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आप मानें चाहे न मानें पर सच्चाई यही है कि जो मजा बाइक चलाने में है वो कार चलाने में नहीं. एक ओर जहां बाइक चलाना रोमांचक है वहीं बाइक की बैक सीट पर बैठना भी कुछ कम नहीं.
बाइक की पिछली सीट पर किसी के कंधे पर हाथ रखकर बैठना...
कितना रोमांटिक है न! और बारिश के मौसम में तो ये मजा दोगुना हो जाता है. लड़कियों को भी बाइक चलाने वाले लड़के बहुत पसंद होते हैं पर क्या आप उसकी वजह जानते हैं...?

ये हैं वो वजहें जिसके चलते बाइक चलाने वाले लड़कों पर मर-मिटती हैं ज्यादातर लड़कियां:

1. लड़कियों को बाइक चलाने वाले लड़के कुछ ज्यादा ही हॉट नजर आते हैं.

2. बाइक की पिछली सीट पर बैठने के लिए आप भी कुछ उसी गेट-अप में रहती हैं. ऐसे में आप भी कुछ कम नजर नहीं आतीं.

3. बाइकर्स को एडवेंचर पसंद होता है. ऐसे में हर कदम हर मोड़ पर कोई न कोई एडवेंचर मिलता है. जो लड़कियों को बहुत पसंद आता है.

4. अक्सर ऐसा होता होगा कि घूमने जाने का प्लान आपका और आपके ब्वॉयफ्रेंड का होता है लेकिन दूसरे लोग भी उसका हिस्सा बन जाते हैं. लेकिन बाइक पर घूमने के दौरान सिर्फ आप होंगी और वो...

5. अक्सर गर्लफ्रेंड्स को ये समझ नहीं आता है कि वो अपने ब्वॉयफ्रेंड के लिए क्या खरीदें. लेकिन अगर आप एक बाइक लवर से प्यार करती हैं तो आपके लिए उसे गिफ्ट देना कोई मुश्किल काम नहीं. आप उसे बाइक एसेसरीज गिफ्ट कर सकती हैं.

6. बाइक से आप उन संकरी सड़कों पर भी घूमने जा सकती हैं जहां कार ले जाना मुश्किल है. आप किसी एक कोने से सनसेट देख सकती हैं. बीच का मजा ले सकती हैं.

7. बाइक चलाने वाले लोग बहुत सतर्क होते हैं. किसी भी काम को कैसे करना है और किस तरीके से करना है, इसका पूरा प्लान वो पहले ही सेट कर लेते हैं.

8. बाइक चलाने वाले ज्यादातर लोग महत्वाकांक्षी होते हैं. वे अपनी लाइफ और फ्यूचर को लेकर बहुत स्पष्ट होते हैं.

 
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983 days
 
Sam's Son

🌅 चिकनगुनिया का इलाज 🌅

ये दवा बनानी कितनी आसान है !

तुलसी का काढ़ा पी लो !

नीम की गिलोय होती है उसको भी उसमे डाल लो !

थोड़ी सोंठ(सुखी अदरक) डाल लो !

थोड़ी छोटी पीपर डाल लो !

और अंत थोड़ा गुड मिला लो !

क्यूंकि काढ़ा ज्यादा कड़वा हो जाता है तो कई बार पिया नहीं जाता !

मात्र इसकी 3 खुराक से राजीव भाई ने हजारो लोगो का चिकनगुनिया पूरा खत्म कर दिया !!

और जो ये एलोपेथी वाले ने किया ! Voveron के 3 -3 इंजेक्शन ठोक दिए ! Diclofenac दे दो !
Paracetamol भी दे दो ! जो इनके पास है सब मरीज को ठोक दिया ! और लोग 20 -20 दिन से बिस्तर मे पड़े तड़पते रहे !!

और कुछ डाक्टर जिनको खुद चिकनगुनिया हो गया ! राजीव भाई के पास आए और बोलो कुछ बता दो ! राजीव भाई ने कहा अपना इंजेक्शन खुद क्यूँ नहीं ठोक लेते ! तो उन्होने ने कहा हमे मालूम है इसके Side Effects क्या हैं !

तो राजीव भाई ने कहा मरीज को क्यूँ नहीं बताते ???
क्या इतने हरामखोर हो ??
तुम जानते हो voveron लगाएंगे मुंह मे छाले हो जाएँगे ! गले मे छालें हो जाएँगे ! अल्सर होने की भी संभावना है ! यह सब तुम जानते हो तो मरीज को क्यूँ नहीं बताते ???

