Message # 458649

कल्लू दर्जी के पास गया और कहा:-
ये मेरे पाजामे की सिलाई कर दो.. *ख़ास जगह से* फ़ट गया है..

दर्जी:- अभी ज़्यादा काम है *सब्र रखो..कल आना*

दूसरें दिन भी वहीं कहा:- अभी ज़्यादा काम है *सब्र रखो..कल आना*

ऐसा 10 दिन चलता रहा...
दर्जी कहता गया:- *"सब्र रखो"*

एक दिन सुबह-सुबह कल्लू दर्जी के यहां पहुंचकर दर्जी का *परिवार सब देखें ऐसे* फ़टाक से बैठ गया..

दर्जी:- ये क्या है ? नीचे तेरे पाजामे से *"गिठ्ठे"* दिख रहें है!

कल्लू:- भोसड़ीके.. ख़बरदार इसे *"गिठ्ठे"* कहा तो..

*ये तो सब्र का फ़ल है!* 😡😜
😝😝😝🤣🤣🤣🤣

BACK TO TOP