Message # 441574

कितने रंग समा रखे हैं
मेरी प्रेम कहानी ने

कभी हँसाया, कभी रुलाया
मुझको मेरी दीवानी ने

अभी खिली थी धूप सुनहरी
अभी अँधेरा घना छा गया

युगों के फेरे देख रहा हूँ
केवल एक जवानी में

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