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Banging your Head Against wall Burns,

150 calories an hour..

 
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781 days
 
Alcoholics

*बर्फ के ये 10 फायदे जानकर चौंक जाएंगे आप*

*1-कड़वी दवाई खाने से पहले मुंह में बर्फ का टुकड़ा रख लें, दवाई कड़वी ही नहीं लगेगी।*

*2- यदि आपने बहुत ज्यादा खा लिया है और खाना पच नहीं रहा, तो थोड़ा-सा बर्फ का टुकड़ा खा ले। खाना शीघ्र पच जाएगा।*

*3- यदि आपके पास मेकअप का भी समय नहीं है या आपकी त्वचा ढीली पड़ती जा रही है तो एक बर्फ का छोटा-सा टुकड़ा लेकर उसे किसी कपड़े में (हो सके तो मखमल का) लपेट चेहरे पर लगाइए। इससे आपके चेहरे की त्वचा टाइट होगी और यह टुकड़ा आपकी त्वचा में ऐसा निखार ला देगा जो और कहीं नहीं मिलेगा।*

*4- प्लास्टिक में बर्फ का टुकड़ा लपेटकर सिर पर रखने से सिरदर्द में राहत मिलती है।*

*5- यदि आपको शरीर में कहीं पर भी चोट लग गई है और खून निकल रहा है तो उस जगह बर्फ मसलने से खून बहना बंद हो जाता है।*

*6- कांटा चुभने पर बर्फ लगाकर उस हिस्से को सुन्न कर ले, कांटा या फांस आसानी से निकल जाएगा और दर्द भी नहीं होगा।*

*7- अंदरुनी यानी गुम चोट लगने पर बर्फ लगाने से खून नहीं जमता व दर्द भी कम होता है।*

*8- नाक से खून आने पर बर्फ को कपड़े में लेकर नाक के ऊपर चारों और रखें, थोड़ी देर में खून निकलना बंद हो जाएगा।*

*9- धीरे-धीरे बर्फ का टुकड़ा चूसने से उल्टी बंद हो जाती है।*

*10- पैरों की एड़ियों में बहुत ज्यादा तीखा दर्द हो तो बर्फ की क्यूब मलने से आराम मिलेगा।*

*अच्छी बातें, अच्छे लोगों, अपने मित्र, रिश्तेदार और ग्रुप मे अवश्य शेयर करे.*

 
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285 days
 
DDLJ143

The only word opposite to ORANGE is a rare alternative of sporangium that is SPORANGE

 
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Viraj Shah

क्या आपको पता है इन अंग्रेजी शब्दो के मजेदार अर्थ


अंग्रेजी के कई शब्द ऐसे होते है जिनके अर्थ हम नहीं जानते, और कई शब्दों के ऐसे अर्थ पढ़ने या सुनने को मिलते हैं, जिन्हें पढ़कर या सुनकर चेहरे पर मुस्कुराहट फैल जाती है। ऐसे ही कुछ अंग्रेजी के शब्दों के मजेदार अर्थ आपके सामने हैं। इन्हें पढ़कर जरूर आपके पेट में हंसते-हंसते बल पड़ जाएंगे।

1- Cricket : गोलगुट्टम लक्कड़ फट्टम दे दनादन प्रतियोगिता

2- Table Tennis : अष्टकोणी काष्ठ फलक पे ले टकाटक दे टकाटक

3- Lawn Tennis : हरित घास पर ले तड़ातड़ दे तड़ातड़

4- Light Bulb : विद्युत प्रकाशित कांच गोलक

5- Match Box : अग्नि उत्पादन पेटी

6- Tea : दुग्ध जल मिश्रित शर्करा युक्त पर्वतीय बूटी

7- Train : सहस्त्र चक्र लौह पथ गामिनी/ अग्नि रथ

8- Railway Station : अग्नि रथ विराम स्थल

9- Button : अस्त व्यस्त वस्त्र नियंत्रक

10- Rail Signal : लौह पथ आवत जावत लाल रक्त पट्टिका

11- All Route Pass : यत्र तत्र सर्वत्र गमन आज्ञा पत्र

12- Mosquito : गुंजनहारी मानव रक्त पिपासु जीव

13- Cigarette : धूम शलाका

 
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658 days
 
heta

जो जीता वो सिकंदर या जो हारा वही सिकंदर ???

