे बेहद सीमित युद्ध हुये। ये चकित करने वाला है कि भारतीयो ने प्राचीन यूनान और माडर्न यूरोप की तुलना मे कितने कम युद्ध लडे। नादिरशाह का तुर्को से युद्ध तो बेहद तीव्र और अंतिम सांस तक लडा गया था। भारत मे तो युद्ध की जरूरत ही नही थी, घूस देना ही ही सेना को रास्ते से हटाने के लिये काफी था। कोई भी आक्रमणकारी जो पैसे खर्च करना चाहे भारतीय राजा को, चाहे उसके सेना मे लाखो सैनिक हो, हटा सकता था।

प्लासी के युद्ध मे भी भारतीय सैनिको ने मुश्किल से कोई मुकाबला किया। क्लाइव ने मीर जाफर को पैसे दिये और पूरी बंगाल सेना 3000 मे सिमट गई। भारतीय किलो को जीतने मे हमेशा पैसो के लेनदेन का प्रयोग हुआ। गोलकुंडा का किला 1687 मे पीछे का गुप्त द्वार खुलवाकर जीता गया। मुगलो ने मराठो और राजपूतो को मूलतः रिश्वत से जीता श्रीनगर के राजा ने दारा के पुत्र सुलेमान को औरंगजेब को पैसे के बदले सौंप दिया। ऐसे कई केसेज हैं जहाँ भारतीयो ने सिर्फ रिश्वत के लिये बडे पैमाने पर गद्दारी की।

सवाल है कि भारतीयो मे सौदेबाजी का ऐसा कल्चर क्यो है जबकि जहाँ तमाम सभ्य देशो मे ये सौदेबाजी का कल्चर नही है

3- *भारतीय इस सिद्धांत मे विश्वास नही करते कि यदि वो सब नैतिक रूप से व्यवहार करेंगे तो सभी तरक्की करेंगे क्योंकि उनका "विश्वास/धर्म" ये शिक्षा नही देता। उनका कास्ट सिस्टम उन्हे बांटता है। वो ये हरगिज नही मानते कि हर इंसान समान है। इसकी वजह से वो आपस मे बंटे और दूसरे धर्मो मे भी गये। कई हिंदुओ ने अपना अलग धर्म चलाया जैसे सिख, जैन बुद्ध, और कई लोग इसाई और इस्लाम अपनाये। परिणामतः भारतीय एक दूसरे पर विश्वास नही करते। भारत मे कोई भारतीय नही है, वो हिंदू ईसाई मुस्लिम आदि हैं। भारतीय भूल चुके हैं कि 1400 साल पहले वो एक ही धर्म के थे। इस बंटवारे ने एक बीमार कल्चर को जन्म दिया। ये असमानता एक भ्रष्ट समाज मे परिणित हुई, जिसमे हर भारतीय दूसरे भारतीय के विरुद्ध है, सिवाय भगवान के जो उनके विश्वास मे खुद रिश्वतखोर है।*

लेखक-ब्रायन,
गाडजोन न्यूजीलैंड

( समाज की बंद आँखों को खोलने के लिए इस मैसेज को जितने लोगो तक भेज सकते हैं भेजने का कष्ट करें ।)
धन्यवाद 🙏🏻🙏🏻

 
74
 
65 days
 
DelhiDude

*रामायण का बाल कांड, सीता हरण कांड आदि तो बहुत लोकप्रिय हैं, लेकिन रामायण का अंत लोग सीता के पृथ्वी में विलीन होने से मानते हैं. विष्णु का सातवां अवतार यानी श्री राम मानव रूप में थे और इसीलिए उनका देह त्यागना भी जरूरी था. तो जब राम ने देह त्यागी तो कौन बना अयोध्या का राजा?*

श्री राम के दो पुत्र थे लव और कुश. जहां लव या लोह ने एक नए राज्य की स्थामना की जो कहीं उत्तर पूर्व पंजाब में है (कुछ लोग लाहौर को भी इससे जोड़ते हैं.) वहीं कुश ने कोसला राज्य (जिसे अयोध्या से बनाया गया था.) में राज किया. कुश राम जितने पराक्रमी राजा नहीं थे और असुर दुर्जया से युद्ध में ही उन्होंने मृत्यु प्राप्त की थी. एक Quora   पोस्ट में रघुकुल के अंत तक सभी राजाओं का वर्णन है.

