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लोग अपने पार्टनर को अपना Better Half क्यों कहते हैं? Greek Mythology में है इसकी बहुत मज़ेदार कहानी

किसी की Wife या हस्बैंड को सम्बोधित करने के लिए हम हमेशा ही फ़लाने के Better Half या हिंदी में महिलाओं के लिए अर्धांगिनी शब्द का प्रयोग करते हैं. Subconsciously हम इसे 'पति/ पत्नी/ पार्टनर' के लिए इस्तेमाल होने वाला दूसरा शब्द मानते हैं. ऐसा लगभग दुनिया के सभी देशों में होता है. किसी की शादी भी होने वाली हो, तो भी वो कहता है कि ' I Am Searching For My Better Half', मैं अपने लिए अपना Better Half ढूंढ रहा हूं.
जानते हैं Better Half का इस्तेमाल कहां से चला आ रहा है? आप यकीन नहीं करेंगे, लेकिन ग्रीक माइथोलॉजी में Better Half शब्द का इस्तेमाल करने के पीछे बहुत Interesting कहानी है.

ग्रीक माइथोलॉजी के हिसाब से, पहले इंसान बहुत ज़्यादा शक्तिशाली और तेज़ दिमाग के हुआ करते थे. उनका एक सिर और दो चेहरे थे, जो अलग-अलग डायरेक्शन में थे, 4 हाथ, पैर और दो गुप्तांग भी थे. कुछ इंसाओं में आदमी-आदमी का सेट था, औरत-औरत का सेट था कर आदमी-औरत का सेट था.

लेकिन इतनी ज़्यादा शक्ति मिलने से इंसान ओवर-कॉन्फिडेंस का शिकार हो गया और उसने भगवान पर हमला करने की सोची. अपनी इतनी ख़ूबसूरत रचना को मारना Zeus (थंडर और आसमान के देवता) को सही नहीं लगा, लेकिन उन्हें ये पता था कि उन्हें इंसान की शक्ति कमी करनी होगी, वरना वो इसका ग़लत इस्तेमाल करेगा.
Zeus ने इन्सान को दो टुकड़ों में बांट दिया. आदमी-आदमी अलग हुए, औरत-औरत अलग हुए और आदमी-औरत वाले इंसान भी अलग हुए. Symposium में ये लिखा गया कि कैसे Zeus ने Apollo की मदद से इंसान को अलग-अलग बांट दिया. लेकिन क्योंकि ये सभी एक-दूसरे से इमोशनली जुड़े हुए थे, इसलिए अलग होने के बाद भी वो एक-दूसरे को ढूंढने लगे. जो इंसान पहले आदमी-औरत थे, वो आदमी औरत को और औरत आदमी को ढूंढने लगे. जो आदमी-आदमी थे, वो एक-दूसरे को ढूंढने लगे और जो औरत-औरत थे, वो एक-दूसरे को ढूंढने लगे.

ये सभी अपने पुराने हिस्सों की खोज में लग गए और उनके बिना कईयों की मौत हो गयी और कुछ डिप्रेशन में चले गये. अपने पुराने हिस्सों को ढूंढने का मकसद सिर्फ़ सेक्स नहीं, बल्कि इमोशनल भी था.
अपने पुराने अंग को इस तरह ढूंढने से वंश आगे बढ़ाने का एक नया तरीका मिल गया. इंसान के पुराने शरीर का वो हिस्सा अपने दूसरे हिस्से यानि दूसरे Half को ढूंढने लगा और यहीं से शुरू हुआ अपने पार्टनर को अपना Half या आधा हिस्सा कहने का चलन.