पढ़िए भारत में "तथाकथित महान" सिकंदर के साम्रज्य की स्थति के बारे में !

आज तक भारतीयो को इतिहास में पढ़ाया गया है और आज भी पढ़ाया जा रहा है कि ग्रीक हमलावर सिकंदर या अलक्षेन्द्र ने भारतीय सीमान्त राजा पुरु या पोरस को हरा दिया और फिर उससे पूछ कि बोलो तुम्हारे साथ क्या सलूक किया जाये, तो पोरस ने जवाब दिया कि "वही जो एक राजा दुसरे राजा के साथ करता है" !!

बड़े कमाल की बात है, मैसेडोनिया का यह अत्यंत महत्वाकांक्षी शासक जिसने अपने पिता फिलिप्स द्वितीय तक को, जिसने अपनी पांचवी रानी ओलम्पिया के पुत्र के लिए समूचे विश्व का सपना देखा था, भरी सभा में (पौसैनियस द्वारा) मरवा डाला था,. उस पिता को जिसने आठ रानियों के कई पुत्रो में मात्र अलक्षेन्द्र के लिए महास्वप्न देखा.. वो पुत्र जो विश्व प्रसिद्ध शिक्षकों अरस्तू, प्लेटो, इत्यादि द्वारा शिक्षित हुआ था, जिसने १६ वर्ष कि उम्र में ही युवराज बन, थ्रेस में खून कि नदियां बहा अपना साम्राज्य मजबूत बनाया, जिसने ग्रीस की प्राचीन महान सभ्यता और यूनानी नस्ल को विध्वंस करने में जरा भी शिकन नहीं दिखायी I वो जिसने परसिया या पारशीय राष्ट्र या फारस को वीभत्स रूप में विध्वंस किया, जिसने एशिया माइनर और मिश्र में अपने झंडे गाड़े और जो तात्कालिक विश्व के महानतम व सर्वाधिक ऐश्वर्यवान साम्राज्यों के समूह महा-राष्ट्र यानि राष्ट्रो के महाराष्ट्र — भारत वर्ष को पूरी लालसा से लीलने के लिए ही अपनी राजधानी पेल्ला, मैसेडोन से सिंधु की तरफ चला था उसने बैक्ट्रिया की ईंट से ईंट बजा दी .. बस सामने सिन्दुस्थान या भारतवर्ष ही था उसके विजय के लिए . फिर क्या हुआ ऐसा क्या हुआ की सिकंदर को भारत से भागना पड़ा?

वो सिकंदर, जिसने पारसियों की दस लाख की पैदल सेना को कुछ हजार सैनिक खोकर और यूनानियों की २०,००० की सेना को १२० सैनिक खोकर ही प्राप्त कर लिया था ..वो, जिसके जैसा रक्तपिपासु कम से कम उसके देश के आसपास तो नहीं ही था, अपनी यूनानियों, मिस्रियों, बाल्कन (वाह्लीक), इलियरिन लडाको से भरी विशाल सेना से लैस यह अतिअकांक्षी आक्रांता, कैसे सिंधु नदी पार कर भारतवर्ष की भूमि पर उतरते ही अचानक बदल गया ? यदि ऐसी सेना जिसने मैसेडोन यानि आज का इटली से लेकर सिंधु नदी या आज के पाकिस्तान तक अपनी सल्तनत बिछायी तो फिर अचानक ही कैसे भारत के एक छोटे से राजा पर मेहरबान हो दयालुता से अभिभूत हो अपने देश वापस चला गया ? वो महान आक्रान्ता, जिसने आँख और हाथ खोलते ही १६ साल के उम्र से मानवी सिरो को धड़ से अलग करने का ही काम किया, अचानक कैसे २६ वर्ष की उम्र में साधू बन अपने देश को चला गया? क्यों नहीं आज पूरा भारत यूनानी भाषा बोलता है और कच्छा पहनता है?

