Message # 439395

भाग-२:-------

प्रार्थना से नहीं, प्राण भरे स्पर्श से मिलती है सफलता

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मित्रो! मैं आपसे यह कह रहा था कि आप फूल की तरह खिल सकते हो तो खिल पड़ो। भगवान से प्रार्थना करेंगे। नहीं बेटे, भगवान से प्रार्थना करने की कोई जरूरत नहीं है। भगवान आपसे प्रार्थना करेगा। हमने सुना है कि प्रार्थना से बड़े-बड़े काम हो जाते हैं। हाँ बेटे, हो जाते हैं। प्रार्थना की कीमत हमने भी सुनी हैं। क्या सुनी है आपने? हम हलवाई की दुकान पर जाते हैं और प्रार्थना करते हैं -हलवाई साहब हमको एक किलो जलेबी चाहिए। अच्छा साहब, आप खूब आ गए, बैठिए जरा सा हाथ धो लूँ, दो मिनट में अभी देता हूँ। देखिए साहब गरमागरम हैं, बिलकुल सही जलेबियाँ की कोई खराबी नहीं है लीजिए। तौल करके उसने पुड़िया में बाँध दीं और हमारी ओर बढ़ाने लगा तथा दूसरा हाथ आगे करने लगा। क्या मतलब है? पैसे लाइए, ऐं पैसे लेगा? हमने तो समझा था कि प्रार्थना से ही जलेबी मिल जाती हैं। भाईसाहब, आपको किसी ने गलत बता दिया हैं। 

महाराज जी! सवा लाख के अनुष्ठान से ही लक्ष्मी मिल जाती है? गलत है बेटे। सवा लाख का अनुष्ठान क्या है? प्रार्थना है। हमने सुना है कि पी०सी०एस० और आई०ए०एस० की नौकरी प्राप्त करने के लिए पाँच रुपए का फार्म खरीदना पड़ता है। टाइप कराकर अर्जी और मैट्रिक और बी० ए० के सर्टीफिकेट की कापी अटेस्टेड कराके जैसे ही भेज देते हैं, वैसे पी०सी०एस० और आई०ए०एस० का हुकुम आ जाता है। नहीं बेटे, इतना तो तेरा कहना सही है कि फार्म पाँच रुपए का ही आता है, अर्जी टाइप कराने के पचहत्तर पैसे देने पड़ते हैं, उसमें फोटो लगाना और पिछले वाले रिजल्टों की कापी अटैच करनी पड़ती है। तो महाराज जी, इतना काम करने के बाद फिर कलेक्टर नहीं हो जाते, कमिश्नर नहीं हो जाते? नहीं बेटे, उसके साथ में एक और टेस्ट का झगड़ा पड़ा हुआ है। वह यह है कि तेरा वाइवा लिया जाएगा और रिटेन टेस्ट लिया जाएगा। इतना सब पास करने के वाद की चयन होगा। मैं तो समझता था कि फार्म से ही सब हो जाएगा। नहीं, इससे नहीं हो सकता। 

मित्रों! प्रार्थनाएँ-पूजाएँ, जिनको हम भजन-पूजन कहते है, इनका भी महत्त्व है। अगर हम प्रार्थना न करें, पूजा न करें तो? तो फिर जिस तरह आप टिकट के लिए स्टेशन मास्टर के पास जाएँ आ चुपचाप खड़े रहे, कुछ न कहें। क्या मतलब है आपका? अपनी बात क्यों नहीं कहते? अरे कोई बात हो तो बताओ? नहीं कुछ नहीं। तो चल भाग यहाँ से। बेटे, आपको कहना होगा कि हमें यहाँ से दिल्ली तक के सेकेंड क्लास के दो टिकट चाहिए और रुपए दीजिए। जो टिकट दे देगा? हाँ दे देगा। इसकी जरूरत है? हाँ बहुत जरूरत है। अगर आप नहीं कहेंगे तो स्टेशन मास्टर को मालूम कैसे पड़ेगा कि आप कहाँ जाना चाहते हैं और कितने टिकट, कौन से क्लास के लेना चाहते हैं? यह सब बताने की जरूरत है। यह प्रार्थना जिसको हम पूजा कहते हैं, भजन कहते हैं। इसकी कीमत यहीं तक सीमित है कि भगवान से यह प्रार्थना करते हैं कि हम कहाँ जाना चाहते हैं, क्या करना और किधर बढ़ना चाहते हैं? हमारा लक्ष्य क्या है, हमारा उद्देश्य क्या है? हमारे संकल्प क्या हैं, हम करना क्या चाहते हैं? यह अपनी एक दिशा और धारा बनाने वाली बात है।

True is dem true

 
20
 
14 days
 
BEAST IS BACK
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