 
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28 days
 
Sam's Son

इंडिया का वो बादशाह जिसके सामने मुगलों को छुपने की जगह नहीं मिली

शेरशाह का जन्म 1486 के आस-पास बिहार में हुआ था. हालांकि इसके जन्म वर्ष और जगह दोनों को लेकर मतभेद है. कई जगह ये कहा जाता है कि शेरशाह का जन्म हिसार, हरियाणा में हुआ था. साल भी बदल जाता है. शेरशाह का नाम फरीद खान हुआ करता था. इनके पिताजी का नाम हसन खान था. हसन खान बहलोल लोदी के यहां काम करते थे. शेरशाह के दादा इब्राहिम खान सूरी नारनौल के जागीरदार हुआ करते थे. नारनौल में इब्राहिम का स्मारक भी बना है. ये लोग पश्तून अफगानी माने जाते थे. सूरी टाइटल इनके अपने समुदाय सुर से लिया गया था. ऐसा भी कहा जाता है कि इनके गांव सुर से ये टाइटल आता है. इतिहास की बात है, जब तक तीन-चार वर्जन नहीं रहते एक ही स्टोरी के, मजा नहीं आता.

फरीद जब बड़ा हो रहा था, तभी उसने एक शेर मार डाला था. और इसी वजह से फरीद का नाम शेर खान पड़ गया. जहां शेर मारा था, उस जगह का नाम शेरघाटी पड़ गया. ये बातें भी कहानी हो सकती हैं. शेर खान के 8 भाई थे. सौतली मांएं भी थीं. शेर खान की घर में बनी नहीं, क्योंकि वो महत्वाकांक्षी था. वो घर छोड़कर जौनपुर के गवर्नर जमाल खान की सर्विस में चला गया. वहां से फिर वो बिहार के गवर्नर बहार खान लोहानी के यहां चला गया. यहां पर शेर खान की ताकत और बुद्धि को पहचाना गया. बहार खान से अनबन होने पर शेर खान ने बाबर की सेना में काम करना शुरू कर दिया. वहीं पर उसने नई तकनीक सीखी थी जिसके दम पर बाबर ने 1526 में बहलोल लोदी के बेटे इब्राहिम लोदी और बाद में राणा सांगा को हराया था. यहां से निकलकर फिर वो बिहार का गवर्नर बन गया.

एक वक्त था कि मगध साम्राज्य इतना विशाल था कि सिकंदर भी हमला करने से मुकर गया था. पर बाद में धीरे-धीरे पावर सेंटर दिल्ली की तरफ शिफ्ट होने लगा था. शेर खान ने जब बिहार की कमान संभाली तो कोई भी बिहार को पावर सेंटर मानने को तैयार नहीं था. शेर खान ने अपनी ताकत बढ़ानी शुरू कर दी. अपनी सेना तैयार करने लगा.

1538 में शेर खान धीरे-धीरे अपने कदम बढ़ाने लगा. बाबर की मौत के बाद हुमायूं बादशाह बना था. मुगल हिंदुस्तान छोड़कर वापस नहीं गए थे. जब हुमायूं बंगाल रवाना हुआ तो शेर खान ने उससे लड़ने का मन बना लिया. 1539 में बक्सर के पास चौसा में दोनों की भिड़ंत हुई. हुमायूं को जान बचा के भागना पड़ा. 1540 में फिर दोनों की भिड़ंत कन्नौज में हुई. वहां भी हुमायूं को हारना पड़ा. बंगाल, बिहार और पंजाब तीनों छोड़ के हुमायूं देश से ही भाग गया. शेर खान ने दिल्ली में सूर वंश की स्थापना कर दी. धीरे-धीरे उसने मालवा, मुल्तान, सिंध, मारवाड़ और मेवाड़ भी जीत लिया. अपना नाम शेरशाह रख लिया. हुमायूं 15 साल तक देश से बाहर रहा.

शेरशाह के बारे में कई बातें फेमस हैं:

1. शेरशाह ने अपना प्रशासन हाई लेवल का रखा था. उसके रेवेन्यू मिनिस्टर टोडरमल को बाद में अकबर ने भी नियुक्त किया था. वो अकबर को नवरत्नों में से एक थे.

2. शेरशाह का दिमाग इतना तेज था कि उसने खावस खान को अपना कमांडर बना लिया था. खान बेहद गरीब व्यक्ति था. वो जंगल में लोमड़ियों का शिकार करता था. पर शेरशाह ने उसकी प्रतिभा को पहचाना.