वो सिकंदर जिसकी घुड़सवार सेना विश्व की सबसे खूंख्वार सेना थी, जिसने भारत वर्ष के सीमावर्ती प्रदेशो में अभिसार को तटस्थ बना अम्भी को पूर्व राज्य का लालच दे एकमात्र भारतीय शूरवीर राजा पुरु को हराकर भारतभूमि पर कब्ज़ा करने का सपना संजोया था, ऐसा ह्रदय परिवर्तन कैसे हुआ उसका?

क्या गंगा किनारे शीर्षासन मुद्रस्थ हिन्दू साधू की संसार की मोहमाया त्यागने की घटना ने उसको बदल दिया?

आखिर क्यों राजा पुरु को हराने के बाद उस महान सिकंदर का मन पुरु की बात "मेरे साथ वो व्यव्हार करो जो एक राजा दुसरे राजा के साथ करता है" मानने को कर गया? हमारी हर इतिहास की पुस्तक इसी प्रकार की कहानियां हमें सिखाती रहती हैं .. हम भी सिकंदर को सिकंदर महान कहते हैं ..क्यों?! मालूम नहीं . हम पूछते भी नहीं. . १३०० वर्षों के मुगलई और अंग्रेजी शासन ने हमारी बुद्धि भी कुंद कर दी . यूनान या यवनदेश, जिससे उत्पन्न हुआ आजका पश्चिमी समाज और खासकर अंग्रेजो का खड़ा किया गया झूठा वैश्विक साम्राज्य अपने को मानता है, वास्तव में मेडिटेरेनियन या "मध्य-धरातल" सागर के किनारे बसा ये छोटा सा जनसमुदाय भारतवर्ष से बाह्य सीमा पर स्थित म्लेच्छ राज्यों (भारतीय प्राचीन साहित्य में) में आता था .. वास्तव में इन स्थानो और आसपास के स्थानो को भारतीय आसुरी राज्य कहते थेI

अलक्षेंद्र, मैसेडोन के सक्षम शासक का अत्यंत महत्वकांक्षी पुत्र था ..वह निस्संदेह कुशल लडाका था पर ये भी है के उसे पहले से ही एक बड़ा साम्राज्य विरासत में मिला था और खुद सिकंदर अत्यंत दुर्बुद्धि और आत्मकेंद्रित युवा था और इसी के कारन उसका वंश भी अपना राज्य उस सीमा तक बढ़ाया पाया I वह साम्राज्य, जो उनके स्वयं के लिए तो कलपनातीत था पर उन्हें विश्व के अधिकांश तात्कालिक विश्व पर स्थित हिन्दू साम्राज्य कि कोई जानकारी नहीं थीI हो भी नहीं सकती थी I यवन भौगोलिक इतिहासकार टॉलमी और उसी कि तरह भारत के महान राज्यो के बारे में बस सुनते ही रहते थे , जैसे "पॉलीबोथरा" कि कल्पना गंगा किनारे स्थित महान भारतीय साम्राज्य के शक्ति केंद्र पाटलिपुत्र के रूप में करना !

