Message # 439437

भाग:-3 श्री हरि

भज सेवायाम् ही है भक्ति
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मित्रो! भक्ति न केवल मानसिक और भावनात्मक संपदा है, वरन उसके आधार पर पुण्य करने और परमार्थ करने का भी मौका मिलता है। आप भक्ति कीजिए और सेवा भी कीजिए। प्यार का अर्थ जैसा कि आमतौर से आपने लगा रखा है, वह प्यार, प्यार नहीं हो सकता है। आपको खूबसूरत चीजों से प्यार है और बिना खूबसूरत चीजों से प्यार नहीं है। इसका क्या मतलब हुआ? खूबसूरत है तो क्या, बिना खूबसूरत है तो क्या? यह संसार एक बगीचा है। इसमें सभी तरह की चीजें हैं। हमारा सीमितपन क्यों हो? हम मोह के बंधन में क्यों बँधे? मोह और बंधन एक ही तरह से होते हैं। जिनसे हमको फायदा होता है, उसके साथ हमारी मोहब्बत होती है, लेकिन जिन लोगों के साथ हमारा फायदा नहीं होता आमतौर से उन लोगों के साथ हमारी मोहब्बत नहीं होती। शंकर भगवान के साथ उनके भक्त भूत-प्रेत भी रहते हैं। भूत प्रेतों की भी वे सेवा करते हैं, मदद करते हैं। भक्ति है, तो हमसे गए-बीते लोगों, पिछड़े हुए लोगों, गए-गुजरी हुए लोगों की भी सेवा करनी चाहिए। बच्चों को हम गोदी में लिए फिरते हैं, क्यों? जो हमसे इतने छोटे हैं, उनकी समझदारी भी कम होती है। जिनकी क्षमताएँ कम हैं, जो उठने में असमर्थ हैं, तो क्या उनकी सेवा नहीं करनी चाहिए? सेवा करनी चाहिए। 

साथियो! सेवा और भक्ति दोनों एक ही चीज हैं। 'भज सेवायाम्' संस्कृत में 'भज' शब्द जो बना है, उससे भजन बना है, भक्ति भी बनी है। भक्ति का अर्थ क्या होता हैं? भक्ति का अर्थ सेवा होता है। कौन करेगा किसकी सेवा? वह करेगा और उसकी करेगा जिसको वह मोहब्बत करता है। तो आप अपनी मोहब्बत को बदल डालिए और उसका दायरा बढ़ाइए। बस यही भक्ति है। भक्ति का अभ्यास हम भगवान से करते है। यह व्यायामशाला है। व्यायामशाला में हम प्रेरणा पाते हैं। कुश्ती लड़ना सीखते है। दौड़ लगाना सीखते हैं और जब दंगल होता है, प्रतियोगिताएँ होती हैं, तब कमाल दिखाते हैं। आप भगवान की कोठरी में बैठकर भक्ति किया कीजिए। किसकी भक्ति करें? सिद्धांतों की भक्ति, आदर्शों की भक्ति। भगवान क्या है? सिद्धांतों का समुच्चय, आदर्शों का समुच्चय, श्रेष्ठताओं का समुच्चय ही भगवान है। भगवान व्यक्ति विशेष नहीं है, जिसको हम और आप मिठाई खिलाएँगे, लड्डू खिलाएँगे और उनको मुकुट पहनाएँगे, साड़ी पहनाएँगे। बेटे, भगवान कोई व्यक्ति थोड़े ही है। भगवान तो एक सच है। भगवान तो एक नियम है। भगवान तो एक सत्ता है। भगवान तो एक ऊँचे आदर्शों का समुच्चय है। उससे प्यार कीजिए, बस भक्ति का अभ्यास हो गया।
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