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चाय के बारे में रोचक तथ्य

1. चाय का आविष्कार 2730 B.C में चाइना में किया गया था । तभी से यह पूरे विश्व में फेल गया ।

2. सबसे पहली चाय चाइना के सम्राट Shen Nung के लिए तैयार किया था ।( " जब सम्राट जी बैठे थे और उनके सामने एक कप का प्याला था और उनमे चाय की पत्ती आकर गिरती है और पानी का रंग बदल जाता है )

3. ठंडी चाय का आविष्कार 1904 सेंट लुईस विश्व मेले में एक अंग्रेज नामित रिचर्ड ब्लेचिंदें दूआरा किया गया था ।

4. चाय बैग / Tea Bag सयुक्त राज्य अमेरिका में 1908 में थॉमस सुलिवन दूआरा किया गया था ।

5. चाय बैग / Tea Bag छोटे-छोटे रेशम से मिलकर बनाया गया था ।

6. चाय चाइना में शुरु होने के बाद सबसे पहले 1716 में कनाडा पंहुचा |

7. सबसे ज्यादा चाय Turkey में रहने वाले पीते है ।

8. चीन में केवल एक चाय बनी थी लेकिन लोगो ने इसे अपने अनुसार ही बना लिया ।

9. ये माना जाता है कि चाय की 1500 से भी ज्यादा किस्में हैं। लेकिन सबसे ज्यादा चाय प्रयोग की जाने वाली चाय :-Type Of Tea / चाय के प्रकार
White Tea
Green Tea
Oolong Tea
Dark Tea
Puer Tea
Mate Tea

10. भारत में चाय की खेती की शुरूआत 1835 में हई थी। भारत में चाय की सबसे ज्यादा खेती आसाम और दारजलिंग में की जाती है।

11. अफ़गानिस्तान और ईरान देश का राष्ट्रीय पेय / National Drink  चाय है।

12.  16 करोड़ लोग रोज़ इंग्लैंड में चाय पीते हैं। और देखा जाये तो  एक साल में इंग्लैंड के लोग लगभग  60 अरब चाय पी जाते हैं।

13. विश्व  में प्रतेक साल 30 लाख टन चाय का उगाया जाता है।

14. पीने के मामले में पानी के बाद चाय का ही नंबर आता है |

15. चाय न पीने से 30% लोगो के सर में दर्द होने लगता है |

16. पूरी दुनिया में चाय को फेलाने वाले डच थे

 
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5 days
 
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Bitcoin के बारे में 8 रोचक तथ्य जो आपको नहीं पता होगा

1. सातोशी नकामोतो  की मौजूदगी अभी भी रहस्यमय है -

सातोशी  नकामोतो वह नाम है जिसका इस्तेमाल उस इंसान ने किया जिसने bitcoin का निर्माण किया लेकिन इसकी असली पहचान अभी भी संदेहास्पद है , कई सालों तक इससे बहुत से लोगों का नाम जुड़ा जैसे Nick Szabo, Dorian Nakamoto ,Hal Finney , Craig Steven Wright and others.कुछ लोगों का यह कहना है की नाकमोतो एक टीम है जिसने bitcoin का निर्माण किया , मई 2017 तक नाकामोतो के पास 1 मिलियन bitcoin था जिसकी कीमत लगभग $2 बिलियन था.

2.Bitcoin की संख्या स्थायी है -

आपने bitcoin माइनिंग के बारे में तो सुना ही होगा जिसके ज़रिये bitcoin को digitally generate किया जाता है , इसका मतलब यह नहीं है की आप अनगिनत bitcoin generate कर सकते है , bitcoin की संख्या को स्थायी कर दिया गया है अभी तक लगभग 21 मिलियन bitcoin generate किया जा चूका है लेकिन आगे इसकी माइनिंग का तरीका बहुत ही कठिन होने वाला हैं .

3.Senders/Receiver की जानकारी जानना नामुनकिन है -

जैसा की आप जानते है की बित्कोइन का address 34 अल्फानुमेरिक अक्षरों से मिलकर बना होता है जिससे senders या reciever की दूसरी जानकारी जानना नामुनकिन है जिसके कारण जो अवैध लेन देन होता है वो ज्यादातर बित्कोइन के ज़रिये ज्यादा होने लगा है इससे बचने के लिए कुछ वॉलेट कंपनी यूजर को id प्रदान करती है जिससे लेने या भेजने वाले की जानकारी हो .

4.बित्कोइन का इस्तेमाल सबसे पहले पिज़्ज़ा आर्डर के लिए किया गया -

बित्कोइन का सबसे पहला लेनदेन सातोशी और Hal Finney के बिच 2009 में हुआ सबसे पहला खरीदी एक पिज़्ज़ा का हुआ जिसकी कीमत $25 थी जिसको खरीदने के लिए 10,000 बित्कोइन्स का खर्च हुआ .

5.बित्कोइन का नेटवर्क सुपर कंप्यूटर के नेटवर्क से ज्यादा ताकतवर है -

यह तथ्य मेरा पर्सनल सबसे पसंदीदा तथ्य है , अगर हम एक्सपर्ट्स की माने तो बित्कोइन के नेटवर्क की कंप्यूटिंग क्षमता 2,046,364 pflop/s है और अगर हम दुनिया के 500 सुपर कंप्यूटर की ताकत को मिलाये तो उनकी कंप्यूटिंग क्षमता सिर्फ 274 pflop/s है जो बित्कोइन के नेटवर्क से काफी ज्यादा कम है .

6.बित्कोइन को अंतरिक्ष में भी भेजा गया है -

साल 2016 में जेनेसिस माइनिंग जो की एक बित्कोइन क्लाउड माइनिंग कंपनी है उसने बित्कोइन को अंतरिक्ष में भेजा था, इसको भेजने के लिए एक 3D बित्कोइन मॉडल और एक बित्कोइन पेपर वालेट का इस्तेमाल किया गया in दोनों चीजों को एक गुब्बारे से बांध दिया गया था इस पुरे प्रक्रिया को रिकॉर्ड किया गया gopro द्वारा , एक बार जब गुब्बारा 20km की ऊँचाई पर पहुच गया तब पेपर वॉलेट में लेनदेन किया गया उसके बाद दूसरा लेनदेन किया गया जब गुब्बारा 34km की अधिकतम ऊँचाई पर पहुँच गयी .

