Message # 451960

अगर हवाओं के रुख मेहरबाँ नहीं होते
तो बुझती आग के तेवर जवाँ नहीं होते
वफा का ज़िक्र चलाया तो हँस के बोले वो
ये फिज़ूल काम हमारे यहाँ नहीं होते

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