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Vastu tips :-

[1] मुख्य द्वार के पास कभी भी कूड़ादान ना रखें इससे पड़ोसी शत्रु हो जायेंगे |

[२] सूर्यास्त के समय किसी को भी दूध,दही या प्याज माँगने पर ना दें इससे घर की बरक्कत समाप्त हो जाती है |

[३] छत पर कभी भी अनाज या बिस्तर ना धोएं..हाँ सुखा सकते है इससे ससुराल से सम्बन्ध खराब होने लगते हैं |

[४] फल खूब खाओ स्वास्थ्य के लिए अच्छे है लेकिन उसके छिलके कूडादान में ना डालें वल्कि बाहर फेंकें इससे मित्रों से लाभ होगा |

[५] माह में एक बार किसी भी दिन घर में मिश्री युक्त खीर जरुर बनाकर परिवार सहित एक साथ खाएं अर्थात जब पूरा परिवार घर में इकट्ठा हो उसी समय खीर खाएं तो माँ लक्ष्मी की जल्दी कृपा होती है |

[६] माह में एक बार अपने कार्यालय में भी कुछ मिष्ठान जरुर ले जाएँ उसे अपने साथियों के साथ या अपने अधीन नौकरों के साथ मिलकर खाए तो धन लाभ होगा |

[७] रात्री में सोने से पहले रसोई में बाल्टी भरकर रखें इससे क़र्ज़ से शीघ्र मुक्ति मिलती है और यदि बाथरूम में बाल्टी भरकर रखेंगे तो जीवन में उन्नति के मार्ग में बाधा नही आवेगी |

[८] वृहस्पतिवार के दिन घर में कोई भी पीली वस्तु अवश्य खाएं हरी वस्तु ना खाएं तथा बुधवार के दिन हरी वस्तु खाएं लेकिन पीली वस्तु बिलकुल ना खाएं इससे सुख समृद्धि बड़ेगी |

[९] रात्रि को झूठे बर्तन कदापि ना रखें इसे पानी से निकाल कर रख सकते है हानि से बचोगें |

[१०] स्नान के बाद गीले या एक दिन पहले के प्रयोग किये गये तौलिये का प्रयोग ना करें इससे संतान हठी व परिवार से अलग होने लगती है अपनी बात मनवाने लगती है अतः रोज़ साफ़ सुथरा और सूखा तौलिया ही प्रयोग करें |

[११] कभी भी यात्रा में पूरा परिवार एक साथ घर से ना निकलें आगे पीछे जाएँ इससे यश की वृद्धि होगी |
ऐसे ही अनेक अपशकुन है जिनका हम ध्यान रखें तो जीवन में किसी भी समस्या का सामना नही करना पड़ेगा तथा सुख समृद्धि बड़ेगी |
Kuchh vaastu tips🔴🔴🔴🔴
💥१. घर में सुबह सुबह कुछ देर के लिए भजन अवशय लगाएं ।
💥२. घर में कभी भी झाड़ू को खड़ा करके नहीं रखें, उसे पैर नहीं लगाएं, न ही उसके ऊपर से गुजरे अन्यथा घर में बरकत की कमी हो जाती है। झाड़ू हमेशा छुपा कर रखें |
💥३. बिस्तर पर बैठ कर कभी खाना न खाएं, ऐसा करने से धन की हानी होती हैं। लक्ष्मी घर से निकल जाती है1 घर मे अशांति होती है1
💥४. घर में जूते-चप्पल इधर-उधर बिखेर कर या उल्टे सीधे करके नहीं रखने चाहिए इससे घर में अशांति उत्पन्न होती है।
💥५. पूजा सुबह 6 से 8 बजे के बीच भूमि पर आसन बिछा कर पूर्व या उत्तर की ओर मुंह करके बैठ कर करनी चाहिए । पूजा का आसन जुट अथवा कुश का हो तो उत्तम होता है |
💥६. पहली रोटी गाय के लिए निकालें। इससे देवता भी खुश होते हैं और पितरों को भी शांति मिलती है |
💥७.पूजा घर में सदैव जल का एक कलश भरकर रखें जो जितना संभव हो ईशान कोण के हिस्से में हो |
💥८. आरती, दीप, पूजा अग्नि जैसे पवित्रता के प्रतीक साधनों को मुंह से फूंक मारकर नहीं बुझाएं।
💥९. मंदिर में धूप, अगरबत्ती व हवन कुंड की सामग्री दक्षिण पूर्व में रखें अर्थात आग्नेय कोण में |
💥१०. घर के मुख्य द्वार पर दायीं तरफ स्वास्तिक बनाएं |
💥११. घर में कभी भी जाले न लगने दें, वरना भाग्य और कर्म पर जाले लगने लगते हैं और बाधा आती है |
💥१२. सप्ताह में एक बार जरुर समुद्री नमक अथवा सेंधा नमक से घर में पोछा लगाएं | इससे नकारात्मक ऊर्जा हटती है |
💥१३. कोशिश करें की सुबह के प्रकाश की किरणें आपके पूजा घर में जरुर पहुचें सबसे पहले |
💥१४. पूजा घर में अगर कोई प्रतिष्ठित मूर्ती है तो उसकी पूजा हर रोज निश्चित रूप से हो, ऐसी व्यवस्था करे |