7.FBI के पास दुनिया की सबसे बड़ी बित्कोइन वॉलेट है -

जब FBI ने सिल्क रोड ऑपरेशन को बंद किया तो उसने उसके मालिक की सारी संपत्ति को भी जब्त कर लिया जिसके कारण यह हुआ की FBI दुनिया की सबसे ज्यादा अमीर बित्कोइन मालिक बन गयी एक magzine की रिपोर्ट के मुताबिक़ FBI के पास लगभग $120 मिलियन के बित्कोइन का नियंत्रण है .

8.बित्कोइन वॉलेट का खोना मतलब सारे बित्कोइन का खो देना -

जिस  तरह आप अपना पैसा अपने बैंक अकाउंट में जमा करते है ठीक उसी प्रकार आप अपने बित्कोइन को बित्कोइन वॉलेट में जमा रखते है यह एक बहुत ही ज्यादा सिक्योर वॉलेट होता है लेकिन अगर किसी कारण आप अपना वॉलेट खो देते है तो आपने जितना भी बित्कोइन जमा किया है उस वॉलेट में वो सारे गुम हो जायेंगे .

 
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5 days
 
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*यदि 05 सेकंड के लिए धरती से ऑक्सीजन गायब हो जाए तो क्या होगा???*

05 सेकंड के लिए धरती बहुत, बहुत ठंडी हो जाएगी.

जितने भी लोग समुद्र किनारे लेटे हैं...उन्हें तुरंत सनबर्न होने लगेगा.

दिन में भी अँधेरा छा जाएगा.

हर वह इंजन रूक जाएगा जिनमें आंतरिक दहन होता है.

रनवे पर टेक ऑफ कर चुका प्लेन वहीं क्रैश हो जाएगा.

धातुओ के टुकड़े बिना वैल्डिंग के ही आपस में जुड़ जाएगे.
.
ऑक्सीजन न होने का यह बहुत भयानक साइड इफेक्ट होगा......

पूरी दुनिया में सबके कानों के पर्दे फट जाएगे....क्योंकि 21% ऑक्सीज़न के अचानक लुप्त होने से हवा का दबाव घट जाएगा.

सभी का बहरा होना पक्का है.

कंक्रीट से बनी हर बिल्डिंग ढेर हो जाएगी.

हर जीवित कोशिका फूलकर फूट जाएगी.
.
पानी में 88.8% ऑक्सीज़न होती है.
ऑक्सीजन ना होने पर हाइड्रोजन गैसीय अवस्था में आ जाएगी और इसका वाॅल्यूम बढ़ जाएगा.
हमारी साँसे बाद में रूकेगी, हम फूलकर पहले ही फट जाएँगे.

समुद्रो का सारा पानी भाप बनकर उड़ जाएगा.....क्योंकि बिना ऑक्सीजन पानी हाइड्रोजन गैस में बदल जाएगा और यह सबसे हल्की गैस होती है तो इसका अंतरिक्ष में उड़ना लाज़िमी है.

ऑक्सीजन के अचानक गुम होने से हमारे पैरों तले की जमीन खिसककर 10-15 किलोमीटर नीचे चली जाएगी.

 
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8 days
 
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*स्विट्जरलैंड*

नाम तो आपने सुना ही होगा 'स्विट्जरलैंड'। ऐसा देश जहाँ दुनियां का हर शादीशुदा जोड़ा अपना हनीमून मनाने के ख्वाब देखता हैं। बर्फीली वादियों से ढका ये देश सुंदरता की अद्भुत कृति है। हरियाली हो या बर्फ, आंखे जिधर भी जाये पलक झपकना भूल जाये। दुनिया का सबसे सम्पन्न देश हैं स्विट्जरलैंड! हर प्रकार से सम्पन्न इस देश की एक रोचक कहानी बताता हूँ।

आज से लगभग 50 साल पहले स्विट्जरलैंड में एक प्राइवेट बैंक की स्थापना हुई जिसका नाम था 'स्विसबैंक'। इस बैंक के नियम दुनिया की अन्य बैंको से भिन्न थे। ये स्विसबैंक अपने ग्राहकों से उसके पैसे के रखरखाव और गोपनीयता के बदले उल्टा ग्राहक से पैसे वसूलती थी। साथ ही गोपनीयता की गारंटी।
न ग्राहक से पूछना की पैसा कहां से आया ?
न कोई सवाल न बाध्यता।

सालभर में इस बैंक की ख्याति विश्वभर में फैल चुकी थी।चोर, बेईमान नेता, माफिया, तस्कर और बड़े बिजनेसमेन इन सबकी पहली पसंद बन चुकी थी स्विस बैंक। बैंक का एक ही नियम था। रिचार्ज कार्ड की तरह एक नम्बर खाता धारक को दिया जाता, साथ ही एक पासवर्ड दिया जाता बस। जिसके पास वह नम्बर होगा बैंक उसी को जानता था। न डिटेल, न आगे पीछे की पूछताछ होती।

लेकिन बैंक का एक नियम था कि अगर सात साल तक कोई ट्रांजेक्शन नही हुआ या खाते को सात साल तक नही छेड़ा गया तो बैंक खाता सीज करके रकम पर अधिकार जमा कर लेगा। सात वर्ष तक ट्रांजेक्शन न होने की सूरत में रकम बैंक की।

अब रोज दुनियाभर में न जाने कितने माफिया मारे जाते हैं। नेता पकड़े जाते हैं। कितने तस्कर पकड़े या मारे जाते है, कितनो को उम्रकैद होती है। ऐसी स्थिति में न जाने कितने ऐसे खाते थे जो बैंक में सीज हो चुके थे। सन् 2000 की नई सदी के अवसर पर बैंक ने ऐसे खातों को खोला तो उनमें मिला कालाधन पूरी दुनिया के 40% काले धन के बराबर था।

पूरी दुनियां का लगभग आधा कालाधन।
ये रकम हमारी कल्पना से बाहर हैं। शायद बैंक भी नही समझ पा रहा था कि क्या किया जाए इस रकम का।
क्या करें, क्या करे।

ये सोचते सोचते बैंक ने एक घोषणा की और पूरे स्विट्जरलैंड के नागरिकों से राय मांगी की इस रकम का क्या करे। साथ ही बैंक ने कहा कि देश के नागरिक चाहे तो ये रकम बैंक उन्हें बांट सकता हैं और प्रत्येक नागरिक को एक करोड़ की रकम मिल जाएगी। सरकार की तरफ से 15 दिन चले सर्वे में 99.2% लोगों की राय थी कि इस रकम को देश की सुंदरता बढ़ाने में और विदेशी पर्यटकों की सुख सुविधाओं और विकास में खर्च किया जाए।

