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Psychology facts :

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Couples who spend at least 10 minutes a day laughing together are more likely to have a stronger relationship.

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Any friendship that exceeds the 7 yr mark is more likely to last an entire lifetime.

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You can judge a lot about a person's character by what they laugh at.

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A lot of problems in the world would disappear if we talk to each other instead of talking about each other.

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Kids who play video games tend to have better hand-eye coordination, a better memory, and better problem solving skills.

⭕⭕⭕
A person is more likely to use " K " in a text message when they have no interest in talking to you.

⭕⭕⭕
75% of women ask questions in which they already know the answer. This is why it's best to simply tell her the truth.

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Everyone has a song in their playlist which they always skip, but never delete.

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People who talk to themselves are more likely to have a high I.Q.

⭕⭕⭕
If you chew gum when you study a subject and then chew the same flavor when you the take the test it can help you remember.

⭕⭕⭕
Your body is actually designed to get 4 hours of sleep twice per day instead of 8 hours once!

⭕⭕⭕
Over thinking can cause physical and mental fatigue, it may also lead to chronic depression.

⭕⭕⭕
Ironically, sometimes the people who don't talk to you are the one's who really want to.

⭕⭕⭕
Psychology says, the best things in life are usually found when you are not looking for them.

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According to old myths, the inability to fall asleep at night means you're awake in someone's dream

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Smiles have been proven to be more attractive on a woman's face than makeup.

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Lack of sleep makes it difficult to control emotions which is why people are more likely to cry or laugh uncontrollably at night.

⭕⭕⭕
You were smiling while reading this message.

Keep smiling it suits you.😊🌼🌿😊

 
3277
 
668 days
 
*****sonu*****

🙏गुड़ खाने से 18 फायदे :🙏

1>गुड़ खाने से नहीं होती गैस की दिक्कत
2>खाना खाने के बाद अक्सर मीठा खाने का मन करता हैं। इसके लिए सबसे बेहतर है कि आप गुड़ खाएं। गुड़ का सेवन करने से आप हेल्दी रह सकते हैं
3> पाचन क्रिया को सही रखना
4> गुड़ शरीर का रक्त साफ करता है और मेटाबॉल्जिम ठीक करता है। रोज एक गिलास पानी या दूध के साथ गुड़ का सेवन पेट को ठंडक देता है। इससे गैस की दिक्कत नहीं होती। जिन लोगों को गैस की परेशानी है, वो रोज़ लंच या डिनर के बाद थोड़ा गुड़ ज़रूर खाएं
5> गुड़ आयरन का मुख्य स्रोत है। इसलिए यह एनीमिया के मरीज़ों के लिए बहुत फायदेमंद है। खासतौर पर महिलाओं के लिए इसका सेवन बहुत अधिक ज़रूर है
6> त्वचा के लिए -- गुड़ ब्लड से खराब टॉक्सिन दूर करता है, जिससे त्वचा दमकती है और मुहांसे की समस्या नहीं होती है।
7> गुड़ की तासीर गर्म है, इसलिए इसका सेवन जुकाम और कफ से आराम दिलाता है। जुकाम के दौरान अगर आप कच्चा गुड़ नहीं खाना चाहते हैं तो चाय या लड्डू में भी इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।
8> एनर्जी के लिए -- बुहत ज़्यादा थकान और कमजोरी महसूस करने पर गुड़ का सेवन करने से आपका एनर्जी लेवल बढ़ जाता है। गुड़ जल्दी पच जाता है, इससे शुगर का स्तर भी नहीं बढ़ता। दिनभर काम करने के बाद जब भी आपको थकान हो, तुरंत गुड़ खाएं।
9> गुड़ शरीर के टेंपरेचर को नियंत्रित रखता है। इसमें एंटी एलर्जिक तत्व हैं, इसलिए दमा के मरीज़ों के लिए इसका सेवन काफी फायदेमंद होता है।
10> जोड़ों के दर्द में आराम -- रोज़ गुड़ के एक टुकड़े के साथ अदरक का सेवन करें, इससे जोड़ों के दर्द की दिक्कत नहीं होगी।
11> गुड़ के साथ पके चावल खाने से बैठा हुआ गला व आवाज खुल जाती है।
12> गुड़ और काले तिल के लड्डू खाने से सर्दी में अस्थमा की परेशानी नहीं होती है।
13> जुकाम जम गया हो, तो गुड़ पिघलाकर उसकी पपड़ी बनाकर खिलाएं।
14> गुड़ और घी मिलाकर खाने से कान का दर्द ठीक हो जाता है।
15> भोजन के बाद गुड़ खा लेने से पेट में गैस नहीं बनती ।
16> पांच ग्राम सौंठ दस ग्राम गुड़ के साथ लेने से पीलिया रोग में लाभ होता है।
17> गुड़ का हलवा खाने से स्मरण शक्ति बढती है।
18> पांच ग्राम गुड़ को इतने ही सरसों के तेल में मिलाकर खाने से श्वास रोग से छुटकारा मिलता है।
🍀 अच्छी बातें , अच्छे लोगों, अपने मित्र , रिश्तेदार और ग्रुप मे अवश्य शेयर करे.
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676 days
 