"पानी पीने का सही वक़्त".
(1) 3 गिलास सुबह उठने के बाद,
.....अंदरूनी उर्जा को Activate
करता है...
(2) 1 गिलास नहाने के बाद,
......ब्लड प्रेशर का खात्मा करता है...
(3) 2 गिलास खाने से 30 Minute पहले,
........हाजमे को दुरुस्त रखता है..
(4) आधा गिलास सोने से पहले,
......हार्ट अटैक से बचाता है..

 
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851 days
 
Shubhiii

ये हैं वो आठ योगी महापुरुष जो आज भी जीवित और अमर माने जाते हैं..

1. भगवान हनुमान - अंजनी पुत्र हनुमान जी को अजर और अमर रहने के वरदान मिला है तथा इन की मौजूदगी रामायण और महाभारत दोनों जगह पर पाई गई है.रामायण में हनुमान जी ने प्रभु राम की सीता माता को रावण के कैद से छुड़वाने में मदद की थी और महाभारत में उन्होंने भीम के घमंड को तोडा था. सीता माता ने हनुमान को अशोक वाटिका में राम का संदेश सुनाने पर वरदान दिया था की वे सदेव अजर-अमर रहेंगे. अजर-अमर का अर्थ है की उनकी कभी मृत्यु नही होगी और नही वे कभी बूढ़े होंगे. माना जाता है की हनुमान जी इस धरती पर आज भी विचरण करते है.

2. अश्वत्थामा - अश्वत्थामा गुरु द्रोणाचर्य के पुत्र है तथा उनके मष्तक में अमरमणि विध्यमान है. अश्वत्थामा ने सोते हुए पांडवो के पुत्रो की हत्या करी थी जिस कारण भगवान कृष्ण ने उन्हें कालांतर तक अपने पापो के प्रायश्चित के लिए इस धरती में ही भटकने का श्राप दिया था. हरियाणा के करुक्षेत्र और अन्य तीर्थ में उनके दिखाई दिए जाने के दावे किये जाते है तथा मध्यप्रदेश के बुराहनपुर में उनके दिखाई दिए जाने की घटना प्रचलित है.

3. ऋषि मार्कण्डेय - ऋषि मार्कण्डेय भगवान शिव के परम भक्त है. उन्होंने भगवान शिव की कठोर तपश्या द्वारा महामृत्युंजय तप को सिद्ध कर मृत्यु पर विजयी पा ली और चिरंजीवी हो गए.

4. भगवान परशुराम -परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते है. परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि और माता का नाम रेणुका था. परशुराम का पहले नाम राम था परन्तु इस शिव के परम भक्त थे. उनकी कठोर तपश्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें एक फरसा दिया जिस कारण उनका नाम परशुराम पड़ा.

5. कृपाचार्य -कृपाचार्य शरद्वान गौतम के पुत्र है. वन में शिकार खेलते हुए शांतून को दो शिशु मिले जिनका नाम उन्होंने कृपि और कृप रखा तथा उनका पालन पोषण किया. कृपाचार्य कौरवो के कुलगुरु तथा अश्वत्थामा के मामा है. उन्होंने महाभारत के युद्ध में कौरवो को साथ दिया.