3. शेरशाह के राज को लेकर कोई भी कम्युनल बात नहीं होती है. राज करने के मामले में वो अकबर से भी आगे थे. अकबर के चलते मुस्लिम नाराज थे क्योंकि वो हिंदुओं को प्रश्रय देता था. वहीं औरंगजेब के चलते हिंदू-मुस्लिम दोनों परेशान थे. पर शेरशाह ने सबको साध के रखा था. उसकी महत्वाकांक्षा सबसे अलग थी.

4. शेरशाह दूरदर्शी व्यक्ति था. उसने फेमस जीटी रोड बनवाया था. जो पेशावर से लेकर कलकत्ता तक था. उस वक्त ये बहुत ही बड़ी बात थी. इससे ट्रांसपोर्ट और व्यापार काफी बढ़ गया था.

5. अकबर के एक अफसर ने लिखा था कि शेरशाह के राज में कोई सोने से भरा थैला लेकर रेगिस्तान में भी सो जाए तो चोरी-छिनैती नहीं होती थी.

6. अकबर के ही करीबी अतगा खान के बेटे मिर्जा अजीज कोका ने लिखा था कि शेरशाह ने मात्र 5 सालों में जो फाउंडेशन तैयाप किया था कि वो आगे भी चलता रहा.

7. अकबर को शेरशाह का बनाया राज्य मिला था. शेरशाह की असमय मौत नहीं हुई होती तो कुछ और ही इतिहास देखने को मिलता.

नवंबर 1544 में शेरशाह ने कालिंजर पर घेरा डाला था. वहां के शासक कीरत सिंह ने शेरशाह के आदेश के खिलाफ रीवा के महाराजा वीरभान सिंह बघेला को शरण दे रखी थी. महीनों तक घेराबंदी लगी रही. पर कालिंजर का किला बहुत मजबूत था. अंत में शेरशाह ने गोला-बारूद के प्रयोग का आदेश दिया. शेरशाह पीछे रहने वालों में से नहीं था. वो खुद भी तोप चलाता था. कहते हैं कि एक गोला किले की दीवार से टकराकर इसके खेमे में विस्फोट कर गया. जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई.

 
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30 days
 
Sam's Son

Read this very Slowly & Steadily...
Very important things for our lives !!

11 FORMULAS FOR GROWING OLD WITH GRACE :

1. Live in your own place to enjoy independence & privacy.

2. Hold on to your bank deposits and assets with yourself.

3. Don't depend only on your children's promise to care for you when you grow old as their prioroties change with time.

4. Expand your circle of friends to include those who will outlive you.

5. Do not compare and expect nothing from others.

6. Do not meddle in the life of your children. Let them live THEIR life not yours.

7. Do not use old age as your shield and justification to demand care, respect and attention.

8. Listen to what others say but think and act independently.

9. Pray, but do not beg, even from God. If at all, ask for his forgiveness.

Last 2 IMPORTANT ONES ..

*m10. TAKE GOOD CARE OF OWN HEALTH. Apart from Medical Attention, eat Best Food in the Best Way (you can afford) & always Try to Do your own Work ...

And finally,

11. DO NOT RETIRE FROM LIFE.

Remember,
You are not ALIVE, unless and until you start LIVING !!!