कुश के बाद राज्य उनके और नाग कन्या कुमुदवती के पुत्र अतिथी के हाथों में चला गया जो एक शूरवीर थे. उनके बाद उनके पुत्र निशध ने राज्य को संभाला. उसके बाद नल जो निशध के पुत्र थे वो राजा बने. नल के बाद नभ ने ये जिम्मा संभाला. तब तक राज्य उत्तर कौशल बन चुका था. नभ के बाद पुण्डरीक, फिर शेमधानव, देवानीक, अहीनागू, परियात्रा, शिल, नाभी, शिखंड, हरिद्शवा, विशवासा, हिरान्याभा, कौसल्य, ब्रह्महिस्था, पुत्रा, पुष्य, और उसके बाद ध्रुवासंधी ने राज्य संभाला. तब तक राज्य काफी बदल चुका था. ध्रुवासंधी की अकाल मृत्यु के बाद 6 साल का बेटा सुदर्षन गद्दी पर बैठा, उसके बाद अग्निवर्णा दूसरी पीढ़ी का राजा बना. अग्निवर्णा ही वो राजा था जिसके कारण रघुवंश का खात्मा हुआ. अग्निवर्णा हमेशा महिलाओं में व्यस्थ रहता था. अग्निवर्णा बहुत कमजोर राजा था, लेकिन कोई भी अन्य राजा रघुवंशियों से भिड़ना नहीं चाहता था इसीलिए राज्य पर आक्रमण नहीं किया. उसकी मृत्यु बहुत जल्दी हो गई और तब उसकी पत्नी गर्भवती थी. इसी के साथ रघुकुल का अंत हुआ था.

*कैसे हुई थी श्री राम की मृत्यु..*

इस बात का उत्तर मूल रामायण में मिलता है. वाल्मिकी रामायण का पहला अध्याय मूल रामायण कहलाता है जिसमें श्रीराम के देह छोड़ने की बात कही गई है.

पौराणिक कथाओं के अनुसार सीता के पृथ्वी में समा जाने के बाद विष्णु का सातवां अवतार यानी श्री राम का पृथ्वी पर काम पूरा हो गया था. श्री राम पहले ही हनुमान को पाताल भेज चुके थे एक अंगूठी ढूंढने क्योंकि उन्हें पता था कि हनुमान रहेंगे तो वो अपना मानव रूप त्याग नहीं पाएंगे. श्री राम से मिलने के लिए एक साधु का भेष बनाकर यम उनसे मिलने आए थे. वो ये बताने आए थे कि राम को अब बैकुंठ लौटना होगा. उनसे मिलते समय राम ने लक्ष्मण को आदेश दिया कि वो किसी को भी अंदर आने न दें नहीं तो उस इंसान को मृत्यु दंड दिया जाएगा. जब राम और यम अंदर थे तो ऋषि दुर्वासा आए, दुर्वासा ऋषि अपने क्रोध के कारण बहुत प्रसिद्ध थे. लक्ष्मण ने उन्हें रोका तो दुर्वासा ऋषि ने राम को श्राप देने की बात कही. ऐसे में भाई को श्राप न मिले इसके लिए लक्ष्मण ने खुद का बलिदान देने की सोची. लक्ष्मण खुद ही राम के पास चले गए. ऐसे में राम को समझ नहीं आया कि वो लक्ष्मण को कैसे मारें. राम ने लक्ष्मण को देश निकाला दे दिया.

अपने भाई को निराश कर लक्ष्मण खुद सरयु नदी में जाकर विलीन हो गए और शेषनाग का रूप ले लिए. कहा जाता है कि लक्ष्मण शेषनाग का ही मानव रूप थे. इसके बाद राम ने भी इसी तरह अपनी देह त्याग दी.