उसी गलती को मेंस्थानीज एवं फिरसे अट्ठारहवी शतब्दी में विलियम जोन्स इत्यादि ने दुहराया और जिसे सारे अंग्रेज, जिन्होंने एक तथाकथित महान साम्राज्य बनाया, आज तक गा रहे हैं! भारत से इतर म्लेच्छों के लिए वह साम्राज्य काफी बड़ा हो सकता था पर, भारत के लिए तो वह मामूली ही कहा जायेगा! पर वास्तव में यवन कालातीत के कई दर्जन आक्रमणो (और कुछ वर्षो के शासन) के बाद भी भारत के बारे में कल्पनाएँ ही करते थे ! पर, सन ३२७ ईसापूर्व में क्या हुआ था? सिकंदर के बारे में विश्व के कई लोग जानते थे और हैं, पर हम आज तक नहीं जानते उसके हश्र का पता भी कइयों को है !!

सिकंदर कि सेना अपने अश्व सेना के लिए प्रसिद्ध थी और यही सेना और अपनी धूर्तता लेकर भारत को खा जाने के लिए आया था.. उसने सीमावर्ती राज्यों को अपनी तरफ भी मिला लिया और जो नहीं मिला उसको रास्ते से हटाने के लिए अपने क्रूर सेनापतियों जिसमे मेसेडोनियन लड़ाकों के साथ उसके वाह्लीक, मिश्री और पर्शियन सहयोगी भी थेI भारत की सीमा में पहुँचते ही पहाड़ी सीमाओं पर भारत के अपेक्षाकृत छोटे राज्यों अश्वायन एवं अश्वकायन की वीर सेनाओं ने कुनात, स्वात, बुनेर, पेशावर (आजका) में सिकंदर सेनाओं को भयानक टक्कर दीI

मस्सागा \'मत्स्यगराज\' राज्य में तो महिलाएं तक उसके सामने खड़ी हो गयीं पर धूर्त यवनी ने मत्स्यराज को हत करने के बाद संधि का नाटक करके रात में हमला करके उस राज्य की राजमाता सहित पूरे राज्य को उसने तलवार से काट डाला उसमे कोई नहीं बचा.. एक बच्चा भी नहीं!! यही काम उसने दुसरे समीपी राज्य ओरा में भी किया, इसी लड़ाई में सिकंदर की एड़ी में तीर लगा, जिसको आधार बनाकर अतियुक्त सिकंदर के बड़बोले प्रशस्तिकारो ने अकाइलिस की कथा बनाई! अब इसके आगे पौरव राज्य था जिसके राजा महाभारत कालीन कुरु वंशी के सम्बन्धी पुरु वंश के राजा पुरु थे जिसे यवन पोरस बोलते थे और सिंधु तट पर उनके विनाश के लिए यवनी सेना करीब १०-१२ प्रमुख सेनापतियों के साथ बस तैयार ही थीI अपने जासूसों और धूर्तता के बल पर सिकंदर के सरदार युद्ध जीतने के प्रति पूर्णतः विश्वस्त थे, पर युद्ध शुरू होते ही उसी दिन यह विदित हो गया की पौरव कौन हैं और क्या हैं? राजा पुरु के शत्रु लालची अम्भी की सेना लेकर सिकंदर ने करीब ३७००० की सेना, जिसमे ७००० घुड़सवार थे, राजा पुरु की सेना जिसमे २०,००० की सेना के खिलाफ, जिसमे २००० घुड़सवार थे और कई नागरिक योद्धा थे, निर्णायक युद्ध के लिए तैयार था और जिसमे जीत के प्रति वो आश्वस्त था I

सिकंदर की सेना में कई युद्धो के घुटे योद्धा थे जिसमे कई उसके विजित प्रदेशो के सैनिक भी थे जिन्हे विजित राज्यो को विद्रोह से रोकने के लिए भी सुदूर तक ले जाया गया था, भारतीय सीमावर्ती राज्यों से संघर्ष में ही सिकंदर (के सेनापतियों) को अनुमान हो गया था की आगे क्या हो सकता हैI पर सनकी सिकंदर अपने ही घमंड में इस भारतीय राज्य को नेस्तनाबूद करने को उद्दत था क्योंकि उसे भारतवर्ष पर राज्य करना था!! अपनी सनक में वो बहुत कुछ नहीं देख पाया जनता तो वो और भी कम था .. राजा पुरु के पास करीब २०० की गजसेना थी ! यहाँ जानने वाली बात है की हाथी मात्र अफ्रीका एवं भारत में ही पाये जाते हैं, यवनो ने हाथी सेना क्या हाथी तक कभी नहीं देखे थे !