DDLJ143

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रोचक जानकारी #
1. विश्व का सबसे अमीर देश स्विटजरलैंड है।
2. सऊदी अरब मेँ एक भी नदी नही है।
3. विश्व का सबसे दानी आदमी अमेरिका का राकफेलर है जिसने अपने जीवन मेँ सार्वजनिक हित के लिए 75 अरब रुपए दान मेँ दे दिए।
4. सबसे महँगी वस्तु यूरेनियम है।
5. दक्षिण ऑस्ट्रेलिया मेँ आयार्स नामक पहाडी
प्रतिदिन अपना रंग बदलती है।
6. विश्व मेँ रविवार की छुट्टी 1843 से शुरु हुई थी।
7. सारे संसार मेँ कुल मिलाकर 2792 भाषाएँ हैं। 8. फ्रांस ऐसा देश है जहां मच्छर नहीं होते हैं।
9. दक्षिण अफ्रिक में कोबरा नामक वृक्ष के पास इंसान के
जाते ही उसकी डालियाँ उसे जकड लेती है और तब तक नही
छोड़ती जब तक वो प्राण ना त्याग दे ।
10. नार्वे देश में सूरज आधी रात में चमकता हैं।
..............
जानकारी रोके नहीं दूसरों को दे।
ज्ञान बाटने से बढ़ता है!

 
1884
 
654 days
 
DDLJ143

दुनिया की 90% महिलाओ के नाम के आखिरी में
A, I, U or L आता है यदि विश्वास न हो तो सोच कर देखो।
😊

😜😜😜😜😜😜😊

 
1743
 
669 days
 
ItsRDil

क्या आप जानते हैं?* 👉 खड़े खड़े पानी पीने वाले का घुटना दुनिया का कोई डॉक्टर ठीक नहीँ कर सकता। 👉* तेज पंखे के नीचे या A. C. में सोने से मोटापा बढ़ता है। 👉* 70% दर्द में एक ग्लास गर्म पानी किसी भी पेन किलर से भी तेज काम करता है। 👉* कुकर में दाल गलती है, पकती नहीँ। इसीलिए गैस और एसिडिटी करती है। 👉* अल्युमिनम के बर्तनों के प्रयोग से अंग्रेजों नें देशभक्त भारतीय क़ैदियों को रोगी बनाया था। 👉* शर्बत और नारियल पानी सुबह ग्यारह के पहले अमृत है। 👉* लकवा होते ही मरीज के नाक में देशी गाय का घी डालने से लकवा पन्द्रह मिनट मेँ ठीक हो जाता है। 👉* देशी गाय के शरीर पर हाथ फेरने से 10 दिन में ब्लड प्रेसर नॉर्मल हो जाता है। अच्छी बातें , अच्छे लोगों, अपने मित्र , रिश्तेदार और ग्रुप मे अवश्य शेयर करे. 🙏😊

 
1699
 
549 days
 
anil Manawat

10 funny Info

हर साल 4 लोग अपनी पैंट बदलते समय अपनी जान गवा देते हैं.

Kiss करने से ज्यादा हाथ मिलाते समय germs एक दुसरे को ट्रान्सफर होते हैं.

धरती पे जितना भार सारी चीटीयों का है उतना ही सारे मनुष्यो का है.

चीन में एक 17 साल के लड़के ने i pad2 और i phone के लिए अपनी kidney बेच दी थी.

राष्ट्रपति जार्ज बुश ने एक बार जपानी प्रधानमंन्त्री की कुर्सी पर उल्टी कर दी थी.

बिल गेट्स हर सेकेण्ड में करीब 12000 रुपये कमाते हैं यानि एक दिन में करीब 102 करोड़ रूपये.

फिलिपिन्स में पाया जाने वाला बोया पक्षी प्रकाश में रहने का इतना शौकीन होता है कि अपने घोंसले के चारो और जुगनु भरकर लटका देता है.

अगर एक बिच्छू पर थोड़ी सी मात्रा में भी शराब या रस डाल दिया जाए तो यह पागल हो जाएगा और खुद को डंक मार लेगा.

व्यक्ति खाना खाए बिना कई हफ्ते गुजार सकता है, लेकिन सोए बिना केवल 11 दिन रह सकता है।

सपनो में हम सिर्फ वही चीजें देख सकते हैं जो हम पहले से देख चुके हैं.

