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*भारत में इस्लाम का आगमन और बलात्कार का आरंभ (एक बेहद रोचक लेख )*

आखिर भारत जैसे देवियों को पूजने वाले देश में बलात्कार की गन्दी मानसिकता कहाँ से आयी, आखिर क्या बात है कि जब प्राचीन भारत के रामायण, महाभारत आदि लगभग सभी हिन्दू-ग्रंथ के उल्लेखों में अनेकों लड़ाईयाँ लड़ी और जीती गयीं, परन्तु विजेता सेना द्वारा किसी भी स्त्री का बलात्कार होने का जिक्र नहीं है।

तब आखिर ऐसा क्या हो गया ?? कि आज के आधुनिक भारत में बलात्कार रोज की सामान्य बात बन कर रह गयी है ??

~श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त की पर न ही उन्होंने और न उनकी सेना ने पराजित लंका की स्त्रियों को हाथ लगाया ।

~महाभारत में पांडवों की जीत हुयी लाखों की संख्या में योद्धा मारे गए। पर किसी भी पांडव सैनिक ने किसी भी कौरव सेना की विधवा स्त्रियों को हाथ तक न लगाया ।

अब आते हैं ईसापूर्व इतिहास में~

220-175 ईसापूर्व में यूनान के शासक "डेमेट्रियस प्रथम" ने भारत पर आक्रमण किया। 183 ईसापूर्व के लगभग उसने पंजाब को जीतकर साकल को अपनी राजधानी बनाया और पंजाब सहित सिन्ध पर भी राज किया। लेकिन उसके पूरे समयकाल में बलात्कार का कोई जिक्र नहीं।

~इसके बाद "युक्रेटीदस" भी भारत की ओर बढ़ा और कुछ भागों को जीतकर उसने "तक्षशिला" को अपनी राजधानी बनाया। बलात्कार का कोई जिक्र नहीं।

~"डेमेट्रियस" के वंश के मीनेंडर (ईपू 160-120) ने नौवें बौद्ध शासक "वृहद्रथ" को पराजित कर सिन्धु के पार पंजाब और स्वात घाटी से लेकर मथुरा तक राज किया परन्तु उसके शासनकाल में भी बलात्कार का कोई उल्लेख नहीं मिलता।

~इसके बाद "शकों" ने भारत पर आक्रमण किया (जिन्होंने ई.78 से शक संवत शुरू किया था)। "सिन्ध" नदी के तट पर स्थित "मीननगर" को उन्होंने अपनी राजधानी बनाकर गुजरात क्षेत्र के सौराष्ट्र , अवंतिका, उज्जयिनी,गंधार,सिन्ध,मथुरा समेत महाराष्ट्र के बहुत बड़े भू भाग पर 130 ईस्वी से 188 ईस्वी तक शासन किया। परन्तु इनके राज्य में भी बलात्कार का कोई उल्लेख नहीं।

~इसके बाद तिब्बत के "युइशि" (यूची) कबीले की लड़ाकू प्रजाति "कुषाणों" ने "काबुल" और "कंधार" पर अपना अधिकार कायम कर लिया। जिसमें "कनिष्क प्रथम" (127-140ई.) नाम का सबसे शक्तिशाली सम्राट हुआ।जिसका राज्य "कश्मीर से उत्तरी सिन्ध" तथा "पेशावर से सारनाथ" के आगे तक फैला था। कुषाणों ने भी भारत पर लम्बे समय तक विभिन्न क्षेत्रों में शासन किया। परन्तु इतिहास में कहीं नहीं लिखा कि इन्होंने भारतीय स्त्रियों का बलात्कार किया हो ।

~इसके बाद "अफगानिस्तान" से होते हुए भारत तक आये "हूणों" ने 520 AD के समयकाल में भारत पर अधिसंख्य बड़े आक्रमण किए और यहाँ पर राज भी किया। ये क्रूर तो थे परन्तु बलात्कारी होने का कलंक इन पर भी नहीं लगा।

~इन सबके अलावा भारतीय इतिहास के हजारों साल के इतिहास में और भी कई आक्रमणकारी आये जिन्होंने भारत में बहुत मार काट मचाई जैसे "नेपालवंशी" "शक्य" आदि। पर बलात्कार शब्द भारत में तब तक शायद ही किसी को पता था।

अब आते हैं मध्यकालीन भारत मेंजहाँ से शुरू होता है इस्लामी आक्रमणऔर यहीं से शुरू होता है भारत में बलात्कार का प्रचलन ।

~सबसे पहले 711 ईस्वी में "मुहम्मद बिन कासिम" ने सिंध पर हमला करके राजा "दाहिर" को हराने के बाद उसकी दोनों "बेटियों" को "यौनदासियों" के रूप में "खलीफा" को तोहफा भेज दिया।

तब शायद भारत की स्त्रियों का पहली बार बलात्कार जैसे कुकर्म से सामना हुआ जिसमें "हारे हुए राजा की बेटियों" और "साधारण भारतीय स्त्रियों" का "जीती हुयी इस्लामी सेना" द्वारा बुरी तरह से बलात्कार और अपहरण किया गया ।

~फिर आया 1001 इस्वी में "गजनवी"। इसके बारे में ये कहा जाता है कि इसने "इस्लाम को फ़ैलाने" के उद्देश्य से ही आक्रमण किया था।

"सोमनाथ के मंदिर" को तोड़ने के बाद इसकी सेना ने हजारों "काफिर औरतों" का बलात्कार किया फिर उनको अफगानिस्तान ले जाकर "बाजारों में बोलियाँ" लगाकर "जानवरों" की तरह "बेच" दिया ।

~फिर "गौरी" ने 1192 में "पृथ्वीराज चौहान" को हराने के बाद भारत में "इस्लाम का प्रकाश" फैलाने के लिए "हजारों काफिरों" को मौत के घाट उतर दिया और उसकी "फौज" ने "अनगिनत हिन्दू स्त्रियों" के साथ बलात्कार कर उनका "धर्म-परिवर्तन" करवाया।

~ये विदेशी मुस्लिम अपने साथ औरतों को लेकर नहीं आए थे।

~मुहम्मद बिन कासिम से लेकर सुबुक्तगीन, बख्तियार खिलजी, जूना खाँ उर्फ अलाउद्दीन खिलजी, फिरोजशाह, तैमूरलंग, आरामशाह, इल्तुतमिश, रुकुनुद्दीन फिरोजशाह, मुइजुद्दीन बहरामशाह, अलाउद्दीन मसूद, नसीरुद्दीन महमूद, गयासुद्दीन बलबन, जलालुद्दीन खिलजी, शिहाबुद्दीन उमर खिलजी, कुतुबुद्दीन मुबारक खिलजी, नसरत शाह तुगलक, महमूद तुगलक, खिज्र खां, मुबारक शाह, मुहम्मद शाह, अलाउद्दीन आलम शाह, बहलोल लोदी, सिकंदर शाह लोदी, बाबर, नूरुद्दीन सलीम जहांगीर,

