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*FACTS ABOUT OLYMPICS*

1. ओलम्पिक खेलो (Olympics) की शुरुआत ओलम्पस नामक यूनानी देवता के सम्मान में सबसे पहले 776 ईसा पूर्व में हुई थी. उस समय इसमें नाटक, संगीत, साहित्य, कला, नाटक और जिम्नास्टिक जैसी प्रतियोगिताए आयोजित होती थी.

2. कुछ समय बाद रोम के राजा थियोडोसिस ने इसे मूर्तिपूजा वाला उत्सव करार देकर इस पर रोक लगा दिया.

3. आधुनिक ओलम्पिक खेलो (Olympics) की शुरुआत बैरन कुबर्तिन के प्रयासों से 1896 में एथेंस में हुई और उन्ही के सुझावों पर 23 जून 1914 में ओलम्पिक के झंडा तैयार किया गया.

4. ओलम्पिक (Olympics) का झंडा सफ़ेद सिल्क से बना है जिसपर ओलम्पिक के प्रतिक पांच छल्ले लगे है. ये पांच छल्ले एक दुसरे से जुड़े है. इनमे पहली लाइन में तीन और दूसरी लाइन में दो छल्ले है. इनका रंग है - नीला, पीला, काला, हरा और लाल.

5. झंडे के पांच छल्ले पांचो महाद्वीपों का प्रतिनिधित्व करते है. इनमे से नीला गोला यूरोप को, पीला एशिया को, लाल अमेरिका को, काला अफ्रीका को, और हरा ऑस्ट्रेलिया को दर्शाता है.

6. ओलम्पिक (Olympics) के झंडे के छल्लो के लिए इन रंगों को इस्तेमाल करने का एक विशेष कारण है. इनमे इस्तेमाल किये गए रंगों में से कम से कम एक रंग हर देश के झंडे पर मिलता है. इसका सांकेतिक अर्थ है की इस खेल के द्वारा सभी दशो के खिलाडी आपस में मिलते है और एक स्वस्थ प्रतोयोगिता करते है.

7. ओलम्पिक खेलो (Olympics) का आयोजन हर चार साल बाद किया जाता है.

8. प्रथम और द्रितीय विश्व युद्ध (first and second world war) के कारण इन खेलो के आयोजन 1916, 1940 और 1944 में नहीं किया गया था.

9. महिलोओं की ओलम्पिक (Olympics) खेलो में भागीदारी सबसे पहले सन 1900 से हुई.

10. ओलम्पिक खेल (Olympics) समारोह में मार्च पोस्ट के दौरों ओलम्पिक खेलो के जन्मदाता देश ग्रीस की टीम सबसे आगे रहती है जबकि मेजबान देश की टीम सबसे पीछे रहती है.

11. ओलम्पिक में मशाल जलाने की प्रथा की शुरआत 1928 से हुई. यह मशाल सूरज की किरणों के द्वारा जलाई जाती है.

12. भारत की ओर से ओलम्पिक खेलो में सबसे पहले 1900 में भाग लिया गया जिसमे भारत ने एथलेटिक्स में दो सिल्वर मैडल जीते.

 
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भारतीय रुपये की कुछ रोचक और महत्वपूर्ण जानकारी - Interesting Facts about Indian Currency

कागज के नोट सबसे पहले 18 वी शताब्दी मे जारी किये गए थे। बैंक ऑफ़ हिंदुस्तान, जनरल बैंक ऑफ़ बंगाल और बंगाल बैंक ने पहली बार कागज के नोट जारी
किये थे।

भारत सरकार ने पहली बार विक्टोरिया पोर्ट्रेट सीरीज वाले बैंकनोट जारी किये थे। मगर कुछ कारणवश सुरक्षितता को ध्यान में रखते हुए इन सीरीज के नोटों को बिच में ही बंद कारण पड़ा था और सन 1867 में उनकी जगह पर अंडरप्रिंट सीरीज जारी की गयी।

अगर आपके पास 51 % फटा नोट है तो आप इस नोट को बैंक में नए नोट से बदल सकते हैं।

हमारे देश में एक रुपये की नोट और सिक्के पर वित्त सचिव के हस्ताक्षर रहते क्यों की इसकी छपाई करने का अधिकार केवल भारत सरकार को है। मगर एक रूपए को छोडके अन्य सभी नोट छापने का अधिकार केवल भारतीय रिज़र्व बैंक के पास है।

लगभग सभी लोग यही समझते हैं कि नोट कागज के होते हैं लेकिन असल में ये बात सही नहीं है नोट कॉटन(Cotton) और कॉटन रग(Cotton Rag) के मिश्रण का बना होता है, यही कारण है की नोट भीगने पर गलता नहीं है।

बैंकनोट पर कुल 17 भाषाए दिखाई देती है जिसमे की 15 भाषाए नोट के भाषा पैनल में ही दिखाई देती है और नोट के बिलकुल बीचोबीच हिंदी मुख्य रूप से दिखती है और नोट के पीछे की बाजु में इंग्लिश भाषा नजर आती है।

आज़ादी के बाद सिक्के तांबे के बनते थे, उसके बाद 1964 में एल्युमिनियम के और 1988 में स्टेनलेस स्टील के बनने शुरू हुए।

नोटों पर Serial Number इसलिए डाला जाता हैं ताकि रिज़र्व बैंक को पता रहे कि इस समय Market में कितनी currency हैं।

According to RBI, भारत हर साल 2000 करोड़ currency के नोट छापता हैं।

जो लोग अंधे होते है उन्हें नोट को पहचानने में किसी तकलीफ का सामने ना करना पड़े इसके लिए बैंक नोट के बाये की दिशा में अलग अलग तरह की सतह से ऊपर थोड़ी सी प्रिंट बनायीं गयी है जिसकी वजह से जल्दी में समझ आता है की कौनसी सी नोट कितने रुपये की है। 1000 रूपये की नोट पर डायमंड, 500 की नोट पर वर्तुलाकार चिन्ह, 100 रुपये की नोट पर त्रिकोण, 50 रुपये की नोट पर चौकोन, 20 रुपये की नोट पर आयत का चिन्ह देखने को मिलता है। लेकिन 10 रूपये की नोट पर किसी भी तरह का कोई भी चिन्ह दिखाई नहीं देता।