यह हरामखोरी तुममे कहाँ से आ गई ??
अपने को ये सब इंजेक्शन लगाओ नहीं ! और मरीज को ठोकते जाओ ठोकते जाओ ! और तुमको मालूम भी है कि मरीज इससे ठीक होने वाला नहीं ! फिर भी Paracetamol दे दो फिर Novalgin दे दो !

और दुर्भाग्य से ये सारी दवाएं यूरोप के देशों मे पीछले 20 -20 सालो से बंद है ! वो कहते है Diclofenac खराब है ! Paracetamol तो जहर है ! Novaljin तो 1984 से अमेरिका मे बैन है ! और वही इंजेक्शन ठोक रहें बार बार ! और मरीज जो है ठीक ही नहीं हो रहा !!
राजीव भाई बताते है होम्योपैथी की तो बहुत सी दवा तो आयुर्वेद से हीं बनाई गई हैं । आप मे से कुछ होम्योपैथी डाक्टर होंगे तो वो जानते होंगे ! तुलसी से ही Ocimum बनी हैं ! तो Ocimum की तीन तीन खुराक देकर राजीव भाई ने कर्नाटक राज्य मे 70 हजार लोगो को चलता कर दिया ! और वो 20 -20 दिन से एलोपैथी खा रहे थे Result नहीं आ रहा था ! बुखार रुक नहीं रहा था उल्टी पे उल्टी हो रही थी ! नींद आ नहीं रही थी और Ocimum 200 की तीन तीन खुराक से सब ठीक कर दिया !
और अंत में कर्नाटक राज्य की सरकार ने इसके परिणाम देख अपने सारे डाएरेक्टर, जोइन डायरेक्टर ! लगा दिये कि जाओ देखो ये राजीव दीक्षित क्या दे रहा है !

राजीव भाई 70 हजार लोगो को दवा दी सिर्फ 6 मरे ! और उन्होने 1 लाख 22 हजार लोगो दवा की मुश्किल से 6 बचे !! ये कर्नाटक का हाल था ! राजीव भाई बोले मेरी मजबूरी यह थी की कार्यकर्ता कम पढ़ गए ! अगर 1 -2 हजार डाक्टरों की टीम साथ होती ! तो हम कर्नाटक के उन लाखो लोगो को बचा लेते जो मर गए !

तो मित्रो ये तुलसी , नीम, सोंठ, गिलोय ,पीपर सब आपके घर मे आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं ! इनके प्रयोग से आप रोगी की जान बचा सकते हैं ! और अगर पूरे शहर या गाँव मे फैल जाये तो एक एक को काढ़ा पिलाना मुश्किल हो तो होम्योपैथी की Ocimum 200 की दो दो बुँदे 3 -3 बार मरीजो को दीजिये !!
उनका अनमोल जीवन और पैसा बचाइए !

 
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928 days
 
Shubhiii

Using your phone while it's charging can damage the battery. This is why the cords for chargers are so short.

 
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586 days
 
mumbhai..

