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On 4th September there was a seminar in Delhi on the subject : Fever cure in 72 hours , where the key speaker on the topic was Dr. Biswaroop Roy Choudhury. In the seminar he stressed upon the fact that how much ignorant the common public is about the topic and how the doctors, at large, are making money out of the ignorance and fear in minds of the patients and their attendants.

He stressed that nowadays Dengue and chikengunia are the two types of viral fever, commonly prevalent and hospitals are running out of beds in Delhi NCR and other areas. He educated that the Virus hide between the cells and are not present in the blood stream and so they cannot be destroyed through medicines because the medicine work through blood only. Our body, which is a super computer, has its own mechanism to fight the virus. It raises its temperature beyond normal level to fight the bacteria/ virus. This causes us discomfort and dis-ease and we go to doctor for treatment. The doctor gives us medicine for fever and as the temperature comes down, the mechanism of the body is hampered and the virus is escaped and it remains inside the body and attacks again after some time.

Whenever there is any viral or bacterial attack body raises its temperature, throws out body waste in the form of loose motion, vomiting, cold and cough etc. and by taking medicine to control these conditions we simply harm our body.

Then question arises what to do in this situation. Dr Choudhury told that we have to monitor the body temperature and as it goes beyond 102.2 degree, we have to administer cold compress on head and calf muscles till the temperature comes down. Cold compress means, take four small towels and dip them into ice cold water, squeeze it and place it on head and one each on calf muscles after ecery 2-3 minutes, till the time the temperature comes to normal.
No medicine is to be taken in such scenario. He has formulated a three day diet chart for the patient, to follow and by doing this the patient will surely be cured. The diet plan is as under :-

Day-1.- divide your weight by 10 and that much number glasses of Mosumbi juice and equal quantity of Coconut water to be taken throughout the whole day. If the patient is 60 kg of weight then he must take 06 glasses of both the juices and no solid food.

Day-2. divide your weight by 20 and that much glasses of mosumbi juice and equal quantity of coconut water and weight X 5 grams of tomato + cucumber.

Day-3. divide your Weight by 30 and that much glasses of mosumbi juice and equal quantity of coconut water and weight X 5 grams of tomato + cucumber in lunch and normal home cooked food for dinner.

By taking these steps we can successfully cure any kind of viral/ bacterial fever in three days, without causing any harm to the body and without interrupting the body mechanism.
We need not panic during fever, cough/ cold/ vomiting/ loose motions but we must monitor the temperature and manage it as discussed above and supply sufficient fluids as discussed above. When we go to doctor/hospital they prescribe unnecessary test/ diagnostics to make money out of our fear and ignorance. The need of the hour is to educate ourselves and others also. Rest the body will do at its own.

Phone number of Doctor Biswaroop Roy Chodhury is 9312286540.
All the Best. Stay healthy and fit. Please do Yoga and Pranayam everyday to remain healthy and medicine/ doctor free for at least 100 years of age, as our ancestors used to live.

 
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288 days
 
Jasmine

जानिये क्यों अल्लाउद्दीन खिलजी ने मरवा दिया था मलिक गफूर को !

निर्देशक संजय लीला भंसाली का फ्रीडम औफ क्रिएशन के नाम पर "पद्मावती" फिल्म की कहानी में अल्लाउद्दीन खिलजी और चित्तोड़ की रानी पद्मिनी की प्रेम कहानी का फिल्मांकन कर रहे है. सिनेमा में "इस कहानी के सभी पात्र काल्पनिक है इनका जीवित या मृत व्यक्ति से कोई सम्बन्ध नहीं है" टैगलाइन को निर्देशक इतिहास के नाम पर सबकुछ चलेगा समझ लेते है. खैर हम इस पोस्ट में अल्लाउद्दीन खिलजी और उसके गुलाम किन्नर के बीच के रिश्तों के बारे में बतायेगे.

मलिक काफूर सुल्तान अल्लाउद्दीन खिलजी का विश्वासपात्र सेनापति था जिसे खिलजी ने खंबात की लड़ाई के बाद 1000 दिनार में खरीदा था . मलिक काफूर मूल रूप से हिंदू परिवार में पैदा हुआ एक किन्नर था, जिसको लोक लाज के डर से उसके परिवार वालों ने उसे बेसहारा छोड़ दिया . यही उनकी सबसे बड़ी ग़लती साबित हुई क्योकि आगे जा कर यही मलिक काफूर खिलजी की पाक फौज में शामिल हुआ और हिंदुओं पर तमाम ज़्यादतियाँ कीं .

अलाउद्दिन खिलजी बेशक एक महान योद्धा था लेकिन वह व्याभिचारी सुल्तान था , यह कहना उचित होगा की वह भारतीय इतिहास का पहला समलिंगी था . जी हाँ यदि यूनिवर्सिटी ऑफ मोंटनना की प्रोफेसर वनिता रुथ की माने तो यह बात शत प्रतिशत सही है , जिसका उल्लेख उन्होने अपनी पुस्तक Same-sex Love In India: A Literary History में किया है . किताब में यह भी लिखा है की सुल्तान खिलजी मलिक काफूर के सौंदर्य पर फिदा हो गया था और उसे खंबात की लड़ाई के पश्चात बतौर गुलाम खरीदा था . यह पता चलता है की अलाउद्दिन खिलजी के मलिक काफूर के साथ समलिंगी रिश्ते थे.

अलाउद्दिन खिलजी , मलिक काफूर पर इतना भरोसा करता था क़ि एक काफ़िर खानदान में पैदा होने के बावजूद एक किन्नर व्यक्ति को तमाम मज़हबी खिलाफत के बावजूद उसने उसे अपनी सेना का प्रधान सेनानायक बना दिया था . कालांतर में मलिक काफूर ने इस्लाम क़ुबूल किया और दिल्ली सल्तनत के प्रति वफ़ादारी की कसमें खाईं .
इसी मलिक काफूर ने बाद में दक्षिण भारत के हिंदू राज्यों पर चढ़ाई करी और हज़ारों लाखों गैर मुस्लिमों को मौत के घाट उतारा . वारंगल , देवगिरी और पांड्या राज्यों को देखते ही देखते मलिक काफूर और उसकी मज़हबी सेना ने धूल चटा दी ,

मलिक काफूर ने बाद में रामेश्वरम में मस्जिद बनवाई . वारंगल के काकतिया राजा को काफूर के साथ संधि करनी पड़ी और इसी के तहत अकूत धन संपदा से अलग मलिक काफूर को कोहिनूर हीरा बतौर उपहार प्राप्त हुआ जिसे उसने अपने मलिक और समलिंगी साथी सुल्तान अलाउद्दिन खिलजी को भिजवाया . खिलजी उसकी कामयाबी पर फूला न समाया और उसको सेना में और अधिक अधिकार बहाल किए.