~अपने हरम में "8000 रखैलें रखने वाला शाहजहाँ"।

~ इसके आगे अपने ही दरबारियों और कमजोर मुसलमानों की औरतों से अय्याशी करने के लिए "मीना बाजार" लगवाने वाला "जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर"।

~मुहीउद्दीन मुहम्मद से लेकर औरंगजेब तक बलात्कारियों की ये सूची बहुत लम्बी है। जिनकी फौजों ने हारे हुए राज्य की लाखों "काफिर महिलाओं" "(माल-ए-गनीमत)" का बेरहमी से बलात्कार किया और "जेहाद के इनाम" के तौर पर कभी वस्तुओं की तरह "सिपहसालारों" में बांटा तो कभी बाजारों में "जानवरों की तरह उनकी कीमत लगायी" गई।

~ये असहाय और बेबस महिलाएं "हरमों" से लेकर "वेश्यालयों" तक में पहुँची। इनकी संतानें भी हुईं पर वो अपने मूलधर्म में कभी वापस नहीं पहुँच पायीं।

~एकबार फिर से बता दूँ कि मुस्लिम "आक्रमणकारी" अपने साथ "औरतों" को लेकर नहीं आए थे।

~वास्तव में मध्यकालीन भारत में मुगलों द्वारा "पराजित काफिर स्त्रियों का बलात्कार" करना एक आम बात थी क्योंकि वो इसे "अपनी जीत" या "जिहाद का इनाम" (माल-ए-गनीमत) मानते थे।

~केवल यही नहीं इन सुल्तानों द्वारा किये अत्याचारों और असंख्य बलात्कारों के बारे में आज के किसी इतिहासकार ने नहीं लिखा।

~बल्कि खुद इन्हीं सुल्तानों के साथ रहने वाले लेखकों ने बड़े ही शान से अपनी कलम चलायीं और बड़े घमण्ड से अपने मालिकों द्वारा काफिरों को सबक सिखाने का विस्तृत वर्णन किया।

~गूगल के कुछ लिंक्स पर क्लिक करके हिन्दुओं और हिन्दू महिलाओं पर हुए "दिल दहला" देने वाले अत्याचारों के बारे में विस्तार से जान पाएँगे। वो भी पूरे सबूतों के साथ।

~इनके सैकड़ों वर्षों के खूनी शासनकाल में भारत की हिन्दू जनता अपनी महिलाओं का सम्मान बचाने के लिए देश के एक कोने से दूसरे कोने तक भागती और बसती रहीं।

~इन मुस्लिम बलात्कारियों से सम्मान-रक्षा के लिए हजारों की संख्या में हिन्दू महिलाओं ने स्वयं को जौहर की ज्वाला में जलाकर भस्म कर लिया।

~ठीक इसी काल में कभी स्वच्छंद विचरण करने वाली भारतवर्ष की हिन्दू महिलाओं को भी मुस्लिम सैनिकों की दृष्टि से बचाने के लिए पर्दा-प्रथा की शुरूआत हुई।

~महिलाओं पर अत्याचार और बलात्कार का इतना घिनौना स्वरूप तो 17वीं शताब्दी के प्रारंभ से लेकर 1947 तक अंग्रेजों की ईस्ट इंडिया कंपनी के शासनकाल में भी नहीं दिखीं। अंग्रेजों ने भारत को बहुत लूटा परन्तु बलात्कारियों में वे नहीं गिने जाते।

~1946 में मुहम्मद अली जिन्ना के डायरेक्टर एक्शन प्लान, 1947 विभाजन के दंगों से लेकर 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम तक तो लाखों काफिर महिलाओं का बलात्कार हुआ या फिर उनका अपहरण हो गया। फिर वो कभी नहीं मिलीं।

~इस दौरान स्थिती ऐसी हो गयी थी कि "पाकिस्तान समर्थित मुस्लिम बहुल इलाकों" से "बलात्कार" किये बिना एक भी "काफिर स्त्री" वहां से वापस नहीं आ सकती थी।

~जो स्त्रियाँ वहां से जिन्दा वापस आ भी गयीं वो अपनी जांच करवाने से डरती थी।

~जब डॉक्टर पूछते क्यों तब ज्यादातर महिलाओं का एक ही जवाब होता था कि "हमपर कितने लोगों ने बलात्कार किये हैं ये हमें भी पता नहीं"।

~विभाजन के समय पाकिस्तान के कई स्थानों में सड़कों पर काफिर स्त्रियों की "नग्न यात्राएं (धिंड) "निकाली गयीं, "बाज़ार सजाकर उनकी बोलियाँ लगायी गयीं"

और 10 लाख से ज्यादा की संख्या में उनको दासियों की तरह खरीदा बेचा गया।

20 लाख से ज्यादा महिलाओं को जबरन मुस्लिम बना कर अपने घरों में रखा गया। (देखें फिल्म "पिंजर" और पढ़ें पूरा सच्चा इतिहास गूगल पर)।

~इस विभाजन के दौर में हिन्दुओं को मारने वाले सबके सब विदेशी नहीं थे। इन्हें मारने वाले स्थानीय मुस्लिम भी थे।

~वे समूहों में कत्ल से पहले हिन्दुओं के अंग-भंग करना, आंखें निकालना, नाखुन खींचना, बाल नोचना, जिंदा जलाना, चमड़ी खींचना खासकर महिलाओं का बलात्कार करने के बाद उनके "स्तनों को काटकर" तड़पा-तड़पा कर मारना आम बात थी।

~केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनियाँ में इस सोच ने मोरक्को से ले कर हिन्दुस्तान तक सभी देशों पर आक्रमण कर वहाँ के निवासियों को धर्मान्तरित किया, संपत्तियों को लूटा तथा इन देशों में पहले से फल फूल रही हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता का विनाश कर दिया।

~परन्तु पूरी दुनियाँ में इसकी सबसे ज्यादा सजा महिलाओं को ही भुगतनी पड़ी.
बलात्कार के रूप में ।

~आज सैकड़ों साल की गुलामी के बाद समय बीतने के साथ धीरे-धीरे ये बलात्कार करने की मानसिक बीमारी भारत के पुरुषों में भी फैलने लगी।

~जिस देश में कभी नारी जाति शासन करती थीं, सार्वजनिक रूप से शास्त्रार्थ करती थीं, स्वयंवर द्वारा स्वयं अपना वर चुनती थीं, जिन्हें भारत में देवियों के रूप में श्रद्धा से पूजा जाता था आज उसी देश में छोटी-छोटी बच्चियों तक का बलात्कार होने लगा और आज इस मानसिक रोग का ये भयानक रूप देखने को मिल रहा है ।

 
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पटाखे फोड़ते हुए कभी आपने सोचा दिवाली में पटाखे फोड़ने की शुरुआत कहां से हुई? पटाखे कब दिवाली से जुड़ गए? पटाखों और दिवाली के बीच क्या सम्बन्ध है? आओ जानते हैं...