चूना अमृत है क्योंकि यह 70 बीमारियों को ठीक करता है :
• चूना एक टुकडा छोटे से मिट्टी के बर्तन मे डालकर पानी से भर दे , चूना गलकर नीचे और पानी ऊपर होगा ! वही एक चम्मच पानी किसी भी खाने की वस्तु के साथ लेना है ! 50 के उम्र के बाद कोई कैल्शियम की दवा शरीर मे जल्दी नही घुलती चूना तुरन्त घुल व पच जाता है .
• जैसे किसी को पीलिया हो जाये माने जॉन्डिस उसकी सबसे अच्छी दवा है चूना ;गेहूँ के दाने के बराबर चूना गन्ने के रस में मिलाकर पिलाने से बहुत जल्दी पीलिया ठीक कर देता है ।
• ये ही चूना नपुंसकता की सबसे अच्छी दवा है -अगर किसी के शुक्राणु नही बनता उसको अगर गन्ने के रस के साथ चूना पिलाया जाये तो साल डेढ़ साल में भरपूर शुक्राणु बनने लगेंगे; और जिन माताओं के शरीर में अन्डे नही बनते उनकी बहुत अच्छी दवा है ये चूना ।
• विद्यार्थियो के लिए चूना बहुत अच्छा है जो लम्बाई बढाता है।
• गेहूँ के दाने के बराबर चूना रोज दही में मिला के खाना चाहिए, दही नही है तो दाल में मिला के खाओ, दाल नही है तो पानी में मिला के पियो - इससे लम्बाई बढने के साथ स्मरण शक्ति भी बहुत अच्छा होता है ।
• जिन बच्चों की बुद्धि कम काम करती है मतिमंद बच्चे उनकी सबसे अच्छी दवा है चूना ..जो बच्चे बुद्धि से कम है, दिमाग देर में काम करते है, देर में सोचते है हर चीज उनकी स्लो है उन सभी बच्चे को चूना खिलाने से अच्छे हो जायेंगे ।
• बहनों को अपने मासिक धर्म के समय अगर कुछ भी तकलीफ होती हो तो उसका सबसे अच्छी दवा है चूना । हमारे घर में जो माताएं है जिनकी उम्र पचास वर्ष हो गयी और उनका मासिक धर्म बंध हुआ उनकी सबसे अच्छी दवा है चूना..
• गेहूँ के दाने के बराबर चूना हर दिन खाना दाल में, लस्सी में, नही तो पानी में घोल के पीना । जब कोई माँ गर्भावस्था में है तो चूना रोज खाना चाहिए क्योंकि गर्भवती माँ को सबसे ज्यादा केल्शियम की जरुरत होती है और चूना केल्शियम का सबसे बड़ा भंडार है । गर्भवती माँ को चूना खिलाना चाहिए।
• अनार के रस में - अनार का रस एक कप और चूना गेहूँ के दाने के बराबर ये मिलाके रोज पिलाइए नौ महीने तक लगातार दीजिये तो चार लाभ होंगे :
★ पहला लाभ :
माँ को बच्चे के जनम के समय कोई तकलीफ नही होगी और नॉर्मल डीलिवरी होगा
★ दूसरा लाभ :
बच्चा जो पैदा होगा वो बहुत हृष्ट पुष्ट और तंदुरुस्त होगा
★ तीसरा लाभ :
बच्चा जिन्दगी में जल्दी बीमार नही पड़ता जिसकी माँ ने चूना खाया
★ चौथा सबसे बड़ा लाभ :
• चूना घुटने का दर्द ठीक करता है , कमर का दर्द ठीक करता है ,कंधे का दर्द ठीक करता है,
• एक खतरनाक बीमारी है Spondylitis वो चूने से ठीक होता है ।
• कई बार हमारे रीढ़की हड्डी में जो मनके होते है उसमे दुरी बढ़ जाती है Gap आ जाता है ये चूना ही ठीक करता है उसको रीड़ की हड्डी की सब बीमारिया चूने से ठीक होता है । अगर आपकी हड्डी टूट जाये तो टूटी हुई हड्डी को जोड़ने की ताकत सबसे ज्यादा चूने में है । चूना खाइए सुबह को खाली पेट ।
• मुंह में ठंडा गरम पानी लगता है तो चूना खाओ बिलकुल ठीक हो जाता है ,
• मुंह में अगर छाले हो गए है तो चूने का पानी पियो तुरन्त ठीक हो जाता है ।
• शरीर में जब खून कम हो जाये तो चूना जरुर लेना चाहिए , एनीमिया है खून की कमी है उसकी सबसे अच्छी दवा है ये चूना , चूना पीते रहो गन्ने के रस में , या संतरे के रस में नही तो सबसे अच्छा है अनार के रस में - अनार के रस में चूना पिए खून बहुत बढता है , बहुत जल्दी खून बनता है - एक कप अनार का रस गेहूँ के दाने के बराबर चूना सुबह खाली पेट ।
• घुटने में घिसाव आ गया और डॉक्टर कहे के घुटना बदल दो तो भी जरुरत नही चूना खाते रहिये और हरसिंगार के पत्ते का काढ़ा खाइए घुटने बहुत अच्छे काम करेंगे ।

 
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946 days
 
Shubhiii

आपने दोस्तों-यारों को अक्सर आपस में ये मजाक करते सुना होगा कि जब से इसकी गर्लफ्रेंड बनी है, ये बदल गया है. भले ही ये बातें मजाक में कही जाती हों लेकिन सच्चाई तो यही है कि प्यार हो जाने के बाद और जिंदगी में एक लड़की आ जाने के बाद लड़के पूरी तरह से बदल जाते हैं.

ये बदलाव न केवल उनके व्यवहार में नजर आता है बल्कि उनकी लाइफस्टाइल में भी साफ झलकता है. वो खुद को एक आदर्श प्रेमी साबित करने की कोशिश में लग जाते हैं. उनकी पसंद-नापसंद सबकुछ हमेशा के लिए बदल जाती है.

