Message # 462795

कभी इसकी कभी उसकी नाराजगी में गुजार दी।
हमने ये जिंदगी आवारगी में गुजार दी।
रोज मांगते रहते हो तुम खुदा से कुछ न कुछ।
ओर एक हम है जो जिंदगी फकीरी में गुजार दी।

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