 
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650 days
 
DDLJ143

भारत के ये 11 अजब गज़ब गाँव जहाँ आप एक बार जरूर जाना चाहेंगे👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻



1. एक गाँव जहां दूध दही मुफ्त मिलता है👇🏻


यहां के लोग कभी दूध या उससे बनने वाली चीज़ो को बेचते नही हैं बल्कि उन लोगों को मुफ्त में दे देते हैं जिनके पास गएँ ये भैंसे नहीं हैं धोकड़ा गुजरात के कक्ष में बसा ऐसा ही अनोखा गाँव है आज जब इंसानियत खो सी गयी है लोग किसी को पानी तक नही पूछते श्वेत क्रांति के लिए प्रसिद्ध ये गाँव दूध दही ऐसे ही बाँट देता है, यहां पर रहने वाले एक पुजारी बताते हैं की उन्हें महीने में करीब 7,500 रुपए का दूध गाँव से मुफ्त में मिलता है।



2. इस गाँव में आज भी राम राज्य है👇🏻


महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के नेवासा तालुके में शनि शिन्ग्नापुर भारत का एक ऐसा गाँव है जहाँ लोगों के घर में एक भी दरवाजा नही है यहाँ तक की लोगों की दुकानों में भी दरवाजे नही हैं, यहाँ पर कोई भी अपनी बहुमूल्य चीजों को ताले - चाबी में बंद करके नहीं रखता फिर भी गाँव में आज - तक कभी कोई चोरी नही हुई |


3. एक अनोखा गाँव जहाँ हर कोई संस्कृत बोलता हैं👇🏻



आज के समय में हमारे देश की राष्ट्र भाषा हिंदी भी पहचान के संकट से जूझ रही हैं , कर्नाटक के शिमोगा शहर के कुछ ही दूरी पर एक गाँव ऐसा बसा हैं जहाँ ग्रामवासी केवल संस्कृत में ही बात करते हैं। शिमोगा शहर से लगभग दस किलोमीटर दूर मुत्तुरु अपनी विशिष्ठ पहचान को लेकर चर्चा में हैं। तुंग नदी के किनारे बसे इस गांव में संस्कृत प्राचीन काल से ही बोली जाती है।

करीब पांच सौ परिवारों वाले इस गांव में प्रवेश करते ही "भवत: नाम किम्?" (आपका नाम क्या है?) पूछा जाता है "हैलो" के स्थान पर "हरि ओम्" और "कैसे हो" के स्थान पर "कथा अस्ति?" आदि के द्वारा ही वार्तालाप होता हैं। बच्चे, बूढ़े, युवा और महिलाएं- सभी बहुत ही सहज रूप से संस्कृत में बात करते हैं। भाषा पर किसी धर्म और समाज का अधिकार नहीं होता तभी तो गांव में रहने वाले मुस्लिम परिवार के लोग भी संस्कृत उतनी ही सहजता से बोलते हैं जैसे दूसरे लोग।

गाँव की विशेषता हैं कि गाँव की मातृभाषा संस्कृत हैं और काम चाहे कोई भी हो संस्कृत ही बोली जाती हैं जैसे इस गांव के बच्चे क्रिकेट खेलते हुए और आपस में झगड़ते हुए भी संस्कृत में ही बातें करते हैं। गांव में संस्कृत में बोधवाक्य लिखा नजर आता है। "मार्गे स्वच्छता विराजते। ग्रामे सुजना: विराजते।" अर्थात् सड़क पर स्वच्छता होने से यह पता चलता है कि गाँव में अच्छे लोग रहते हैं। कुछ घरों में लिखा रहता है कि आप यहां संस्कृत में बात कर कर सकते हैं। इस गांव में बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा संस्कृत में होती है


4. एक गांव जो हर साल कमाता है 1 अरब रुपए👇🏻

यूपी का एक गांव अपनी एक खासियत की वजह से पूरे देश में पहचाना जाता है। आप शायद अभी तक इस गांव की पहचान से दूर रहे हों, लेकिन देश के कोने-कोने में इस गांव ने अपने झंडे गाड़ दिए हैं।

अमरोहा जनपद के जोया विकास खंड क्षेत्र का ये छोटा सा गांव है सलारपुर खालसा। 3500 की आबादी वाले इस गांव का नाम पूरे देश में छाया है और इसका कारण है टमाटर। गांव में टमाटर की खेती बड़े पैमाने पर होती है और 17 साल में टमाटर आसपास के गांवों जमापुर, सूदनपुर, अंबेडकरनगर में भी छा गया है।

देश का शायद ही कोई कोना होगा, जहां पर सलारपुर खालसा की जमीन पर पैदा हुआ टमाटर न जाता हो। गांव में 17 साल से चल रही टमाटर की खेती का क्षेत्रफल फैलता ही जा रहा है और अब मुरादाबाद मंडल में सबसे ज्यादा टमाटर की खेती इसी गांव में होती है। कारोबार की बात करें, तो पांच माह में यहां 60 करोड़ का कारोबार होता है।