मलिक काफूर के कामयाबी का राज़ यही था की जो भी अमूल्य वास्तु उसे युद्धों , चढ़ाई और संधियों में प्राप्त होतीं वह तुरंत अपने सुल्तान के कदमों में उसे पेश करता , इसलिए वह खिलजी का विश्वासपात्र था. लेकिन इसी खिलजी का जब मलिक काफूर से मोह भंग हुआ तो उसने उसे जान से मरवा दिया , यह कहानी भी बड़ी रोचक है

सन 1294 के करीब देवगीरि राज्य अलाउद्दिन खिलजी के सीधे नियंत्रण में आ गया संधि के तहत देवगीरि के यादव शासक हर साल दिल्ली सल्तनत को एक तयशुदा रकम भिजवाते थे , किन्ही कारणों से यह रकम बकाया होती रही , और 1307 में अलाउद्दिन खिलजी ने अपने विश्वास पात्र मलिक काफूर को इसे वसूलने देवगिरी भेजा , मलिक काफूर ने देवगीरि पर चढ़ाई की और धन दौलत लूट कर दिल्ली भिजवाई साथ ही साथ , देवगीरि के शासक रामदेव की दो सुंदर बेटियों को
उठवा कर दिल्ली में अलाउद्दिन खिलजी के हरम में भिजवा दिया. जब खिलजी ने इन राजकुमारियों के साथ सोने की इच्छा जताई , तो बड़ी राजकुमारी ने युक्ति लड़ते हुए मलिक काफूर का नाम यह कहते हुए फँसा दिया की हमे बादशाह की खिदमत में पेश करने से पहले ही मलिक काफूर हमारे साथ सब कुछ कर चुका है. अलाउद्दिन खिलजी एक वासनायुक्त भेड़िया था जिसने अपनी गंदी नज़र चित्तोड़ की रानी पद्‍मिनी पर भी डाली थी. राजकुमारियों की बात सुनकर अलाउद्दिन खिलजी गुस्से से पागल हो गया , उसने उसी वक्त मलिक काफूर की गिरफ्तारी का हुक्म जारी कराया . मान्यता है की उसने काफूर को गाय की चमड़ी में बाँध कर दिल्ली लाने का आदेश दिया , जब मलिक काफूर को दिल्ली लाया गया उसकी घुटन से मौत हो चुकी थी. यह देख कर राजकुमारी खिलजी से बोली की ऐसा आदेश देने के पहले उसे पूरी जाँचपड़ताल करनी चाहिए थी. गुस्से में मूर्ख खिलजी यह भी भूल गया की मलिक काफूर एक किन्नर है . अपनी बेवकूफी से आगबबूला खिलजी ने दोनो राजकुमारियों के हाथ पैर बाँध कर उन्हे ऊँची पहाड़ी से फिंकवा दिया.
सन 1316 में मलिक काफूर की मौत से दुखी और निराश अलाउद्दिन खिलजी ड्रोपसी [एडीमा] से चल बसा , हालाँकि यह माना जाता है की उसकी हत्या उसके एक सेनापति मलिक नायाब ने करवाई।

चित्तोड़ के राजा रतन सिंह की रानी पद्मिनी अपूर्व सुन्दर थी | उनकी सुन्दरता के बारे में सुनकर दिल्ली का तत्कालीन बादशाह अल्लाउद्दीन खिलजी पद्मिनी को पाने के लिए लालायित हो उठा और उसने रानी को पाने हेतु चितौड़ दुर्ग पर एक विशाल सेना के साथ चढ़ाई कर दी | उसने चितौड़ के किले को कई महीनों घेरे रखा पर चितौड़ की रक्षार्थ तैनात राजपूत सैनिको के अदम्य साहस व वीरता के चलते कई महीनों की घेरा बंदी व युद्ध के बावजूद वह चितौड़ के किले में घुस नहीं पाया |

तब उसने कूटनीति से काम लेने की योजना बनाई और अपने दूत को चितौड़ रत्नसिंह के पास भेज सन्देश भेजा कि "हम तो आपसे मित्रता करना चाहते है..रानी की सुन्दरता के बारे बहुत सुना है सो हमें तो सिर्फ एक बार रानी का मुंह दिखा दीजिये..हम घेरा उठाकर दिल्ली लौट जायेंगे"!

सन्देश सुनकर रत्नसिंह आगबबुला हो उठे पर रानी पद्मिनी ने इस अवसर पर दूरदर्शिता का परिचय देते हुए अपने पति रत्नसिंह को समझाया कि " मेरे कारण व्यर्थ ही चितौड़ के सैनिको का रक्त बहाना बुद्धिमानी नहीं है | "

रानी को अपनी नहीं पूरे मेवाड़ की चिंता थी वह नहीं चाहती थी कि उसके चलते पूरा मेवाड़ राज्य तबाह हो जाये और प्रजा को भारी दुःख उठाना पड़े क्योंकि मेवाड़ की सेना अल्लाउद्दीन की विशाल सेना के आगे बहुत छोटी थी | सो उसने बीच का रास्ता निकालते हुए कहा कि अल्लाउद्दीन चाहे तो रानी का मुख आईने में देख सकता है |

अल्लाउद्दीन भी समझ रहा था कि राजपूत वीरों को हराना बहुत कठिन काम है और बिना जीत के घेरा उठाने से उसके सैनिको का मनोबल टूट सकता है साथ ही उसकी बदनामी होगी वो अलग..सो उसने यह प्रस्ताव स्वीकार कर लिया |
चितौड़ के किले में अल्लाउद्दीन का स्वागत रत्नसिंह ने अतिथि की तरह किया |

रानी पद्मिनी का महल सरोवर के बीचों बीच था सो दीवार पर एक बड़ा आइना लगाया गया रानी को आईने के सामने बिठाया गया | आईने से खिड़की के जरिये रानी के मुख की परछाई सरोवर के पानी में साफ़ पड़ती थी वहीँ से अल्लाउद्दीन
को रानी का मुखारविंद दिखाया गया | सरोवर के पानी में रानी के मुख की परछाई में उसका सौन्दर्य देख देखकर
अल्लाउद्दीन चकित रह गया और उसने मन ही मन रानी को पाने के लिए कुटिल चाल चलने की सोच ली! जब रत्नसिंह अल्लाउद्दीन को वापस जाने के लिएकिले के द्वार तक छोड़ने आये तो अल्लाउद्दीन ने अपने सैनिको को संकेत कर रत्नसिंह को धोखे से गिरफ्तार कर लिया |