6. विभीषण - विभीषण ने भगवान राम की महिमा जान कर युद्ध में अपने भाई रावण का साथ छोड़ प्रभु राम का साथ दिया. राम ने विभीषण को अजर-अमर रहने का वरदान दिया था.

7. वेद व्यास - ऋषि व्यास ने महाभारत जैसे प्रसिद्ध काव्य की रचना करी है. उनके द्वारा समस्त वेदो एवं पुराणो की रचना हुई. वेद व्यास, ऋषि पाराशर और सत्यवती के पुत्र है. ऋषि वेदव्यास भी अष्टचिरंजीवियो में सम्लित है.

8. राजा बलि - राजा बलि को महादानी के रूप में जाना जाता है. उन्होंने भगवान विष्णु के वामन अवतार को अपना सब कुछ दान कर दिया अतः भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल का राजा बनाया और अमरता का वरदान दिया. राजा बलि प्रह्लाद के वंशज है l


#शिवाराधना से दैत्यगुरु शुक्राचार्य को संजीवनी विद्या की प्राप्ति

एक बार दैत्यों के आचार्य शुक्र को अपने शिष्यों दानवों का पराभव देखकर बहुत दुख हुआ और उन्होंने तपस्यों बल से देवों को हराने की प्रतिज्ञा की तथा वे अर्बुद पर्वत पर तपस्या करने चले गए। वहां उन्होंने भूमि के भीतर एक सुरंग में प्रवेश कर \'शुक्रेश्वर\' नामक शिव लिंग की स्थापना की और प्रतिदिन श्रद्धाभक्तिपूर्वक षोडशोपचार से भगवान शंकर की अर्चना करने लगे। अनाहार और अनन्यमनस्क होकर वे परम दारुण तप करने लगे । इस प्रकार तप करते- करते जब उनके एक सहस्त्र बीत गए, तब श्रीमहादेव ने उन्हें दर्शन देकर कहा- हे द्विजोत्तम! मैं तुम्हारी आराधना से परम संतुष्ट हूं, जो वर मांगना चाहो, मांगो शुक्राचार्य ने हाथ जोड़कर प्रार्थना की-
यदि तुष्टो महादेव विद्यां देहि महेश्वर।
यया जीवंति संप्रासा मृत्युं संख्येऽपि जन्तव:।।
स्कंदपुरायण, प्रभासखंड, अर्बुदखंड
\'हे महेश्वर महादेव, यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे वह विद्या दीजिए जिससे युद्ध में भी मरे हुए प्राणी जीवित हो जाएं\',
भगवान शंकर ने प्रसन्नपूर्वक मृत्यु पर विजय प्राप्त कराने वाली तथा मृत प्राणी को भी जीवित कर लेने की शक्ति वाली संजीवनी -विद्या वर के रूप में उन्हें प्रदान की और कहा कि तुम्हें और कुछ मांगना हो तो वह भी मांग लो। तब उन्होंने कहा कि \'महाराज! कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को जो इन शुक्रेश्वर का भक्ति पूर्वक अर्चन करे, उसे अल्पमृत्यु का कभी भय न हो।\' महादेव जी ने तथास्तु कहकर कैलास की ओर प्रयाण किया । वर के प्रभाव से शुक्राचार्य युद्ध में मरे हुए असंख्य दैत्यों को फिर से जिला लेते थे, जिससे दैत्यों को पराजित करना देवों के लिए कठिन हो गया।
इस शुक्रतीर्थ में पितरों की श्राद्धदि क्रिया करने से पितृगण संतुष्ट होते हैं। यहां स्नान करने से एवं शुक्रेश्वर के अर्चन से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है और उसे अल्पमृत्यु का भय कभी नहीं होता, सुख मिलते हैं और वह अंत में शिवलोक को प्राप्त कर शिवगणों के साथ आनंद भोगता है ।

 
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DelhiDude

Eating chocolate while studying will help the brain retain new information more easily, and has been directly linked to higher test score