सर्वे के नतीजे हम भारतीयों के लिये चौंकाने वाले है लेकिन राष्ट्रभक्त स्विटरजरलैंड की जनता के लिये ये साधारण बात थी। उन्होंने हराम के पैसों को नकार दिया। मुफ्त नही चाहिये ये स्पष्ट सर्वे हुआ।

चौंकाने वाला काम दूसरे दिन हुआ। 25 जनवरी 2000 को स्विट्जरलैंड की जनता बैनर लेकर सरकारी सर्वे चैनल के बाहर खड़ी थी। उनका कहना था जो 0.8% लोग हैं मुफ्त की खाने वाले, उनके नाम सार्वजनिक करो।
ये समाज पर और स्विट्जरलैंड पर कलंक है। काफी मशक्कत के बाद सरकार ने मुफ्त की मांग करने वालो को दंडित करने का आश्वासन दिया, तब जनता शांत हुई।

और यहां भारत मे, 15 लाख मोदी से चाहिये।🤔🤔🤔🤔

 
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41 days
 
B P S R

*औरंगज़ेब ने ज़ुबान खींच ली, आंखें निकालीं, जान ले ली, फिर भी उसकी इस राजा ने नहीं मानी*


संभाजी राजे. मराठा साम्राज्य की नींव रखने वाले मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज के सबसे बड़े सुपुत्र. महज़ 32 साल की उम्र में जिनकी मुग़ल बादशाह औरंगज़ेब ने हत्या करवा दी थी. कहते हैं कि बहुत कम उम्र में ही उनको राजनीति की गहरी समझ थी.

*सबसे लोकप्रिय मराठी शासक का बेटा*

संभाजी राजे का जन्म 14 मई 1657 को पुरंदर किले पर हुआ. ये पुणे से लगभग 50 किलोमीटर की दूरी पर है. वो शिवाजी महाराज की पहली और प्रिय पत्नी सईबाई के बेटे थे. वो महज़ दो साल के थे जब उनकी मां की मौत हो गई, जिसके चलते उनकी परवरिश उनकी दादी जिजाबाई ने की.

जब संभाजी नौ साल के थे तब उन्हें एक समझौते के तहत राजपूत राजा जय सिंह के यहां बंदी के तौर पर रहना पड़ा था. जब शिवाजी महाराज औरंगज़ेब को चकमा देकर आगरा से भागे थे तब संभाजी उनके साथ ही थे. उनकी जान को ख़तरा भांप कर शिवाजी महाराज ने उन्हें अपने रिश्तेदार के घर मथुरा छोड़ दिया. और उनके मरने की अफवाह फैला दी. कुछ दिनों बाद वो महाराष्ट्र सही-सलामत पहुंचे.

*बग़ावती रवैया*

संभाजी शुरू से ही रिबेल टाइप के थे. उन्हें गैर-ज़िम्मेदार भी माना गया. यही वजह रही कि उनके आचरण को काबू में लाने के लिए 1678 में शिवाजी महाराज ने उन्हें पन्हाला किले में क़ैद कर लिया था. वहां से वो अपनी पत्नी के साथ भाग निकले और मुग़लों से जा मिले. लगभग एक साल तक मुग़लों के साथ रहे. एक दिन उन्हें पता चला कि मुग़ल सरदार दिलेर ख़ान उन्हें गिरफ्तार कर के दिल्ली भिजवाने का मंसूबा बना रहा है. वो मुग़लों का साथ छोड़ के महाराष्ट्र लौट आए. लौटने के बाद भी उनकी किस्मत अलग नहीं रही और उन्हें फिर से बंदी बना कर पन्हाला भेज दिया गया.

जब अप्रैल 1680 में शिवाजी महाराज की मौत हुई, संभाजी पन्हाला में ही कैद थे. शिवाजी महाराज के दूसरे बेटे राजाराम को सिंहासन पर बिठाया गया. ख़बर लगते ही संभाजी राजे ने अपनी मुक्ति का अभियान प्लान किया. कुछ शुभचिंतकों के साथ मिल कर उन्होंने पन्हाला के किलेदार को मार डाला और किले पर कब्ज़ा कर लिया. उसके बाद 18 जून 1680 को रायगढ़ का किला भी कब्ज़ा लिया. राजाराम, उनकी बीवी जानकी और उनकी मां सोयराबाई को गिरफ्तार किया गया. 20 जुलाई 1680 को संभाजी की ताजपोशी हुई.

बताते हैं कि अक्टूबर 1680 में संभाजी की सौतेली मां सोयराबाई को षड़यंत्र रचने के इल्ज़ाम में फांसी दी गई.

*मुग़लों से जंग*

सत्ता में आने के बाद संभाजी राजे ने मुग़लों से पंगे लेने शुरू किए. बुरहानपुर शहर पर हमला किया और उसे बरबाद कर के रख दिया. शहर की सुरक्षा के लिए रखी गई मुग़ल सेना के परखच्चे उड़ा दिए. शहर को आग के हवाले कर दिया. इसके बाद से मुग़लों से उनकी खुली दुश्मनी रही.

औरंगज़ेब से उनकी चिढ़ का एक किस्सा मशहूर है. औरंगज़ेब के चौथे बेटे अकबर ने जब अपने पिता से बग़ावत की तो संभाजी राजे ने ही उसे आसरा दिया था. उस दौरान संभाजी राजे ने अकबर की बहन ज़ीनत को एक ख़त लिखा. वो ख़त औरंगज़ेब के लोगों के हाथ लगा और भरे दरबार में औरंगज़ेब को पढ़ कर सुनाया गया. ख़त कुछ इस तरह था,

"बादशाह सलामत सिर्फ मुसलमानों के बादशाह नहीं हैं. हिंदुस्तान की जनता अलग-अलग धर्मों की है. उन सबके ही बादशाह हैं वो. वो जो सोच कर दक्कन आये थे, वो मकसद पूरा हो गया है. इसी से संतुष्ट होकर उन्हें दिल्ली लौट जाना चाहिए. एक बार हम और हमारे पिता उनके कब्ज़े से छूट कर दिखा चुके हैं. लेकिन अगर वो यूं ही ज़िद पर अड़े रहे, तो हमारे कब्ज़े से छूट कर दिल्ली नहीं जा पाएंगे. अगर उनकी यही इच्छा है तो उन्हें दक्कन में ही अपनी क़बर के लिए जगह ढूंढ लेनी चाहिए."