रत्नसिंह को कैद करने के बाद अल्लाउद्दीन ने प्रस्ताव रखा कि रानी को उसे सौंपने के बाद ही वह रत्नसिंह को कैद मुक्त करेगा | रानी ने भी कूटनीति का जबाब कूटनीति से देने का निश्चय किया और उसने अल्लाउद्दीन को सन्देश भेजा कि -" मैं मेवाड़ की महारानी अपनी सात सौ दासियों के साथ आपके सम्मुख उपस्थित होने से पूर्व अपने पति के दर्शन
करना चाहूंगी यदि आपको मेरी यह शर्त स्वीकार है तो मुझे सूचित करे | रानी का ऐसा सन्देश पाकर कामुक अल्लाउद्दीन के ख़ुशी का ठिकाना न रहा ,और उस अदभुत सुन्दर रानी को पाने के लिए बेताब उसने तुरंत रानी की शर्त स्वीकार कर सन्देश भिजवा दिया |रत्नसिंह को कैद करने के बाद अल्लाउद्दीन ने प्रस्ताव रखा कि रानी को उसे सौंपने के बाद ही वह रत्नसिंह को कैद मुक्त करेगा | रानी ने भी कूटनीति का जबाब कूटनीति से देने का निश्चय किया और उसने अल्लाउद्दीन को सन्देश भेजा कि -" मैं मेवाड़ की महारानी अपनी सात सौ दासियों के साथ आपके सम्मुख उपस्थित होने से पूर्व अपने पति के दर्शन
करना चाहूंगी यदि आपको मेरी यह शर्त स्वीकार है तो मुझे सूचित करे | रानी का ऐसा सन्देश पाकर कामुक अल्लाउद्दीन के ख़ुशी का ठिकाना न रहा ,और उस अदभुत सुन्दर रानी को पाने के लिए बेताब उसने तुरंत रानी की शर्त स्वीकार कर सन्देश भिजवा दिया |

उधर रानी ने अपने काका गोरा व भाई बादल के साथ रणनीति तैयार कर सात सौ डोलियाँ तैयार करवाई और इन डोलियों में हथियार बंद राजपूत वीर सैनिक बिठा दिए! डोलियों को उठाने के लिए भी कहारों के स्थान पर छांटे हुए वीर सैनिको को कहारों के वेश में लगाया गया |इस तरह पूरी तैयारी कर रानी अल्लाउद्दीन के शिविर में अपने पति को छुड़ाने हेतु चली! उसकी डोली के साथ गोरा व बादल जैसे युद्ध कला में निपुण वीर चल रहे थे | अल्लाउद्दीन व उसके सैनिक रानी के काफिले को दूर से देख रहे थे |

सारी पालकियां अल्लाउदीन के शिविर के पास आकर रुकीं और उनमे से राजपूत वीर अपनी तलवारे सहित निकल कर यवन सेना पर अचानक टूट पडे l इस तरह अचानक हमले से अल्लाउद्दीन की सेना हक्की बक्की रह गयी और गोरा बादल ने तत्परता से रत्नसिंह को अल्लाउद्दीन की कैद से मुक्त कर सकुशल चितौड़ के दुर्ग में पहुंचा दिया |
इस हार से अल्लाउद्दीन बहुत लज्जित हुआ और उसने अब चितौड़ विजय करने के लिए ठान ली |
आखिर अल्लाउद्दीन के छ:माह से ज्यादा चले घेरे व युद्ध के कारण किले में खाद्य सामग्री अभाव हो गया तब राजपूत सैनिकों ने केसरिया बाना पहन कर जौहर और शाका करने का निश्चय किया | जौहर के लिए गोमुख के उत्तर वाले मैदान में एक विशाल चिता का निर्माण किया गया | रानी पद्मिनी के नेतृत्व में 16000 राजपूत रमणियों ने गोमुख में स्नान कर अपने सम्बन्धियों को अन्तिम प्रणाम कर जौहर चिता में प्रवेश किया |

 
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144 days
 
Sam's Son

Hi all.. Hope all of u are doing well.😊

Friends, one important learning from Chennai floods:

Millions of personal documents of people have been lost or damaged. Important papers like Insurance Certificates and Medical Records are lost or destroyed. In panic, fleeing people have abandoned them.

Solution: Digitizing your documents.

Please scan and store the following documents for you and each family member in a Pen Drive. Whenever you add another document, please scan it too and save it in the Pen Drive. The Pen Drive can be kept inside a small Ziplock pouch. Make a few copies of the Pen Drive and keep them in very safe places, so that even if one is lost/damaged, you still have copies.

The documents list:

1. Passport, including Visa Pages
2. Insurance Certificates for Life Insurance
3. Insurance Certificates for Medical Insurance
4. Birth Certificate
5. School Certificates
6. Degree Certificates
7. Fixed Deposit Certificates
8. Important Medical Documents, including medical prescriptions for elderly family members
9. Driving License
10. Aadhar Card
11. Ration Card
12. Voter I'D
13. PAN Card
14. Previous years Income Tax returns
15. Property Papers for home, farm arc
16. Vehicle Insurance papers
17. Vehicle Registrations and Tax tokens
17. Warranty Papers for important items
18. Any other Insurance Papers like Home Insurance, Mobile Insurance arc
19. Prescription Lenses for Eyes
20. Employment Record, including Appointment Orders for previous companies, Salary Slips, Releiving Letters arc

Never know when a systematic document preservation system will suddenly be helpful. This need not be needed only during calamities, they may be needed even in normal life situations.

Over the past few days, I saw so many people regretting for not keeping their documents safe.
Take care.😊👆👍👍

 
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559 days
 
Rishabh Salecha

रजनीश चन्द्र मोहन: एक साधारण टीचर बन गया दुनिया का सबसे विवादित गुरु \'ओशो\'

धर्म का बाज़ारीकरण करने में संत, गुरुओं और सन्यासियों का बड़ा हाथ है. आज के दौर में बाबाओं का कारोबार बेहद उन्नति के साथ फल-फूल रहा है. अगर आपको जल्दी से जल्दी अमीर बनना है, तो बाबा बनना बेहतर रहेगा! लोगों में धर्म के प्रति इतनी अंधी आस्था है कि उन्हें कोई भी भगवान के नाम पर लूट लेता है और उन्हें जब इसका पता चलता है तो काफी देर हो चुकी होती है. भारत में तो ऐसे बाबाओं की पूरी फेहरिस्त है, जिनसे जुड़े विवादों ने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या सही में संत, सन्यासी और बाबा इस तरह के काम कर सकते हैं? बलात्कार जैसे जघन्य अपराध से लेकर धोखाधड़ी तक के आरोप इन पर लगते रहे हैं. भारत में ऐसे कई बाबा हैं और हुए हैं जो विवादों से घिरे रहे हैं. इन बाबाओं में आसाराम बापू, संत रामपाल, स्वामी नित्यानंद, बाबा रामदेव, स्वामी अग्निवेश, चंद्रस्वामी, जयेन्द्रा सरस्वती, गुरुमीत राम रहीम, सत्य साईं बाबा और रजनीश या ओशो शामिल हैं.