जनपद में 1200 हेक्टेयर में होने वाली टमाटर की खेती में इन चार गांवों में ही अकेले 1000 हेक्टेयर में खेती होती है। जिसके चलते यह गांव मुरादाबाद मंडल में भी अव्वल नंबर पर है। जबकि सूबे में भी टमाटर खेती में आगे रहने वाली जगहों में इस गांव का नाम शामिल है।

इस साल की बात करें, तो प्रदेश में डेढ़ क्विंटल टमाटर बीज की बिक्री हुई थी। जिसमें अकेले सलारपुर खालसा में ही 80 किलो बीज बिका था।


5. ये है जुड़वों का गाँव, रहते है 350 से ज्यादा जुड़वाँ👇🏻

केरल के मलप्पुरम जिले में स्तिथ कोडिन्ही गाँव (Kodihni Village) को जुड़वों के गाँव (Twins Village) के नाम से जाना जाता है। यहाँ पर वर्तमान में करीब 350 जुड़वा जोड़े रहते है जिनमे नवजात शिशु से लेकर 65 साल के बुजुर्ग तक शामिल है। विशव स्तर पर हर 1000 बच्चो पर 4 जुड़वाँ पैदा होते है, एशिया में तो यह औसत 4 से भी कम है। लेकिन कोडिन्ही में हर 1000 बच्चों पर 45 बच्चे जुड़वा पैदा होते है। हालांकि यह औसत पुरे विशव में दूसरे नंबर पर , लेकिन एशिया में पहले नंबर पर आता है। विशव में पहला नंबर नाइज़ीरिआ के इग्बो-ओरा को प्राप्त है जहाँ यह औसत 145 है। कोडिन्ही गाँव एक मुस्लिम बहुल गाँव है जिसकी आबादी करीब 2000 है। इस गाँव में घर, स्कूल, बाज़ार हर जगह हमशक्ल नज़र आते है।


6. एक गाँव जिसे कहते है भगवान का अपना बगीचा👇🏻

जहाँ एक और सफाई के मामले में हमारे अधिकांश गाँवो, कस्बों और शहरों की हालत बहुत खराब है वही यह एक सुखद आश्चर्य की बात है की एशिया का सबसे साफ़ सुथरा गाँव भी हमारे देश भारत है। यह है मेघालय का मावल्यान्नॉंग गांव जिसे की भगवान का अपना बगीचा (God\'s Own Garden) के नाम से भी जाना जाता है। सफाई के साथ साथ यह गाँव शिक्षा में भी अवल्ल है। यहाँ की साक्षरता दर 100 फीसदी है, यानी यहां के सभी लोग पढ़े-लिखे हैं। इतना ही नहीं, इस गांव में ज्यादातर लोग सिर्फ अंग्रेजी में ही बात करते हैं।


खासी हिल्स डिस्ट्रिक्ट का यह गांव मेघालय के शिलॉंन्ग और भारत-बांग्लादेश बॉर्डर से 90 किलोमीटर दूर है। साल 2014 की गणना के अनुसार, यहां 95 परिवार रहते हैं। यहां सुपारी की खेती आजीविका का मुख्य साधन है। यहां लोग घर से निकलने वाले कूड़े-कचरे को बांस से बने डस्टबिन में जमा करते हैं और उसे एक जगह इकट्ठा कर खेती के लिए खाद की तरह इस्तेमाल करते हैं।


7. एक श्राप के कारण 170 सालों से हैं वीरान - रात को रहता है भूत प्रेतों का डेरा👇🏻

हमारे देश भारत के कई शहर अपने दामन में कई रहस्यमयी घटनाओ को समेटे हुए है ऐसी ही एक घटना हैं राजस्थान के जैसलमेर जिले के कुलधरा(Kuldhara) गाँव कि, यह गांव पिछले 170 सालों से वीरान पड़ा हैं।कुलधरा(Kuldhara) गाँव के हज़ारों लोग एक ही रात मे इस गांव को खाली कर के चले गए थे और जाते जाते श्राप दे गए थे कि यहाँ फिर कभी कोई नहीं बस पायेगा। तब से गाँव वीरान पड़ा हैं।

कहा जाता है कि यह गांव रूहानी ताकतों के कब्जे में हैं, कभी एक हंसता खेलता यह गांव आज एक खंडहर में तब्दील हो चुका है| टूरिस्ट प्लेस में बदल चुके कुलधरा गांव घूमने आने वालों के मुताबिक यहां रहने वाले पालीवाल ब्राह्मणों की आहट आज भी सुनाई देती है। उन्हें वहां हरपल ऐसा अनुभव होता है कि कोई आसपास चल रहा है। बाजार के चहल-पहल की आवाजें आती हैं, महिलाओं के बात करने उनकी चूडिय़ों और पायलों की आवाज हमेशा ही वहां के माहौल को भयावह बनाते हैं। प्रशासन ने इस गांव की सरहद पर एक फाटक बनवा दिया है जिसके पार दिन में तो सैलानी घूमने आते रहते हैं लेकिन रात में इस फाटक को पार करने की कोई हिम्मत नहीं करता हैं।