*अपनों ने ही दिया धोखा*

1687 में मराठा फ़ौज की मुग़लों से एक भयंकर लड़ाई हुई. हालांकि जीत मराठों के ही हाथ लगी, लेकिन उनकी सेना बहुत कमज़ोर हो गई. यही नहीं उनके सेनापति और संभाजी के विश्वासपात्र हंबीरराव मोहिते की इस लड़ाई में मौत हो गई. संभाजी राजे के खिलाफ़ षड्यंत्रों का बाज़ार गर्म होने लगा. उनकी जासूसी की जाने लगी. उनके रिश्तेदार शिर्के परिवार की इसमें बड़ी भूमिका थी.

फ़रवरी 1689 में जब संभाजी एक बैठक के लिए संगमेश्वर पहुंचे, तो वहां उनपर घात लगा कर हमला किया गया. मुग़ल सरदार मुक़र्रब ख़ान की अगुआई में संभाजी के सभी सरदारों को मार डाला गया. उन्हें और उनके सलाहकार कविकलश को पकड़ कर बहादुरगढ़ ले जाया गया.

औरंगज़ेब ने संभाजी के सामने एक प्रस्ताव रखा. सारे किले औरंगज़ेब को सौंप कर इस्लाम कबूल करने का प्रस्ताव. इसे मान लिया जाने पर उनकी जानबख्शी करने का वादा किया. संभाजी राजे ने इस प्रस्ताव को मानने से साफ़ इंकार कर दिया. इसके बाद शुरू हुआ टॉर्चर और बेइज्ज़ती का दौर.


*मार डालने से पहले यातनाओं का लंबा सिलसिला*

कहते हैं कि इस्लाम कबूलने से इंकार करने के बाद संभाजी राजे और कविकलश को जोकरों वाली पोशाक पहना कर पूरे शहरभर में परेड़ कराई गई. पूरे रास्ते भर उन पर पत्थरों की बरसात की गई. भाले चुभाए गए. उसके बाद उन्हें फिर से इस्लाम कबूलने के लिए कहा गया. फिर से इंकार करने पर और ज़्यादा यातनाएं दी गई. दोनों कैदियों की ज़ुबान कटवा दी गई. आंखें निकाल ली गई.

यूरोपियन इतिहासकार डेनिस किनकैड़ लिखते हैं,

"बादशाह ने उनको इस्लाम कबूलने का हुक्म दिया. इंकार करने पर उनको बुरी तरह पीटा गया. दोबारा पूछने पर भी संभाजी ने इंकार ही किया. इस बार उनकी ज़ुबान खींच ली गई. एक बार फिर से पूछा गया. संभाजी ने लिखने की सामग्री मंगवाई और लिखा, \'अगर बादशाह अपनी बेटी भी दे, तब भी नहीं करूंगा\'. इसके बाद उनको तड़पा-तड़पा कर मार डाला गया."

11 मार्च 1689 को उनके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर के उनकी जान ली गई. इस वक़्त की एक किवंदती महाराष्ट्र में बेहद मशहूर है. कहते हैं कि मार डालने से जस्ट पहले औरंगज़ेब ने संभाजी राजे से कहा था, "अगर मेरे चार बेटों में से एक भी तुम्हारे जैसा होता, तो सारा हिंदुस्तान कब का मुग़ल सल्तनत में समा चुका होता."

कुछ लोगों के मुताबिक़ उनकी लाश के टुकड़ों को तुलापुर की नदी में फेंक दिया गया. वहां से उन्हें कुछ लोगों ने निकाला और उनके जिस्म को सी कर उसका अंतिम संस्कार कर दिया. कुछ और लोग मानते हैं कि उनके जिस्म को मुग़लों ने कुत्तों को खिलाया.

*मौत के बाद*

औरंगज़ेब ने सोचा था कि संभाजी की मौत के बाद मराठा साम्राज्य ख़त्म हो जाएगा और उस पर काबू पा लेना मुमकिन होगा. लेकिन हुआ उलट. संभाजी के जीते जी जो मराठा सरदार बिखरे-बिखरे थे, वो उनकी मौत के बाद एक होकर लड़ने लगे. इसके चलते औरंगज़ेब का दक्कन पर काबिज़ होने का सपना मरते दम तक नहीं पूरा हो सका. और जैसा कि संभाजी ने कहा था औरंगज़ेब को दक्कन में ही दफ़न होना पड़ा.

छत्रपति संभाजी राजे पर मराठी साहित्य में बहुत कुछ लिखा जा चुका है. जिनमें शिवाजी सावंत का लिखा उपन्यास \'छावा\' बेहद उम्दा है. छावा यानी शेर का शावक. आज भी महाराष्ट्र में संभाजी राजे की छवि शेर के बच्चे की ही है.

 
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42 days
 
Sam's Son

धरती की वह रहस्यमयी जगहें जहां काम नहीं करता गुरुत्वाकर्षण



गुरुत्वाकर्षण एक ऐसी चीज है जिसके बगैर धरती पर चल पाना मुमकिन नहीं है गुरुत्वाकर्षण धरती पर हर जगह मौजूद है गुरुत्वाकर्षण से सिर्फ तभी बचा जा सकता है जब आप पृथ्वी से दूर अंतरिक्ष में पहुंच जाएं। गुरुत्वाकर्षण के कारण ही हम पृथ्वी पर टिके रह पाते हैं परंतु क्या आप जानते हैं कि धरती पर ऐसी भी कुछ रहस्यमयी जगह है जहां गुरुत्वाकर्षण काम नहीं करता।

1. Mystery Spot, California - इस जगह को 1939 में खोजा गया था यह 150 वर्ग मीटर का एक छोटा सा भू भाग है जहां पर चुंबकीय क्षेत्र और गुरुत्वाकर्षण अलग तरीके से काम करता है।



2. Magnetic Hill, Leh - लेह में मोजूद यह एक छोटी सी सड़क है जो कारगिल से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है इस सड़क पर गाड़ियां अपने आप ऊपर की तरफ बढ़ने लगती हैं यदि आप इंजन बंद कर देते हैं तो भी गाड़ी ऊपर की तरफ बढ़ती रहती है धीमे धीमे यह 20 किलोमीटर की स्पीड पकड़ लेती

3. Spook Hill, Florida - यह जगह भी बिल्कुल भारत के लेह जैसी है यहां पर यदि आप अपनी गाड़ी का इंजन बंद कर देते हैं तो आपकी गाड़ी ऊपर की ओर चलने लगती हैं।