यवनी कुशल घुड़सवारी के महारथी थे और अधिकतर युद्ध उन्होंने इसी सेना और अपने युद्धक हथियारो जैसे कैटापल्ट इत्यादि के बल पर ही जीते थे .. वर्षो तक यवनी स्वयं को ही समूचे विश्व के स्वामी समझते रहे थे, और यही सब उन्होंने अपने इतिहास में भी रचा. ! पहले से ही क्षतिप्राप्त यवनी सेना ने अगले दिन जो झेला उसने उनके दिमाग ठीक कर दिए .. राजा पुरु जिसको स्वयं यवनी सात फूट से ऊपर का बताते हैं, अपनी शक्तिशाली गजसेना के साथ यवनी सेना पर टूट पड़े! इसके पहले झेलम नदी पर दोनों सेनाओं के बीच कई दिनों तक सतर्क आशंकित निगाहो का आदानप्रदान होता रहा ! भारतीयों के पास विदेशी को मार भगाने की हर नागरिक के हठ, शक्तिशाली गजसेना के अलावा कुछ अनदेखे हथियार भी थे जैसे सातफूटा भाला जिससे एक ही सैनिक कई कई शत्रु सैनिको और घोड़े सहित घुड़सवार सैनिको भी मार गिरा सकता था ! इस युद्ध में पहले दिन ही सिकंदर की सेना को जमकर टक्कर मिलीI यवनी सेना के कई वीर सैनिक हताहत हुए, यवनी सरदारो के भयाक्रांत होने के बावजूद सिकंदर अपने हठ पर अड़ा रहा और अपनी विशिष्ट अंगरक्षक एवं अन्तः प्रतिरक्षा टुकड़ी को लेकर वो बीच युद्ध क्षेत्र में घुस गया !

कोई भी भारतीय सेनापति हाथियों पर होने के कारण उनतक कोई खतरा नहीं हो सकता था, राजा की तो बात बहुत दूर है! राजा पुरु के भाई अमर ने सिकंदर के घोड़े बुकिफाइलस (संस्कृत- भवकपाली ) को अपने भले से मार डाला और सिकंदर को जमीन पर गिरा दिया, ऐसा मैसेदैनियन सेना ने अपने सारे युद्धकाल में कभी होते हुए नहीं देखा था, कोई आजतक सिकंदर, सिकंदर के अश्व क्या उसकी विशिष्ट अन्तः टुकड़ी तक को खरोंच नहीं दे पाया था ! सिकंदर जमीन पर गिरा तो सामने राजा पुरु तलवार लिए सामने खड़ा था, मैसेडोनिअ का महान विश्वविजेता बस पल भर का मेहमान था की तभी राजा पुरु ठिठक गया ! यह डर नहीं था, शायद यह आर्य राजा का क्षात्र धर्म था, बहरहाल तभी सिकंदर के अंगरक्षक उसे तेजी से वहाँ से भगा ले गए I