मुगल साम्राज्य से पहले पटाखों के साथ दिवाली मनाने का कोई प्रमाण नहीं है. उस दौर में दिवाली दीयों से मनाई जाती थी. गुजरात के कुछ इलाकों में छिटपुट जलने वाले पटाखे यूज होते थे. (1667 में औरंगजेब ने दिवाली पर सार्वजनिक रूप से दीयों और पटाखों के प्रयोग पर पाबंदी लगा दी थी.) मुगलों के बाद, अंग्रेजों ने एक्स्प्लोसिव एक्ट पारित किया. इसमें पटाखों के लिए इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल को बेचने और पटाखे बनाने पर पाबंदी लगा दी गई।

1923 में, अय्या नादर और शनमुगा नादर ने पटाखे चलाने की दिशा में पहला कदम रखा। दोनों काम की तलाश में कलकत्ता गए और एक माचिस की फैक्ट्री में काम करना शुरू किया, इसके बाद अपने घर शिवकाशी लौट आए। वहां पर माचिस फैक्ट्री की नींव डाल दी (शिवकाशी तमिलनाडु का इलाका है)।

1940 में एक्स्प्लोसिव एक्ट में संशोधन किया गया. एक ख़ास स्तर के पटाखों को बनाना वैध कर दिया गया. नादर ब्रदर्स ने इसका फायदा उठाया और 1940 में पहली पटाखों की फैक्ट्री डाली.

नादर ब्रदर्स ने पटाखों को दिवाली से जोड़ने की कोशिश शुरू की। माचिस फैक्ट्री की वजह से उन्हें पहले से ही प्लेटफॉर्म मिला हुआ था। इसके बाद शिवकाशी में पटाखों की फैक्ट्री तेजी से फैली, 1980 तक अकेले शिवकाशी में 189 पटाखों की फैक्ट्रियां थी।

इसी तरह शिवकाशी की पटाखा फैक्ट्री की वजह से चाइल्ड लेबर खूब बढ़ गया। इस पेशे से जुड़े न जाने कितनों की मौत हो गयी और न जाने कितने अपाहिज हो गए।

शिवकाशी के पटाखा बनाने वालों ने अब चाइना में भी पटाखे बनाने शुरू कर दिए हैं। पिछले दस सालों में भारत के पटाखों में शिवकाशी का शेयर काफी कम हुआ है। भारत के कुछ बड़े पटाखा उद्योगों में एक है- स्टैण्डर्ड फायरवर्क्स, 2005 में इन्होंने अपनी कई फैक्ट्रियां चाइना में लगा ली हैं।

अब शिवकाशी की इकॉनमी में पटाखा उद्योग का शेयर कम हो रहा है। लोगों का पढ़ाई की तरफ रुझान बढ़ा है जिससे वो बच्चों को इस तरफ नहीं मोड़ रहे हैं। फैक्ट्री वालों को काम करने के लिए लोग कम मिल रहे हैं। शिवकाशी अब अपने विकास के लिए सिर्फ पटाखा उद्योग पर निर्भर नहीं रह गई है।

 
25
 
23 days
 
Heart catcher

रामेश्वरम धाम की 10 अनदेखी और अनकही बातें! श्री राम ने यहाँ क्यों की थी शिवलिंग की स्थापना !!<br>
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1. रामेश्वरम धाम तमिलनाडु प्रांत के रामनाथपुरम जिले में स्थित है।यहाँ विराजित शिवलिंग को 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक बताया जाता है।इसी बात से साबित हो जाता है कि रामेश्वरम धाम की महिमा कितनी महान है।<br>
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2. कहा जाता है कि जब श्रीराम रावण से युद्ध करने जा रहे थे तो राम को एहसास हुआ कि अगर भगवान शिव को प्रसन्न नहीं किया गया तो रावण से युद्ध जीतना मुश्किल होगा।तब राम ने समुद्र किनारे शिवलिंग की स्थापना कर शिव की आराधना की थी. रामेश्वरम धाम वही स्थान है।<br>
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3. मंदिर के अंदर मीठे जल के 24कुंए हैं। इन जल कुंडों का निर्माण भगवान राम ने अपने बाण से किया ।आज 2 जल कुंड तो सुख गये हैं किन्तु बाकी भी सुरक्षित हैं। इनके जल से व्यक्ति के जन्मों-जन्मों के पाप खत्म हो जाते हैं।<br>
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5. एक कहानी यह भी है कि जब युद्ध खत्म हुआ तो भगवान राम ने इस स्थान पर शिव पूजा करने का मन बनाया।तो हनुमान जी को शिवलिंग लाने का काम सौपा गया था. हनुमान जी शिवलिंग लेने कैलाश पर्वत गये थे और यहाँ पूजा का मुहूर्त का समय निकला जा रहा था। तो माता सीता ने रेत का शिवलिंग बनाकर, राम जी की पूजा समय पर करवाई थी। इस बात से हनुमान को दुःख हुआ क्योकि वह काफी दूर से शिवलिंग लेकर आये थे। तब राम ने हनुमान की भावनाओं को समझते हुए, आदेश दिया था कि आप रेत के शिवलिंग को खत्मकर अपना शिवलिंग यहाँ लगा दें। किन्तु बोला जाता है कि हनुमान जी रेत के शिवलिंग को यहाँ से हटा नहीं पाए थे।तभी हनुमान अपनी गलती समझ गये थे।<br>
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6. यदि आप शिवपुराण पढ़ते हैं तो वहां भी रामेश्वरम धाम की महिमा का गुणगान किया गया है। शिवपुराण में बताया गया है कि यह धाम कितना महत्वपूर्ण है।<br>
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7. रामेश्वरम धाम को जिस तरह से बनाया गया है वह भी देखने लायक चीज है। यहाँ की कलाकारी को देखने दूर-दूर से लोग आते हैं।भारत के लोगों की तुलना में विदेशी लोगों की संख्या कई बार ज्यादा ही होती है।<br>
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8. यदि कोई व्यक्ति रामेश्वरम धाम में जाकर शिव का अभिषेक करता है तो उसके साथ-साथ उसकी सात अन्य पीढ़ियों का भी भगवान पार करते हैं। यहाँ जाने से जिव को आवागमन से भी मुक्ति मिलती है।<br>
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9. रामेश्वरम मंदिर के पास ही कई अन्य हिन्दू तीर्थ स्थल हैं, जैसे हनुमानकुंड, अमृतवाटिका और बरामतीर्थ आदि, भक्तों का यहाँ जाना भी जरुरी बताया गया है।<br>
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10. मंदिर के पास ही एक जगह ऐसी है जिसके बारें में बताया जाता है यहाँ राम और विभीषण की पहली मुलाकात हुई थी. आज इस स्थान पर मंदिर बना हुआ है।<br>
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33
 
38 days
 
B P S R

""जितना सत्य जीवन है उतनी ही सत्य मृत्यु है"

माइकल जैक्सन डेड सौ साल जीना चाहता था! किसी के साथ हाथ मिलाने से पहले दस्ताने पहनता था! लोगों के बीच में जाने से पहले मुंह पर मास्क लगाता था !उसकी देखरेख करने के लिए उसने अपने घर पर 12 डॉक्टर्स नियुक्त किए हुए थे !