4. Cosmos Mystery Area, south Dakota - जब आप इस जगह पर पहुंचेंगे तो यहां पर आपको पेड़ पौधे एक तरफ झुके हुए दिखाई देंगे। यहां आप एक खास कोण बिना गिरे खड़े रह सकते हैं इस जगह की खोज 1950 में की गई थी।


5.Mystery Spot, Michigan - लगभग 300 वर्ग मीटर का यह एरिया रहस्यमयी माना जाता है क्योंकि यहां पर ग्रेविटी काम नहीं करती। यहां पर जानवर भी आने से डरते हैं यहां पर आप खड़ी दीवार पर भी चल सकते हैं

 
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51 days
 
User27605

*Avengers 4 में क्या होने वाला है*


जाल निकल नहीं रहा लेकिन फिर भी ये शॉ ऑफ कर दूं कि मैं अवेंजर्स इन्फिनिटी वॉर देख आया हूं और उम्मील है मार्वेल के सारे फैन्स देख चुके होंगे. अगर नहीं देखा है तो प्लीज लौट जाओ क्योंकि आगे स्पॉइलर हैं. पहला स्पॉइलर ये है कि वीकेंड पर सिर्फ तीन दिन में फिल्म 90 करोड़ की कमाई पार कर चुकी है. अब काम की बात की आने वाली अवेंजर में क्या होगा.


1. बात ये है कि जैसे सारे लोग धूल में मिल गए हैं उससे आप पूछ सकते हैं अमा ऐसे भी कोई मरता है क्या? आधी से ज्यादा अवेंजर्स की फौज गायब हो गई. उनकी जगह लोकी, गमोरा और विजन का मरना ज्यादा नेचुरल लगता है. तो हकीकत के सबसे नजदीक थ्योरी ये है कि टाइम का खेल खेला गया है. डॉक्टर स्ट्रैंज ने आगे जाकर देख लिया था कि क्या लोचा होने वाला है. लाखों फ्यूचर लड़ाइयों के बीच जिस एक जीत की बात डॉक्टर ने की थी वो शायद यही हो कि टाइम में आगे पीछे घुसकर सब माहौल सेट किया गया है.

2. डॉक्टर स्ट्रैंज, ब्लैक पैंथर, स्पाइडर मैन नहीं मर सकते. इन सबकी फिल्में आने वाली हैं यार अभी जुम्मे जुम्मे चार रोज तो हुए इनको आए हुए. स्पाइडरमैन की होमकमिंग का सीक्वल, ब्लैक पैंथर 2 और डॉक्टर स्ट्रैंज 2 आने वाली हैं. सारे पावरफुल सुपरहीरोज हैं, डॉक्टर स्ट्रैंज की फैन फॉलोविंग एशिया में बहुत ज्यादा है जहां से मार्वेल की कमाई का बड़ा हिस्सा जाता है. उसको ये लोग मार नहीं सकते बताए देते हैं.

3. गार्डियन्स ऑफ गैलेक्सी की पूरी टीम साफ हो गई है जो कि इम्पॉसिबल है यार. एडम वॉरलाक गार्डियन्स से बदला लेने के लिए तैयार किया जा रहा है तो ऐसा कैसे हो सकता है. रॉकेट थॉर का रैबिट दोस्त बन गया है वो लौटेगा जरूर.

4. टेंसन लेने का नहीं अभी एंट मैन, हॉक आई जिंदा हैं, हो सकता है कि अगली अवेंजर्स में ये लोग भी दिख जाएं भौकाल दिखाते हुए.

5. ऐस्गार्ड की आधी जनता मरी है ये बात थॉर खुद अपने श्री मुख से बता चुके हैं लेकिन अभी आधी तो बाकी है न. ऐस्गार्ड के लोग सालों साल जीते हैं और महा पावरफुल होते हैं ये बात भी पता है इसलिए इधर से भी उम्मीद का कीड़ा काट रहा है.
खैर अवेंजर्स 4 का नाम भी काफी कुछ डिसाइड कर देगा इसलिए टेंसन लेने की जरूरत नहीं है नाम आने दो.

6. एक और सबसे खास बात, फिल्म के पोस्ट क्रेडिट सीन में निक फ्यूरी पेजर जैसे यंत्र से जो संदेश भेज रहे हैं वो कैप्टन मार्वेल के पास जाने वाला है. लोगों को लग सकता है कि अब अवेंजर्स में कैप्टन मार्वेल देखने को मिलेगी लेकिन हाथ जोड़ रहे हैं. ये सपना मत देखो यार काहे कि सपने जब टूटते हैं न तो बहुत दर्द होता है. कैप्टन मार्वेल मार्वेल के सबसे ज्यादा पावरफुल सुपर हीरो होने वाली है ऐसा मार्वेल के प्रेसिडेंट केविन फेज ने 2016 के एक इंटरव्यू में बताया था.

7. एक और प्वाइंट है हाइड्रा की वापसी. कैप्टन अमेरिका विंटर सोल्जर और अवेंजर्स- एज ऑफ़ अल्ट्रान के बाद हाइड्रा का उतना जिक्र नहीं आया है. न हालिया स्पाइडर मैन होम कमिंग या ब्लैक पैंथर में, लेकिन इनफिनिटी वॉर में हाइड्रा का लीडर रेड स्कल उस ग्रह में नज़र आता है. जहाँ थानोस सोल स्टोन लेने गया था. रेड स्कल को कैप्टन अमेरिका-फर्स्ट अवेंजर के अंत के बाद से नहीं देखा गया था. उस फिल्म में वो क्रैश होते प्लेन से हाथ में टेसेरेक्ट उठाने के चक्कर में कहीं गायब हो गया था. अब पता लगा वो अब तक ज़िंदा है और कई चीजें जानता है. साथ ही इनफिनिटी स्टोन के पास रहा है. ये बातें भले उसे शक्तिशाली न बनाती हों लेकिन ये दिखाती हैं कि वो अब भी इम्पोर्टेंस रखता है. तो कल को मार्वल की फिल्मों में हाइड्रा की वापसी या रेड स्कल का और ज्यादा रोल और योगदान तो तय है. और कुछ नहीं तो रेड स्कल की मौत तो दिखानी ही चाहिए, अब ये अवेंजर्स 4 में होता है या और किसी फिल्म में ये देखना है.