भारत में शत्रुओं के उत्तरपश्चिम से घुसने के दो ही रास्ते रहे हैं जिसमे सिंधु का रास्ता कम खतरनाक माना जाता था! क्यों? सिकंदर सनक में आगे तक घुस गया जहाँ उसकी पलटन को भरी क्षति उठानी पड़ी, पहले ही भारी क्षति उठाकर यवनी सेनापति अब समझ गए थी की अगर युद्ध और चला तो सारे यवनी यहीं नष्ट कर दिए जायेंगे, यह निर्णय पाकर सिकंदर वापस भागा पर उस रास्ते से नहीं भाग पाया जहाँ से आया था और उसे दुसरे खतरनाक रास्ते से गुजरना पड़ा जिस क्षेत्र में प्राचीन क्षात्र या जाट निवास करते थे (आज भी करते हैं) उस क्षेत्र को जिसका पूर्वी हिस्सा आजके हरयाणा में स्थित था और जिसे "जाट प्रदेश" कहते थे !! इस प्रदेश में पहुँचते ही सिकंदर का सामना जाट वीरों से (और पंजाबी वीरों से सांगल क्षेत्र में) हो गया और उसकी अधिकतर पलटन का सफाया जाटो ने कर दिया, भागते हुए सिकंदर पर एक जाट सैनिक ने बरछा फेंका जो उसकी वक्ष कवच को बींधता हुआ पार हो गया I यह घटना आजके सोनीपत नगर के पास हुआ था (मैं उस वीर की पहचान जानने का प्रयास कर रही हु) I इस हमले में सिकंदर तुरंत नहीं मरा बल्कि आगे जाकर जाटप्रदेश की पश्चिमी सीमा गांधार में जाकर उसके प्राणपखेरू उड़ गए!! (यवनी इतिहासकारों ने लिखा- सिकंदर बेबीलोन (आधुनिक इराक) में बीमारी से मरा!- ३२६ ई. पू.) महान यवनराज्य के बड़बोले इतिहासकारों के लिए ये अत्यंत अपमानजनक एवं असहनीय था !!

सिकंदर के दरबारियों एवं रक्षकों ने इस अपमान से बचने के लिए वो कथा बनायीं जो सिकंदर की महिमामंडित छवि से मेल खा सके! और उन्होंने पोरस और सिकंदर की अतिश्योक्तिपूर्ण नाटकीय गाथा बनायीं !! पर हर विदेशी ने पूरा गप्प नहीं लिखा प्लूटार्क ने लिखा — सिकंदर राजा पुरु की २०, ००० की सेना के सामने तो ठहर नहीं पाया आगे विश्व की महानतम राजधानी की विशालतम सम्राट धनानंद की सेना ३ ५० ००० की सेना उसका स्वागत करने के लिए तैयार थी जिसमे ८०,००० घुड़सवार, ८००० युद्धक रथ एवं ७०००० विध्वंसक हाथीसेना थी उसके सैनिक मुर्गी- तीतर जैसे काट दिए जाते ..I उस महान सिकंदर की महान सेना में किसने वापस लौटे ये तो बस सोचने वाली ही बात है!! पर, आज हम वो क्यों जानते हैं जो सभी यवनी- ग्रीक अपनी स्वमुग्धता में मानते हैं?

ग्रीको की शिक्षा यूरोपियनों ने ली और अंग्रेजों ने ग्रीक-रोमनों की सभ्यता से प्रेरणा ली और वही इतिहास अपने निवासियों को पढ़ाया !! व इतिहास अंग्रेजों के साथ भारत में आ गया और अंग्रेजी गुलामी के साथ हम आज भी सिकंदर को महान और प्रथम भारतीय वीरो में से एक राजा पुरु को पराजित एवं लज्जित मानते हैं.. शर्म नाक है, पर उससे भी अधिक शोचनीय है की हम आज भी नहीं जानतेI हम आज भी अपने नायको को नहीं जानते, क्योंकि गुलामी हमारी मानसिकता में रचबस गयी है, हमारी पहचान मुगलो और अंग्रेजो की गुलामी से अधिक नहीं है आज भी कई, या शायद सभी भारत को विदेशी इतिहास से समझ रहे हैं, ग्रीक और रोमन सभ्यता को महानतम समझ रहे हैं.. और उसी ग्रीको-रोमन साम्राज्य से विशुद्ध अनुचर की तरह अंग्रेजो को वापस इस देश पर शासन करने का आमंत्रण देने के लिए अपने प्रधानमत्री को भेजते हैं!! कदाचित, हम अभी जिन्दा नहीं हुए हैं !

