Message # 440141

SAI SHRADHA
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*"दुःख की घड़ी उसे डरा नंही सकती,*
*कोई ताकत उसे हरा नंही सकती,*
*और जिस पर हो जाये साई तेरी मेहर,*
*फिर ये दुनिया उसे मिटा नहीं सकती...!"*
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