HAPPY LIVING 👍

 
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Jasmine

इन 11 बड़े Differences की वजह से अलग-अलग और जुदा-जुदा हैं हॉलीवुड-बॉलीवुड

बॉलीवुड और हॉलीवुड फ़िल्मों में यूं तो कई समानताएं हैं, बॉलीवुड का नाम तक, हॉलीवुड की तर्ज पर रखा गया है. लेकिन, दोनों फ़िल्म हॉलीवुड और बॉलीवुड में कई सारे अन्तर भी हैं, जो इनकी पहचान और ट्रेडमार्क बन गए हैं. अगर आप हॉलीवुड और बॉलीवुड, दोनों के शौक़ीन हैं, तो यकीनन ये अंतर आपने भी महसूस किये होंगे.
ये हैं वो 11 अन्तर, जो एक हॉलीवुड फ़िल्म को, बॉलीवुड फ़िल्मों से अलग करते हैं.
1. आमतौर पर हॉलीवुड में हल्के रंग का प्रयोग किया जाता है. वहीं, बॉलीवुड में Costume से लेकर सेट्स तक, सबकुछ एकदम रंगीन और भड़कीला होता है.
2. हॉलीवुड में पारंपरिक चीज़ें नहीं दिखाई जातीं, सबकुछ आधुनिक अंदाज़ में दिखाया जाता है. इसके उलट, बॉलीवुड में शादी से लेकर गोदभराई तक, दीपावली से लेकर होली तक, सबकुछ पारंपरिक अंदाज़ में ही दिखाया जाता है.
3. जहां हॉलीवुड, अपनी फ़िल्म को भव्य बनाने के लिए तकनीक पर ज़ोर देता है, वहीं बॉलीवुड में भव्यता के नाम पर महंगे कपड़े और हसीं वादियां दिखाई जाती हैं.
4. बॉलीवुड में इमोशनल सीन में, कलाकार खुल कर अपनी भावनाएं दिखाते हैं. जबकि हॉलीवुड में कलाकार अपने चेहरे पर बहुत ज़्यादा भाव नहीं लाते.
5. हॉलीवुड में गानें बैकग्राउंड में बजते हैं, लेकिन बॉलीवुड में ये कहानी का हिस्सा होते हैं, जिन पर फ़िल्म में सब नाचना शुरू कर देते हैं.
6. हॉलीवुड की कॉमेडी फ़िल्म में, मुख्य किरदार की लाइफ़ में होने वाली अजीबोगरीब घटनाएं दिखा कर हंसाया जाता है, तो दूसरी तरफ़ बॉलीवुड फ़िल्मों की कॉमेडी Loud होती है. यहां पर चुटकुलों और कलाकारों के आपसी संवाद के माध्यम से दर्शकों को हंसाने की कोशिश की जाती है.
7. हॉलीवुड और बॉलीवुड दोनों इन्डस्ट्री में बनने वाली साइन्स फ़िक्शन फ़िल्मों में काफ़ी अन्तर होता है. हॉलीवुड की सुपरहीरो वाली फ़िल्म, तकनीकी तौर पर काफ़ी बेहतर होती हैं. वहीं बॉलीवुड की साइन्स फ़िक्शन फ़िल्में, बचकाने कॉस्ट्यूम और बेकार विज़ुअल इफ़ेक्ट्स के कारण कॉमेडी फ़िल्म ज़्यादा लगती हैं.
8. हॉलीवुड फ़िल्म में Couple का एक-दूसरे को छोड़ देना आम बात होती है. बॉलीवुड फ़िल्मों में ऐसा नहीं होता है, बॉलीवुड में हीरो और हीरोइन को सिर्फ़ मौत ही जुदा कर सकती है.
9. हॉलीवुड फ़िल्मों की अभिनेत्रियां पतली, लम्बी और फ़िट होती हैं. उनका शरीर बिल्कुल परफ़ेक्ट होता है. लेकिन बॉलीवुड की अभिनेत्रियां ज़ीरो साइज़ में विश्वास नहीं करती हैं. इनका ज़्यादा फ़ोकस चेहरे की सुन्दरता पर होता है.
10. हॉलीवुड में फ़िल्म मशहूर होती हैं. बॉलीवुड में फ़िल्म स्टार मशहूर होते हैं. हॉलीवुड में अगर फ़िल्म अच्छी है, तो उस फ़िल्म के अभिनेता भी मशहूर होते हैं और स्टार बन जाते हैं. जबकि बॉलीवुड में दर्शक तभी फ़िल्म देखने जाते हैं, जब फ़िल्म में कोई स्टार हो.
11. हॉलीवुड फ़िल्में आमतौर पर जो Message देना चाहती हैं, उसका संकेत भर देती हैं. उसके बाद दर्शक अपने आपको Message से जोड़ लेते हैं. जबकि बॉलीवुड फ़िल्में में मेसेज काफ़ी क्लियर होता है.

 
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Sam's Son
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