इतिहास दोहराने का नहीं कुछ शिक्षा लेने का होता है।

जय जननी, जय मातृभूमि....

 
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789 days
 
DelhiDude

Myth: Mobile phones can cause fires at petrol filling stations
Fact: Petroleum gas is flammable - it can be ignited by a spark. But that spark will probably come from matches, lighters or static electricity and not your mobile phone. The fear is that a faulty phone or battery will cause a spark and fire but this is extremely unlikely and there is not a single verified incidence of this.

 
115
 
845 days
 
rajeshyadav.net

Déja Vu occurs when your brain applies a memory of a similar situation to your current situation, making you think it has happened already.

 
67
 
494 days
 
dre@m_factory

iGyan


Your nose is connected to your memory center; that's why smells trigger powerful memories.

 
87
 
939 days
 
Kashyap 139.94

Alaska Facts In Hindi
अलास्का के बारे में रोचक तथ्य

1. 1867 में अमेरिका ने रूस से अलास्का को सिर्फ $70 लाख डाॅलर में खरीदा था।

2. अलास्का इतना बड़ा हैं कि इसमें अमेरिका के New jerseys शहर जैसे 75 और फिट हो सकते हैं।

3. एक बिल्ली को लगभग 15 साल तक Alaska में मेयर बनाया गया था।

4. अमेरिका का सबसे बड़ा प्रांत Alaska में है जो लगभग जर्मनी के बराबर हैं।

5. अलास्का में एक जगह ऐसी भी हैं जहाँ जहाज से pizza deliever किया जाता हैं।

6. Alaska मे एक रेगिस्तान भी है जिसमें 150 फुट ऊंचे रेत के टीले बनते हैं।

7. 1975 के बाद Alaska में नशीली चीजों के प्रयोग पर बैन हटा दिया था।

8. अगर पूरे अमेरिका की बात की जाए तो पैदल काम पर सबसे ज्यादा Alaska के लोग जाते हैं।

9. पूरे अमेरिका के सबसे ज्यादा रेप Alaska में होते हैं।

10. अमेरिका के Central Park की कीमत और अलास्का की कीमत बराबर हैं।

11. Alaska के English keyboard पर सभी letters लगातार लिखे हुए हैं।

12. Alaska के सबसे नजदीक प्वाइंट से रूस केवल 2 miles दूर रह जाता हैं।

13. Alaska की राजधानी तक रोड़ से पहुंचना असंभव हैं।

14. अमेरिका में प्रयोग होने वाला 20% तेल Alaska से आता हैं।

15. हर साल Alaska में 5000 भूकंप आते हैं.

16. Alaska के कुछ हिस्से में सूरज 84 दिन तक भी नही छिपता।

17. 1 अप्रैल 1974 को अलास्का के एक ज्वालामुखी के नजदीक काला धुंआ उड़ता हुआ नजर आया. इसको देखकर वहां का कोस्ट गार्ड जब धुएं के नजदीक पहुंचा तो देखा कि 70 टायर जल रहे थे और बर्फ पर अप्रैल फूल लिखा हुआ था.

 
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162 days
 
B P S R

An Interesting Fact

Before 1997, the fasting sugar limit for Diabetes was 140.

WHO put a panel to decrease it and was fixed it as 126.

All of a sudden 14% of world population became diabetics overnight.

Later in 2003, American Diabetic Association again decreased the limit to 100.

And after this 90% of Indian population became diabetic.

And do you know who are the members of those panels deciding the fasting sugar limit ??

They are the consultants of 7 big pharmaceutical companies in world.

So in short, it's the Pharma industry that decides if you are diabetic or not.

Be aware !

 
311
 
920 days
 
Dev ;)
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