प्यार में पड़ने के बाद या फिर गर्लफ्रेंड मिलने के बाद लड़कों में आते हैं ये बड़े बदलाव:

1. दोस्तों से मिलना-जुलना कम हो जाता है. गर्लफ्रेंड बन जाने के बाद लड़के ज्यादातर समय गर्लफ्रेंड के साथ ही बिताना पसंद करते हैं. उसके साथ घूमना, बातें करना उनकी प्राथमिकता हो जाती है.

2. गर्लफ्रेंड मिल जाने पर लड़के ज्यादा झूठ बोलने लगते हैं. हालांकि वो झूठ तो पहले भी बोलते होते हैं लेकिन गर्लफ्रेंड के आ जाने के बाद उसकी संख्या बढ़ जाती है. कभी दोस्तों से तो कभी घरवालों से और कभी तो गर्लफ्रेंड से भी.

3. गर्लफ्रेंड बन जाने के बाद लड़के अपने लुक्स को लेकर कुछ ज्यादा ही सचेत हो जाते हैं.

4. लड़कियों के प्रति उनका नजरिया बहुत अधिक बदल जाता है. ज्यादातर मामलों में ये बदलाव सकारात्मक ही होता है.

5. समय की कीमत समझने लग जाते हैं और पहले से ज्यादा जिम्मेदार हो जाते हैं.

6. अपने सिंगल दोस्तों का सलाह देना शुरू कर देते हैं.

 
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1010 days
 
Sam's Son

Ostriches can run faster than horses, and the male ostriches can roar like lions.

 
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1128 days
 
Shubhiii

अनारकली, जिसे हमने सलीम की महबूबा समझा, दरअसल वो अकबर की बीवी थी?

हिंदुस्तान के इतिहास की रूह में एक नाम बसता है. अपने वक्त में गुमनाम गलियों में पैदा हुआ वो नाम देश की सबसे बड़ी मुगलिया सल्तनत की चौधराहट पर छप गया था. फिर वो नाम गुमनाम हो गया. कहते हैं कि जलालुद्दीन अकबर ने उसे आगरे की किसी दीवार में चुनवा दिया था. पर अकबर एक चीज भूल गए थे. वो इश्क की रंगत में सराबोर नाम था. चुनवा देने से उसकी खुशबू हिंदुस्तान की मिट्टी में मिल हर जगह पहुंच गई. अनारकली. जिसकी जिंदगी एक तिलिस्म की तरह थी. कहां शुरू हुई, कहां खत्म कोई नहीं जानता. पर दीन-ए-इलाही मानने वाले बादशाह से ये उम्मीद नहीं थी. बादशाह ने भी कुछ तिलिस्म छोड़ रखा था.

पाकिस्तान के पंजाब सिविल सेक्रेटरिएट के पास एक ताजमहल के रंग का मकबरा है. इसे अनारकली का मकबरा कहा जाता है. क्या बादशाह को नाचीज की मुहब्बत के आगे झुकना पड़ा था? कुछ तो कहते हैं कि बादशाह ही अनारकली से प्रेम कर बैठा था.

अनारकली को इतिहासकारों ने अपने मन से खंगाला है. सस्पेंस, थ्रिलर, तिलिस्म, सांसों में भरा इश्क, जुनून हर उस चीज से अनारकली को नवाजा गया है, जिससे जिंदगी की कहानियां बनती हैं. हिंदुस्तान भी काबिलों का देश है. हर तरह से रिसर्च की गई है. हर एंगल खंगाला गया है. तो हर तरह की कहानियां भी बनी हैं. कमाल ये है कि अनारकली के बारे में हर कोई अपनी ही कहानी को मुकम्मल मानता है-

1. अनारकली का नाम नादिरा बेगम हुआ करता था. शर्फुन्निसा भी कहा जाता था. ईरान से आई थीं. व्यापारियों के कारवां में लाहौर तक. पर खूबसूरती इतनी थी कि वहीं से हल्ला हो गया. उस वक्त बादशाहों को किसी चीज का डर नहीं रहता था. इज्जत का भी. क्योंकि जनता के मन में इज्जत की जगह डर से काम चल जाता था. तो अकबर बादशाह के दरबार में नादिरा को तलब किया गया. और वहां उसे अनारकली नाम मिला.

