Message # 439263

!!श्री हरि!!
अध्यात्म जादूगरी नहीं है

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मित्रो! ये बातें सुनकर मुझे बहुत दुःख होता है कि लोग अध्यात्म को मैजिक समझते हैं, जादूगरी समझते हैं। जादूगरी का अर्थ होता है-क्रियाकृत्य। क्रियाकृत्यों के माध्यम से, आवाज के माध्यम से, जीभ की नोंक के माध्यम से, बोले हुए शब्दों के माध्यम से लोग चमत्कार दिखाना चाहते हैं। बेटे! यह बाजीगरी है। जादूगर को अपना व्यक्तित्व बनाने की कोई जरूरत नहीं पड़ती है। उसको बस शब्दों की हेरा-फेरी आनी चाहिए और हाथ की हेरा-फेरी आनी चाहिए। आपको भी हाथ की हेरा-फेरी आती है, नमस्कार करना आता है, मुद्राएँ बनानी आती हैं, हाथ जोड़ना आता है। यह शंख मुद्रा है, यह अमुक मुद्रा है। आपको अगर हाथ-पाँव चलाना आता है, तो आपके लिए यह काफी है कि आपके लिए अध्यात्म जादूगरी है और अगर अध्यात्म जादूगरी नहीं है, तब? तब फिर आपको अपना व्यक्तित्व विकसित करना पड़ेगा। 

मित्रो! वाणी के द्वारा मंत्र बोले जाते हैं। इसको आपको अनुशासित करना चाहिए। वाणी क्या है? वाणी सरस्वती है। बाकी देवी-देवता कहाँ रहते हैं, यह मैं फिर कभी बताऊँगा, आज तो मैं आपको यह बताता हूँ कि सरस्वती का वचन कभी मिथ्या नहीं हो सकता है। सरस्वती वह है, जिसके शब्द सार्थक होकर के रहते हैं। यह देवी कहलाती है, वाणी कहलाती है, वाक कहलाती है। सरस्वती ज्ञान की देवी है। कल्याण की देवी है। सरस्वती जीभ में रहती है। नहीं साहब! जीभ तो माँस की है। हाँ बेटे! है तो माँस की, लेकिन अगर आप उपासना कर लें तो आपकी जीभ साक्षात सरस्वती हो जाएगी। अगर हम कोई उपासना न करें? आप कोई उपासना मत कीजिए। बस, दो उपासनाएँ कर लीजिए। मैं आपसे वायदा करता हूँ और वचन देता हूँ कि आपकी जीभ में से सरस्वती उत्पन्न हो जाएगी और आपके वचन मंत्र हो जाएँगे, अगर आप दो तरीके से जीभ की उपासना कर लें तब। कैसे? एक उपासना के बावत कल मैं आपसे निवेदन कर रहा था और यह कह रहा था कि आपको आहार के बारे में गौर करना चाहिए। आहार की बनावट के बारे में नहीं, आहार के ''बेस'' के बारे में ध्यान देना चाहिए। आहार का बेस-जो आप खाते हैं, उसमें पहनावा भी शामिल है।
🙏🏻🙏🏻🙏🏻ॐ शान्ति🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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