 
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Anonymous

रेलवे संबंधी कुछ जानकारियाँ1. भारतीय रेलवे की स्थापना कब हुई - 16 अप्रैल 18532.भारत की पहली रेल कब और कहाँ चली - 16 अप्रैल 1853 को मुंबई से ठाणे तक3.भारत की पहली रेल ने मुंबई से ठाणे तक कितनी दूरी तय की थी- 34 कि.मी.4.भारतीय रेलवे का मुख्यालय कहाँ स्थित है - नई दिल्ली में5.भारतीय रेलवे पर किसका एकाधिकार है - भारत सरकार का6.भारतीय रेलवे को कितने जोन में बांटा गया है - 17 जोन7.किस रेल का रूट सबसे लम्बा है - विवेक एक्सप्रेस8.रेलवे स्टाफ कोलेज कहाँ पर स्थित है - वडौदरा में9.भारत में सबसे पहले रेलवे टाईमटेबल किसने बनाया था - जार्ज ब्रैडशा ने10.भारत का सबसे बडा रेलवे जंक्शन कहां पर स्थित है - मथुरा में11.भारत का सबसे बडा रेलवे प्लेटफार्म कहां पर स्थित है - गोरखपुर में12.भारत के आजाद होने के बाद सबसे पहला रेल मंत्री कौन बना - जोन मथाई13. ब्राड गेज रेल की चौडाई कितनी है - 1.676 मीटर15.भारत की पहली विधुत रेल कौन सी थी - डेक्कन क्वीन (कल्याण से पुणे)16.भारतीय रेलवे ने किस साल कोYear of Rail Usersघोषित किया था - 1995 को17.भारत का सबसे लंबा रेलवे ट्यूनल कौन सा है - पीर पंजल रेलवे ट्यूनल18.मैत्री एक्सप्रेस किन दो देशो के मध्य चलती है - भारत और बंगलादेश19.भारत की सबसे तेज ट्रेन कौन सी है - शताब्दी एक्सप्रेस20.रेलवे बोर्ड कब स्थापित किया गया था - 1905 मे22.भारत की पहली महिला रेल मंत्री कौन थी - ममता बैनर्जी23.भारतीय रेलवे का एशिया में कौन सा स्थान है - पहला24. भारतीय रेलवे का विश्व में कौन सा स्थान है - दूसरा25.भारत की पहली रेलवे सुरंग का क्या नाम था - पारसिक रेलवे26.भारत का सबसे बडा रेलवे यार्ड कहां पर स्थित है - मुगल सराय27.भारत का सबसे लंबा रेलवे पूल कौन सा है - नेहरू सेतु28.भारत का सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशन कौन सा है - लखनऊ29.भारत की पहली मैट्रो ट्रेन कहाँ चली - कोलकाता30.भारतीय रेलवे म्यूजियम कहाँ पर स्थित है - चाणक्यापुरी (नई दिल्ली)31.भारत का पहला कम्पयुट्रीकृत आरक्षण कहाँ शुरू हुआ - नई दिल्ली32.जीवन रेखा एक्सप्रेस कब शुरू हुई - 1991 में33.भारत के किन राज्यों में रेलवे सुविधा नही है - मेघालय और सिक्किम34.रेल बजट पेश करने वाला पहला भारतीय - जोन मथाई35 .भारत का सबसे लबां रेलवे ब्रिज कौन सा है - वल्लरपडम (केरला)36.भारतीय रेलवे का स्लोगन क्या है - लाईफ लाईन आफ द नेशन37.रेल कोच फैक्टरी आर. एस. एफ. कहां पर स्थित है - कपूरथला38.रेल व्हील फैक्टरी कहां पर स्थित है - यालाहकां (बैंगलुरू)39.डिजल लोकोमोटिव मोडरनीजेशन वर्कस कहां पर स्थित है - पटियाला (पजांब)40.इंटिगर्ल कोच फैक्टरीआई. सी. एफ. कहां पर स्थित है - चेन्नई41.पी. एन. आर. की फुल फार्म क्या है - पैसेजंर नेम रिकार्ड42.आई. आर. सी. टी. सी. की फुल फार्म क्या है - इंडियन रेलवे केटरिंग एडं टूरिज्म कारपोरेशन43.टी. टी. ई. की फुल फार्म क्या है - ट्रैवलिगं टिकट एग्जेमिनर44.आई. आर. एस. की फुल फार्म क्या है - इंडियन रेलवे स्टैंडर्ड45.टी. एम. एस. की फुल फार्म क्या है - ट्रेन मैनेजमेंट सिस्टम46.आर. पी. एफ. की फुल फार्म क्या है - रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स47.पी. आर. एस. की फुल फार्म क्या है - पैसेजंर रिजर्वेशन सिस्टम48.आर. आर. बी. की फुल फार्म क्या है - रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड49.आर. आर. एफ. की फुल फार्म क्या है - रेलवे रिर्जवेशन फोर्म50.आई. वी. आर. एस. की फुल फार्म क्या है - इंटरेक्टिव वायस रिस्पोंस सिस्टम

 
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Just4u

iGyan


Your nose is connected to your memory center; that's why smells trigger powerful memories.