आपने कभी इस बात पर गौर किया है, की नोट पर साल के निचे अलग अलग तरह के चिन्ह दिखाई देते है। सभी चिन्ह दर्शाते है की उन्हें कहा से लिया गया।
सुरक्षा कारणों की वजय से आपको नोट के serial नंबर में I J O X Y Z अक्षर नहीं मिलेंगे।

अभी जो बैंक नोट जारी किये जाते है उन्हें महात्मा गांधी सीरीज के नोट कहा जाता है। 1996 में महात्मा गांधी सीरीज के बैंक नोट पहली बार जारी किये गए थे।

आरबीआई ने सबसे बड़ी 10,000 रुपये की नोट पहली बार 1938 में जारी की थी और फिर से 1954 में भी बनाई थी। मगर इन बड़ी नोटों पर 1946 और 1978 में पाबन्दी लगाई गयी थी।

केंद्र सरकार जीन नोटों को बनाने को कहता उन सभी नोटों को भारतीय रिज़र्व बैंक जारी करता है उसमे फिर 5,000 और 10,000 रुपये के नोट शामिल है। मगर आर बी आई एक्ट 1934 में एक नया कानून बनाया गया जिसके अनुसार 10,000 के ऊपर की कोई भी नोट जारी नहीं की जा सकती।

औपचारिक रूप से भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना सन 1935 में की गयी और उसे भारत सरकार के सभी नोट जारी करने के अधिकार दिए गए। आरबीआई ने पहली बार छटा किंग जॉर्ज पोर्ट्रेट वाली पाच रुपये की नोट जारी की थी।

इतिहास में आरबीआई ने सबसे बड़ी 10,000 रूपये की नोट जारी की थी। 1000 रूपये की नोट और 10,000 रुपये की नोट 1938 और 1946 में दौरान इस्तेमाल की जाती थी मगर बाद में इनपर बंदी लगाई गयी।

जब देश को आजादी मिली थी तो उस वक्त रुपये को आने में गिना जाता था। उस समय 16 आने को मिलाकर 1 रुपया बनता था। एक आने को भी और 4 पैसे और 12 पाई में गिना जाता था। अभी रुपये को पैसे में गिना जाता और 100 पैसे मिलाने के बाद 1 रुपया बनता है। भारतीय रुपये का दशमलवकरण सन 1947 में किया गया। इसमे भारतीय रुपये को 100 \'नया पैसा\' में गिनने की शुरुवात की गयी। मगर 1964 में इस \'नया\' शब्द का इस्तेमाल करना बंद कर दिया गया।

आजादी मिलने के बाद में पहली बार एक रुपये के नोट जारी किये गए थे।

लेकिन सन 1954 में 1,000 रूपये, 5,000 और 10,000 की नोट को फिर से व्यवहार में लाया गया। मगर बाद में फिर से 1978 में इनपर पाबन्दी लगाई गयी।

2010 मे पहली बार 75 रुपये, 100 रूपये और 1000 रूपये के सिक्के बनाये गए लेकिन वह सब सिक्के स्मारक सिक्के के रूप में बनाये गए। उन्हें इसलिए बनाया गया था क्यों की उस साल भारतीय रिज़र्व बैंक के 75 साल पुरे हुए थे साथ ही रवीन्द्रनाथ टागोर के 100 साल और ब्रिहदेश्वर मंदिर को पुरे 1000 हुए थे।

2010 में भारतीय रूपया को यह चिन्ह दिया गया। इस चिन्ह को बनाने का सारा श्रेय डी। उदय कुमार को ही दिया जाता है। इस चिन्ह को देवनागरी वर्ण "र" से बनाया गया है। इस चिन्ह को बनाने के लिए लैटिन वर्ण "आर" और देवनागरी वर्ण "र" का इस्तेमाल किया गया तब जाकर भारतीय रूपए को यह चिन्ह मिल सका। इस चिन्ह में जो समानांतर लाइन दिखाई गयी वह भारतीय तिरंगे को दर्शाने का काम करती है।

कॉइनेज एक्ट 2011 के तहत 1000 रुपये तक के सिक्के जारी किये जा सकते है।

1 पैसा, 2 पैसे, 3 पैसे, 5 पैसे, 10 पैसे, 20 पैसे और 25 पैसे को 30 जून 2011 को पूरी तरह से बंद कर दिया गया।