 
73
 
76 days
 
DelhiDude

आयुर्वेद दोहे

पानी में गुड डालिए, बीत जाए जब रात!
सुबह छानकर पीजिए, अच्छे हों हालात!!
*धनिया की पत्ती मसल, बूंद नैन में डार!*
दुखती अँखियां ठीक हों, पल लागे दो-चार!!
*ऊर्जा मिलती है बहुत, पिएं गुनगुना नीर!*
कब्ज खतम हो पेट की, मिट जाए हर पीर!!
*प्रातः काल पानी पिएं, घूंट-घूंट कर आप!*
बस दो-तीन गिलास है, हर औषधि का बाप!!
*ठंडा पानी पियो मत, करता क्रूर प्रहार!*
करे हाजमे का सदा, ये तो बंटाढार!!
*भोजन करें धरती पर, अल्थी पल्थी मार!*
चबा-चबा कर खाइए, वैद्य न झांकें द्वार!!
*प्रातः काल फल रस लो, दुपहर लस्सी-छांस!*
सदा रात में दूध पी, सभी रोग का नाश!!
*प्रातः- दोपहर लीजिये, जब नियमित आहार!*
तीस मिनट की नींद लो, रोग न आवें द्वार!!
*भोजन करके रात में, घूमें कदम हजार!*
डाक्टर, ओझा, वैद्य का , लुट जाए व्यापार !!
*घूट-घूट पानी पियो, रह तनाव से दूर!*
एसिडिटी, या मोटापा, होवें चकनाचूर!!
*अर्थराइज या हार्निया, अपेंडिक्स का त्रास!*
पानी पीजै बैठकर, कभी न आवें पास!!
*रक्तचाप बढने लगे, तब मत सोचो भाय!*
सौगंध राम की खाइ के, तुरत छोड दो चाय!!
*सुबह खाइये कुवंर-सा, दुपहर यथा नरेश!*
भोजन लीजै रात में, जैसे रंक सुजीत!!
*देर रात तक जागना, रोगों का जंजाल!*
अपच,आंख के रोग सँग, तन भी रहे निढाल^^
*दर्द, घाव, फोडा, चुभन, सूजन, चोट पिराइ!*
बीस मिनट चुंबक धरौ, पिरवा जाइ हेराइ!!
*सत्तर रोगों कोे करे, चूना हमसे दूर!*
दूर करे ये बाझपन, सुस्ती अपच हुजूर!!
*भोजन करके जोहिए, केवल घंटा डेढ!*
पानी इसके बाद पी, ये औषधि का पेड!!
*अलसी, तिल, नारियल, घी सरसों का तेल!*
यही खाइए नहीं तो, हार्ट समझिए फेल!
*पहला स्थान सेंधा नमक, पहाड़ी नमक सु जान!*
श्वेत नमक है सागरी, ये है जहर समान!!
*अल्यूमिन के पात्र का, करता है जो उपयोग!*
आमंत्रित करता सदा, वह अडतालीस रोग!!
*फल या मीठा खाइके, तुरत न पीजै नीर!*
ये सब छोटी आंत में, बनते विषधर तीर!!
*चोकर खाने से सदा, बढती तन की शक्ति!*
गेहूँ मोटा पीसिए, दिल में बढे विरक्ति!!
*रोज मुलहठी चूसिए, कफ बाहर आ जाय!*
बने सुरीला कंठ भी, सबको लगत सुहाय!!
*भोजन करके खाइए, सौंफ, गुड, अजवान!*
पत्थर भी पच जायगा, जानै सकल जहान!!
*लौकी का रस पीजिए, चोकर युक्त पिसान!*
तुलसी, गुड, सेंधा नमक, हृदय रोग निदान!
*चैत्र माह में नीम की, पत्ती हर दिन खावे !*
ज्वर, डेंगू या मलेरिया, बारह मील भगावे !!
*सौ वर्षों तक वह जिए, लेते नाक से सांस!*
अल्पकाल जीवें, करें, मुंह से श्वासोच्छ्वास!!
*सितम, गर्म जल से कभी, करिये मत स्नान!*
घट जाता है आत्मबल, नैनन को नुकसान!!
*हृदय रोग से आपको, बचना है श्रीमान!*
सुरा, चाय या कोल्ड्रिंक, का मत करिए पान!!
*अगर नहावें गरम जल, तन-मन हो कमजोर!*
नयन ज्योति कमजोर हो, शक्ति घटे चहुंओर!!
*तुलसी का पत्ता करें, यदि हरदम उपयोग!*
मिट जाते हर उम्र में,तन में सारे रोग।
*कृपया इस जानकारी को जरूर आगे बढ़ाएं*

 
229
 
98 days
 
akshay parekh

*🌷ऊँ की ध्वनि का महत्व जानिये*
एक घडी,आधी घडी,आधी में पुनि आध,,,,,,,
तुलसी चरचा राम की, हरै कोटि अपराध,,,,,,।।
1 घड़ी= 24मिनट
1/2घडी़=12मिनट
1/4घडी़=6 मिनट

*🌷क्या ऐसा हो सकता है कि 6 मि. में किसी साधन से करोडों विकार दूर हो सकते हैं।*

उत्तर है *हाँ हो सकते हैं*
वैज्ञानिक शोध करके पता चला है कि......

🌷सिर्फ 6 मिनट *ऊँ* का उच्चारण करने से सैकडौं रोग ठीक हो जाते हैं जो दवा से भी इतनी जल्दी ठीक नहीं होते.........