 
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Kashyap 139.94

"You can not FIX a match"

"Untill & unless SACHIN TENDULKAR is out"

This is what A BOOKIE SAID TO CBI OFFICERS during THE MATCH FIXING SCANDAL IN 2000🏏🇮🇳

 
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Shubhiii

On 4th September there was a seminar in Delhi on the subject : Fever cure in 72 hours , where the key speaker on the topic was Dr. Biswaroop Roy Choudhury. In the seminar he stressed upon the fact that how much ignorant the common public is about the topic and how the doctors, at large, are making money out of the ignorance and fear in minds of the patients and their attendants.

He stressed that nowadays Dengue and chikengunia are the two types of viral fever, commonly prevalent and hospitals are running out of beds in Delhi NCR and other areas. He educated that the Virus hide between the cells and are not present in the blood stream and so they cannot be destroyed through medicines because the medicine work through blood only. Our body, which is a super computer, has its own mechanism to fight the virus. It raises its temperature beyond normal level to fight the bacteria/ virus. This causes us discomfort and dis-ease and we go to doctor for treatment. The doctor gives us medicine for fever and as the temperature comes down, the mechanism of the body is hampered and the virus is escaped and it remains inside the body and attacks again after some time.

Whenever there is any viral or bacterial attack body raises its temperature, throws out body waste in the form of loose motion, vomiting, cold and cough etc. and by taking medicine to control these conditions we simply harm our body.

Then question arises what to do in this situation. Dr Choudhury told that we have to monitor the body temperature and as it goes beyond 102.2 degree, we have to administer cold compress on head and calf muscles till the temperature comes down. Cold compress means, take four small towels and dip them into ice cold water, squeeze it and place it on head and one each on calf muscles after ecery 2-3 minutes, till the time the temperature comes to normal.
No medicine is to be taken in such scenario. He has formulated a three day diet chart for the patient, to follow and by doing this the patient will surely be cured. The diet plan is as under :-

Day-1.- divide your weight by 10 and that much number glasses of Mosumbi juice and equal quantity of Coconut water to be taken throughout the whole day. If the patient is 60 kg of weight then he must take 06 glasses of both the juices and no solid food.

Day-2. divide your weight by 20 and that much glasses of mosumbi juice and equal quantity of coconut water and weight X 5 grams of tomato + cucumber.

Day-3. divide your Weight by 30 and that much glasses of mosumbi juice and equal quantity of coconut water and weight X 5 grams of tomato + cucumber in lunch and normal home cooked food for dinner.

By taking these steps we can successfully cure any kind of viral/ bacterial fever in three days, without causing any harm to the body and without interrupting the body mechanism.
We need not panic during fever, cough/ cold/ vomiting/ loose motions but we must monitor the temperature and manage it as discussed above and supply sufficient fluids as discussed above. When we go to doctor/hospital they prescribe unnecessary test/ diagnostics to make money out of our fear and ignorance. The need of the hour is to educate ourselves and others also. Rest the body will do at its own.

Phone number of Doctor Biswaroop Roy Chodhury is 9312286540.
All the Best. Stay healthy and fit. Please do Yoga and Pranayam everyday to remain healthy and medicine/ doctor free for at least 100 years of age, as our ancestors used to live.

 
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738 days
 
Jasmine

ये थे भारत के दुर्दांत ठगों के 3 पक्के उसूल

क्या मैं एक शानदार पति और जानदार दोस्त नहीं रहा हूं? क्या मैंने अपने समाज, अपनी कौम से धोखा किया है? कौन सा रिवाज मैंने नहीं पूरा किया है? कौन है वो आदमी जो आमिर अली के नाम पर बट्टा लगा रहा है? जिसने भी मेरे सम्मान पर उंगली उठाई है, वो बचेगा नहीं. जो नाम मैंने कमाया है, उसे हासिल करने के लिए लोग तरसते हैं.
ये बुलंद आवाज निकली थी आमिर अली की जबान से. ब्रिटिश राज के कोर्ट में. आमिर पर मुकदमा चल रहा था 700 लोगों की हत्या का. आमिर ने कहा था कि अगर जेल नहीं आया होता, तो हज़ार लोगों को तो मार ही दिया होता.

