Message # 446594

हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी कि, हर खवाहिश पे दम निकले
बहुत निकले मेरे सीमेन, फिर भी कम निकले

बहुत बेआबरू हो कर, तेरे कूचे से हम निकले
चूची भी मयस्‍सर नहीं कि, दिल से मेरे गम निकले

मुहब्बत में नहीं है फर्क, चोदने और गांड मारने का
उसी को देख कर हिलाते है, जिस काफिर पे दम निकले

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