जो उसके सर के बाल से लेकर पांव के नाखून तक की जांच प्रतिदिन किया करते थे! उसका खाना लैबोरेट्री में चेक होने के बाद उसे खिलाया जाता था! उसको व्यायाम करवाने के लिए 15 लोगों को रखा हुआ था! माइकल जैकसन अश्वेत था उसने 1987 में प्लास्टिक सर्जरी करवा कर अपनी त्वचा को गोरा बनवा लिया था!

अपने काले मां-बाप और काले दोस्तों को भी छोड़ दिया गोरा होने के बाद उसने गोरे मां-बाप को किराए पर लिया! और अपने दोस्त भी गोरे बनाए शादी भी गोरी औरतों के साथ की!

नवम्बर 15 को माइकल ने अपनी नर्स डेबी रो से विवाह किया, जिसने प्रिंस माइकल जैक्सन जूनियर (1997) तथा पेरिस माइकल केथरीन (3 अपैल 1998) को जन्म दिया।

18 मई 1995 में किंग ऑफ पॉप ने रॉक के शहजादे एल्विस प्रेस्ली की बेटी लिसा प्रेस्ली से शादी कर ली। एमटीवी वीडियो म्यूजिक अवॉर्ड्स में इस जोड़ी के ऑनस्टेज किस ने बहुत सुर्खियाँ बटोरी! हालाँकि यह जोडी सिर्फ दो साल तक ही साथ रह पाई और 18 जून 1996 में माइकल और लिसा ने तलाक ले लिया।

वो डेढ़ सौ साल तक जीने के लक्ष्य को लेकर चल रहा था! हमेशा ऑक्सीजन वाले बेड पर सोता था,उसने अपने लिए अंगदान करने वाले डोनर भी तैयार कर रखे थे! जिन्हें वह खर्चा देता था,ताकि समय आने पर उसे किडनी, फेफड़े, आंखें या किसी भी शरीर के अन्य अंग की जरूरत पड़ने पर वह आकर दे दे।

उसको लगता था वह पैसे और अपने रसूख की बदौलत मौत को भी चकमा दे सकता है लेकिन वह गलत साबित हुआ 25 जून 2009 को उसके दिल की धड़कन रुकने लगी उसके घर पर 12 डॉक्टर की मौजूदगी मैं हालत काबू में नहीं आए, सारे शहर के डाक्टर उसके घर पर जमा हो गए वह भी उसे नहीं बचा पाए।

उसने 25 साल तक बिना डॉक्टर से पूछे कुछ नहीं खाया! अंत समय में उसकी हालत बहुत खराब हो गई थी 50 साल तक आते-आते वह पतन के करीब ही पहुंच गया था! लगभग उसने बच्चों का यौन शोषण किया वह घटिया हरकतों पर उतर आया था! और 25 जून 2009 को वह इस दुनिया से चला गया जिसने जिसने अपने लिए डेढ़ सौ साल जीने इंतजाम कर रखा था!उसका इंतजाम धरा का धरा रह गया!

जब उसकी बॉडी का पोस्टमार्टम हुआ तो डॉक्टर ने बताया! कि उसका शरीर हड्डियों का ढांचा बन चुका था! उसका सिर गंजा था उसकी पसलियां कंधे हड्डियां टूट चुके थे! उसके शरीर पर अनगिनत सुई के निशान थे प्लास्टिक सर्जरी के कारण होने वाले दर्द से छुटकारा पाने के लिए एंटीबायोटिक वाले दर्जनों इंजेक्शन उसे दिन में लेने पड़ते थे!

माइकल जैक्सन की अंतिम यात्रा को 2.5 अरब लोगो ने लाइव देखा था। यह अब तक की सबसे ज़्यादा देखे जाने वाली लाइव ब्रॉडकास्ट हैं।

माइकल जैक्सन की मृत्यु के दिन यानी 25 जून 2009 को 3:15 PM पर, Wikipedia,Twitter और AOL\'s instant messenger यह सभी क्रैश हो गए थे।

उसकी मौत की खबर का पता चलता है गूगल पर 8 लाख लोगों ने माइकल जैकसन को सर्च किया! ज्यादा सर्च होने के कारण गूगल पर सबसे बड़ा ट्रैफिक जाम हुआ था! और गूगल क्रैश हो गया ढाई घंटे तक गूगल काम नहीं कर पाया!

मौत को चकमा देने की सोचने वाले हमेशा मौत से चकमा खा ही जाते हैं! सार यही है,बनावटी दुनिया के बनावटी लोग कुदरती मौत की बजाय बनावटी मौत ही मरते हैं!

क्यूँ करते हो गुरुर अपने चार दिन के ठाठ पर,
मुठ्ठी भी खाली रहेगी जब पहुँचोगे घाट पर॥

 
92
 
40 days
 
Heart catcher

👁‍🗨ઠગ્સ ઑફ હિંદુસ્તાન.