 
33
 
75 days
 
Sam's Son

जन्मदिन मुबारक बीकानेर
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ऊंठ मिठाई इस्त्री सोनो गेणो साह
पांच चीज पिरथी सिरै वाह बीकाणा वाह।

रेगिस्तानी जहाज ऊंठ ,मिठाई ,स्त्री ,सोना गहना और साहूकारों के लिए कवि को पृथ्वी पर श्रेष्ठ शहर लगने वाला बीकानेर आज अपना 531 वां जन्मदिन मना रहा है।

पनरे सौ पैंताळवे सुद बैसाख सुमेर
थावर बीज थरपियो बीके बीकानेर।

अल्हड़ अलबेला मस्ताना शहर अपने संस्थापक राव बीका के हठ को आज भी अपने स्वभाव में थामे हुए है।पिता राव जोधा के ताने को चुनोति मान बीका अपने काका राव कांधल के साथ राज बनाने निकले तो रेतीले धोरो को फतेह करते हुए जांगळ प्रदेश में विक्रम संवत् 1545 में माँ करनी के आशीर्वाद से एक भेड़पालक किसान के कहे स्थान पर इस नगर की नींव थरपी।

राजशाही के काल में राव बीका से लेकर महाराजा सादुल सिंह तक के काल में कुल 23 शासको में महाराजा गंगा सिंह सर्वाधिक विजनरी शासक रहे। अक्तुबर 1931 में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में जाने के लिए महात्मा गांधी को सहमत करने वाले गंगा सिंह ही थे जिन्होंने गांधी जी की यात्रा की सारी व्यवस्था की। गंग नहर ,बीकानेर रेलवे जैसे जन हितेषी काम करवाने वाले महाराजा को शहर के जन्मदिन के दिन याद करना लाजमी है।

531 सालो के इतिहास में इस शहर का साम्प्रदायिक सौहार्द गौर करने लायक है। सूरज निकलने से पहले मन्दिर की घण्टियाँ और मस्जिदों में अजान के स्वर एक साथ मिलकर इस शहर का संगीत बुनते है वही गिरजाघरों में प्रार्थना के लिए बुदबुदाते होठ और गुरूद्वारे में अरदास के लिए पलटते पन्ने फिजाओ में प्रेम और आध्यात्म का राग अलापते है। कोटगेट के भीतरी सड़क दाऊ जी रोड पर नोगजा की दरगाह और दाऊ जी मन्दिर में एकसाथ दोनों धर्म के लोग मत्था टेकते है। इसीलिए तो कहा है-

बीकानेर की संस्कृति जैसी सांझी खीर
नोगजा मेरे देवता दाऊजी मेरे पीर ।

इतिहास गवाह है इन सवा पांच सौ सालो में कोई इस संस्कृति को क्षति नही पहुंचा पाया। आजादी से पहले के साम्प्रदायिक दंगे हो चाहे विभाजन की विभीषिका या फिर बाबरी मस्जिद टूटने की घटना इस शहर ने अपने परकोटे में बाहरी अजनबी हवा को घुसने नही दिया। यहां तक कि यहां के राजनेताओ की जोड़ी मक्खन अली (मक्खन जोशी) और महबूब जोशी(महबूब अली) को इसी नाम से जाना जाता रहा।

काशीनाथ सिंह के उपन्यास 'काशी का अस्सी' पढ़ते हुए आपको अहसास होता है कि बीकाणा बनारस का जुड़वा शहर सा है इसीलिए तो इसे छोटी काशी कहा जाता है।
शहर के भीतरी भाग में बसा पुराना शहर अपने पाटों पर पूरी रात जागता है।पाटों की हथाइयो में "क्या ल्यायो" और "पगे लागणा" से शुरू होकर गांव गवाड से ठेठ अमेरिका के ट्रम्प और रूस के पुतिन तक की चर्चाए होती है। ज्योतिषीय ज्ञान में शहर का हर तीसरा आदमी पारंगत है वही थियेटर से लेकर म्यूजिक ,पेंटिंग, पोएट्री ,नॉवेल और स्टोरी राइटर भी बड़ी संख्या में है तभी हर सप्ताह पुस्तक लोकार्पण से लेकर साहित्यिक चर्चाए तक के आयोजन भीड़ भरे रहते है।
स्व. हरीश भादाणी ,स्व. छगन मोहता और स्व. यादवेन्द्र शर्मा चन्द्र का यह शहर धीर गम्भीर नंदकिशोर आचार्य से लेकर नई पीढ़ी के कई नामी गिरामी लेखको विचारको को अपने में समेटे है जो इस जमी पर दर्शन विचार की नगर चेतना को बनाए हुए है।
यहां की होली तो जग प्रसिद्ध है ही । होलका के दिनों में अश्लील गीतों के बहाने कुंठा को निकालते अलबेले अलमस्त लोगो की बात ही निराली है।
रसगुल्लों की मिठास और भुजिया का तीखापन इस शहर में एक साथ मिलता है ।खाने खिलाने के शौकीन शहर के अंदरुनी भाग में आधी से अधिक दुकाने खाने पीने की चीजो की नजर आती है । यहां कि चाय पट्टी किसी बड़े शहर का कॉफ़ी हाउस सा है जहां कभी अज्ञेय अपने दोस्तों के साथ गम्भीर साहित्यिक चर्चाए करते थे। आजकल वहाँ दिन उगते ही आँख मलते लोग कचोरी समोसों से दिन की शुरुआत करने आते है। शायद अज्ञेय ने ही कहा था ," बीकानेर के आधे लोग कचोरी बनाते है और आधे लोग खाते है।"

इस खान पान और मस्ती के बीच भी लोग गहरे और गम्भीर है। इसी लिए तो कहा है -

जळ ऊँडा थळ उजळा पाता मैंगल पेस
बळिहारी उण देस री रायसिंघ नरेस ।
(पानी जितना गहरा है उतनी गहराई और सूझबूझ यहां के लोगो में है।ऐसे देश पर बलिहारी जानें का मन करता है।)

देश आजाद हुआ तो बीकानेर पहली रियासत थी जहां के शासक सादुल सिंह ने सबसे पहले भारत संघ में विलय पर हस्ताक्षर किए। लोकशाही के दौर में मुरलीधर व्यास जैसे जननेता हुए जिन्होंने तत्कालिक मुख्यमन्त्री को मांग न मानने तक शहर में घुसने न देने की चेतावनी दे डाली।
प्रजा परिषद से लेकर कांग्रेस ,समाजवाद और वामपंथ जैसे विचारो में रंगे अलग अलग खेमे के धुरन्धरो के बावजूद सामूहिक नगर चेतना कभी खण्डित न हुई।
एक ऐसे दौर में जब पुरे मुल्क में साम्प्रदायिक उन्माद चरम पर है और सियासत नफरत की खेती कर रही है यहां की फिजाए भी कुछ बदली सी नजर आती है बावजूद इसके सवा पांच सौ सालो की विरासत अटूट प्रेम को मजबूती से थामे हुए है , मरहूम शायर अजीज आजाद कहते है
मेरा दावा है सब जहर उतर जाएगा
तुम मेरे शहर में दो दिन तो ठहर के देखो।