🌷👉 छः मिनट ऊँ का उच्चारण करने से मस्तिष्क मै विषेश वाइब्रेशन (कम्पन) होता है.... और औक्सीजन का प्रवाह पर्याप्त होने लगता है।

🌷कई मस्तिष्क रोग दूर होते हैं.. स्ट्रेस और टेन्शन दूर होती है,,,, मैमोरी पावर बढती है..।

🌷👉लगातार सुबह शाम 6 मिनट ॐ के तीन माह तक उच्चारण से रक्त संचार संतुलित होता है और रक्त में औक्सीजन लेबल बढता है।
🌷रक्त चाप , हृदय रोग, कोलस्ट्रोल जैसे रोग ठीक हो जाते हैं....।
🌷👉विशेष ऊर्जा का संचार होता है ......... मात्र 2 सप्ताह दोनों समय ॐ के उच्चारण से
🌷घबराहट, बेचैनी, भय, एंग्जाइटी जैसे रोग दूर होते हैं।

🌷👉कंठ में विशेष कंपन होता है मांसपेशियों को शक्ति मिलती है..।
🌷थाइराइड, गले की सूजन दूर होती है और स्वर दोष दूर होने लगते हैं..।
🌷👉पेट में भी विशेष वाइब्रेशन और दबाव होता है....। एक माह तक दिन में तीन बार 6 मिनट तक ॐ के उच्चारण से
🌷पाचन तन्त्र , लीवर, आँतों को शक्ति प्राप्त होती है, और डाइजेशन सही होता है, सैकडौं उदर रोग दूर होते हैं..।

🌷👉उच्च स्तर का प्राणायाम होता है, और फेफड़ों में विशेष कंपन होता है..।

🌷फेफड़े मजबूत होते हैं, स्वसनतंत्र की शक्ति बढती है, 6 माह में अस्थमा, राजयक्ष्मा (T.B.) जैसे रोगों में लाभ होता है।
🌷👉आयु बढती है।
ये सारे रिसर्च (शोध) विश्व स्तर के वैज्ञानिक स्वीकार कर चुके हैं।
*🌷जरूरत है छः मिनट रोज करने की....।*

*🙏�नोट:- ॐ का उच्चारण लम्बे स्वर में करें ।।*

*🙏🏻आप सदा स्वस्थ और प्रसन्न रहे यही मंगल कामना🙏🏻*

 
229
 
111 days
 
akshay parekh

Pyar= Sabse Hota Hai
Ishq= Kisi Ki Koi Chiz Se Hoti Hai
Mohabbat= Muh Se Nikli Har A6i Bat

Shadi= 2 Log Ki Aapsi Sehmati Se Bana Rishta

Vivah= Vidhi Vidhan Se Banaya Gaya Rishta

Now Choose What You Do

 
79
 
122 days
 
PRRISH

AMAZING INFO. ABOUT HORSE 🐎🦄

1. इंग्लिश में नर घोड़े को \'Stallion\' और मादा घोड़ी को \'Mare\' कहते है. युवा घोड़े को \'Colt\' और युवा घोड़ी को \'Filly\' कहते है. छोटे घोड़े को \'Ponies\' कहते है।

2. घोड़ो की लगभग 300 से ज्यादा नस्लें है. अरबी नस्ल को घोड़ों की सबसे पुरानी जीवित नस्ल माना जाता है, लगभग 4500 साल पुरानी. दूसरो घोड़ो की बजाय अरबी घोड़ो की पसली में एक हड्डी कम होती है।

3. कई फुटेज में घोड़ो को मुस्कुराते हुए देखा गया है. दरअसल, ऐसा करने से घोड़ों की सूँघने की शक्ति बढ़ जाती है. घोड़े भी इंसानो की तरह अपना मूड बताने के लिए तरह-तरह के चेहरे बनाते है।

4. हमारे नाखूनों की तरह घोड़ो के खुर भी सेंसिटिव होते है. जब घोड़ा दौड़ता है तो उसके चारों खुर एक साथ जमीन से उठते है।

5. यदि घोड़े के कान का पिछला हिस्सा ठंडा लग रहा है तो समझ लेना घोड़े को ठंड लग रही है।

6. घोड़ो पर लिखी हुई पहली पुस्तक \'शालिहोत्र\' है ये पुस्तक शालिहोत्र ऋषि के हाथों महाभारत काल से भी पहले लिखी गई थी।

7. घोड़ो के लिए उल्टी करना असंभव है. ये इंसानो की तरह डकार भी नही मार सकते. इसलिए घोड़ों की मौत का सबसे बड़ा कारण पेट का दर्द है।