 
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B P S R

💐🌹🙏 नमस्कार। 🙏🌹💐

*⌛दो पक्ष⌛*
१-कृष्ण पक्ष , २-शुक्ल पक्ष❗
*🙏तीन ऋण🙏*
१-देवऋण , २-पितृऋण, ३-ऋषिऋण❗
*🏉चार युग🏉*
१-सतयुग , २-त्रेतायुग ,
३-द्वापरयुग , ४-कलियुग❗
*🌷चार धाम🌷*
१-द्वारिका , २-बद्रीनाथ ,
३-जगन्नाथपुरी , ४-रामेश्वरमधाम❗
*🕹चार पीठ🕹*
१-शारदा पीठ *(द्वारिका)*
२-ज्योतिष पीठ *(जोशीमठ बद्रिधाम*)
३-गोवर्धन पीठ *(जगन्नाथपुरी),*
४-शृंगेरीपीठ❗
*⌛चार वेद⌛*
१-ऋग्वेद , २-अथर्वेद ,३-यजुर्वेद , ४-सामवेद!
*🍁चार आश्रम🍁*
१-ब्रह्मचर्य , २-गृहस्थ , ३-वानप्रस्थ , ४-संन्यास❗
*🏉चार अंतःकरण🏉*
१-मन , २-बुद्धि , ३-चित्त , ४-अहंकार❗
*🍁पञ्च गव्य🍁*
१-गाय का घी , २-दूध ,
दही ,३-गोमूत्र , ४-गोबर❗
*🙏पञ्च देव🙏*
१-गणेश , २-विष्णु , ३-शिव , ४-देवी ,५-सूर्य!
*🕹पंच तत्त्व🕹*
१-पृथ्वी ,२-जल , ३-अग्नि , ४-वायु , ५-आकाश❗
*⌛छह दर्शन⌛*
१-वैशेषिक , २-न्याय ,३-ऋषांख्य , ४-योग , ५-पूर्व मिसांसा , ६-दक्षिण मिसांसा❗
*🌷 सप्त ऋषि🌷*
१-विश्वामित्र ,२-जमदाग्नि ,३-भरद्वाज , ४-गौतम , ५-अत्री , ६-वशिष्ठ और कश्यप❗
*🍁सप्त पुरी🍁*
१-अयोध्यापुरी ,२-मथुरापुरी ,
३-मायापुरी *(हरिद्वार)*, ४-काशीपुरी ,
५-कांचीपुरी *(शिन कांची-विष्णु कांची),*
६-अवंतिकापुरी और
७-द्वारिकापुरी❗
*⌛आठ योग⌛*
१-यम , २-नियम , ३-आसन ,४-प्राणायाम , ५-प्रत्याहार , ६-धारणा , ७-ध्यान, एवं ८-समािध❗
*🙏आठ लक्ष्मी🙏*
१-आग्घ , २-विद्या , ३-सौभाग्य ,४-अमृत , ५-काम , ६-सत्य , ७-भोग ,एवं ८-योग लक्ष्मी❗
*🌹नव दुर्गा 🌹*
१-शैल पुत्री , २-ब्रह्मचारिणी ,३-चंद्रघंटा , ४-कुष्मांडा , ५-स्कंदमाता , ६-कात्यायिनी ,७-कालरात्रि, ८-महागौरी एवं ९-सिद्धिदात्री❗
*🍫 दस दिशाएं🍫*
१,पूर्व , २-पश्चिम , ३-उत्तर , ४-दक्षिण ,५-ईशान , ६-नैऋत्य , ७-वायव्य , ८-अग्नि
९-आकाश, एवं १०-पाताल,❗
*🏉मुख्य ११ अवतार🏉*
१-मत्स्य , २-कश्यप , ३-वराह , ४-नरसिंह , ५-वामन , ६-परशुराम ,७-श्री राम , ८-कृष्ण , -बलराम , १०-बुद्ध , एवं ११-कल्कि❗
*🍁बारह मास🍁*
१-चैत्र , २-वैशाख , ३-ज्येष्ठ ,४-अषाढ , ५-श्रावण , ६-भाद्रपद , ७-अश्विन , ८-कार्तिक ,९-मार्गशीर्ष , १०-पौष , ११-माघ , १२-फागुन❗
*⌛ बारह राशी ⌛*
१-मेष , २-वृषभ , ३-मिथुन , ४-कर्क , ५-सिंह , ६-कन्या , ७-तुला , ८-वृश्चिक , ८-धनु , १०-मकर , ११-कुंभ , १२-कन्या❗
*🙏बारह ज्योतिर्लिंग🙏*
१-सोमनाथ ,२-मल्लिकार्जुन ,३-महाकाल , ४-ओमकारेश्वर , ५-बैजनाथ , ६-रामेश्वरम ,७-विश्वनाथ , ८-त्र्यंबकेश्वर , ९-केदारनाथ , १०-घुष्नेश्वर, ११-भीमाशंकर ,१२-नागेश्वर!
*💥पंद्रह तिथियाँ💥*
१-प्रतिपदा ,२-द्वितीय ,३-तृतीय ,४-चतुर्थी , ५-पंचमी , ६-षष्ठी , ७-सप्तमी , ८-अष्टमी , ९-नवमी ,१०-दशमी , ११-एकादशी , १२-द्वादशी , १३-त्रयोदशी , १४-चतुर्दशी , १५-पूर्णिमा, अमावास्या❗
*🕹स्मृतियां🕹*
१-मनु , २-विष्णु , ३-अत्री , ४-हारीत ,५-याज्ञवल्क्य ,७-उशना , ७-अंगीरा , ८-यम , ९-आपस्तम्ब , १०-सर्वत ,१०-कात्यायन , १२-ब्रहस्पति , १३-पराशर , १४-व्यास , १५-शांख्य , १६-लिखित , १७-दक्ष ,
१८-शातातप , १९-वशिष्ठ❗

 
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akshay parekh

चाय के बारे में रोचक तथ्य

1. चाय का आविष्कार 2730 B.C में चाइना में किया गया था । तभी से यह पूरे विश्व में फेल गया ।

2. सबसे पहली चाय चाइना के सम्राट Shen Nung के लिए तैयार किया था ।( " जब सम्राट जी बैठे थे और उनके सामने एक कप का प्याला था और उनमे चाय की पत्ती आकर गिरती है और पानी का रंग बदल जाता है )

3. ठंडी चाय का आविष्कार 1904 सेंट लुईस विश्व मेले में एक अंग्रेज नामित रिचर्ड ब्लेचिंदें दूआरा किया गया था ।

4. चाय बैग / Tea Bag सयुक्त राज्य अमेरिका में 1908 में थॉमस सुलिवन दूआरा किया गया था ।

5. चाय बैग / Tea Bag छोटे-छोटे रेशम से मिलकर बनाया गया था ।

6. चाय चाइना में शुरु होने के बाद सबसे पहले 1716 में कनाडा पंहुचा |

7. सबसे ज्यादा चाय Turkey में रहने वाले पीते है ।

8. चीन में केवल एक चाय बनी थी लेकिन लोगो ने इसे अपने अनुसार ही बना लिया ।

9. ये माना जाता है कि चाय की 1500 से भी ज्यादा किस्में हैं। लेकिन सबसे ज्यादा चाय प्रयोग की जाने वाली चाय :-Type Of Tea / चाय के प्रकार
White Tea
Green Tea
Oolong Tea
Dark Tea
Puer Tea
Mate Tea

10. भारत में चाय की खेती की शुरूआत 1835 में हई थी। भारत में चाय की सबसे ज्यादा खेती आसाम और दारजलिंग में की जाती है।

