Message # 445651

" 'सी' से सिरदर्द "

गाँव की नई नवेली दुल्हन अपने पति से अंग्रेजी भाषा सीख रही थी, पर वह अभी 'सी' अक्षर पर ही अटकी हुई थी, क्योंकि उसकी समझ में नही आ रहा था की 'सी' को कभी 'च' कभी 'क' तो कभी 'स' क्यों बोला जाता है।

एक दिन वह अपने पति से बोली - आप को पता है," "चलचत्ता के चुली भी च्रिचेट खेलते हैं"। उसके पति ने यह सुन कर समझाया... यहां 'सी' को 'च' नही 'क' बोलते हैं, ऐसे कहते हैं कि, कलकत्ता के कुली भी क्रिकेट खेलते हैं।

पत्नी ने फिर पूछा - वह कुन्नी लाल कोपड़ा तो केयरमैन है न ? पति ने फिर समझाया, यहां 'सी' को 'क' नही 'च' बोलते हैं... चुन्नी लाल चोपड़ा तो चेयरमैन है न।

थोडी देर बाद पत्नी बोली - आपका "चोट चैप दोनो चाटन का है? पति अब जरा तेज आवाज में बोला " तुम समझती क्यों नहीं, यहां 'सी' को 'क' बोलते हैं, कोट, कैप, काटन " समझी?

पत्नी फिर बोली - " कंडीगढ़ मे कंबल किनारे कर्क है "
पति को गुस्सा आ गया, वह बोला " बेवकूफ यहां 'सी' को 'च' बोलते है. चंडीगढ, चंबल, चर्च।

पत्नी सहमते हुए धीरे से बोली " चरंट लगने से चंडक्टर और च्लर्क मर गये। पति ने अपना सिर पिट लिया और बोला " ये सारे 'सी' तो 'क' बोले बोले जायेंगे.... करंट,कंडक्टर ,क्लर्क "

पत्नी धीरे से बोली " अजी तुम गुस्सा क्यों कर रहे हो ? देखो 2 केंटीमीटर का केल और कीमेंट कितना मजबूत है। पति जोर से चीखा "अब तुम बोलना बंद करो वरना मैं पागल हो जाऊँगा, यहा 'सी' को 'स' बोलते है ... सेंटीमीटर, सेल , सिमेन्ट"

पत्नि बोली - " इस 'सी' से मेरा भी सिर दर्द करने लग गया है, अब मैं चेक खा कर चाफी के साथ चैप्सूल खा कर सोऊंगी "

जाते-जाते पति बड़बड़ाता गया, " तुम केक खाओ, पर मेरा सिर न खाओ, तुम काॅफी पियो, पर मेरा खून न पियो, तुम कैप्सूल निगलो, पर मुझे चैन से रहने दो।
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