8. घोड़े खड़े-खड़े सो सकते है क्योकिं उनके अगले और पिछले पैर की बनावट इस तरह से होती है कि वो आराम करते हुए भी नही गिरेगे. दूसरी बात, सोते तो ये लेट कर भी है लेकिन लेट कर सोने से उनके पेट के अंगो पर दबाव पड़ता है जो उनके लिए हानिकारक है।

9. घोड़े के दाँत बहुत बड़े होते है. दाँत उसके दिमाग के मुकाबले ज्यादा जगह घेरते है. घोड़े की उम्र और उसके कंकाल की पहचान(घोड़ा है या घोड़ी) उसके दाँतो को गिनकर ही पता लगती है। घोड़े के दिमाग का वजन लगभग 623 ग्राम होता है जो इंसानो के दिमाग का लगभग आधा है।

10. घोड़े की आँखे सिर पर इस तरह से होती है कि वो 360° तक देख सकता है. इनकी आँखो का ऊपरी हिस्सा नजदीक की वस्तुएँ और निचला हिस्सा दूर की वस्तुएँ देखता है. लेकिन एक बात ये भी तो है कि घोड़े इंसानों की तरह फोकस नही कर सकते।

11. घोड़े पैदा होने के कुछ ही घंटे बाद ठीक से चलने लग जाते है।

12. वैसे तो घोड़ों की स्पीड 40 से 48km/h होती है. लेकिन सबसे तेज घोड़े की स्पीड 70.76km/h मापी गई है. अमेरिकन क्वार्टर नस्ल का घोड़ा सबसे तेज दौड़ता है।

13. जब नर घोड़ा और मादा जेब्रा सेक्स करते है तो \'जेब्रोइड्स\' पैदा होते है. आप नीचे तस्वीर देख सकते है।

14. ओलंपिक में भाग लेने वाले घोड़े बिजनेस क्लास में सफर करते है. इनके पास खुद के पासपोर्ट है।

15. आज की ब्रटिश सेना के पास टैंको की बजाय घोड़े अधिक संख्या में है।

16. लंदन में आज भी यातायात उसी गति से चलता है जैसे 100 साल पहले घोड़ा गाड़ी के समय में चलता था।

17. WW1 यानि प्रथम विश्वयुद्ध में 8 करोड़ घोड़े मारे गए थे. जो बच गए उन्हें किसी और कार्य के लिए अनफिट घोषित करके बेल्जियम में कसाईघर में भेज दिया गया था।

18. एक घोड़ा ज्यादा से ज्यादा 14.9 हार्स पाॅवर ऊर्जा का उत्पादन कर सकता है।

19. घोड़े के कान में 16 माँसपेशियाँ होती है जो उन्हें 180° तक घूमने में मदद करती है। घोड़े बहुत कम से बहुत ज्यादा आवाज तक सुन सकते है, 14 Hz से लेकर 25 KHz. (आदमी 20 Hz से लेकर 20KHz तक सुन सकते है).

20. पिछली कई सदियों में यूरोप में सूअर, घोड़ो और कीड़ों को भी अपराधों की सजा मिल चुकी है।

21. घोड़े केवल नाक से साँस लेते है मुँह से नही. इसलिए रेस की प्रैक्टिस करते समय हमें अक्सर कहा जाता है कि घोड़े की तरह मुहँ बंद करके साँस लो।

22. फुट और इंच में मापने की बजाय घोड़े की लंबाई को हाथो में मापा जाता है. एक हाथ 4 इंच के बराबर होता है. सबसे ऊँचा घोड़ा \'सैम्पसन\' जिसकी लंबाई 21.2 हाथ के बराबर थी. सबसे छोटा घोड़ा \'आइंस्टीन\' जो केवल 3.5 हाथ के बराबर था।

23. अगर ऊँचे जम्प के रिकाॅर्ड पर नजर डाली जाए तो 5th feb, 1948 को चिली देश में \'हाऊसो\' नाम का घोड़ा 8 फुट 1.25 इंच ऊपर कूदा था. इसके घुड़सवार का नाम था \'Captain Alberto Larraguibel\'.

24. घोड़े की उम्र यही कोई 25 साल होती है. लेकिन अगर रिकाॅर्ड की बात की जाए तो 1822 में \'ओल्ड बिली\' नाम का घरेलू घोड़ा 62 साल का होकर मरा था।

25. कहानी 1923 की है घोड़ों की रेस चल रही थी घुड़सवार को अचानक दिल का दौरा पड़ा और मौत हो गई लेकिन घोड़ा नही रूका और रेस जीत गया. इसी के साथ \'फ्रैंक हेयास\' दुनिया का अकेला ऐसा घुड़सवार बन गया जिसने मरने के बाद रेस जीती।

 
75
 
124 days
 
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