🔹એક એવી ફિલ્મ જેની રીલિઝ થવાની રાહ જોઈ રહ્યું છે આખું હિંદુસ્તાન.આવું એટલા માટે કારણ કે હિંદી ફિલ્મ ઈન્ડસ્ટ્રીના ઈતિહાસમાં આ ફિલ્મમાં પ્રથમ વખત એક સાથે કામ કરી રહ્યા છે બે મહાન કલાકારો.અમિતાભ બચ્ચન અને આમિર ખાન.અત્યાર સુધીની હિસ્ટ્રીની સૌથી મોંઘી ફિલ્મો પૈકીની એક ફિલ્મ બની છે ઠગ્સ ઓફ હિંદુસ્તાન. નામ પરથી એટલું તો તમે પણ જાણી ગયા હશો કે આ ફિલ્મમાં હિંદુસ્તાનના ઠગની વાત હશે પણ ગુજરાત માટે ગૌરવ લેવા જેવી એક એવી બાબત છે જેનાથી ગુજરાતના જ લોકો બેખબર છે.તમને જાણીને નવાઈ લાગશે કે ઠગ્સ ઓફ હિંદુસ્તાન ફિલ્મ એક જાણીતી ગુજરાતી નવલકથા પરથી બની છે. આ ગુજરાતી નવલકથાનું નામ છે "અમીર અલી ઠગના પીળા રૂમાલની ગાંઠ". 1968માં લખાયેલી આ નવલકથા ત્રણ ભાગ અને 102 પ્રકરણમાં છે.આ પુસ્તકના લેખક છે ગુજરાતના જાણીતા પત્રકાર-લેખક હસકિસન મહેતા. સૌથી સફળ ગુજરાતી નવલકથાઓ પૈકીની એક નવલકથા છે "અમીર અલી ઠગના પીળા રૂમાલની ગાંઠ. આ નવલકથા છે અમીર અલી નામના એક એવા ઠગની વાસ્તવિક જિંદગીની કે જે એક લૂંટારો હતો.1780થી 1805ના સમયગાળામાં મધ્ય ભારતમાં ઠગનો ખૂબ ત્રાસ હતો..ઠગ એટલે એક જાતના લૂંટારા. જંગલમાંથી પસાર થનારા વેપારીઓને લૂંટવાનું આ લોકોનું મુખ્ય કામ હતું.તે સમયે ભારતની જનતા આવા ઠગથી ખૂબ હેરાન થતી હતી. અમીર અલી પોતાની લૂંટ ચલાવવાની રીતના કારણે કુખ્યાત હતો. પહેલા તો તે જંગલમાંથી પસાર થનારા વેપારીઓમાં સામેલ થઈ જતો અને પછી તક જોઈને બધાની હત્યા કરી લૂંટ ચલાવતો.અમીર અલીની હત્યા કરવાની શૈલી પણ ખૂબ ચર્ચાસ્પદ હતી..તેની પાસે એક પીળા કલરનો રૂમાલ હતો. આ રૂમાલથી અમીર અલી પોતાના શિકારનું ગળું દબાવી દેતો. એટલે જ હરકિસન મહેતાએ પોતાની નવલકથાનું નામ રાખ્યું હતું "અમીર અલી ઠગના પીળા રૂમાલની ગાંઠ"ઠગ્સ ઓફ હિંદુસ્તાનમાં આમિર ખાન આ અમીર અલીનો જ રોલ નિભાવી રહ્યો છે. તો અમિતાભ તેમાં બન્યાં છે અમીર અલીના પિતા ઈસ્માઈલ મિયાં. તો કેટરીના કૈફ અને ફાતિમા સના શેખે આમિર ખાનની પત્ની અને પ્રેમિકાની ભૂમિકા ભજવી છે જેના નવલકથામાં નામ છે શીરિન અને રોશન.આમ તો આ નવલકથા હરકિસન મહેતાએ લખી છે પણ તેમણે એ વાતનો એકરાર પણ કર્યો છે કે આ પુસ્તક લખવાની પ્રેરણા તેમને 1839માં પ્રકાશિત થયેલી કર્નલ મેડોઝ ટેલરની "કન્ફેશન્સ ઓફ ઠગ" નામના અંગ્રેજી પુસ્તકમાંથી મળી હતી. ઠગ્સ ઓફ હિંદુસ્તાનના લેખકે પણ આ જ પુસ્તક પરથી પ્રેરણા લઈ ફિલ્મ બનાવી છે.ભલે હરકિસન મહેતાનું આ મૌલિક સર્જન ન હોય પણ તેમણે જે રીતે અમીર અલીના પરાક્રમો અને ઠગોની દુનિયાનું વર્ણન કર્યુ છે તે ખરેખર કાબિલેદાદ છે. ઠગ્સ ઓફ હિંદુસ્તાન કેવી ફિલ્મ હશે અને તેની સ્ટોરી શું હશે તે જાણવું હોય તો ફિલ્મ જોયા પહેલા તમે આ પુસ્તક વાંચવાનું ભૂલતા નહીં..

 
13
 
48 days
 
Sanju143

*FACTS ABOUT OLYMPICS*

1. ओलम्पिक खेलो (Olympics) की शुरुआत ओलम्पस नामक यूनानी देवता के सम्मान में सबसे पहले 776 ईसा पूर्व में हुई थी. उस समय इसमें नाटक, संगीत, साहित्य, कला, नाटक और जिम्नास्टिक जैसी प्रतियोगिताए आयोजित होती थी.

2. कुछ समय बाद रोम के राजा थियोडोसिस ने इसे मूर्तिपूजा वाला उत्सव करार देकर इस पर रोक लगा दिया.

3. आधुनिक ओलम्पिक खेलो (Olympics) की शुरुआत बैरन कुबर्तिन के प्रयासों से 1896 में एथेंस में हुई और उन्ही के सुझावों पर 23 जून 1914 में ओलम्पिक के झंडा तैयार किया गया.

4. ओलम्पिक (Olympics) का झंडा सफ़ेद सिल्क से बना है जिसपर ओलम्पिक के प्रतिक पांच छल्ले लगे है. ये पांच छल्ले एक दुसरे से जुड़े है. इनमे पहली लाइन में तीन और दूसरी लाइन में दो छल्ले है. इनका रंग है - नीला, पीला, काला, हरा और लाल.

5. झंडे के पांच छल्ले पांचो महाद्वीपों का प्रतिनिधित्व करते है. इनमे से नीला गोला यूरोप को, पीला एशिया को, लाल अमेरिका को, काला अफ्रीका को, और हरा ऑस्ट्रेलिया को दर्शाता है.

6. ओलम्पिक (Olympics) के झंडे के छल्लो के लिए इन रंगों को इस्तेमाल करने का एक विशेष कारण है. इनमे इस्तेमाल किये गए रंगों में से कम से कम एक रंग हर देश के झंडे पर मिलता है. इसका सांकेतिक अर्थ है की इस खेल के द्वारा सभी दशो के खिलाडी आपस में मिलते है और एक स्वस्थ प्रतोयोगिता करते है.

7. ओलम्पिक खेलो (Olympics) का आयोजन हर चार साल बाद किया जाता है.

8. प्रथम और द्रितीय विश्व युद्ध (first and second world war) के कारण इन खेलो के आयोजन 1916, 1940 और 1944 में नहीं किया गया था.

9. महिलोओं की ओलम्पिक (Olympics) खेलो में भागीदारी सबसे पहले सन 1900 से हुई.

10. ओलम्पिक खेल (Olympics) समारोह में मार्च पोस्ट के दौरों ओलम्पिक खेलो के जन्मदाता देश ग्रीस की टीम सबसे आगे रहती है जबकि मेजबान देश की टीम सबसे पीछे रहती है.

11. ओलम्पिक में मशाल जलाने की प्रथा की शुरआत 1928 से हुई. यह मशाल सूरज की किरणों के द्वारा जलाई जाती है.

12. भारत की ओर से ओलम्पिक खेलो में सबसे पहले 1900 में भाग लिया गया जिसमे भारत ने एथलेटिक्स में दो सिल्वर मैडल जीते.