आज अपने शहर के पांच सौ तीसवें जन्मदिन पर शहरवासी परम्परा को निभाते हुए बाजरे के खिचडे के 'सबड़के' लेते हुए इमली पानी के साथ घरो की छतो पर किनो(पतंग) के पेच लड़ाते हुए 'बोय काट्यो -बोय काट्यो' के हाके मचा रहे है।

इस यौम ए पैदाइश के दिन तुम्हे जन्मदिन मुबारक बीकानेर, बस यही दुआ है तुम्हे किसी की नजर न लगे।

 
18
 
91 days
 
Prashant jain

*अगर OK का मतलब All Correct है, तो इसे AC क्यों नहीं बोलते?*

हुत बड़ी पहेली थी. कि अंग्रेजी में जब All Correct होता है, तो उसका शॉर्ट कट (एब्रिविएशन) OK कैसे हो गया?
AC क्यों नहीं हुआ? इतनी बड़ी गलती अमेरिकियों ने कैसे कर दी? गलती की तो की, इसे सुधारा क्यों नहीं गया?


ग्रेजी का All Correct ओके कैसे बन गया, ये बड़ी पहेली थी. समझ नहीं आता था कि अंग्रेजी बोलने-लिखने वालों ने ये गलती कैसे कर दी. फिर पता चला कि ये असल में फैशन के मारे हुआ.

अंग्रेजी में तीन ऐसे शब्द हैं, जिन्हें करीब-करीब पूरी दुनिया जानती है. सॉरी, थैंक यू और ओके. 
23 मार्च एक तरह से OK का बर्थडे है.

23 मार्च, 1839 को इसी दिन बॉस्टन मॉर्निंग पोस्ट ने अपनी एक खबर में इसका इस्तेमाल किया था. लोगों के मुंह पर तो ये पहले से था. लेकिन ये पहला मौका था जब किसी पब्लिकेशन ने इसे यूज किया. ओके मतलब \'All Correct\'. हिंदी में कहिए, तो सब ठीक है. सब बढ़िया है. ऑल करेक्ट. अमेरिका ने दुनिया को कई चीजें दी हैं. लेकिन कोई और चीज शायद इतनी लोकप्रिय नहीं हुई. आप किसी दूर-दराज के छोटे से गांव में भी ओके बोलेंगे, तो सामने वाले को मतलब समझ आ जाएगा.


पहेली थी ये: OK क्यों कहते हैं, AC क्यों नहीं कहते?

ऑल करेक्ट के लिए तो AC इस्तेमाल होना चाहिए. क्योंकि स्पेलिंग तो All Correct है. फिर OK क्यों? ये सवाल बहुत लंबे समय तक पहेली बना रहा. समझ ही नहीं आता था. कि अंग्रेजी बोलने वालों ने इतनी बड़ी गलती कैसे की. स्पेलिंग जानते थे, फिर भी गलत शॉर्टकट क्यों बना दिया.

असल में जिस दौर की ये बात है, तब अमेरिका में ये फैशन होता था. लोग, खासतौर पर जवान-जहान लोग जान-बूझकर शब्दों का गलत उच्चारण करते थे. वो भी एक तरह से हमारी SMS और चैट करने वाली पीढ़ी जैसे थे. जैसे हम लोग फटाफट टाइप करते समय कितने सारे शब्दों का शॉर्टकट लिखते हैं. बॉयफ्रेंड BF हो जाता है. गर्लफ्रेंड GF हो जाती है. बेस्ट फ्रेंड्स फॉरेवर BFF हो जाता है. गुड नाइट GN हो जाता है. गुड मॉर्निंग GM हो जाता है.

ये हमारे टाइम का फैशन है. उस समय का फैशन था जानते-बूझते शब्दों को गलत बोलना. फिर उसी हिसाब से उसका शॉर्टकट (एब्रिविएशन) बनाकर स्लैंग की तरह इस्तेमाल करना. तो उनके लिए कूल (cool) हो जाता था क्यूल (kewl). These बिगड़कर हो जाता था DZ. तब ऐसे कुछ टर्म्स बड़े प्रचलित थे. जैसे एक था- KY. नो यूज का छोटा रूप.

इन सब एब्रिवेएशन्स (यानी शॉर्ट कट) में सबसे ज्यादा प्रचलित था OK. इसे कुछ इस तरह बोला जाता था - Oll Korrect. युवाओं के बीच इसके इस्तेमाल को देखते हुए बाकी लोगों ने भी ये बोलना शुरू कर दिया था. फिर इसका यूज बढ़ता चला गया. सब बोलने लगे. सब समझने लगे. और देखते ही देखते अमेरिका से बाहर निकलकर ये ओके दुनियाभर में फैल गया. आज भी आप पूछेंगे कि चैटिंह करते समय लोग सबसे ज्यादा क्या लिखते हैं, तो जवाब शायद OK ही होगा. बल्कि अब तो कई लोग इसका भी शॉर्टकट लिखने लगे हैं. *K*.

ये लिखो, तो लोग समझ जाते हैं कि OK लिखा जा रहा है.

