Message # 443180

घर घर देखा मगर कोई परिवार ना मिला..
रसूखवालों के शहर में कोई इज्जतदार ना मिला..

धर्म के नाम पर जुट गए हजूम के हजूम..
मगर गरीब के हक का कोई तरफदार ना मिला..

भरे पड़े थे अखबार बेटों के ख्वाहिशमंदों के..
मगर खोई मां को ढूंढने का इश्तहार ना मिला..

 
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162 days
 
Sudesh K Jain
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