Message # 441530

रफ्ता रफ्ता हर सफर ही मुकाम होता गया,
तुम मिलते गए और मैं इंसान होता गया।।
तुम हो गए मस्ज़िद मेरी, तुममे ही खुदा दिखने लगा,
हर इबादत महज़ तुझको ही सलाम होता गया।
सुनते रहे हैं कि कठिन है राह-ए-ज़िन्दगी, पर
तुम्हारे साथ हर कदम आसान होता गया।
तुम्हें पाकर हर मंज़िल आसान लगने लगी
और इरादा मेरा वो आसमान होता गया।
शराबों से कहाँ अब मुझको नशा होता है,

BACK TO TOP