 
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भारतीय रुपये की कुछ रोचक और महत्वपूर्ण जानकारी - Interesting Facts about Indian Currency

कागज के नोट सबसे पहले 18 वी शताब्दी मे जारी किये गए थे। बैंक ऑफ़ हिंदुस्तान, जनरल बैंक ऑफ़ बंगाल और बंगाल बैंक ने पहली बार कागज के नोट जारी
किये थे।

भारत सरकार ने पहली बार विक्टोरिया पोर्ट्रेट सीरीज वाले बैंकनोट जारी किये थे। मगर कुछ कारणवश सुरक्षितता को ध्यान में रखते हुए इन सीरीज के नोटों को बिच में ही बंद कारण पड़ा था और सन 1867 में उनकी जगह पर अंडरप्रिंट सीरीज जारी की गयी।

अगर आपके पास 51 % फटा नोट है तो आप इस नोट को बैंक में नए नोट से बदल सकते हैं।

हमारे देश में एक रुपये की नोट और सिक्के पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर रहते क्यों की इसकी छपाई करने का अधिकार केवल भारत सरकार को है। मगर एक रूपए को छोडके अन्य सभी नोट छापने का अधिकार केवल भारतीय रिज़र्व बैंक के पास है।

लगभग सभी लोग यही समझते हैं कि नोट कागज के होते हैं लेकिन असल में ये बात सही नहीं है नोट कॉटन(Cotton) और कॉटन रग(Cotton Rag) के मिश्रण का बना होता है, यही कारण है की नोट भीगने पर गलता नहीं है।

बैंकनोट पर कुल 17 भाषाए दिखाई देती है जिसमे की 15 भाषाए नोट के भाषा पैनल में ही दिखाई देती है और नोट के बिलकुल बीचोबीच हिंदी मुख्य रूप से दिखती है और नोट के पीछे की बाजु में इंग्लिश भाषा नजर आती है।

आज़ादी के बाद सिक्के तांबे के बनते थे, उसके बाद 1964 में एल्युमिनियम के और 1988 में स्टेनलेस स्टील के बनने शुरू हुए।

नोटों पर Serial Number इसलिए डाला जाता हैं ताकि रिज़र्व बैंक को पता रहे कि इस समय Market में कितनी currency हैं।

According to RBI, भारत हर साल 2000 करोड़ currency के नोट छापता हैं।

जो लोग अंधे होते है उन्हें नोट को पहचानने में किसी तकलीफ का सामने ना करना पड़े इसके लिए बैंक नोट के बाये की दिशा में अलग अलग तरह की सतह से ऊपर थोड़ी सी प्रिंट बनायीं गयी है जिसकी वजह से जल्दी में समझ आता है की कौनसी सी नोट कितने रुपये की है। 1000 रूपये की नोट पर डायमंड, 500 की नोट पर वर्तुलाकार चिन्ह, 100 रुपये की नोट पर त्रिकोण, 50 रुपये की नोट पर चौकोन, 20 रुपये की नोट पर आयत का चिन्ह देखने को मिलता है। लेकिन 10 रूपये की नोट पर किसी भी तरह का कोई भी चिन्ह दिखाई नहीं देता।

आपने कभी इस बात पर गौर किया है, की नोट पर साल के निचे अलग अलग तरह के चिन्ह दिखाई देते है। सभी चिन्ह दर्शाते है की उन्हें कहा से लिया गया।
सुरक्षा कारणों की वजय से आपको नोट के serial नंबर में I J O X Y Z अक्षर नहीं मिलेंगे।

अभी जो बैंक नोट जारी किये जाते है उन्हें महात्मा गांधी सीरीज के नोट कहा जाता है। 1996 में महात्मा गांधी सीरीज के बैंक नोट पहली बार जारी किये गए थे।

आरबीआई ने सबसे बड़ी 10,000 रुपये की नोट पहली बार 1938 में जारी की थी और फिर से 1954 में भी बनाई थी। मगर इन बड़ी नोटों पर 1946 और 1978 में पाबन्दी लगाई गयी थी।

केंद्र सरकार जीन नोटों को बनाने को कहता उन सभी नोटों को भारतीय रिज़र्व बैंक जारी करता है उसमे फिर 5,000 और 10,000 रुपये के नोट शामिल है। मगर आर बी आई एक्ट 1934 में एक नया कानून बनाया गया जिसके अनुसार 10,000 के ऊपर की कोई भी नोट जारी नहीं की जा सकती।

औपचारिक रूप से भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना सन 1935 में की गयी और उसे भारत सरकार के सभी नोट जारी करने के अधिकार दिए गए। आरबीआई ने पहली बार छटा किंग जॉर्ज पोर्ट्रेट वाली पाच रुपये की नोट जारी की थी।

इतिहास में आरबीआई ने सबसे बड़ी 10,000 रूपये की नोट जारी की थी। 1000 रूपये की नोट और 10,000 रुपये की नोट 1938 और 1946 में दौरान इस्तेमाल की जाती थी मगर बाद में इनपर बंदी लगाई गयी।

जब देश को आजादी मिली थी तो उस वक्त रुपये को आने में गिना जाता था। उस समय 16 आने को मिलाकर 1 रुपया बनता था। एक आने को भी और 4 पैसे और 12 पाई में गिना जाता था। अभी रुपये को पैसे में गिना जाता और 100 पैसे मिलाने के बाद 1 रुपया बनता है। भारतीय रुपये का दशमलवकरण सन 1947 में किया गया। इसमे भारतीय रुपये को 100 \'नया पैसा\' में गिनने की शुरुवात की गयी। मगर 1964 में इस \'नया\' शब्द का इस्तेमाल करना बंद कर दिया गया।

आजादी मिलने के बाद में पहली बार एक रुपये के नोट जारी किये गए थे।

लेकिन सन 1954 में 1,000 रूपये, 5,000 और 10,000 की नोट को फिर से व्यवहार में लाया गया। मगर बाद में फिर से 1978 में इनपर पाबन्दी लगाई गयी।

2010 मे पहली बार 75 रुपये, 100 रूपये और 1000 रूपये के सिक्के बनाये गए लेकिन वह सब सिक्के स्मारक सिक्के के रूप में बनाये गए। उन्हें इसलिए बनाया गया था क्यों की उस साल भारतीय रिज़र्व बैंक के 75 साल पुरे हुए थे साथ ही रवीन्द्रनाथ टागोर के 100 साल और ब्रिहदेश्वर मंदिर को पुरे 1000 हुए थे।

2010 में भारतीय रूपया को यह चिन्ह दिया गया। इस चिन्ह को बनाने का सारा श्रेय डी। उदय कुमार को ही दिया जाता है। इस चिन्ह को देवनागरी वर्ण "र" से बनाया गया है। इस चिन्ह को बनाने के लिए लैटिन वर्ण "आर" और देवनागरी वर्ण "र" का इस्तेमाल किया गया तब जाकर भारतीय रूपए को यह चिन्ह मिल सका। इस चिन्ह में जो समानांतर लाइन दिखाई गयी वह भारतीय तिरंगे को दर्शाने का काम करती है।