ओशो, जो 20वीं शताब्दी के सबसे विवादित सन्यासी थे. हालांकि, लोग आज भी ओशो या रजनीश (वास्तविक नाम) के जीवन के बारे में कुछ खास नहीं जानते. उनके लिए ओशो का नाम दुनियाभर के प्रसिद्ध बाबाओं और गुरुओं में से एक नाम ही है.

असली नाम था रजनीश, एक लेक्चरर थे.

रजनीश 11 दिसंबर 1931 को मध्य प्रदेश के गांव कुछवाड़ा में जन्मे थे. 11 भाइयों में सबसे बड़े ओशो का पारिवारिक नाम रजनीश चंद्र मोहन था. ओशो ने जबलपुर विश्वविद्यालय से स्नातक (1953) और फिर सागर विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में स्नातकोत्तर (1957) पूरी करने के दौरान दावा किया कि उन्होंने ज्ञान पा लिया है. वर्ष 1957 में संस्कृत के लेक्चरर के तौर पर रजनीश ने रायपुर विश्वविद्यालय ज्वाइन किया. लेकिन उनके विचारों को छात्रों के लिए खराब समझते हुए विश्वविद्यालय ने उनका ट्रांसफर कर दिया. अगले ही वर्ष वो दर्शनशास्त्र के लेक्चरर के रूप में जबलपुर यूनिवर्सिटी में शामिल हो गए. इस दौरान भारत के कोने-कोने में जाकर उन्होंने गांधीवाद और समाजवाद पर भाषण दिया. अब तक वह आचार्य रजनीश के नाम से अपनी पहचान बना चुके थे.

1970 में की 'डाइनमिक मेडिटेशन' की शुरुआत.

वर्ष 1970 में रजनीश जबलपुर से मुंबई आ गए और सबसे पहली बार \'डाइनमिक मेडिटेशन\' की शुरुआत की. इसके बाद वे भारत से लेकर विदेश तक में प्रसिद्ध होने लगे और अपने विचारों को साझा करने लगे धीरे-धीरे उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ने लगी. वर्ष 1971 में उनके अनुयायियों ने उन्हें \'भगवान श्री रजनीश\' की उपाधि दे दी. जब वह मुंबई से पुणे शिफ्ट हुए तो उनके अनुयायियों ने अपने \'भगवान\' के लिए आश्रम बनवाया, जहां आचार्य ने 1974 से लेकर 1981 तक दीक्षा दी. अमेरिका में विवादों से घिरने के बाद वो वापस पुणे में ही आकर बस गए, जहां रहते हुए उन्होंने अपने आश्रमों और सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार किया. 19 जनवरी 1990 में ओशो की मृत्यु हो गई.
रजनीश उर्फ़ ओशो पर कई विवाद खड़े हुए, जिनके कारण उनके अनुयायियों से लेकर खुद उन्हें भी जेल के दर्शन करने पड़े.


अपने भक्तों के बीच 'भगवान ओशो' कहलाने वाले ओशो को लेकर उनकी शिष्या और प्रेमिका मां आनंद शीला ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। ओशो के आश्रम से 55 मिलियन डॉलर का घपला करने के बाद शीला 39 महीनों तक जेल में रहीं। जेल से निकलने के करीब 20 साल बाद शीला ने हाल ही में रीलीज हुई अपनी किताब 'डोंट किल हिम! ए मेम्वर बाई मा आनंद शीला' में अपने गुरू से जुड़े कई अनछुहे पहलुओं को सामने रखा है।

एक माह में 90 लोगों के साथ सेक्स

शीला ने अपनी किताब में लिखा है कि ओशो के आश्रम में अध्यात्म के नाम पर सेक्स की मंडी सजती थी। आश्रम के शिविरों में सबसे ज्यादा चर्चा भी सैक्स पर ही होती थी। भगवान ओशो अपने भक्तों को बताते थे कि सेक्स की इच्छा को दबाना कई कष्टों का कारण है, इसलिए सेक्स की इच्छा को दबाना नहीं चाहिए। वे सेक्स को बिना किसी निर्णय के ‌स्वीकार करने के लिए कहते थे। भगवान के उपदेशों पर चलते हुए उनके सभी शिष्य बिना किसी हिचकिचाहट और नैतिक दबाव के चलते आश्रम में खुलेआम सेक्स करते थे। आश्रम का हर संन्यासी एक महीने में करीब 90 लोगों के साथ सेक्स करता था

पानी की तरह बरसता था आश्रम में पैसा

किताब के मुताबिक भगवान ओशो बिजनेस करना भी बखूबी जानते थे। उन्होंने ऐसा सिस्टम बनाया हुआ था कि आश्रम के हर हिस्से से आय होती थी। उनके प्रवचन सुनने के लिए आश्रम में प्रवेश शुल्क लगता था। आश्रम में चिकित्सकों का एक ग्रुप भी कार्यरत था, जो मरीजों को देखते थे। चिकित्सा सेवा के साथ-साथ आश्रम के अंदर बुफे में खान-पान की भी व्यवस्‍था थी। आश्रम में आने वाले लोग अपनी इच्छानुसार खाना लेकर भुगतान करते थे। इसके अलावा आश्रम में कई दूसरी शुल्क आधारित सेवाएं भी चलती थीं। इन सभी स्रोतों के जरिए आश्रम में पानी की तरह पैसा बरसता था। भगवान ओशो के आश्रम में हर दिन दान पाने के नए तरीके सोचे जाते थे।