11. अफ़गानिस्तान और ईरान देश का राष्ट्रीय पेय / National Drink  चाय है।

12.  16 करोड़ लोग रोज़ इंग्लैंड में चाय पीते हैं। और देखा जाये तो  एक साल में इंग्लैंड के लोग लगभग  60 अरब चाय पी जाते हैं।

13. विश्व  में प्रतेक साल 30 लाख टन चाय का उगाया जाता है।

14. पीने के मामले में पानी के बाद चाय का ही नंबर आता है |

15. चाय न पीने से 30% लोगो के सर में दर्द होने लगता है |

16. पूरी दुनिया में चाय को फेलाने वाले डच थे

 
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B P S R

Bitcoin के बारे में 8 रोचक तथ्य जो आपको नहीं पता होगा

1. सातोशी नकामोतो  की मौजूदगी अभी भी रहस्यमय है -

सातोशी  नकामोतो वह नाम है जिसका इस्तेमाल उस इंसान ने किया जिसने bitcoin का निर्माण किया लेकिन इसकी असली पहचान अभी भी संदेहास्पद है , कई सालों तक इससे बहुत से लोगों का नाम जुड़ा जैसे Nick Szabo, Dorian Nakamoto ,Hal Finney , Craig Steven Wright and others.कुछ लोगों का यह कहना है की नाकमोतो एक टीम है जिसने bitcoin का निर्माण किया , मई 2017 तक नाकामोतो के पास 1 मिलियन bitcoin था जिसकी कीमत लगभग $2 बिलियन था.

2.Bitcoin की संख्या स्थायी है -

आपने bitcoin माइनिंग के बारे में तो सुना ही होगा जिसके ज़रिये bitcoin को digitally generate किया जाता है , इसका मतलब यह नहीं है की आप अनगिनत bitcoin generate कर सकते है , bitcoin की संख्या को स्थायी कर दिया गया है अभी तक लगभग 21 मिलियन bitcoin generate किया जा चूका है लेकिन आगे इसकी माइनिंग का तरीका बहुत ही कठिन होने वाला हैं .

3.Senders/Receiver की जानकारी जानना नामुनकिन है -

जैसा की आप जानते है की बित्कोइन का address 34 अल्फानुमेरिक अक्षरों से मिलकर बना होता है जिससे senders या reciever की दूसरी जानकारी जानना नामुनकिन है जिसके कारण जो अवैध लेन देन होता है वो ज्यादातर बित्कोइन के ज़रिये ज्यादा होने लगा है इससे बचने के लिए कुछ वॉलेट कंपनी यूजर को id प्रदान करती है जिससे लेने या भेजने वाले की जानकारी हो .

4.बित्कोइन का इस्तेमाल सबसे पहले पिज़्ज़ा आर्डर के लिए किया गया -

बित्कोइन का सबसे पहला लेनदेन सातोशी और Hal Finney के बिच 2009 में हुआ सबसे पहला खरीदी एक पिज़्ज़ा का हुआ जिसकी कीमत $25 थी जिसको खरीदने के लिए 10,000 बित्कोइन्स का खर्च हुआ .

5.बित्कोइन का नेटवर्क सुपर कंप्यूटर के नेटवर्क से ज्यादा ताकतवर है -

यह तथ्य मेरा पर्सनल सबसे पसंदीदा तथ्य है , अगर हम एक्सपर्ट्स की माने तो बित्कोइन के नेटवर्क की कंप्यूटिंग क्षमता 2,046,364 pflop/s है और अगर हम दुनिया के 500 सुपर कंप्यूटर की ताकत को मिलाये तो उनकी कंप्यूटिंग क्षमता सिर्फ 274 pflop/s है जो बित्कोइन के नेटवर्क से काफी ज्यादा कम है .

6.बित्कोइन को अंतरिक्ष में भी भेजा गया है -

साल 2016 में जेनेसिस माइनिंग जो की एक बित्कोइन क्लाउड माइनिंग कंपनी है उसने बित्कोइन को अंतरिक्ष में भेजा था, इसको भेजने के लिए एक 3D बित्कोइन मॉडल और एक बित्कोइन पेपर वालेट का इस्तेमाल किया गया in दोनों चीजों को एक गुब्बारे से बांध दिया गया था इस पुरे प्रक्रिया को रिकॉर्ड किया गया gopro द्वारा , एक बार जब गुब्बारा 20km की ऊँचाई पर पहुच गया तब पेपर वॉलेट में लेनदेन किया गया उसके बाद दूसरा लेनदेन किया गया जब गुब्बारा 34km की अधिकतम ऊँचाई पर पहुँच गयी .

7.FBI के पास दुनिया की सबसे बड़ी बित्कोइन वॉलेट है -

जब FBI ने सिल्क रोड ऑपरेशन को बंद किया तो उसने उसके मालिक की सारी संपत्ति को भी जब्त कर लिया जिसके कारण यह हुआ की FBI दुनिया की सबसे ज्यादा अमीर बित्कोइन मालिक बन गयी एक magzine की रिपोर्ट के मुताबिक़ FBI के पास लगभग $120 मिलियन के बित्कोइन का नियंत्रण है .

8.बित्कोइन वॉलेट का खोना मतलब सारे बित्कोइन का खो देना -

जिस  तरह आप अपना पैसा अपने बैंक अकाउंट में जमा करते है ठीक उसी प्रकार आप अपने बित्कोइन को बित्कोइन वॉलेट में जमा रखते है यह एक बहुत ही ज्यादा सिक्योर वॉलेट होता है लेकिन अगर किसी कारण आप अपना वॉलेट खो देते है तो आपने जितना भी बित्कोइन जमा किया है उस वॉलेट में वो सारे गुम हो जायेंगे .

 
26
 
69 days
 
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*यदि 05 सेकंड के लिए धरती से ऑक्सीजन गायब हो जाए तो क्या होगा???*

05 सेकंड के लिए धरती बहुत, बहुत ठंडी हो जाएगी.

जितने भी लोग समुद्र किनारे लेटे हैं...उन्हें तुरंत सनबर्न होने लगेगा.