8. इस गांव में कुछ भी छुआ तो लगता है 1000 रुपए का जुर्माना👇🏻

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के अति दुर्गम इलाके में स्तिथ है मलाणा गाँव। इसे आप भारत का सबसे रहस्यमयी गाँव कह सकते है। यहाँ के निवासी खुद को सिकंदर के सैनिकों का वंशज मानते है। यहां पर भारतीय क़ानून नहीं चलते है यहाँ की अपनी संसद है जो सारे फैसले करती है। मलाणा भारत का इकलौता गांव है जहाँ मुग़ल सम्राट अकबर की पूजा की जाती है।

हिमाचल के मलाणा गांव में लगे नोटिस बोर्ड।
कुल्लू के मलाणा गांव में यदि किसी बाहरी व्यक्ति ने किसी चीज़ को छुआ तो जुर्माना देना पड़ता है। जुर्माने की रकम 1000 रुपए से 2500 रुपए तक कुछ भी हो सकती है।
अपनी विचित्र परंपराओं लोकतांत्रिक व्यवस्था के कारण पहचाने जाने वाले इस गांव में हर साल हजारों की संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। इनके रुकने की व्यवस्था इस गांव में नहीं है। पर्यटक गांव के बाहर टेंट में रहते हैं। अगर इस गांव में किसी ने मकान-दुकान या यहां के किसी निवासी को छू (टच) लिया तो यहां के लोग उस व्यक्ति से एक हजार रुपए वसूलते हैं।

ऐसा नहीं हैं कि यहां के निवासी यहां आने वाले लोगों से जबरिया वसूली करते हों। मलाणा के लोगों ने यहां हर जगह नोटिस बोर्ड लगा रखे हैं। इन नोटिस बोर्ड पर साफ-साफ चेतावनी लिखी गई है। गांव के लोग बाहरी लोगों पर हर पल निगाह रखते हैं, जरा सी लापरवाही भी यहां आने वालों पर भारी पड़ जाती है।

मलाणा गांव में कुछ दुकानें भी हैं। इन पर गांव के लोग तो आसानी से सामान खरीद सकते हैं, पर बाहरी लोग दुकान में न जा सकते हैं न दुकान छू सकते हैं। बाहरी ग्राहकों के दुकान के बाहर से ही खड़े होकर सामान मांगना पड़ता है। दुकानदार पहले सामान की कीमत बताते हैं। रुपए दुकान के बाहर रखवाने के बाद सामन भी बाहर रख देते हैं।


9. यह गाँव कहलाता है \'मिनी लंदन\'👇🏻

झारखंड की राजधानी रांची से उत्तर-पश्चिम में करीब 65 किलोमीटर दूर स्थित एक कस्बा गांव है मैक्लुस्कीगंज। एंग्लो इंडियन समुदाय के लिए बसाई गई दुनिया की इस बस्ती को मिनी लंदन भी कहा जाता है।

घनघोर जंगलों और आदिवासी गांवों के बीच सन् 1933 में कोलोनाइजेशन सोसायटी ऑफ इंडिया ने मैकलुस्कीगंज को बसाया था। 1930 के दशक में रातू महाराज से ली गई लीज की 10 हजार एकड़ जमीन पर अर्नेस्ट टिमोथी मैकलुस्की नामक एक एंग्लो इंडियन व्यवसायी ने इसकी नींव रखी थी। चामा, रामदागादो, केदल, दुली, कोनका, मायापुर, महुलिया, हेसाल और लपरा जैसे गांवों वाला यह इलाका 365 बंगलों के साथ पहचान पाता है जिसमें कभी एंग्लो-इंडियन लोग आबाद थे। पश्चिमी संस्कृति के रंग-ढंग और गोरे लोगों की उपस्थिति इसे लंदन का सा रूप देती तो इसे लोग मिनी लंदन कहने लगे।
मैकलुस्की के पिता आइरिश थे और रेल की नौकरी में रहे थे। नौकरी के दौरान बनारस के एक ब्राह्मण परिवार की लड़की से उन्हें प्यार हो गया। समाज के विरोध के बावजूद दोनों ने शादी की। ऐसे में मैकलुस्की बचपन से ही एंग्लो-इंडियन समुदाय की छटपटाहट देखते आए थे। अपने समुदाय के लिए कुछ कर गुजरने का सपना शुरू से उनके मन में था। वे बंगाल विधान परिषद के मेंबर बने और कोलकाता में रियल एस्टेट का कारोबार भी खूब ढंग से चलाया।कोलकाता में प्रॉपर्टी डीलिंग के पेशे से जुड़ा टिमोथी जब इस इलाके में आया तो यहां की आबोहवा ने उसे मोहित कर लिया। यहां के गांवों में आम, जामुन, करंज, सेमल, कदंब, महुआ, भेलवा, सखुआ और परास के मंजर, फूल या फलों से सदाबहार पेड़ उसे कुछ इस कदर भाए कि उसने भारत के एंग्लो-इंडियन परिवारों के लिए एक अपना ही चमन विकसित करने की ठान ली।