बीमारी के बावजूद सेक्स का प्राथमिकता

आश्रम में संन्यासियों को शिफ्ट में काम करना पड़ता था। आश्रम के संन्यासी भगवान ओशो से इतने प्रभावित थे कि अपनी परवाह किए बिना काम करते थे। यहां तक कि उन्हें रात को सोने के लिए अच्छी जगह भी नहीं मिलती थी। लेकिन धीरे-धीरे कुछ संन्यासियों को बीमारियों ने जकड़ लिया। आश्रम के संन्यासी बुखार, सर्दी और इंफेक्‍शन से पीड़ित रहते थे। आश्रम में चारों तरफ गंदगी का माहौल था। इसके बावजूद भगवान लगातार अपने भक्तों को सेक्स की इच्छा दबाने के विरुद्ध उपदेश देते थे, इसलिए आश्रम के संन्यासी बेफिक्र होकर सेक्स करते थे। शीला ने किताब में लिखा, 'मुझे यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि पूरे दिन काम में लगे रहने के बावजूद संन्यासी सेक्स के लिए समय और ऊर्जा निकालते ‌थे। एक दिन मैंने एक संन्यासी से इस बारे में पूछा तो उसने मुझे बताया कि वो हर दिन ‌तीन अलग-अलग महिलाओं के साथ सेक्स करता है। गंदगी में रहने के कारण संन्यासियों की हालत ज्यादा खराब होने लगी और धीरे-धीरे आश्रम के अस्पताल के सभी बेड भर गए।

30 रॉल्स रॉयस गाड़ियों की मांग

भगवान आश्रम में सबकुछ ओशो के मन-मुताबिक और काफी अच्छा होने के बावजूद वे खुश नहीं थे। भगवान अब बोर हो रहे थे। एक दिन उन्होंने मुझसे कहा कि उन्हें एक महीने में 30 नई रॉल्स रॉयस गाड़ियां चाहिएं, जबकि उस समय उनके पास 96 नई रॉल्स रॉयस कारें थीं। जाहिर था कि वो सिर्फ अपनी बोरियत मिटाने के लिए नई गाड़ियां चाहते थे। 30 नई रॉल्स रॉयस कारों का मतलब था करीब 3 से 4 मिलियन डॉलर। इतनी बड़ी रकम सिर्फ आश्रम के बजट में कटौती करके ही जुटाई जा सकती थी, ले‌किन भगवान ओशो ने मुझे इस रकम को पाने के लिए 50-60 लोगों के नाम की लिस्ट दी, जो काफी धनी थे।

5. धर्म के प्रति अलग नज़रिये के कारण उन्हें विद्रोही विचारक भी कहा गया.

ओशो का कहना था कि बुद्ध तो \'वेद\' को शास्त्र नहीं मानते क्योंकि 99 प्रतिशत तुम्हारे वेद में कचरा भरा हुआ है. इसको वे शास्त्र मानें भी कैसे? जैन भी तुम्हारे \'वेद\' को शास्त्र नहीं मानते, मुसलमान तो तुम्हारी \'गीता\' को शास्त्र नहीं मानते और न ही हिंदू \'कुरान\' को शास्त्र मानते हैं, न \'बाइबल\' को. इस दुनिया में 300 धर्म किसके शास्त्र को शास्त्र मानें? 1969 में आयोजित सेकेंड वर्ल्ड हिंदू कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि \'कोई भी धर्म जो जीवन को अर्थहीन और दुख से भरा मानता है और जीवन के प्रति नफ़रत सिखाता है, वह सच्चा धर्म नहीं है. धर्म एक कला है, जो बताता है कि कैसे जीवन का आनंद उठाया जाए\'.

6. अमेरिका में अपना कम्यून स्थापित करने और आरोपों के चलते उन्हें भारत भेजा गया.

अमेरिका के ओरोगॉन में अपने कम्यून की स्थापना कर उनके अनुयायियों ने पूरा एक शहर बसा दिया था, जिसका नाम ओशो के वास्तविक नाम से \'रजनीशपुरम\' रखा गया. स्थानीय लोगों को ये पसंद नहीं आया और उन्होंने कम्यून पर मुक़दमा कर दिया. बाद में जांच से पता चला कि रजनीश के शिष्यों ने ज़हरीले \'सालमोनेला बैक्टीरिया\' पर तरह-तरह के प्रयोग करने शुरू कर दिए. इसके बाद उन्होंने सलाद के पत्तों पर इस बैक्टीरिया का छिड़काव कर दिया. जल्द ही लोग बीमार पड़ने लगे. कुल मिला कर 751 लोग बीमार हो कर अस्पतालों में दाख़िल कराए गए.

सितंबर 1985 में सैकड़ों लोग कम्यून छोड़ कर यूरोप चले गए. कुछ दिनों के बाद रजनीश ने लोगों को संबोधित किया. उन्होंने अपने शिष्यों पर टेलीफ़ोन टैप करने, आगज़नी और सामूहिक तौर पर लोगों को ज़हर देने के आरोप लगाते हुए ख़ुद को निर्दोष बताया. उन्होंने कहा कि इन बातों की उन्हें कोई जानकारी नहीं थी.
सरकार ने रजनीश के कम्यून की जांच के आदेश दे दिए. जांच में कम्यून के अंदर सालमोनेला बैक्टीरिया पैदा करने वाली प्रयोगशाला और टेलीफ़ोन टैप करने के उपकरण पाए गए. रजनीश के शिष्यों पर मुक़दमा चला. उनके शिष्यों ने \'प्ली बारगेन\' के तहत कुछ दोष स्वीकार कर लिए. उनके तीन शिष्यों को जेल की सज़ा हुई. इसके साथ ही अमेरिका ने ओशो को भी भारत भेज दिया.

 
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Sam's Son

सिनेमा से पहले राष्ट्रगान बजाने का कॉन्सेप्ट यहां से आया है

कुछ दिन पहले नया नियम आया. सिनेमा देखने से पहले राष्ट्रगान सुनना ही होगा. पर ये नियम आया कहां से?
वहीं से, जहां से सिनेमा आया है.

ये कानून बनाया गया था ब्रिटिश राज में. पूरी दुनिया में अपनी कॉलोनी बना लिए थे. पर उनका कोई राष्ट्रगान नहीं था. वहां सुनाया जाता था गॉड सेव द क्वीन. हर फिल्म शुरू होने से पहले सुनाया जाता था. क्योंकि लोगों में ब्रिटिश क्वीन के प्रति निष्ठा जगानी थी. लोग इरिटेट होते थे. एक तो समझ नहीं आता था, दूसरे सुनना पड़ता था. मजबूरी में. तो भारत में ये इन्नोवेटिव कानून नहीं है. ब्रिटिश लीगेसी ही है जिसे बार-बार आजमाया जा रहा है.

आजाद भारत में 1962 में ये लागू किया गया था. क्योंकि भारत-चीन युद्ध चल रहा था. लोगों को मोटिवेशन की जरूरत थी. तो कुछ दिन तक खूब चला. फिर लोगों ने नियम की अवहेलना शुरू कर दी. तो नियम हटा लिया गया. बाद में 2002-03 में शरद पवार की नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के एक नेता ने कोर्ट में पेटीशन डाल-डाल के ये नियम पारित करा लिया. नियम क्या, कोर्ट का ऑर्डर था. तो महाराष्ट्र में तो बहुत पहले से आ गया था.