दिन में भी अँधेरा छा जाएगा.

हर वह इंजन रूक जाएगा जिनमें आंतरिक दहन होता है.

रनवे पर टेक ऑफ कर चुका प्लेन वहीं क्रैश हो जाएगा.

धातुओ के टुकड़े बिना वैल्डिंग के ही आपस में जुड़ जाएगे.
.
ऑक्सीजन न होने का यह बहुत भयानक साइड इफेक्ट होगा......

पूरी दुनिया में सबके कानों के पर्दे फट जाएगे....क्योंकि 21% ऑक्सीज़न के अचानक लुप्त होने से हवा का दबाव घट जाएगा.

सभी का बहरा होना पक्का है.

कंक्रीट से बनी हर बिल्डिंग ढेर हो जाएगी.

हर जीवित कोशिका फूलकर फूट जाएगी.
.
पानी में 88.8% ऑक्सीज़न होती है.
ऑक्सीजन ना होने पर हाइड्रोजन गैसीय अवस्था में आ जाएगी और इसका वाॅल्यूम बढ़ जाएगा.
हमारी साँसे बाद में रूकेगी, हम फूलकर पहले ही फट जाएँगे.

समुद्रो का सारा पानी भाप बनकर उड़ जाएगा.....क्योंकि बिना ऑक्सीजन पानी हाइड्रोजन गैस में बदल जाएगा और यह सबसे हल्की गैस होती है तो इसका अंतरिक्ष में उड़ना लाज़िमी है.

ऑक्सीजन के अचानक गुम होने से हमारे पैरों तले की जमीन खिसककर 10-15 किलोमीटर नीचे चली जाएगी.

 
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*स्विट्जरलैंड*

नाम तो आपने सुना ही होगा 'स्विट्जरलैंड'। ऐसा देश जहाँ दुनियां का हर शादीशुदा जोड़ा अपना हनीमून मनाने के ख्वाब देखता हैं। बर्फीली वादियों से ढका ये देश सुंदरता की अद्भुत कृति है। हरियाली हो या बर्फ, आंखे जिधर भी जाये पलक झपकना भूल जाये। दुनिया का सबसे सम्पन्न देश हैं स्विट्जरलैंड! हर प्रकार से सम्पन्न इस देश की एक रोचक कहानी बताता हूँ।

आज से लगभग 50 साल पहले स्विट्जरलैंड में एक प्राइवेट बैंक की स्थापना हुई जिसका नाम था 'स्विसबैंक'। इस बैंक के नियम दुनिया की अन्य बैंको से भिन्न थे। ये स्विसबैंक अपने ग्राहकों से उसके पैसे के रखरखाव और गोपनीयता के बदले उल्टा ग्राहक से पैसे वसूलती थी। साथ ही गोपनीयता की गारंटी।
न ग्राहक से पूछना की पैसा कहां से आया ?
न कोई सवाल न बाध्यता।

सालभर में इस बैंक की ख्याति विश्वभर में फैल चुकी थी।चोर, बेईमान नेता, माफिया, तस्कर और बड़े बिजनेसमेन इन सबकी पहली पसंद बन चुकी थी स्विस बैंक। बैंक का एक ही नियम था। रिचार्ज कार्ड की तरह एक नम्बर खाता धारक को दिया जाता, साथ ही एक पासवर्ड दिया जाता बस। जिसके पास वह नम्बर होगा बैंक उसी को जानता था। न डिटेल, न आगे पीछे की पूछताछ होती।

लेकिन बैंक का एक नियम था कि अगर सात साल तक कोई ट्रांजेक्शन नही हुआ या खाते को सात साल तक नही छेड़ा गया तो बैंक खाता सीज करके रकम पर अधिकार जमा कर लेगा। सात वर्ष तक ट्रांजेक्शन न होने की सूरत में रकम बैंक की।

अब रोज दुनियाभर में न जाने कितने माफिया मारे जाते हैं। नेता पकड़े जाते हैं। कितने तस्कर पकड़े या मारे जाते है, कितनो को उम्रकैद होती है। ऐसी स्थिति में न जाने कितने ऐसे खाते थे जो बैंक में सीज हो चुके थे। सन् 2000 की नई सदी के अवसर पर बैंक ने ऐसे खातों को खोला तो उनमें मिला कालाधन पूरी दुनिया के 40% काले धन के बराबर था।

पूरी दुनियां का लगभग आधा कालाधन।
ये रकम हमारी कल्पना से बाहर हैं। शायद बैंक भी नही समझ पा रहा था कि क्या किया जाए इस रकम का।
क्या करें, क्या करे।

ये सोचते सोचते बैंक ने एक घोषणा की और पूरे स्विट्जरलैंड के नागरिकों से राय मांगी की इस रकम का क्या करे। साथ ही बैंक ने कहा कि देश के नागरिक चाहे तो ये रकम बैंक उन्हें बांट सकता हैं और प्रत्येक नागरिक को एक करोड़ की रकम मिल जाएगी। सरकार की तरफ से 15 दिन चले सर्वे में 99.2% लोगों की राय थी कि इस रकम को देश की सुंदरता बढ़ाने में और विदेशी पर्यटकों की सुख सुविधाओं और विकास में खर्च किया जाए।

सर्वे के नतीजे हम भारतीयों के लिये चौंकाने वाले है लेकिन राष्ट्रभक्त स्विटरजरलैंड की जनता के लिये ये साधारण बात थी। उन्होंने हराम के पैसों को नकार दिया। मुफ्त नही चाहिये ये स्पष्ट सर्वे हुआ।

चौंकाने वाला काम दूसरे दिन हुआ। 25 जनवरी 2000 को स्विट्जरलैंड की जनता बैनर लेकर सरकारी सर्वे चैनल के बाहर खड़ी थी। उनका कहना था जो 0.8% लोग हैं मुफ्त की खाने वाले, उनके नाम सार्वजनिक करो।
ये समाज पर और स्विट्जरलैंड पर कलंक है। काफी मशक्कत के बाद सरकार ने मुफ्त की मांग करने वालो को दंडित करने का आश्वासन दिया, तब जनता शांत हुई।

और यहां भारत मे, 15 लाख मोदी से चाहिये।🤔🤔🤔🤔

 
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105 days
 
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*औरंगज़ेब ने ज़ुबान खींच ली, आंखें निकालीं, जान ले ली, फिर भी उसकी इस राजा ने नहीं मानी*


संभाजी राजे. मराठा साम्राज्य की नींव रखने वाले मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज के सबसे बड़े सुपुत्र. महज़ 32 साल की उम्र में जिनकी मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब ने हत्या करवा दी थी. कहते हैं कि बहुत कम उम्र में ही उनको राजनीति की गहरी समझ थी.