पर अपने डिफेन्स में कही आमिर की सारी बातें सही हैं. वो एक बेहद चालाक और मजबूत आदमी. अपनी बात का पक्का. इरादों में चट्टान. जन्मजात नेता. और एक वहशी हत्यारा. पर हत्या को वो हत्या नहीं मानता था. ये उसके लिए मां काली का आशीर्वाद था. ये वही चीज थी, जिसे आज के ज़माने में लोग \'खुद को खोजने\' के नाम से जानते हैं. दस साल की उम्र में ही आमिर ने खुद को खोज लिया था.
आमिर अली एक ठग था. ब्रिटिश राज का सबसे मशहूर ठग. शायद ठगी के 600 सालों का सबसे मशहूर.

600 साल के इतिहास में ठगों ने हर साल 50 हज़ार से 2 लाख तक लोगों को मारा था

बारहवीं शताब्दी से भारत में मुस्लिम शासक जम चुके थे. अब वो यहीं के हो के रह गए थे. उत्तर भारत और दक्षिण भारत के बीच व्यापार भी काफी बढ़ने लगा था. लोग इधर-उधर आने-जाने लगे थे. उसी दौरान मध्य प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक के इलाकों में ठग पैदा हुए. बाद में ये देश के हर भाग तक फ़ैल गए. ये ठग धर्म से हिन्दू और मुसलमान दोनों होते थे. पर ये धर्म सिर्फ उनके घर पर था. उनके प्रोफेशनल जीवन में ठगी ही धर्म होता था.

ठग मां काली को मानते थे. उनका मानना था कि मां काली ने ठगों को हत्या के लिए ही पैदा किया है. कहानी के मुताबिक धरती पर अनैतिकता बहुत ज्यादा बढ़ गई थी. काली ने ठगों को धरती पर भेजा ऐसे लोगों को मारने के लिए. हाथ में रुमाल देकर. इसी रुमाल से लोगों का गला घोंट दिया जाता था. ठगों ने सबको मार दिया. फिर काली ने इनको कहा कि तुम्हें धरती पर ही रहना है. ऐसे लोग आते रहेंगे. और आपको मारते रहना है. ये लोग ठगी पर जाने से पहले मां काली का इशारा खोजते थे. कहीं मंदिर के पास गधा दिख गया या बिल्ली दिख गई तो इसे शकुन माना जाता था. अगर शकुन ना हुआ तो ये लोग आगे नहीं बढ़ते थे. अंग्रेजों के एक अनुमान के मुताबिक ठग हर साल 50 हज़ार से लेकर 2 लाख तक लोगों को मार देते थे. हालांकि ये अनुमान अंग्रेजों ने बहुत बढ़ा-चढ़ाकर भी लगाया होगा ताकि जनता में अंग्रेजी राज के प्रति सहानुभूति बनी रहे. क्योंकि ठग तो वो लोग भी थे!

पूरा माफिया जैसा प्लान कर के काम होता था

इनके काम करने का तरीका बहुत ही खतरनाक था. ये झुंड में चलते. धनी यात्रियों की तरह. उस वक़्त ठगों के डर से कोई भी अकेले यात्रा नहीं करता था. हमेशा ग्रुप में चलते. ठग अपने लोगों से धनी लोगों के बारे में पता करते. फिर उनके ग्रुप में शामिल हो जाते. बड़े प्यार से बातें करते. सबके दिल का हाल लेते. भरोसा बनाते. लोग इन पर भरोसा कर अपने बच्चों को इनके पास छोड़ देते. अपने सुख-दुःख शेयर कर लेते. फिर जब सारे लोग अलसाये से हो जाते, ठग एक-एक इंसान के पीछे लग जाते. जब वो इंसान दुनिया से बेखबर, अपने साथियों की तरफ से निःशंक, अपनी यात्रा और अपने प्लान से खुश रहता, उसी वक़्त ये ठग उनके कंठ पर रुमाल लपेट के गला घोंट देते. गला घोंटने से पहले एक सिग्नल दिया जाता. चलो पान खाते हैं. बुलावा आ गया. मौसम का मिजाज कैसा है. बहुत सारे यात्री ठगों के इस सिग्नल की कहानियां सुन चुके रहते थे. वो थर्रा जाते. पर बच नहीं पाते. मारने के बाद सारे लोगों को दफना दिया जाता था. पर एक दिक्कत आती थी कि दबी लाश फूल जाती और सियार खोद-खोद के खाने लगते. इसके लिए दफ़नाने से पहले लाश का पेट फाड़ दिया जाता था.

