Message # 442161

*सलीक़े से हवाओं में ..... जो ख़ुशबू घोल* *देते हैं*
*अभी भी कुछ लोग बाक़ी हैं .... जो मीठा* *बोल लेते हैं*

🙏शुभ वंदन 🙏

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