*सबसे लोकप्रिय मराठी शासक का बेटा*

संभाजी राजे का जन्म 14 मई 1657 को पुरंदर किले पर हुआ. ये पुणे से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर है. वो शिवाजी महाराज की पहली और प्रिय पत्नी सईबाई के बेटे थे. वो महज़ दो साल के थे जब उनकी मां की मौत हो गई, जिसके चलते उनकी परवरिश उनकी दादी जिजाबाई ने की.

जब संभाजी नौ साल के थे तब उन्हें एक समझौते के तहत राजपूत राजा जय सिंह के यहां बंदी के तौर पर रहना पड़ा था. जब शिवाजी महाराज औरंगज़ेब को चकमा देकर आगरा से भागे थे तब संभाजी उनके साथ ही थे. उनकी जान को ख़तरा भांप कर शिवाजी महाराज ने उन्हें अपने रिश्तेदार के घर मथुरा छोड़ दिया. और उनके मरने की अफवाह फैला दी. कुछ दिनों बाद वो महाराष्ट्र सही-सलामत पहुंचे.

*बग़ावती रवैया*

संभाजी शुरू से ही रिबेल टाइप के थे. उन्हें गैर-ज़िम्मेदार भी माना गया. यही वजह रही कि उनके आचरण को काबू में लाने के लिए 1678 में शिवाजी महाराज ने उन्हें पन्हाला किले में क़ैद कर लिया था. वहां से वो अपनी पत्नी के साथ भाग निकले और मुग़लों से जा मिले. लगभग एक साल तक मुग़लों के साथ रहे. एक दिन उन्हें पता चला कि मुग़ल सरदार दिलेर ख़ान उन्हें गिरफ्तार कर के दिल्ली भिजवाने का मंसूबा बना रहा है. वो मुग़लों का साथ छोड़ के महाराष्ट्र लौट आए. लौटने के बाद भी उनकी किस्मत अलग नहीं रही और उन्हें फिर से बंदी बना कर पन्हाला भेज दिया गया.

जब अप्रैल 1680 में शिवाजी महाराज की मौत हुई, संभाजी पन्हाला में ही कैद थे. शिवाजी महाराज के दूसरे बेटे राजाराम को सिंहासन पर बिठाया गया. ख़बर लगते ही संभाजी राजे ने अपनी मुक्ति का अभियान प्लान किया. कुछ शुभचिंतकों के साथ मिल कर उन्होंने पन्हाला के किलेदार को मार डाला और किले पर कब्ज़ा कर लिया. उसके बाद 18 जून 1680 को रायगढ़ का किला भी कब्ज़ा लिया. राजाराम, उनकी बीवी जानकी और उनकी मां सोयराबाई को गिरफ्तार किया गया. 20 जुलाई 1680 को संभाजी की ताजपोशी हुई.

बताते हैं कि अक्टूबर 1680 में संभाजी की सौतेली मां सोयराबाई को षड़यंत्र रचने के इल्ज़ाम में फांसी दी गई.

*मुग़लों से जंग*

सत्ता में आने के बाद संभाजी राजे ने मुग़लों से पंगे लेने शुरू किए. बुरहानपुर शहर पर हमला किया और उसे बरबाद कर के रख दिया. शहर की सुरक्षा के लिए रखी गई मुग़ल सेना के परखच्चे उड़ा दिए. शहर को आग के हवाले कर दिया. इसके बाद से मुग़लों से उनकी खुली दुश्मनी रही.

औरंगज़ेब से उनकी चिढ़ का एक किस्सा मशहूर है. औरंगज़ेब के चौथे बेटे अकबर ने जब अपने पिता से बग़ावत की तो संभाजी राजे ने ही उसे आसरा दिया था. उस दौरान संभाजी राजे ने अकबर की बहन ज़ीनत को एक ख़त लिखा. वो ख़त औरंगज़ेब के लोगों के हाथ लगा और भरे दरबार में औरंगज़ेब को पढ़ कर सुनाया गया. ख़त कुछ इस तरह था,

"बादशाह सलामत सिर्फ मुसलमानों के बादशाह नहीं हैं. हिंदुस्तान की जनता अलग-अलग धर्मों की है. उन सबके ही बादशाह हैं वो. वो जो सोच कर दक्कन आये थे, वो मकसद पूरा हो गया है. इसी से संतुष्ट होकर उन्हें दिल्ली लौट जाना चाहिए. एक बार हम और हमारे पिता उनके कब्ज़े से छूट कर दिखा चुके हैं. लेकिन अगर वो यूं ही ज़िद पर अड़े रहे, तो हमारे कब्ज़े से छूट कर दिल्ली नहीं जा पाएंगे. अगर उनकी यही इच्छा है तो उन्हें दक्कन में ही अपनी क़बर के लिए जगह ढूंढ लेनी चाहिए."

*अपनों ने ही दिया धोखा*

1687 में मराठा फ़ौज की मुग़लों से एक भयंकर लड़ाई हुई. हालांकि जीत मराठों के ही हाथ लगी, लेकिन उनकी सेना बहुत कमज़ोर हो गई. यही नहीं उनके सेनापति और संभाजी के विश्वासपात्र हंबीरराव मोहिते की इस लड़ाई में मौत हो गई. संभाजी राजे के खिलाफ़ षड्यंत्रों का बाज़ार गर्म होने लगा. उनकी जासूसी की जाने लगी. उनके रिश्तेदार शिर्के परिवार की इसमें बड़ी भूमिका थी.