ठगी के कुछ उसूल भी थे:

1. इसमें औरत हो या बच्चा, किसी को भी नहीं छोड़ा जाता था. किसी के नाम पर फरमान निकल गया, तो फिर उसे मरना ही है. चाहे उसके पास पैसा हो या नहीं.

2. पर किसी भी औरत से छेड़खानी या रेप नहीं होता था. क्योंकि ये ठगी के उसूलों से बाहर था.

3. अगर किसी ठग की पहचान पब्लिक में हो गई, तो साथी ही उसे मार देते थे. क्योंकि पहचान छुपा के रखना बहुत जरूरी था.

ठगों में अलग-अलग पोस्ट भी होते थे

ठगों में सबके काम बंटे हुए थे. हर कोई गला घोंटने का काम नहीं कर सकता था. इसके लिए खुद को साबित करना पड़ता था. क्योंकि शिकार हमेशा कमजोर नहीं होता था. और रुमाल से गला घोंटने के लिए ताकत के साथ चालाकी भी चाहिए होती थी. तो ये पोस्ट थे ठगों के:

1. सोथा किसी यात्री ग्रुप से बात करने जाते थे. ये बड़े चालाक होते थे. हर जगह की भाषा-संस्कृति, खान-पान से परिचित होते थे. आज भी ऐसे लोग मिल जाते हैं जो बात-बात में अपनी रिश्तेदारी निकाल लेते हैं.

2. भुट्टोटे होते थे गला घोंटने वाले. सीनियर मोस्ट ठग. सिग्नल मिलते ही पीछे से जाकर गला घोंट देते. दो असिस्टेंट आ जाते शिकार के हाथ-पैर पकड़ने के लिए.

3. बेल्हा कब्र खोदते थे. जब ठगी का प्लान हो जाता, तो जगह से कुछ दूरी पर जाकर फटाफट कब्र खोद देते थे.

4. अंत में लुघाई आते थे. ये लाशों को दफ़न करने के एक्सपर्ट थे. पूरे काम के दौरान बाकी यात्रियों के साथ आराम फरमा रहे होते. क़त्ल होते ही हरकत में आ जाते.

☝🏽☝🏽आमिर खान और अमिताभ बच्चन की फिल्म आ रही है Thugs of Hindostan जो आमिर अली की कहानी पर बनी है. ये कहानी फिलिप मिडोज टेलर की लिखी किताब The Confessions of a Thug पर आधारित है. इस कहानी के बारे में मैं सैम आपको अगले भाग में बताऊंगा...

 
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731 days
 
Sam's Son

ख़राब आचरण के वजह से विश्वविद्यालय से निकाली गयी थी इंदिरा गांधी

इंदिरा गांधी बड़ी उम्मीदों के साथ ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय भेजा गया था ताकि वह ऑक्सफ़ोर्ड के बाद भारत देश का भला कर सकें। लेकिन देखिये कि जल्द ही इंदिरा को वहां से खराब प्रदर्शन के कारण निकाल दिया जाता है।
तब नेहरू जी ने इनको शांतिनिकेतन विश्वविद्यालय में भर्ती कराया गया था। जैसा कि शायद आपको पता ना हो कि शान्तिनिकेतन रवीन्द्रनाथ टैगौर जी चला रहे थे। लेकिन आश्चर्यजनक बात यह है कि उन्होंने भी इंदिरा को खराब आचरण के कारण वहां से निकाल दिया था। तो आखिर इंदिरा गाँधी में ऐसा क्या था कि वह कहीं भी अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पा रही थीं। असल में आपको गांधी परिवार की पूरी सच्चाई जरूर पता होनी चाहिए। एक स्त्री खराब आचरण के कारण विश्वविद्यालय से निकाल दी जाती हैं किन्तु वह इस लायक जरूर है कि वह देश की प्रधानमंत्री बन जाती है।