 
105
 
115 days
 
Sam's Son

कब तक हम इस लानत को अपने सिर पर ढोएँगे? दुनिया के भ्रष्टाचार मुक्त देशों में शीर्ष पर गिने जाने वाले न्यूजीलैंण्ड के एक लेखक ब्रायन ने भारत में व्यापक रूप से फैंलें भष्टाचार पर एक लेख लिखा है। ये लेख सोशल मीडि़या पर काफी वायरल हो रहा है। लेख की लोकप्रियता और प्रभाव को देखते हुए विनोद कुमार जी ने इसे हिन्दी भाषीय पाठ़कों के लिए अनुवादित किया है। -

*न्यूजीलैंड से एक बेहद तल्ख आर्टिकिल।*

*भारतीय लोग होब्स विचारधारा वाले है (सिर्फ अनियंत्रित असभ्य स्वार्थ की संस्कृति वाले)*

भारत मे भ्रष्टाचार का एक कल्चरल पहलू है। भारतीय भ्रष्टाचार मे बिलकुल असहज नही होते, भ्रष्टाचार यहाँ बेहद व्यापक है। भारतीय भ्रष्ट व्यक्ति का विरोध करने के बजाय उसे सहन करते है। कोई भी नस्ल इतनी जन्मजात भ्रष्ट नही होती

*ये जानने के लिये कि भारतीय इतने भ्रष्ट क्यो होते हैं उनके जीवनपद्धति और परम्पराये देखिये।*

भारत मे धर्म लेनेदेन वाले व्यवसाय जैसा है। भारतीय लोग भगवान को भी पैसा देते हैं इस उम्मीद मे कि वो बदले मे दूसरे के तुलना मे इन्हे वरीयता देकर फल देंगे। ये तर्क इस बात को दिमाग मे बिठाते हैं कि अयोग्य लोग को इच्छित चीज पाने के लिये कुछ देना पडता है। मंदिर चहारदीवारी के बाहर हम इसी लेनदेन को भ्रष्टाचार कहते हैं। धनी भारतीय कैश के बजाय स्वर्ण और अन्य आभूषण आदि देता है। वो अपने गिफ्ट गरीब को नही देता, भगवान को देता है। वो सोचता है कि किसी जरूरतमंद को देने से धन बरबाद होता है।

*जून 2009 मे द हिंदू ने कर्नाटक मंत्री जी जनार्दन रेड्डी द्वारा स्वर्ण और हीरो के 45 करोड मूल्य के आभूषण तिरुपति को चढाने की खबर छापी थी। भारत के मंदिर इतना ज्यादा धन प्राप्त कर लेते हैं कि वो ये भी नही जानते कि इसका करे क्या। अरबो की सम्पत्ति मंदिरो मे व्यर्थ पडी है।*

*जब यूरोपियन इंडिया आये तो उन्होने यहाँ स्कूल बनवाये। जब भारतीय यूरोप और अमेरिका जाते हैं तो वो वहाँ मंदिर बनाते हैं।*

*भारतीयो को लगता है कि अगर भगवान कुछ देने के लिये धन चाहते हैं तो फिर वही काम करने मे कुछ कुछ गलत नही है। इसीलिये भारतीय इतनी आसानी से भ्रष्ट बन जाते हैं।*

*भारतीय कल्चर इसीलिये इस तरह के व्यवहार को आसानी से आत्मसात कर लेती है, क्योंकि*

1 नैतिक तौर पर इसमे कोई नैतिक दाग नही आता। एक अति भ्रष्ट नेता जयललिता दुबारा सत्ता मे आ जाती है, जो आप पश्चिमी देशो मे सोच भी नही सकते ।

2 भारतीयो की भ्रष्टाचार के प्रति संशयात्मक स्थिति इतिहास मे स्पष्ट है। भारतीय इतिहास बताता है कि कई शहर और राजधानियो को रक्षको को गेट खोलने के लिये और कमांडरो को सरेंडर करने के लिये घूस देकर जीता गया। ये सिर्फ भारत मे है

भारतीयो के भ्रष्ट चरित्र का परिणाम है कि भारतीय उपमहाद्वीप मे बेहद सीमित युद्ध हुये। ये चकित करने वाला है कि भारतीयो ने प्राचीन यूनान और माडर्न यूरोप की तुलना मे कितने कम युद्ध लडे। नादिरशाह का तुर्को से युद्ध तो बेहद तीव्र और अंतिम सांस तक लडा गया था। भारत मे तो युद्ध की जरूरत ही नही थी, घूस देना ही ही सेना को रास्ते से हटाने के लिये काफी था। कोई भी आक्रमणकारी जो पैसे खर्च करना चाहे भारतीय राजा को, चाहे उसके सेना मे लाखो सैनिक हो, हटा सकता था।

प्लासी के युद्ध मे भी भारतीय सैनिको ने मुश्किल से कोई मुकाबला किया। क्लाइव ने मीर जाफर को पैसे दिये और पूरी बंगाल सेना 3000 मे सिमट गई। भारतीय किलो को जीतने मे हमेशा पैसो के लेनदेन का प्रयोग हुआ। गोलकुंडा का किला 1687 मे पीछे का गुप्त द्वार खुलवाकर जीता गया। मुगलो ने मराठो और राजपूतो को मूलतः रिश्वत से जीता श्रीनगर के राजा ने दारा के पुत्र सुलेमान को औरंगजेब को पैसे के बदले सौंप दिया। ऐसे कई केसेज हैं जहाँ भारतीयो ने सिर्फ रिश्वत के लिये बडे पैमाने पर गद्दारी की।

सवाल है कि भारतीयो मे सौदेबाजी का ऐसा कल्चर क्यो है जबकि जहाँ तमाम सभ्य देशो मे ये सौदेबाजी का कल्चर नही है

3- *भारतीय इस सिद्धांत मे विश्वास नही करते कि यदि वो सब नैतिक रूप से व्यवहार करेंगे तो सभी तरक्की करेंगे क्योंकि उनका "विश्वास/धर्म" ये शिक्षा नही देता। उनका कास्ट सिस्टम उन्हे बांटता है। वो ये हरगिज नही मानते कि हर इंसान समान है। इसकी वजह से वो आपस मे बंटे और दूसरे धर्मो मे भी गये। कई हिंदुओ ने अपना अलग धर्म चलाया जैसे सिख, जैन बुद्ध, और कई लोग इसाई और इस्लाम अपनाये। परिणामतः भारतीय एक दूसरे पर विश्वास नही करते। भारत मे कोई भारतीय नही है, वो हिंदू ईसाई मुस्लिम आदि हैं। भारतीय भूल चुके हैं कि 1400 साल पहले वो एक ही धर्म के थे। इस बंटवारे ने एक बीमार कल्चर को जन्म दिया। ये असमानता एक भ्रष्ट समाज मे परिणित हुई, जिसमे हर भारतीय दूसरे भारतीय के विरुद्ध है, सिवाय भगवान के जो उनके विश्वास मे खुद रिश्वतखोर है।*

लेखक-ब्रायन,
गाडजोन न्यूजीलैंड

( समाज की बंद आँखों को खोलने के लिए इस मैसेज को जितने लोगो तक भेज सकते हैं भेजने का कष्ट करें ।)
धन्यवाद 🙏🏻🙏🏻

 
94
 
116 days
 
DelhiDude
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