2. अगर ये कहें कि अनारकली सिर्फ भारत की दंतकथाओं में विराजती है तो गलत होगा. पाक अखबार डॉन के हवाले से ब्रिटिश टूरिस्ट विलियम फिंच 1608 से 1611 तक लाहौर में रहे थे. फिंच के मुताबिक अनारकली अकबर की कई पत्नियों में से एक पत्नी थी. जिससे अकबर को बेटा भी था. दानियाल शाह. बाद में अनारकली के जहांगीर से इश्क की अफवाह उड़ी. जहांगीर अकबर का बेटा था जोधाबाई से. अकबर ने इस बात पर खफा होकर अनारकली को लाहौर किले की दीवारों में चुनवा दिया. बाद में जहांगीर ने उसी जगह एक खूबसूरत मकबरा बनवाया.

3. नूर अहमद चिश्ती ने अपनी किताब तहकीकात-ए-चिश्तिया में लिखा है कि अकबर के अनारकली से बेपनाह मुहब्बत होने की वजह से बाकी रानियां चिढ़ गई थीं. इसीलिए जब अकबर डेक्कन गया तो उसके खिलाफ षड़यंत्र होने लगा. वो बीमार पड़ी और मर गई. उसकी बांदियों ने सुसाइड कर लिया. क्योंकि अकबर की मुहब्बत का डर था.

4. सैयद अब्दुल लतीफ ने अपनी किताब तारीख-ए-लाहौर में लिखा है कि जहांगीर से इश्क के चलते ही अनारकली की जान गई. वो अकबर की बीवी थी. जहांगीर ने उसकी कब्र पर लिखवाया कि अगर मैं अपनी महबूबा को एक बार भी पकड़ सकता तो अल्लाह का शुक्रिया करता. कयामत तक. उस कब्र पर 1599 और 1615 साल की तारीखें हैं. कहते हैं कि मरने और कब्र के पूरे होने की तारीखें हैं.

5. कन्हैया लाल ने अपनी किताब तारीख-ए-लाहौर में लिखा है कि अनारकली की बीमारी से ही मौत हुई थी. बाद में अकबर ने मकबरा बनवाया. सिख राजाओं ने उसे तोड़वा दिया. अंग्रेजों ने चर्च बनवा दिया उसका.

6. अनारकली की कहानी को अमर बनाया इम्तियाज अली ताज के नाटक ने. और उसे लोकगीत बना दिया के आसिफ की फिल्म मुगल-ए-आजम ने. फिल्म की कहानी ही सबसे पॉपुलर कहानी है. इसका गाना प्यार किया तो डरना क्या मुगल बादशाह के सामने अनारकली की निडरता का प्रतीक बन गया. कहते हैं कि जब जहांगीर 14 साल तक घर से बाहर रहने के बाद वापस आया तो उसके सम्मान में मुजरा कराया गया. उसी मुजरे में ईरान से आई अनारकली थी. सलीम उसे दिल दे बैठा. और अकबर ने दिमाग. अनारकली को चुनवा दिया गया दीवार में. पर इंडियन दर्शक उस वक्त ये अंत बर्दाश्त नहीं कर सकते थे. इसीलिए फिल्म में अकबर अनारकली को गुप्त रास्ते से बाहर भेज देता है.

7. एक दूर की कहानी ये भी है. कि सलीम ने अनारकली से बाद में निकाह कर लिया था. और उसे नाम दिया नूरजहां. नूरजहां भी ईरान के मिर्जा गयास बेग की बेटी थी. नूरजहां का जहांगीर के दिमाग पर पूरा काबू था.

8. इन सबमें सबसे खतरनाक वो कहानी है जिसमें अकबर ने अपनी बीवी अनारकली को पर्दे के पीछे से सलीम को देख मुस्कुराता हुआ देखा था. और इसी बात पर उसे दीवार में दफन कर दिया.

जो भी हो, अनारकली का नाम इतिहास में दफन है और उसकी रूह अभी भी जिंदा है. तभी तो हर बात में उसका जिक्र होता है. पर फिंच की कहानी के सच होने की संभावना ज्यादा है. क्योंकि फिंच अनारकली के मरने के कुछ साल बाद ही आया था. उस वक्त तो सारी कहानियां ओस की तरह होंगी. लोग छूते गए, बूंदें टूटती गईं.

पर जहांगीर की आत्मकथा तुजुक-ए-जहांगीरी में अनारकली का जिक्र नहीं है.