ऐसा बोला जाता है कि रवीन्द्रनाथ टैगौर को इंदिरा गाँधी के प्रेम संबंधों का पता चल गया था। कैथरीन फ्रैंक की पुस्तक "the life of Indira Nehru Gandhi" में इंदिरा गांधी के अन्य प्रेम संबंधों के कुछ पर प्रकाश डाला गया है। इस पुस्तक में साफ लिखा है कि इंदिरा का पहला प्यार शान्तिनिकेतन में जर्मन शिक्षक के साथ था. बाद में वह एम ओ मथाई, (पिता के सचिव) धीरेंद्र ब्रह्मचारी (उनके योग शिक्षक) के साथ और दिनेश सिंह (विदेश मंत्री) के साथ भी अपने प्रेम संबंधो के लिए प्रसिद्द हुई।

सबूत के लिए पढ़िए यह पुस्तकें
के.एन. राव की पुस्तक "नेहरू राजवंश" (10:8186092005 ISBN),
कैथरीन फ्रैंक की पुस्तक "The Life of Indira Nehru Gandhi (ISBN: 9780007259304),
पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह की पुस्तक Profiles And Letters "

यह तीन पुस्तकें पढ़ लीजिये और तब आप गाँधी परिवार के ऐसे-ऐसे राज जान जाओगे कि आपके पैरों से जमीन खिसक जाएगी।

क्या मुस्लिम लोगों से नेहरू नफरत करते थे ?
शान्तिनिकेतन से जब इंदिरा गाँधी घर आ गई तो वह एकदम अकेली हो गयी थीं। उस समय तक इनकी माँ की मौत हो ही गयी थी। कहते हैं कि इनके इस अकेलेपन का फायदा फ़िरोज़ खान नाम के व्यापारी ने उठाया। यह व्यक्ति शराब का व्यापारी था। फ़िरोज़ खान और इंदिरा गाँधी के बीच प्रेम सम्बन्ध स्थापित हो गए। दोनों ने लन्दन की मस्जिद में जाकर निकाह भी कर लिया था। इस तरह से इंदिरा गाँधी मुस्लिम धर्म अपना चुकी थीं। इंदिरा ने अपना नाम मेमुना बेगम रखा था। तो इसमें किसी को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।

लेकिन तभी जवाहरलाल नेहरू अपने प्रधानमंत्री पद का डर सताने लगता है और वह एक मुस्लिम युवक को उसका धर्म परिवर्तन कराने के लिए राजी करते हैं। फिरोज खान को फिरोज गांधी बनाया जाता है। अब इस तरह से तो साफ हो जाता है कि नेहरू मुस्लिम लोगों से जलते थे। तभी शायद एक व्यक्ति को फिरोज खान से फिरोज गांधी बनने को मजबूर किया गया था. इंदिरा गाँधी का यह सच जनता तक पहुँचाने की सख्त जरूरत हो गयी है। जिस तरह से यह परिवार हिन्दू-मुस्लिम लोगों का उपयोग अपने हित को पूरा करने के लिए कर रहा है तो अब वक़्त आ गया है कि गांधी परिवार के हर व्यक्ति का काला चिठ्ठा खोलकर जनता के सामने पेश किया जाये।

 
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Sam's Son

🙏👇 *जय शिव सदाशिव* 👇🙏

*कौन सी धातु के बर्तन में भोजन करने से क्या क्या लाभ और हानि होती है.......🙏🏼*

*सोना*

सोना एक गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है।

*चाँदी*

चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है। शरीर को शांत रखती है इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है।

*कांसा*

काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है। लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है। कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल ३ प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

*तांबा*

तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है. तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है।

*पीतल*

पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती। पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल ७ प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

*लोहा*

लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से शरीर की शक्ति बढती है, लोह्तत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है। लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है। लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है।

*स्टील*

स्टील के बर्तन नुक्सान दायक नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसलिए नुक्सान नहीं होता है. इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी नहीं पहुँचता।

*एलुमिनियम*

एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है। इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान होता है। यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे हड्डियां कमजोर होती है. मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है। उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है। एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।

*मिट्टी*

मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते थे। इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त हैमिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे १०० प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है।

 
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