फ़रवरी 1689 में जब संभाजी एक बैठक के लिए संगमेश्वर पहुंचे, तो वहां उनपर घात लगा कर हमला किया गया. मुग़ल सरदार मुक़र्रब ख़ान की अगुआई में संभाजी के सभी सरदारों को मार डाला गया. उन्हें और उनके सलाहकार कविकलश को पकड़ कर बहादुरगढ़ ले जाया गया.

औरंगज़ेब ने संभाजी के सामने एक प्रस्ताव रखा. सारे किले औरंगज़ेब को सौंप कर इस्लाम कबूल करने का प्रस्ताव. इसे मान लिया जाने पर उनकी जानबख्शी करने का वादा किया. संभाजी राजे ने इस प्रस्ताव को मानने से साफ़ इंकार कर दिया. इसके बाद शुरू हुआ टॉर्चर और बेइज्ज़ती का दौर.


*मार डालने से पहले यातनाओं का लंबा सिलसिला*

कहते हैं कि इस्लाम कबूलने से इंकार करने के बाद संभाजी राजे और कविकलश को जोकरों वाली पोशाक पहना कर पूरे शहरभर में परेड़ कराई गई. पूरे रास्ते भर उन पर पत्थरों की बरसात की गई. भाले चुभाए गए. उसके बाद उन्हें फिर से इस्लाम कबूलने के लिए कहा गया. फिर से इंकार करने पर और ज़्यादा यातनाएं दी गई. दोनों कैदियों की ज़ुबान कटवा दी गई. आंखें निकाल ली गई.

यूरोपियन इतिहासकार डेनिस किनकैड़ लिखते हैं,

"बादशाह ने उनको इस्लाम कबूलने का हुक्म दिया. इंकार करने पर उनको बुरी तरह पीटा गया. दोबारा पूछने पर भी संभाजी ने इंकार ही किया. इस बार उनकी ज़ुबान खींच ली गई. एक बार फिर से पूछा गया. संभाजी ने लिखने की सामग्री मंगवाई और लिखा, \'अगर बादशाह अपनी बेटी भी दे, तब भी नहीं करूंगा\'. इसके बाद उनको तड़पा-तड़पा कर मार डाला गया."

11 मार्च 1689 को उनके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर के उनकी जान ली गई. इस वक़्त की एक किवंदती महाराष्ट्र में बेहद मशहूर है. कहते हैं कि मार डालने से जस्ट पहले औरंगज़ेब ने संभाजी राजे से कहा था, "अगर मेरे चार बेटों में से एक भी तुम्हारे जैसा होता, तो सारा हिंदुस्तान कब का मुग़ल सल्तनत में समा चुका होता."

कुछ लोगों के मुताबिक़ उनकी लाश के टुकड़ों को तुलापुर की नदी में फेंक दिया गया. वहां से उन्हें कुछ लोगों ने निकाला और उनके जिस्म को सी कर उसका अंतिम संस्कार कर दिया. कुछ और लोग मानते हैं कि उनके जिस्म को मुग़लों ने कुत्तों को खिलाया.

*मौत के बाद*

औरंगज़ेब ने सोचा था कि संभाजी की मौत के बाद मराठा साम्राज्य ख़त्म हो जाएगा और उस पर काबू पा लेना मुमकिन होगा. लेकिन हुआ उलट. संभाजी के जीते जी जो मराठा सरदार बिखरे-बिखरे थे, वो उनकी मौत के बाद एक होकर लड़ने लगे. इसके चलते औरंगज़ेब का दक्कन पर काबिज़ होने का सपना मरते दम तक नहीं पूरा हो सका. और जैसा कि संभाजी ने कहा था औरंगज़ेब को दक्कन में ही दफ़न होना पड़ा.

छत्रपति संभाजी राजे पर मराठी साहित्य में बहुत कुछ लिखा जा चुका है. जिनमें शिवाजी सावंत का लिखा उपन्यास \'छावा\' बेहद उम्दा है. छावा यानी शेर का शावक. आज भी महाराष्ट्र में संभाजी राजे की छवि शेर के बच्चे की ही है.

 
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Sam's Son

धरती की वह रहस्यमयी जगहें जहां काम नहीं करता गुरुत्वाकर्षण



गुरुत्वाकर्षण एक ऐसी चीज है जिसके बगैर धरती पर चल पाना मुमकिन नहीं है गुरुत्वाकर्षण धरती पर हर जगह मौजूद है गुरुत्वाकर्षण से सिर्फ तभी बचा जा सकता है जब आप पृथ्वी से दूर अंतरिक्ष में पहुंच जाएं। गुरुत्वाकर्षण के कारण ही हम पृथ्वी पर टिके रह पाते हैं परंतु क्या आप जानते हैं कि धरती पर ऐसी भी कुछ रहस्यमयी जगह है जहां गुरुत्वाकर्षण काम नहीं करता।

1. Mystery Spot, California - इस जगह को 1939 में खोजा गया था यह 150 वर्ग मीटर का एक छोटा सा भू भाग है जहां पर चुंबकीय क्षेत्र और गुरुत्वाकर्षण अलग तरीके से काम करता है।



2. Magnetic Hill, Leh - लेह में मोजूद यह एक छोटी सी सड़क है जो कारगिल से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है इस सड़क पर गाड़ियां अपने आप ऊपर की तरफ बढ़ने लगती हैं यदि आप इंजन बंद कर देते हैं तो भी गाड़ी ऊपर की तरफ बढ़ती रहती है धीमे धीमे यह 20 किलोमीटर की स्पीड पकड़ लेती

3. Spook Hill, Florida - यह जगह भी बिल्कुल भारत के लेह जैसी है यहां पर यदि आप अपनी गाड़ी का इंजन बंद कर देते हैं तो आपकी गाड़ी ऊपर की ओर चलने लगती हैं।


4. Cosmos Mystery Area, south Dakota - जब आप इस जगह पर पहुंचेंगे तो यहां पर आपको पेड़ पौधे एक तरफ झुके हुए दिखाई देंगे। यहां आप एक खास कोण बिना गिरे खड़े रह सकते हैं इस जगह की खोज 1950 में की गई थी।