 
210
 
830 days
 
Sam's Son

# चाँद_के_बारे_मेँ_रोचक_जानकारी
1. अब तक सिर्फ 12 मनुष्य चाँद पर गए है.
2. चांद धरती के आकार का सिर्फ 27प्रतीशत हिस्सा ही है.
3. चाँद का वजन लगभग 81,00,00,00, 000(81 अरब) टन है.
4. पूरा चाँद आधे चाँद से 9गुना ज्यादा चमकदार होता है.
5. नील आर्मस्ट्रोग ने चाँद पर जब अपना पहला कदम रखा तो उससे जो निशान चाँद की जमीन पर बना वह अब तक है और अगले कुछ लाखों सालो तक ऐसा ही रहेगा.क्योंकि चांद पर हवा तो है ही नही जो इसे मिटा दे.
6. जब अंतरिक्ष यात्री एलन सैपर्ड चाँद पर थे तब उन्होंने एक golf ball को hitमारा जोकि तकरीबन 800 मीटर दूर तक गई.
7. अगर आप का वजन धरती पर 60 किलो है तो चाँद की low gravity की वजह से चाँद पर आपका वजन 10किलो ही होगा.
8. चाँद पर पड़े काले धब्बों को चीन में चाँद पर मेढ़क कहा जाता है.
9. जब सारे अपोलो अंतरिक्ष यान चाँद से वापिस आए तब वह कुल मिलाकर 296 चट्टानों के टुकड़े लेकर आए जिनका द्रव्यमान(वजन) 382 किलो था.
10. चाँद का सिर्फ 59 प्रतीशत हिस्सा ही धरती से दिखता है.
11. चाँद धरती के ईर्ध-गिर्द घूमते समय अपना सिर्फ एक हिस्सा ही धरती की तरह रखता है इसलिए चाँद का दूसरा पासा आज तक धरती से किसी मनुष्य ने नही देखा.
12. चाँद का व्यास धरती के व्यास का सिर्फ चौथा हिस्सा है और लगभग49 चाँद धरती में समा सकते हैं.
13. क्या आपको पता है चाँद हर साल धरती से4 सैटीमीटर दूर खिसक रहा है.अब से 50 अरब साल बाद चाँद धरती के ईर्द-गिर्द एक चक्कर 47 दिन में पूरा करेगा जो कि अब 27.3 दिनो में कर रहा है.पर यह होगा नही क्योकि अब से 5 अरब साल बाद ही धरती सूर्य के साथ खत्म हो जाएगी.
14. सौर मंडल के 63 उपग्रहो में चाँद का आकार 5 वे नंम्बर पर

 
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1085 days
 
Raaz

अच्छी सेहत के लिए पौष्ट‍िक आहार, योग-ध्यान के साथ-साथ नियमित दिनचर्या भी जरूरी है. दिनचर्या में सही वक्त पर नींद लेना भी शामिल है. शास्त्रों में इस बारे में बताया गया है कि सोने का सही तरीका क्या होना चाहिए.

दक्षिण दिशा की ओर सिर रखने के फायदे
दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोना बेहतर माना गया है. ऐसी स्थ‍िति में स्वाभाविक तौर पर पैर उत्तर दिशा में रहेगा. शास्त्रों के साथ-साथ प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, सेहत के लिहाज से इस तरह सोने का निर्देश दिया गया है. यह मान्यता भी वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है.

उत्तर की ओर क्यों न रखें सिर?
दरअसल, पृथ्वी में चुम्बकीय शक्ति होती है. इसमें दक्षिण से उत्तर की ओर लगातार चुंबकीय धारा प्रवाहित होती रहती है. जब हम दक्षिण की ओर सिर करके सोते हैं, तो यह ऊर्जा हमारे सिर ओर से प्रवेश करती है और पैरों की ओर से बाहर निकल जाती है. ऐसे में सुबह जगने पर लोगों को ताजगी और स्फूर्ति महसूस होती है.

अगर इसके विपरीत करें सिर 
इसके विपरीत, दक्षिण की ओर पैर करके सोने पर चुम्बकीय धारा पैरों से प्रवेश करेगी है और सिर तक पहुंचेगी. इस चुंबकीय ऊर्जा से मानसिक तनाव बढ़ता है और सवेरे जगने पर मन भारी-भारी रहता है.