2016 में सुप्रीम कोर्ट के जज दीपक मिश्रा ने सबके लिए अनिवार्य कर दिया है. कुछ मामलों में छूट है. हालांकि कोई लड़ाई वगैरह नहीं चल रही. पर लोगों को लग रहा है कि ये अंतर्द्वंद्व चल रहा है लोगों के मन में तो देशभक्ति का सिंबल होना जरूरी है.

अमेरिका और ब्रिटेन वगैरह में तो ये साठ-सत्तर के दशक में ही खत्म हो गया था. लोग बातें करने लगते थे. फुटबॉल खेलने लगते थे. कोई अटेंशन में नहीं रहता था. लड़ाइयां खत्म हो गई थीं. अब हमेशा जुनून के प्रतीकों की जरूरत नहीं थी. तो लोग ध्यान नहीं देते थे.

पर इंडिया तो इंडिया है. हमारे यहां अब जा के इसको अनिवार्य किया गया है. देखते हैं कि कितना फर्क आता है. हालांकि ठीक ही है अगर जनता कोई चीज थोड़े डिसिप्लिन से करे. पर एक और बात है. राष्ट्रगान के कई वर्जन हैं. सियाचीन वर्जन. ए आर रहमान का वर्जन. इंडियन आयडल का वर्जन. और भी बहुत सारे वर्जन हैं. कोई फिक्स नहीं है. तो ये बड़ा मजेदार रहेगा कि कौन से थिएटर में कौन सा वर्जन बज रहा है.

 
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194 days
 
Sam's Son

"पानी पीने का सही वक़्त".

(1) 3 गिलास सुबह उठने के बाद,
.....अंदरूनी उर्जा को Activate
करता है...

(2) 1 गिलास नहाने के बाद,
......ब्लड प्रेशर का खात्मा करता है...

(3) 2 गिलास खाने से 30 Minute पहले,
........हाजमे को दुरुस्त रखता है..

(4) आधा गिलास सोने से पहले,
......हार्ट अटैक से बचाता है..

 
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698 days
 
Dev ;)

☞. *P D F* का मतलब है?
उत्तर:- *Portable Document Format.*

☞. *H T M L* का मतलब है?
उत्तर:- *Hyper Text Mark up Language.*

☞. *N E F T* का मतलब है?
उत्तर:- *National Electronic Fund Transfer.*

☞. *M I C R* का मतलब है?
उत्तर:- *Magnetic Inc Character Recognition.*

☞. *I F S C* का मतलब है?
उत्तर:- *Indian Financial System Code.*

☞. *I S P* का मतलब है?
उत्तर:- *Internet Service Provider.*

☞. *E C S* का मतलब है?
उत्तर:- *Electronic Clearing System.*

☞. *C S T* का मतलब है?
उत्तर:- *Central Sales Tax.*

☞. *CRR* का मतलब है?
उत्तर:- *Cash Reserve Ratio.*

☞. *U D P* का मतलब है?
उत्तर:- *User Datagram Protocol.*

☞. *R T C* का मतलब है?
उत्तर:- *Real Time Clock.*

☞. *I P* का मतलब है?
उत्तर:- *Internet Protocol.*

.☞. *C A G* का मतलब है?
उत्तर:- *Comptroller and Auditor General.*

.☞. *F E R A* का मतलब है?
उत्तर:- *Foreign Exchange Regulation Act.*

☞. *I S R O* का मतलब है?
उत्तर:- *International Space Research organization.*

☞. *I S D N* का मतलब है?
उत्तर:- *Integrated Services Digital Network.*
.
☞. *SAARC* का मतलब है?
उत्तर:- *South Asian Association for Regional co -operation.*

☞. *O M R* का मतलब है?
उत्तर:- *Optical Mark Recognition.*

☞. *A H R L* का मतलब है?
उत्तर:- *Asian Human Right Commission.*

☞. *J P E G* का मतलब है?
उत्तर:- *Joint photo Expert Group.*

☞. *U. R. L.* का मतलब है?
उत्तर:- *Uniform Resource Locator.*

☞. *I R D P* का मतलब है?
उत्तर:- *Integrated Rural Development programme.*

☞. *A. S. L. V.* का मतलब है?
उत्तर:- *Augmented satellite Launch vehicle.*

☞. *I. C. U.* का मतलब है?
उत्तर:- *Intensive Care Unit.*

☞. *A. T. M.* का मतलब है?
उत्तर:- *Automated Teller Machine.*

☞. *C. T. S.* का मतलब है?
उत्तर:- *Cheque Transaction System.*

☞. *C. T. R* का मतलब है?
उत्तर:- *Cash Transaction Receipt.*

☞. *N E F T* का मतलब है?
उत्तर:- *National Electronic Funds Transfer.*

☞. *G D P* का मतलब है?
उत्तर:- *Gross Domestic Product.*

☞. *F D I* का मतलब है?
उत्तर:- *Foreign Direct Investment .*

☞. *E P F O* का मतलब है?
उत्तर:- *Employees Provident Fund Organization.*

☞. *C R R* का मतलब है?
उत्तर:- *Cash Reserve Ratio.*

☞. *CFRA* का मतलब है?
उत्तर:- *Combined Finance & Revenue Accounts.*

☞. *GPF* का मतलब है?
उत्तर:- *General Provident Fund.*

☞. *GMT* का मतलब है?
उत्तर:- *Global Mean Time.*

☞. *GPS* का मतलब है?
उत्तर:- *Global Positioning System.*

☞. *GNP* का मतलब है?
उत्तर:- *Gross National Product.*

☞. *SEU* का मतलब है?
उत्तर:- *Slightly Enriched Uranium.*

☞. *GST* का मतलब है?
उत्तर:- गुड्स एण्ड सर्विस टैक्स *(Goods and ServiceTax).*

☞. *GOOGLE* का मतलब है?
उत्तर:- *Global Organization Of Oriented GroupLanguage Of Earth.*

☞. *YAHOO* का मतलब है?
उत्तर:- *Yet Another Hierarchical Officious Oracle .*

☞. *WINDOW* का मतलब है?
उत्तर:- *Wide Interactive Network Development forOffice work Solution .*

☞. *COMPUTER* का मतलब है?
उत्तर:- *Common Oriented Machine ParticularlyUnited and used under Technical and EducationalResearch.*

☞. *VIRUS* का मतलब है?
उत्तर:- *Vital Information Resources Under Siege.*

☞. *UMTS* का मतलब है?
उत्तर:- *Universal Mobile TelecommunicationsSystem.*

☞. *AMOLED* का मतलब है?
उत्तर:- *Active-matrix organic light-emitting diode.*

☞. *OLED* का मतलब है?
उत्तर:- *Organic light-emitting diode*

☞. *IMEI* का मतलब है ?
उत्तर:- *International Mobile EquipmentIdentity.*

☞. *ESN* का मतलब है?
उत्तर:- *Electronic Serial Number.*

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140 days
 
Anonymous

स्मार्ट सिटी ....