5.Mystery Spot, Michigan - लगभग 300 वर्ग मीटर का यह एरिया रहस्यमयी माना जाता है क्योंकि यहां पर ग्रेविटी काम नहीं करती। यहां पर जानवर भी आने से डरते हैं यहां पर आप खड़ी दीवार पर भी चल सकते हैं

 
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User27605

*Avengers 4 में क्या होने वाला है*


जाल निकल नहीं रहा लेकिन फिर भी ये शॉ ऑफ कर दूं कि मैं अवेंजर्स इन्फिनिटी वॉर देख आया हूं और उम्मील है मार्वेल के सारे फैन्स देख चुके होंगे. अगर नहीं देखा है तो प्लीज लौट जाओ क्योंकि आगे स्पॉइलर हैं. पहला स्पॉइलर ये है कि वीकेंड पर सिर्फ तीन दिन में फिल्म 90 करोड़ की कमाई पार कर चुकी है. अब काम की बात की आने वाली अवेंजर में क्या होगा.


1. बात ये है कि जैसे सारे लोग धूल में मिल गए हैं उससे आप पूछ सकते हैं अमा ऐसे भी कोई मरता है क्या? आधी से ज्यादा अवेंजर्स की फौज गायब हो गई. उनकी जगह लोकी, गमोरा और विजन का मरना ज्यादा नेचुरल लगता है. तो हकीकत के सबसे नजदीक थ्योरी ये है कि टाइम का खेल खेला गया है. डॉक्टर स्ट्रैंज ने आगे जाकर देख लिया था कि क्या लोचा होने वाला है. लाखों फ्यूचर लड़ाइयों के बीच जिस एक जीत की बात डॉक्टर ने की थी वो शायद यही हो कि टाइम में आगे पीछे घुसकर सब माहौल सेट किया गया है.

2. डॉक्टर स्ट्रैंज, ब्लैक पैंथर, स्पाइडर मैन नहीं मर सकते. इन सबकी फिल्में आने वाली हैं यार अभी जुम्मे जुम्मे चार रोज तो हुए इनको आए हुए. स्पाइडरमैन की होमकमिंग का सीक्वल, ब्लैक पैंथर 2 और डॉक्टर स्ट्रैंज 2 आने वाली हैं. सारे पावरफुल सुपरहीरोज हैं, डॉक्टर स्ट्रैंज की फैन फॉलोविंग एशिया में बहुत ज्यादा है जहां से मार्वेल की कमाई का बड़ा हिस्सा जाता है. उसको ये लोग मार नहीं सकते बताए देते हैं.

3. गार्डियन्स ऑफ गैलेक्सी की पूरी टीम साफ हो गई है जो कि इम्पॉसिबल है यार. एडम वॉरलाक गार्डियन्स से बदला लेने के लिए तैयार किया जा रहा है तो ऐसा कैसे हो सकता है. रॉकेट थॉर का रैबिट दोस्त बन गया है वो लौटेगा जरूर.

4. टेंसन लेने का नहीं अभी एंट मैन, हॉक आई जिंदा हैं, हो सकता है कि अगली अवेंजर्स में ये लोग भी दिख जाएं भौकाल दिखाते हुए.

5. ऐस्गार्ड की आधी जनता मरी है ये बात थॉर खुद अपने श्री मुख से बता चुके हैं लेकिन अभी आधी तो बाकी है न. ऐस्गार्ड के लोग सालों साल जीते हैं और महा पावरफुल होते हैं ये बात भी पता है इसलिए इधर से भी उम्मीद का कीड़ा काट रहा है.
खैर अवेंजर्स 4 का नाम भी काफी कुछ डिसाइड कर देगा इसलिए टेंसन लेने की जरूरत नहीं है नाम आने दो.

6. एक और सबसे खास बात, फिल्म के पोस्ट क्रेडिट सीन में निक फ्यूरी पेजर जैसे यंत्र से जो संदेश भेज रहे हैं वो कैप्टन मार्वेल के पास जाने वाला है. लोगों को लग सकता है कि अब अवेंजर्स में कैप्टन मार्वेल देखने को मिलेगी लेकिन हाथ जोड़ रहे हैं. ये सपना मत देखो यार काहे कि सपने जब टूटते हैं न तो बहुत दर्द होता है. कैप्टन मार्वेल मार्वेल के सबसे ज्यादा पावरफुल सुपर हीरो होने वाली है ऐसा मार्वेल के प्रेसिडेंट केविन फेज ने 2016 के एक इंटरव्यू में बताया था.

7. एक और प्वाइंट है हाइड्रा की वापसी. कैप्टन अमेरिका विंटर सोल्जर और अवेंजर्स- एज ऑफ़ अल्ट्रान के बाद हाइड्रा का उतना जिक्र नहीं आया है. न हालिया स्पाइडर मैन होम कमिंग या ब्लैक पैंथर में, लेकिन इनफिनिटी वॉर में हाइड्रा का लीडर रेड स्कल उस ग्रह में नज़र आता है. जहाँ थानोस सोल स्टोन लेने गया था. रेड स्कल को कैप्टन अमेरिका-फर्स्ट अवेंजर के अंत के बाद से नहीं देखा गया था. उस फिल्म में वो क्रैश होते प्लेन से हाथ में टेसेरेक्ट उठाने के चक्कर में कहीं गायब हो गया था. अब पता लगा वो अब तक ज़िंदा है और कई चीजें जानता है. साथ ही इनफिनिटी स्टोन के पास रहा है. ये बातें भले उसे शक्तिशाली न बनाती हों लेकिन ये दिखाती हैं कि वो अब भी इम्पोर्टेंस रखता है. तो कल को मार्वल की फिल्मों में हाइड्रा की वापसी या रेड स्कल का और ज्यादा रोल और योगदान तो तय है. और कुछ नहीं तो रेड स्कल की मौत तो दिखानी ही चाहिए, अब ये अवेंजर्स 4 में होता है या और किसी फिल्म में ये देखना है.

 
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Sam's Son
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