1930 के दशक में साइमन कमीशन की रिपोर्ट आई जिसमें एंग्लो-इंडियन समुदाय के प्रति अंग्रेज सरकार ने किसी भी तरह की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया था। पूरे एंग्लो-इंडियन समुदाय के सामने खड़े इस संकट को देखते हुए मैकलुस्की ने तय किया कि वह समुदाय के लिए एक गांव इसी भारत में बनाएंगे। बाद ऐसा ही हुआ। कोलकाता और अन्य दूसरे महानगरों में रहने वाले कई धनी एंग्लो-इंडियन परिवारों ने मैकलुस्कीगंज में डेरा जमाया, जमीनें खरीदीं और आकर्षक बंगले बनवाकर यहीं रहने लगे।
इंसानों की तरह मैकलुस्कीगंज को भी कभी बुरे दिन देखने पड़े थे। यहां के लोग उस दौर को भी याद करते हैं जब एक के बाद एक एंग्लो-इंडियन परिवार ये जगह छोड़ते चले गए। कुछ 20-25 परिवार रह गए, बाकी ने शहर खाली कर दिया। इसके बाद तो खाली बंगलों के कारण भूतों का शहर बन गया था मैकलुस्कीगंज।

लेकिन, और अब यह दौर है जब गिने-चुने परिवार मैकलुस्कीगंज को आबाद करने में जुटे हैं। यहां कई हाई प्रोफाइल स्कूल खुल गए हैं, जिनमें पड़ने के लिए दूर-दूर से छात्र आ रहे हैं। पक्की सड़कें बनी हैं, जरूरत के सामान की कई दुकानें भी खुल गई हैं। एक के बाद कई स्कूल खुल गए हैं। साथ ही बस्ती की अधिकतर गलियों या बंगलों में छात्रावास होने के साइनबोर्ड भी मिलेंगे। ये सब एक नए मैकलुस्कीगंज की ओर मिनी लंदन को ले जा रहे हैं।

10. एक गाँव जहाँ छत पर रखी पानी की टंकियों से होती है घरो की पहचान👇🏻

यह कहानी है पंजाब के जालंधर शहर के एक गांव उप्पलां की। इस गाँव में अब लोगों की पहचान उनके घरों पर बनी पानी की टंकियों से होती है। अब आप सोच रहे होंगे की पानी की टंकियों में ऐसी क्या विशेषता है तो हम आपको बता दे की यहाँ के मकानो की छतो पर आम वाटर टैंक नहीं है, बल्कि यहाँ पर शिप, हवाईजहाज़, घोडा, गुलाब, कार, बस आदि अनेकों आकर की टंकिया है।

इस गांव के अधिकतर लोग पैसा कमाने लिए विदेशों में रहते है। गांव में खास तौर पर एनआरआईज की कोठियां में छत पर इस तरह की टंकिया रखी है। अब कोठी पर रखी जाने वाली टंकियो से उसकी पहचानी जा रही हैं। नामी परिवार अपने घरों पर तरह तरह की टंकियां बनवा रहे हैं। कोई गुलाब का फूल बना खुशहाली का संकेत देता है तो कोई घोड़ा बनाकर रुआबदार परिवार का संदेश देता है। कोई शेर बनाकर अपनी बहादुरी जाहिर करता है तो कोई बाज बनाकर अपनी पहचान को दमदार रूप से प्रस्तुत करता है।
तरसेम सिंह उप्पल जब 70 साल पहले हांगकांग गए थे तो उन्होंने सफर शिप से किया था। अपने बेटों को अपनी पहली यात्रा के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा था कि हम भी अपने घर पर शिप बनवाएंगे। 1995 में यह शिप बनाई गई।
82 साल के गुरदेव सिंह द्वारा बनाया गया बब्बर शेर भी कई सालों तक चर्चा का विषय बना रहा। क्यों जो गुरदेव सिंह ने शेर पर खुद की मूरत बनाकर बिठा दी थी। कहा जाता है कि ऐसे करते ही गांव में लोग इकट्‌ठा होना शुरू हो गए।b v कहा गया कि शेर पर तो शेरां वाली माता ही बैठ सकती है। आनन फानन में मूरत हटा ली गई। शेर की मूरत वैसे की वैसी ही है। हटाई गई गुरदेव सिंह की मूरत अब भी कोठी में पड़ी है।