कॉइनेज एक्ट 2011 के तहत 1000 रुपये तक के सिक्के जारी किये जा सकते है।

1 पैसा, 2 पैसे, 3 पैसे, 5 पैसे, 10 पैसे, 20 पैसे और 25 पैसे को 30 जून 2011 को पूरी तरह से बंद कर दिया गया।

 
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💐🌹🙏 नमस्कार। 🙏🌹💐

*⌛दो पक्ष⌛*
१-कृष्ण पक्ष , २-शुक्ल पक्ष❗
*🙏तीन ऋण🙏*
१-देवऋण , २-पितृऋण, ३-ऋषिऋण❗
*🏉चार युग🏉*
१-सतयुग , २-त्रेतायुग ,
३-द्वापरयुग , ४-कलियुग❗
*🌷चार धाम🌷*
१-द्वारिका , २-बद्रीनाथ ,
३-जगन्नाथपुरी , ४-रामेश्वरमधाम❗
*🕹चार पीठ🕹*
१-शारदा पीठ *(द्वारिका)*
२-ज्योतिष पीठ *(जोशीमठ बद्रिधाम*)
३-गोवर्धन पीठ *(जगन्नाथपुरी),*
४-शृंगेरीपीठ❗
*⌛चार वेद⌛*
१-ऋग्वेद , २-अथर्वेद ,३-यजुर्वेद , ४-सामवेद!
*🍁चार आश्रम🍁*
१-ब्रह्मचर्य , २-गृहस्थ , ३-वानप्रस्थ , ४-संन्यास❗
*🏉चार अंतःकरण🏉*
१-मन , २-बुद्धि , ३-चित्त , ४-अहंकार❗
*🍁पञ्च गव्य🍁*
१-गाय का घी , २-दूध ,
दही ,३-गोमूत्र , ४-गोबर❗
*🙏पञ्च देव🙏*
१-गणेश , २-विष्णु , ३-शिव , ४-देवी ,५-सूर्य!
*🕹पंच तत्त्व🕹*
१-पृथ्वी ,२-जल , ३-अग्नि , ४-वायु , ५-आकाश❗
*⌛छह दर्शन⌛*
१-वैशेषिक , २-न्याय ,३-ऋषांख्य , ४-योग , ५-पूर्व मिसांसा , ६-दक्षिण मिसांसा❗
*🌷 सप्त ऋषि🌷*
१-विश्वामित्र ,२-जमदाग्नि ,३-भरद्वाज , ४-गौतम , ५-अत्री , ६-वशिष्ठ और कश्यप❗
*🍁सप्त पुरी🍁*
१-अयोध्यापुरी ,२-मथुरापुरी ,
३-मायापुरी *(हरिद्वार)*, ४-काशीपुरी ,
५-कांचीपुरी *(शिन कांची-विष्णु कांची),*
६-अवंतिकापुरी और
७-द्वारिकापुरी❗
*⌛आठ योग⌛*
१-यम , २-नियम , ३-आसन ,४-प्राणायाम , ५-प्रत्याहार , ६-धारणा , ७-ध्यान, एवं ८-समािध❗
*🙏आठ लक्ष्मी🙏*
१-आग्घ , २-विद्या , ३-सौभाग्य ,४-अमृत , ५-काम , ६-सत्य , ७-भोग ,एवं ८-योग लक्ष्मी❗
*🌹नव दुर्गा 🌹*
१-शैल पुत्री , २-ब्रह्मचारिणी ,३-चंद्रघंटा , ४-कुष्मांडा , ५-स्कंदमाता , ६-कात्यायिनी ,७-कालरात्रि, ८-महागौरी एवं ९-सिद्धिदात्री❗
*🍫 दस दिशाएं🍫*
१,पूर्व , २-पश्चिम , ३-उत्तर , ४-दक्षिण ,५-ईशान , ६-नैऋत्य , ७-वायव्य , ८-अग्नि
९-आकाश, एवं १०-पाताल,❗
*🏉मुख्य ११ अवतार🏉*
१-मत्स्य , २-कश्यप , ३-वराह , ४-नरसिंह , ५-वामन , ६-परशुराम ,७-श्री राम , ८-कृष्ण , -बलराम , १०-बुद्ध , एवं ११-कल्कि❗
*🍁बारह मास🍁*
१-चैत्र , २-वैशाख , ३-ज्येष्ठ ,४-अषाढ , ५-श्रावण , ६-भाद्रपद , ७-अश्विन , ८-कार्तिक ,९-मार्गशीर्ष , १०-पौष , ११-माघ , १२-फागुन❗
*⌛ बारह राशी ⌛*
१-मेष , २-वृषभ , ३-मिथुन , ४-कर्क , ५-सिंह , ६-कन्या , ७-तुला , ८-वृश्चिक , ८-धनु , १०-मकर , ११-कुंभ , १२-कन्या❗
*🙏बारह ज्योतिर्लिंग🙏*
१-सोमनाथ ,२-मल्लिकार्जुन ,३-महाकाल , ४-ओमकारेश्वर , ५-बैजनाथ , ६-रामेश्वरम ,७-विश्वनाथ , ८-त्र्यंबकेश्वर , ९-केदारनाथ , १०-घुष्नेश्वर, ११-भीमाशंकर ,१२-नागेश्वर!
*💥पंद्रह तिथियाँ💥*
१-प्रतिपदा ,२-द्वितीय ,३-तृतीय ,४-चतुर्थी , ५-पंचमी , ६-षष्ठी , ७-सप्तमी , ८-अष्टमी , ९-नवमी ,१०-दशमी , ११-एकादशी , १२-द्वादशी , १३-त्रयोदशी , १४-चतुर्दशी , १५-पूर्णिमा, अमावास्या❗
*🕹स्मृतियां🕹*
१-मनु , २-विष्णु , ३-अत्री , ४-हारीत ,५-याज्ञवल्क्य ,७-उशना , ७-अंगीरा , ८-यम , ९-आपस्तम्ब , १०-सर्वत ,१०-कात्यायन , १२-ब्रहस्पति , १३-पराशर , १४-व्यास , १५-शांख्य , १६-लिखित , १७-दक्ष ,
१८-शातातप , १९-वशिष्ठ❗

 
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akshay parekh

चाय के बारे में रोचक तथ्य

1. चाय का आविष्कार 2730 B.C में चाइना में किया गया था । तभी से यह पूरे विश्व में फेल गया ।

2. सबसे पहली चाय चाइना के सम्राट Shen Nung के लिए तैयार किया था ।( " जब सम्राट जी बैठे थे और उनके सामने एक कप का प्याला था और उनमे चाय की पत्ती आकर गिरती है और पानी का रंग बदल जाता है )

3. ठंडी चाय का आविष्कार 1904 सेंट लुईस विश्व मेले में एक अंग्रेज नामित रिचर्ड ब्लेचिंदें दूआरा किया गया था ।

