Message # 455565

शादियों के प्रकार:- हिन्दू धर्म में कुल 16 संस्कार वर्णित हैं| जिनमे से शादी भी एक अहम संस्कार हैं| धर्म के अनुकूल विवाह आठ प्रकार के होते हैं|

1. ब्रह्म विवाह -

Brahma-marriage

दोनों पक्षों (वर पक्ष और वधु पक्ष) की सहमति से समान वर्ग में सुयोग्य वर के साथ कन्या का, पूरी सहमति और वैदिक रीति-रिवाज से, विवाह तय कर देना, ब्रह्म विवाह कहलाता हैं| इसमें कन्यादान को महत्वपूर्ण माना गया हैं| कन्यादान का मतलब कन्या (वधु) को स्वेच्छा से दिया गया दान हैं| न की कोई दहेज़| अब कन्यादान कुछ भी हो सकता हैं| वर्तमान में इसे \'अरेंज मैरिज\' (Arrange Marriage) कहा जाता हैं|

2. दैव विवाह -

Dev-vivaah

किसी विशेष धार्मिक कार्य की सम्पन्नता पर लड़की के पिता द्वारा मूल्य के रूप में अपनी बेटी को दान कर देना, दैव विवाह कहलाता हैं|

3. आर्श विवाह -

aarsh-vivaah

जब वर पक्ष वाले कन्या के मूल्य के रूप में वधु पक्ष वालों को गाय दान कर देते हैं, तत्पश्चात जो शादी की जाती हैं वो आर्श विवाह कहलाता हैं|

4. प्रजापत्य विवाह -

prajapaty-vivaah

वधु पक्ष द्वारा कन्या से पूछे बगैर ही अभिजात्य वर्ग में शादी तय कर देना, प्रजापत्य विवाह कहलाता हैं| इस विवाह में लड़की की सहमति मायने नहीं रखती हैं|

5. गंधर्व विवाह -

gandharv-vivaah

जब लड़की और लड़का परिवार की सहमति के बिना ही रीति-रिवाज के साथ शादी कर लेते हैं तो इसे गंधर्व विवाह कहते हैं| इस विवाह में परिवार की सहमति के कोई मायने नहीं होते हैं|

6. असुर विवाह -

asur-vivaah

कन्या के परिवार को कन्या के बदले पैसे देकर या खरीद कर, उससे जो विवाह किया जाता हैं उसे असुर विवाह कहते हैं|

7. राक्षस विवाह -

rakshak-vivaah

जब जबरदस्ती लड़की का अपहरण कर लिया जाता हैं और उसके बाद लड़की से शादी की जाती हैं उसे राक्षस विवाह कहते हैं|

8. पैशाच विवाह -

peshach-vivaah

आम तौर पर इसे विवाह की श्रेणी में नहीं रखा जाता हैं| जब मदहोशी, निद्रावस्था या मानसिक दुर्बलता का फायदा उठाकर शादी की जाती हैं उसे पैशाच विवाह कहते हैं|

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