11. इसे कहते है मंदिरों का गाँव और गुप्त काशी👇🏻

झारखंड के दुमका जिले में शिकारीपाड़ा के पास बसे एक छोटे से गांव " मलूटी" में आप जिधर नज़र दौड़ाएंगे आपको प्राचीन मंदिर नज़र आएंगे। मंदिरों की बड़ी संख्या होने के कारण इस क्षेत्र को गुप्त काशी और मंदिरों का गाँव भी कहा जाता है। इस गांव का राजा कभी एक किसान हुआ करते था। उसके वंशजों ने यहां 108 भव्य मंदिरों का निर्माण करवाया।


ये मंदिर बाज बसंत राजवंशों के काल में बनाए गए थे। शुरूआत में कुल 108 मंदिर थे, लेकिन संरक्षण के आभाव में अब सिर्फ 72 मंदिर ही रह गए हैं। इन मंदिरों का निर्माण 1720 से लेकर 1840 के मध्य हुआ था। इन मंदिरों का निर्माण सुप्रसिद्व चाला रीति से की गयी है। ये छोटे-छोटे लाल सुर्ख ईटों से निर्मित हैं और इनकी ऊंचाई 15 फीट से लेकर 60 फीट तक हैं। इन मंदिरों की दीवारों पर रामायण-महाभारत के दृश्यों का चित्रण भी बेहद खूबसूरती से किया गया है।

मलूटी पशुओं की बली के लिए भी जाना जाता है। यहां काली पूजा के दिन एक भैंस और एक भेड़ सहित करीब 100 बकरियों की बली दी जाती है। हालांकि पशु कार्यकर्ता समूह अक्सर यहां पशु बली का विरोध करते रहते हैं। जहां तक बात है मंदिरों के संरक्षण की तो बिहार के पुरातत्व विभाग ने 1984 में गांव को पुरातात्विक प्रांगण के रूप में विकसित करने की योजना बनाई थी। इसके तहत मंदिरों का संरक्षण कार्य शुरू किया गया था और आज पूरा गांव पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है। लेकिन मूलभूत सुविधाओं के अभाव के कारण पर्यटक यहां रात में रुकने से घबराते हैं।

मलूटी गांव में इतने सारे मंदिर होने के पीछे एक रोचक कहानी है। यहां के राजा महल बनाने की बजाए मंदिर बनाना पसंद करते थे और राजाओं में अच्‍छे से अच्‍छा मंदिर बनाने की होड़ सी लग गई। परिणाम स्‍वरूप यहां हर जगह खूबसूरत मंदिर ही मंदिर बन गए और यह गांव मंदिर के गांव के रूप में जाना जाने लगा। मलूटी के मंदिरों की यह खासियत है कि ये अलग-अलग समूहों में निर्मित हैं। भगवान भोले शंकर के मंदिरों के अतिरिक्त यहां दुर्गा, काली, धर्मराज, मनसा, विष्णु आदि देवी-देवताओं के भी मंदिर हैं। इसके अतिरिक्त यहां मौलिक्षा माता का भी मंदिर है, जिनकी मान्यता जाग्रत शाक्त देवी के रूप में है।

 
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518 days
 
sachin prajapati

कुछ जानकारी भारत की ....

1. नासा-के-वैज्ञानिकों ने माना है कि सूरज से ⭕〽" ॐ " की आवाज निकलती है, जो हमारे ऋषियों ने बरसों पूर्व बता दिया था॥

2. अमेरिकी साईंटिस्टों ने गौमूत्र द्वारा कई दवाईयाँ बना कर पटेंट लिए हैं, जबकि हम इसे बरसों से प्रयोग कर रहे हैं॥

3. यूरोपियन सेटन-हॉल-यूनिवर्सिटी में गीता पढाई जाती है, उनका मानना है कि इसमें पॉजिटिव वाईब्स हैं॥

4. इस्लामिक देश इंडोनेशिया की एयरलाइंस कंपनी का नाम गरूड-एयरलाईंस है, क्यूँकि उन का इतिहास भारत से जुडा हुआ है॥

5. इंडोनेशियन करंसी पर भगवान गणेश जी की तस्वीर है॥

6. बराक़ ओबामा अपनी जेब में सदा हनूमान जी की तस्वीर रखते हैं, जबकि वो हिंदू नहीं हैं॥

7. योगा/प्राणायाम अब पूरी दुनियाँ में प्रचलित है, हमारे ऋषियों ने इस पर कई उपनिष्द लिखे हैं और हम इसे हजारों बरसों से कर रहे हैं॥

8. हमारे ज्योतिष शास्त्र ने हजारों वर्ष पूर्व बता दिया था कि धरती गोल है, चंद्रमा का ब्यास कितना है, धरती से चंद्रमा तथा बाकी ग्रहों की दूरी तथा बहुत सी खगोलिय बातें जो मॉडरन साईंस को कुछ वर्ष पूर्व ही पता चली हैं॥

9. जर्मनी की एयरलाईंस कंपनी का नाम भी संस्कृत में Luft-Hansa एयरलाईंस रखा गया है॥

10. अफगानिस्तान के पर्वत का नाम हिंदुकश है॥

11. पूरी दुनियाँ में भारत ही एकमात्र ऐसा हेश है, जिस के नाम पर सागर का नाम रखा गया हो (हिंद महासागर, Indian Ocean).