4. चाय बैग / Tea Bag सयुक्त राज्य अमेरिका में 1908 में थॉमस सुलिवन दूआरा किया गया था ।

5. चाय बैग / Tea Bag छोटे-छोटे रेशम से मिलकर बनाया गया था ।

6. चाय चाइना में शुरु होने के बाद सबसे पहले 1716 में कनाडा पंहुचा |

7. सबसे ज्यादा चाय Turkey में रहने वाले पीते है ।

8. चीन में केवल एक चाय बनी थी लेकिन लोगो ने इसे अपने अनुसार ही बना लिया ।

9. ये माना जाता है कि चाय की 1500 से भी ज्यादा किस्में हैं। लेकिन सबसे ज्यादा चाय प्रयोग की जाने वाली चाय :-Type Of Tea / चाय के प्रकार
White Tea
Green Tea
Oolong Tea
Dark Tea
Puer Tea
Mate Tea

10. भारत में चाय की खेती की शुरूआत 1835 में हई थी। भारत में चाय की सबसे ज्यादा खेती आसाम और दारजलिंग में की जाती है।

11. अफ़गानिस्तान और ईरान देश का राष्ट्रीय पेय / National Drink  चाय है।

12.  16 करोड़ लोग रोज़ इंग्लैंड में चाय पीते हैं। और देखा जाये तो  एक साल में इंग्लैंड के लोग लगभग  60 अरब चाय पी जाते हैं।

13. विश्व  में प्रतेक साल 30 लाख टन चाय का उगाया जाता है।

14. पीने के मामले में पानी के बाद चाय का ही नंबर आता है |

15. चाय न पीने से 30% लोगो के सर में दर्द होने लगता है |

16. पूरी दुनिया में चाय को फेलाने वाले डच थे

 
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127 days
 
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Bitcoin के बारे में 8 रोचक तथ्य जो आपको नहीं पता होगा

1. सातोशी नकामोतो  की मौजूदगी अभी भी रहस्यमय है -

सातोशी  नकामोतो वह नाम है जिसका इस्तेमाल उस इंसान ने किया जिसने bitcoin का निर्माण किया लेकिन इसकी असली पहचान अभी भी संदेहास्पद है , कई सालों तक इससे बहुत से लोगों का नाम जुड़ा जैसे Nick Szabo, Dorian Nakamoto ,Hal Finney , Craig Steven Wright and others.कुछ लोगों का यह कहना है की नाकमोतो एक टीम है जिसने bitcoin का निर्माण किया , मई 2017 तक नाकामोतो के पास 1 मिलियन bitcoin था जिसकी कीमत लगभग $2 बिलियन था.

2.Bitcoin की संख्या स्थायी है -

आपने bitcoin माइनिंग के बारे में तो सुना ही होगा जिसके ज़रिये bitcoin को digitally generate किया जाता है , इसका मतलब यह नहीं है की आप अनगिनत bitcoin generate कर सकते है , bitcoin की संख्या को स्थायी कर दिया गया है अभी तक लगभग 21 मिलियन bitcoin generate किया जा चूका है लेकिन आगे इसकी माइनिंग का तरीका बहुत ही कठिन होने वाला हैं .

3.Senders/Receiver की जानकारी जानना नामुनकिन है -

जैसा की आप जानते है की बित्कोइन का address 34 अल्फानुमेरिक अक्षरों से मिलकर बना होता है जिससे senders या reciever की दूसरी जानकारी जानना नामुनकिन है जिसके कारण जो अवैध लेन देन होता है वो ज्यादातर बित्कोइन के ज़रिये ज्यादा होने लगा है इससे बचने के लिए कुछ वॉलेट कंपनी यूजर को id प्रदान करती है जिससे लेने या भेजने वाले की जानकारी हो .

4.बित्कोइन का इस्तेमाल सबसे पहले पिज़्ज़ा आर्डर के लिए किया गया -

बित्कोइन का सबसे पहला लेनदेन सातोशी और Hal Finney के बिच 2009 में हुआ सबसे पहला खरीदी एक पिज़्ज़ा का हुआ जिसकी कीमत $25 थी जिसको खरीदने के लिए 10,000 बित्कोइन्स का खर्च हुआ .

5.बित्कोइन का नेटवर्क सुपर कंप्यूटर के नेटवर्क से ज्यादा ताकतवर है -

यह तथ्य मेरा पर्सनल सबसे पसंदीदा तथ्य है , अगर हम एक्सपर्ट्स की माने तो बित्कोइन के नेटवर्क की कंप्यूटिंग क्षमता 2,046,364 pflop/s है और अगर हम दुनिया के 500 सुपर कंप्यूटर की ताकत को मिलाये तो उनकी कंप्यूटिंग क्षमता सिर्फ 274 pflop/s है जो बित्कोइन के नेटवर्क से काफी ज्यादा कम है .

6.बित्कोइन को अंतरिक्ष में भी भेजा गया है -

साल 2016 में जेनेसिस माइनिंग जो की एक बित्कोइन क्लाउड माइनिंग कंपनी है उसने बित्कोइन को अंतरिक्ष में भेजा था, इसको भेजने के लिए एक 3D बित्कोइन मॉडल और एक बित्कोइन पेपर वालेट का इस्तेमाल किया गया in दोनों चीजों को एक गुब्बारे से बांध दिया गया था इस पुरे प्रक्रिया को रिकॉर्ड किया गया gopro द्वारा , एक बार जब गुब्बारा 20km की ऊँचाई पर पहुच गया तब पेपर वॉलेट में लेनदेन किया गया उसके बाद दूसरा लेनदेन किया गया जब गुब्बारा 34km की अधिकतम ऊँचाई पर पहुँच गयी .

7.FBI के पास दुनिया की सबसे बड़ी बित्कोइन वॉलेट है -

जब FBI ने सिल्क रोड ऑपरेशन को बंद किया तो उसने उसके मालिक की सारी संपत्ति को भी जब्त कर लिया जिसके कारण यह हुआ की FBI दुनिया की सबसे ज्यादा अमीर बित्कोइन मालिक बन गयी एक magzine की रिपोर्ट के मुताबिक़ FBI के पास लगभग $120 मिलियन के बित्कोइन का नियंत्रण है .

8.बित्कोइन वॉलेट का खोना मतलब सारे बित्कोइन का खो देना -

जिस  तरह आप अपना पैसा अपने बैंक अकाउंट में जमा करते है ठीक उसी प्रकार आप अपने बित्कोइन को बित्कोइन वॉलेट में जमा रखते है यह एक बहुत ही ज्यादा सिक्योर वॉलेट होता है लेकिन अगर किसी कारण आप अपना वॉलेट खो देते है तो आपने जितना भी बित्कोइन जमा किया है उस वॉलेट में वो सारे गुम हो जायेंगे .

 
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