Message # 446143

ग़ज़ब की *धूप* है आजकल मगर फिर भी.... दिल किसी का भी *पिघलते* नहीं देखा मैंने...!!
🙂🙂


अर्थात........ कवि कहना चाहता है कि,,,,

*इतनी गर्मी में भी कोई बियर के लिये भी नही पूछ रहा*

🥂🥂🥂🥂😉😉😉😉😋😋😋😋

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