12. वियतनाम में भगवान विष्णु की 4000 साल पुरानी मूर्ति पाई गई है, उस समय हिंदू धर्म वहाँ तक फैला था॥

13. Harvard University ने पता लगाया है कि गायत्री मंत्र से 110,000 फ्रीक्वेंसी के कंपन हैं, जो पूरी साईंस द्वारा जाने गए किन्हीं भी शब्दों से कई गुणा ज्यादा है॥

14. भोपाल गैस त्रासदि में केवल एक परिवार कुशल बचा था, वे लोग उस समय हवन कर रहे थे। हवन का धुआँ कई प्रकार की जहरीली गैसों का प्रभाव खत्म करता है॥

15. राम सेतु के पत्थर पानी पर आज भी तैरते हैं॥

16. भगवान राम द्वारा बनाया गया राम सेतु सैटेलाईट की मदद से आज भी देखा जा सकता है॥

17. भगवान कृष्ण की द्वारका नगरी के अवशेष आज भी समुद्र में देखे जा सकते हैं॥

18. कंधार की एक गुफा में अमेरिकी सेना को 5000 साल पूर्व की हवाई जहाज जैसी चीज मिली है, जो यकीनन महाभारत के काल का हवाई जहाज़ है॥

इसके इलावा भी कई साक्ष्य हैं, जो हिंदू इतिहास तथा हमारी साईंस की जानकारी को सपोर्ट करते हैं। दुनियाँ के किसी भी देश या धर्म से ज्यादा, हमारा इतिहास लिखित है, और प्रमाणिक भी है॥

 
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Heart catcher

भारत में sunday की छुट्टी
किस व्यक्ति ने हमें दिलाई?
और इसके पीछे उस महान व्यक्ति का क्या मकसद था?
क्या है इसका इतिहास?
साथियों, जिस व्यक्ति की वजह से हमें ये छुट्टी हासिल हुयी है, उस महापुरुष का नाम है "नारायण मेघाजी लोखंडे". नारायण मेघाजी लोखंडे ये जोतीराव फुलेजी के सत्यशोधक आन्दोलन के कार्यकर्ता थे। और कामगार नेता भी थे। अंग्रेजो के समय में हफ्ते के सातो दिन मजदूरो को काम करना पड़ता था। लेकिन नारायण मेघाजी लोखंडे जी का ये मानना था की, हफ्ते में सात दिन हम अपने परिवार के लिए काम करते है। लेकिन जिस समाज की बदौलत हमें नौकरिया मिली है, उस समाज की समस्या छुड़ाने के लिए हमें एक दिन छुट्टी मिलनी चाहिए। उसके लिए उन्होंने अंग्रेजो के सामने 1881 में प्रस्ताव रखा। लेकिन अंग्रेज ये प्रस्ताव मानने के लिए तयार नहीं थे। इसलिए आख़िरकार नारायण मेघाजी लोखंडे जी को इस sunday की छुट्टी के लिए 1881 में आन्दोलन करना पड़ा। ये आन्दोलन दिन-ब-दिन बढ़ते गया। लगभग 8 साल ये आन्दोलन चला। आखिरकार 1889 में अंग्रेजो को sunday की छुट्टी का ऐलान करना पड़ा। ये है इतिहास।
क्या हम इसके बारे में जानते है?
अनपढ़ लोग छोड़ो लेकिन क्या पढ़े लिखे लोग भी इस बात को जानते है?
जहा तक हमारी जानकारी है, पढ़े लिखे लोग भी इस बात को नहीं जानते। अगर जानकारी होती तो sunday के दिन enjoy नहीं करते....समाज का काम करते....और अगर समाज का काम ईमानदारी से करते तो समाज में भुखमरी, बेरोजगारी, बलात्कार, गरीबी, लाचारी ये समस्या नहीं होती।
साथियों, इस sunday की छुट्टीपर हमारा हक़ नहीं है, इसपर "समाज" का हक़ है। कोई बात नहीं, आज तक हमें ये मालूम नहीं था लेकिन अगर आज हमें मालूम हुआ है तो आज से ही sunday का ये दिन सामाजिक कार्यों के लिए समर्पित करें.!!

 
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Niki2512

"पानी पीने का सही वक़्त".

(1) 3 गिलास सुबह उठने के बाद,
.....अंदरूनी उर्जा को Activate
करता है...

(2) 1 गिलास नहाने के बाद,
......ब्लड प्रेशर का खात्मा करता है...

(3) 2 गिलास खाने से 30 Minute पहले,
........हाजमे को दुरुस्त रखता है..

(4) आधा गिलास सोने से पहले,
......हार्ट अटैक से बचाता है..

 
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Dev ;)
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