के 'आगाज' में खूबसूरत इंडिया हमारे देश के ज्यादातर अविकसित गांव कब संवरेंगे, उनकी तकदीर कब बदलेगी, इसकी तो उम्मीद नजर नहीं आती लेकिन देश के 13 शहरों का स्मार्ट होना अब तय हो गया है। इन 13 शहरों के स्मार्ट होने की उम्मीदों को पंख लग गए हैं।

केंद्र सरकार ने इन शहरों को स्मार्ट बनाकर खूबसूरत और विकसित बनाने की हुंकार भरी है। स्मार्ट सिटी परियोजना में सबसे ज्यादा फायदा उत्तर प्रदेश को हो रहा है। इस योजना के तहत राज्य में सबसे ज्यादा, यानी 13 स्मार्ट सिटी विकसित की जाएंगी। इसके बाद तमिलनाडु का नंबर है। तमिलनाडु में 12 और महाराष्ट्र में 10 स्मार्ट सिटी बनाई जाएगी। सरकार के मानदंड के मुताबिक बिहार में 3 स्मार्ट सिटी बनेंगे।

अब जान लेते हैं कि आखिर वो कौन से राज्य के कौन-कौन से शहर है जो स्मार्ट सिटी के सांचे में ढलेंगे। यूपी के शहर है- लखनऊ, इलाहाबाद, लखनऊ और वाराणसी। तमिलनाडु में चेन्नई, कोयंबटूर, मदुरै को इस सूची में शामिल किया गया है। गुजरात राज्य से अहमदाबाद, गांधी नगर ,सूरत और राजकोट को चुना गया है। अमृतसर , लुधियाना, जालंधर पंजाब के तीन शहर है जो स्मार्ट बनकर निखरेंगे। हरियाणा से गुड़गांव और फरीदाबाद, हिमाचल प्रदेश से शिमला और उत्तराखंड से हरिद्वार और रूड़की को स्मार्ट सिटी के लिस्ट में शामिल किया गया है।  

100 स्मार्ट सिटी का विकास, 500 नगरों के लिए अटल शहरी पुनर्जीवन एवं परिवर्तन मिशन (एएमआरयूटी) और 2022 तक शहरी क्षेत्रों में सभी के लिए आवास योजना शामिल हैं। तीन परियोजनाओं के परिचालन दिशानिर्देश, नियमों, लागू करने के ढांचे को केंद्र द्वारा राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, स्थानीय शहरी निकायों के साथ पिछले एक साल के दौरान की गई चर्चा के आधार पर तैयार की गई हैं। इन तीन बड़े शहरी परियोजनाओं को तैयार करने में प्रधानमंत्री खुद भी जुड़े रहे हैं। इसके लिए करीब 4 लाख करोड़ रुपये का केंद्रीय अनुदान तय किया गया है। पीएम मोदी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि स्मार्ट सिटी परियोजना किसी भी राज्य पर थोपी नहीं जाएगी। उस शहर के लोगों को खुद फैसला करना होगा।

इनके अलावा दिल्ली को एक स्मार्ट सिटी मिली है। मोदी सरकार ने जो मानदंड तय किया है उसके मुताबिक पश्चिम बंगाल और राजस्थान में चार-चार, बिहार, आंध्र प्रदेश और पंजाब में तीन-तीन, ओडिशा, हरियाणा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में दो-दो तथा जम्मू-कश्मीर, केरल, झारखंड, असम, हिमाचल, गोवा, अरुणाचल प्रदेश और चंडीगढ़ में एक-एक स्मार्ट सिटी विकसित की जाएंगी।

साथ ही जहां दो बड़े शहरों के बीच में जगह खाली है उन इलाकों को भी स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित किया जा सकता है। शहरी विकास मंत्री वेंकैया नायडू के मुताबिक स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लागू करना चुनौतीपूर्ण होगा और किसी भी इलाके को स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित करने में 10 से 15 साल का वक्त लग सकता है। इन इलाकों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत विकसित किया जाएगा। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत जिन शहरी इलाकों को शामिल किया जाएगा वहां 24 घंटे बिजली और पानी की व्यवस्था होगी, शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाएं होंगी। साइबर−कनेक्टिवीटी और ई-गवर्नेन्स की सुविधा होगी, हाईटेक ट्रांसपोर्ट नेटवर्क बहाल किया जाएगा और नालियों और कचरा निबटान का 100 फीसदी इंतजम होगा।

आईए अब जरा ग्लोबल चश्मे से यह देखने की कोशिश करते है कि स्मार्ट सिटी का आखिर मतलब है क्या। स्मार्ट सिटी यानी वो शहर है जहां हर बुनियादी सुविधाएं मौजूद हो। जो विकास के सांचे में हर पैमाने पर ढला हो। जहां शहर बसाने के लिए पर्यावरण के नाम पर अनावश्यक छेड़छाड़ ना किया गया हो। शहरी आबोहवा के लिए हर सुविधा आसानी से मौजूद हो जो एक आम जिंदगी की रोजमर्रा की जरूरत हो। स्मार्ट सिटी की लिस्ट में पहले पायदान पर है बार्सिलोना। यह स्पेन का शहर जिसकी आबादी 16 लाख से ज्यादा है। स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी वाला शहर न्यूयॉर्क स्मार्ट सिटी की लिस्ट में दूसरे पायदान पर है। यूरोपियन शैली की शानदार इमारतों का शहर और यूरोप का दूसरा सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर लंदन इस लिस्ट में तीसरे पायदान पर आता है।

तकनीक, बिल्डिंग, सार्वजनिक सुविधाएं, बुनियादी सुविधाएं, सड़क और परिवहन, रोजगार जैसे कुछ अहम मसले होते है जो एक स्मार्ट सिटी की बुनियाद रखते है। इन तमाम कसौटियों पर परखे जाने के बाद ही एक शहर को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलता है। निवासियों के रहन-सहन का स्तर, उन्हें मिलने वाली सुविधाएं, टेक्नोलॉजी का बेहतर इस्तेमाल जैसी कई चीजें मिलकर एक शहर को स्मार्ट बनाती हैं। जिसमें उसकी आर्थिक विकास और तकनीकी तरक्की का भी भरपूर योगदान होता है। यह भी तय है कि अगर नरेंद्र मोदी सरकार दुनिया की इन स्मार्ट सिटी को आधार बनाकर स्मार्ट सिटी बनाएगी तो हमारे शहर भी दुनिया के बेहतरीन शहरों को टक्कर देंगे।
 