पूरब की ओर भी रख सकते हैं सिर
दूसरी स्थ‍िति यह हो सकती है कि सिर पूरब और पैर पश्चिम दिशा की ओर रखा जाए. कुछ मान्यताओं के अनुसार इस स्थि‍ति को बेहतर बताया गया है. दरअसल, सूरज पूरब की ओर से निकलता है. सनातन धर्म में सूर्य को जीवनदाता और देवता माना गया है. ऐसे में सूर्य के निकलने की दिशा में पैर करना उचित नहीं माना जा सकता. इस वजह से पूरब की ओर सिर रखा जा सकता है.

सोने से जुड़े कुछ जरूरी निर्देश...
--शास्त्रों में संध्या के वक्त, खासकर गोधूलि बेला में सोने की मनाही है. 
--सोने से करीब 2 घंटे पहले ही भोजन कर लेना चाहिए. सोने से ठीक पहले कभी भी भोजन नहीं करना चाहिए. 
--अगर बहुत जरूरी काम न हो तो रात में देर तक नहीं जागना चाहिए.
--जहां तक संभव हो, सोने से पहले चित्त शांत रखने की कोशि‍श करनी चाहिए.
--सोने से पहले प्रभु का स्मरण करना चाहिए और इस अनमोल जीवन के लिए उनके प्रति आभार जताना चाहिए. 
ललित नेगी

 
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1329 days
 
Heart catcher

किस्मत में था, किसी और के प्यार की वजह से बन गईं एलिजाबेथ ब्रिटेन की महारानी

1947 का साल था. दुनिया बदल गई थी. ब्रिटिश राज का सूरज अस्त हुआ था. क्राउन ज्वेल हिंदुस्तान अब अपने पैरों पर खड़ा हो रहा था. अमेरिका तय कर रहा था कि कौन सा देश किससे बात करेगा. एक शर्माये हुए छोटे भाई की तरह ब्रिटेन हर बात में हां कह देता था. हिज मजेस्टी इस चीज को झेलने के लिए ज्यादा दिन तक धरती पर नहीं रुके. 4-5 साल के अंदर उन्होंने दुनिया छोड़ दी.

25 साल की लड़की एलिजाबेथ बनी महारानी. ब्रिटेन ही नहीं, पाकिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा समेत सारे कॉमनवेल्थ मुल्कों की. भारत ने तो पहले ही मना कर दिया था ब्रिटेन के राज को मानने से. महारानी को भी कोई अफसोस नहीं था. क्योंकि खुद महारानी की जिंदगी बदल गई थी. अब वो एक बेखौफ लड़की नहीं रही थीं, जो कहीं चली जाती, घूम लेती. किसी को भर नजर देख सकती. अब उन पर दबाव आ गया था. एक खास तरीके से रहने का. बोलने का. उठने-बैठने का.

धीरे-धीरे दुनिया आपस में मशगूल होती गई. राजे-महाराजाओं की तस्वीर धुंधली पड़ती गई. किताबों का हिस्सा बन गए. यदा-कदा लोग इतिहास में झांक लेते जब लोकतंत्र के चर्चों से उब जाते. पर महारानी बनी रहीं. और दुनिया को अहसास कराती रहीं कि एक परंपरा अभी बाकी है. सम्मान की परंपरा. अब पता नहीं कि सही है या गलत. पर वो एक ऐसे युग का प्रतिनिधित्व कर रही थीं जो लोगों की नजरों से बाहर हो गया था.

महारानी को लोगों ने देखा. हर जगह उनकी उपस्थिति महसूस की गई. पर नहीं देखा तो उनका मन, उनका जीवन. कि कैसे एक 25 साल की लड़की महारानी में तब्दील हो गई. कैसे एक परंपरा को ढोना पड़ा. लोग भूल गए कि उस लड़की के मन में भी स्ट्रगल हुआ होगा. अपने आप को लेकर. लोगों को लेकर. षड़यंत्रों को लेकर. अपने भविष्य को लेकर. धीरे-धीरे महारानी को याद किया जाता रहा उनके जन्मदिन पर. अचानक 80 की हो गईं, 90 की हो गईं. बीच में लोग बस राजकुमार-राजकुमारियों के बारे में ही पता करते रहते.

