Message # 443958

*गुरू की बात कभी राज़ नहीं होती,*
*वक्त के पहिए में आवाज़ नहीं होती।*

*जाने किस पल क्या ""बख्श दे गुरू"",*
*क्योंकि उनकी मर्जी किसी की मोहताज नहीं होती।।*
🙏🙏🙏

BACK TO TOP