जाहिर है इन तमाम कसौटियों पर परखे जाने के बाद ही एक शहर को स्मार्ट सिटी का दर्जा मिलता है। स्मार्ट का मतलब किसी शहर की आर्थिक तरक्की या तकनीकी तरक्की कतई नहीं है। बल्कि निवासियों के रहन-सहन का स्तर, उन्हें मिलने वाली सुविधाएं, टेक्नोलॉजी का बेहतर इस्तेमाल जैसी कई चीजें मिलकर एक शहर को स्मार्ट बनाती हैं। ऐसे में सवाल ये कि क्या नरेंद्र मोदी सरकार की स्मार्ट सिटी योजना में शामिल शहरों को इन कसौटियों पर कसा जाएगा। अगर मोदी सरकार दुनिया की इन स्मार्ट सिटी को आधार बनाते हुए स्मार्ट सिटी बनाएगी तो हमारी शहर भी दुनिया के बेहतरीन शहरों को टक्कर देंगे।

सबसे बड़ी अहम बात तो यह भी है कि योजनाएं सिर्फ कागजों पर नहीं बनाई जा सकती। रुपरेखा और बेसिक ड्राफ्ट तो कागजों पर ही होता है। लेकिन उसके बाद जमीनी पहल सबसे अहम होता है। योजनाओं के लिए बनाई गई रूपरेखा पर किस प्रकार तय सीमा के अंदर उसपर अमल होता है। जमीनी कामयाबी के लिए कई चीजें जरूरी होती है और इस योजना में यह साफ दिख रहा है कि केंद्र सरकार की यह खूबसूरत पहल राज्य सरकार की भागीदारी के बगैर रंग नहीं ला पाएगी। ऐसे में सरकारी एजेंसियों का तालमेल जरूरी है और उससे भी बड़ी जरूरत है योजना के तहत आनेवाली हर बाधा का त्वरित निराकरण, तभी देश में स्मार्ट सिटी का सपना सच हो पाएगा॥

 
197
 
700 days
 
Heart catcher

Explosion from the first nuclear weapon test at Trinity was so bright that Georgia Green, a blind woman almost 50 miles away, asked her brother
"What's that light?"

 
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592 days
 
Dev ;)

25 अजब गजब तथ्य =
1. 1903 में जब व्यापार का पहला साल था, तो Gillette कंपनी के सिर्फ 168 ब्लेड बिके थे. जबकि आज ये सबसे बड़ी ब्लेड कंपनी है.
2. हर 594 लोगों में से 1 आदमी ऐसा है जिसके पास $10 लाख है. दुनिया में केवल 1826 अरबपति है (रिपोर्ट: डाॅलर में)
3. आज तक के सभी फोटो के 10%, पिछले 12 महीने में खींचे गए है.
4. दुनिया की सभी बैटरियों में करीब इतनी बिजली है कि 10 मिनट तक दुनिया चल जाए.
5. दुनिया में अकेले कोकिन (एक ड्रग्स) की इतनी बिक्री है कि जितनी माइक्रोसाॅफ्ट, मैक्डोनाल्ड और कैल्लोग्ग (अमेरिकी फूड कंपनी) तीनों की मिलाकर भी नही है.
5. यदि तुम साल के $21,000 (14 लाख रूपए) कमाते हो तो इसका मतलब धरती के 4% अमीर लोगो में से हो.
6. एक मोबाइल फोन बनाने की तकनीक 2,50,000 अलग-अलग पेंटेंट पर निर्भर करती है.
7. ब्लू व्हेल अपने मुँह में इतना पानी ले सकती है जितना उसके पूरे शरीर में वजन है.
8. 2520 ऐसा सबसे छोटा नंबर है जो 1 से 10 तक सभी नंबरों से भाग होता है.
9. दुनिया का 95% डाटा कागज पर लिखा हुआ है और उसमें ज्यादातर दोबारा कभी नही देखा गया.
10. कुल जनसंख्या का हिसाब देखा जाए, तो लेखक और कलाकार के आत्महत्या करने के चांस 18 गुना ज्यादा है.
11. CIA (अमेरिका खुफ़िया एजेंसी) हर रोज लगभग 50 लाख ट्वीट बढ़ती है.
12. बाकियों की तुलना में हमारी पहली ऊंगली सबसे ज्यादा संसिटिव होती है.
13. यदि आपको किसी का ड्राइविंग लाइसेंस मिल जाता है तो उसे मेल बाॅक्स में डाल दें. डाकखाने वाले अपने आप उसे सही पते पर पहुंचा देंगे.
14. हमारी एक आइब्रो (सेली) में लगभग 550 बाल होते है.
15. 56% टाइपिंग उल्टे हाथ से पूरी की जाती है.
16. दुनिया के 80% millionare (65 लाख रूपए से ऊपर वाले) second-hand गाड़ी चलाते है.
17. शरीर के किसी ओर हिस्से की बजाय जीभ पर लगी चोट सबसे जल्दी ठीक होती है.
18. आपकी आंखे हर समय आपकी नाक को देखती रहती है लेकिन दिमाग उसे इग्नोर कर देता है.
19. Doorbell (बाहर दरवाजें पर लगी घंटी) का अविष्कार सन् 1831 में किया गया था.
20. जो पानी हम पी रहे है वह 3 अरब साल पुराना है.
21. जिसने रूबिक क्यूब बनाया था उसने शुरू का एक महीना उसे हल करने में लगाया था. उसके बाद दुनिया को बताया.
22. दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले इंगलैंड, कनाडा और इटली के छोटे बच्चे सबसे ज्यादा रोते है.
23. अमेरिका में करीब हर आदमी के पास 2 credit cards है.
24. अब दुनिया में इतना भोजन तो पैदा होने लगा है कि एक भी आदमी भूखा न रहें. लेकिन ऐसा संभव नही हो रहा.
25. दुनिया में केवल 8 आदमी ऐसे बचे हुए है जो 1800s (मतलब 1800 से 1899 के बीच) में पैदा हुए थे. जब ये मर जाएगे तो सभी 1900s (1900 के बाद) वाले रह जाएगे.

 
155
 
54 days
 
Raaz
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