Message # 460458

एक बार कश्मीरी उग्रवादियों ने अमरनाथ यात्रा को बन्द करने की धमकी दी । उस समय बाला साहेब ठाकरे ने भी पलटवार करते हुए धमकी दी थी कि हज की उड़ान मुम्बई से जाती है , दम है तो जाकर बताओ।
कहते हैं कि इस धमकी के बाद कश्मीरी उग्रवादियों के तेवर नरम पड़ गए थे और उन्होंने अमरनाथ यात्रा का विरोध करना छोड़ दिया।
वे आतंकी हमले करते हैं..... न्यूयॉर्क में । लंदन में । मास्को , पेरिस में । ब्रुसेल्स , स्टॉक होम में ।
वे चुन-चुनकर काफिरों को मारते हैं । गोलियों से भूनते हैं । धमाके करते हैं । गले काटते हैं और आसमानी किताब की आयतें सुन-सुनकर अपने मजहबी भाइयों को जाने देते हैं । बदले में मरने वाले क्या करते हैं ? भाईचारे का ढोल बजाते हैं । सेक्युरिज्म के गीत गाते हैं । आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता जैसे जुमले कहते हैं । साम्प्रदायिक सद्भावना जैसे बेसुरे राग अलापते हैं ।
मरने वाले मरते हैं और मारने वाले निश्चिन्त रहते हैं कि उनकी आतंकी कार्यवाहियों की कोई प्रतिक्रिया नहीं होती । काफ़िर मरते हैं , रोते-धोते हैं और चुप हो जाते हैं । फिर भाईचारे की बात करने लग जाते हैं लेकिन उनके अपनों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है । यही चुप्पी उनका हौंसला बढ़ाती है ।
क्राइस्टचर्च के हमले के बाद अब उन्हें भी पता चल गया होगा कि आप न्यूयॉर्क , लंदन , पेरिस , ब्रुसेल्स या स्टॉकहोम करेंगे तो कोई क्राइस्टचर्च भी कर सकता है ।शक्ति संतुलन ऐसे ही होता है । शांति की शुरुवात ऐसे ही होती है । मारने वालों को याद रखना चाहिए कि मरने वाला भी पलटकर मार सकता है ।
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आखिर कोई कब तक सहेगा ?

Comments

Mast comment bhai .ati lazwaab. 6202540466
 
Nitin Modi
 
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