1952 में हिज मैजेस्टी जॉर्ज VI की मौत हो गई थी. तो उनके बाद एलिजाबेथ को गद्दी दी गई. उसके 5 साल पहले प्रिंस फिलिप से शादी हुई थी. एलिजा की. लंबे रोमांस के बाद. 1953 में सार्वजनिक रूप से एलिजा को क्राउन मिला. पर इसके बाद शुरू हुआ मुश्किलों का दौर.
खुद तो एलिजा ने अपनी मर्जी से शादी की थी. क्योंकि उस वक्त वो स्वतंत्र थीं. पर महारानी बनने के बाद अपनी छोटी बहन प्रिंसेस मार्गरेट को 1955 में अपनी मर्जी से शादी करने से रोक दिया था. क्योंकि वो एक डिवोर्स्ड आदमी से शादी कर रही थीं. ये सही था या गलत. नहीं जानते. क्योंकि ये चीज वक्त के हिसाब से तय होती हैं. बाद में प्रिंस चार्ल्स ने अपनी मर्जी से डायना से शादी की ही. एक बार मार्गरेट की ही सेक्स की तस्वीरों को लेकर स्कैंडल भी हुआ था. तो मुद्दे बहुत जटिल होते हैं. सारी बातें सबको पता नहीं चल पातीं.

1926 में जब जॉर्ज V के दूसरे बेटे की तीसरी बेटी हुई तो यही माना गया कि उत्तराधिकार संभालने में तो ये बहुत नीचे रहेगी. मतलब कोई संयोग ही नहीं बनता था. पर संयोग बना और यही एलिजा महारानी बनीं. 1930 में छोटी बहन का जन्म हुआ था.

एलिजा की जिंदगी महारानियों वाली नहीं थी. सुख थे सारे. पर पालन-पोषण साधारण था. किसी के भी बच्चों के साथ खेलना. कोई प्रतिबंध नहीं था. अपने दादा महाराज को ग्रैंडपा इंग्लैंड कह के बुलाती थीं. पर एलिजा एक चीज अलग करती थीं. सीखने की बहुत चाह थी उनमें. राजघराने के लोगों में ये चीज नहीं थी उस वक्त. वो जो था, उसी में मशगूल रहते थे. हिस्ट्री, लिटरेचर सब पढ़ा एलिजा ने पर पढ़ाई ढ़ंग से नहीं हुई.

तभी एक वाकया हुआ. एलिजा के अंकल ने राजगद्दी छोड़ दी. किंग एडवर्ड VII ने अपने प्यार एक अमेरिकी लड़की वालिस सिंपसन के लिए गद्दी छोड़ दी. वालिस शादी-शुदा थी. और महाराज से प्यार करने के लिए तलाक दे दिया अपने पति को. तो तलाकशुदा लड़की से शादी करने के लिए महाराज को राजघराने ने मना कर दिया. महाराज ने राजघराने को मना कर दिया.



तो अब एलिजा के पिता को गद्दी मिल गई. उस वक्त वो दस साल की थीं. उनको एक सैनिक ने बताया कि तुम्हारे पप्पा अब राजा बन गये हैं. एलिजा को समझ में नहीं आया. पर इनकी मम्मी को समझ में आ गया था. उन्होंने एलिजा के लिए ट्यूशन रख दिया. घर पर ही सब चीजों की पढ़ाई होने लगी. भविष्य के लिए तैयारी होने लगी. पढ़ाई इसलिए भी नहीं हो पाई क्योंकि दूसरा विश्व-युद्ध शुरू हो गया. महारानी अपनी बेटिय़ों को सुरक्षित रखना चाहती थीं.

बेटियों को ब्रिटिश गवर्नमेंट ने प्रोपेगैंडा का हथियार बना लिया. हर जगह कहा जाने लगा कि लड़ाई के चलते इन लड़कियों को बंकर में सोना पड़ रहा है. दिक्कतें हो रही हैं. तो इससे जनता के मन में और भावनाएं बढ़तीं. आखिर अब इनको उत्तराधिकारी नजर आ रहा था इन लड़कियों में.

उसी वक्त एलिजा मिलीं प्रिंस फिलिप से. पर एलिजा के डैड को फिलिप पसंद नहीं थे. क्योंकि उनकी नजर में फिलिप के पास कोई मैनर ही नहीं था. इसकी एक और वजह थी. फिलिप किसी तरह से जर्मनी से जुड़े थे. तो ये चीज उस वक्त पाप-कर्म मानी जाती थी. पर वो वक्त भी आया कि एलिजा और फिलिप की शादी हुई. फिर एलिजा महारानी भी बनीं. और अब उनके जीवन पर वेब सीरीज आ रही है. तो देखा जाएगा कि ये लोग कितना सच दिखा पाते हैं. क्योंकि अगर सच नहीं दिखाया तो महारानी का रोजाना का पब्लिक जीवन तो बोरिंग ही है.

 
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Sam's Son
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