Message # 437859

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कहने की जरूरत नहीं,
बस श्रद्धा सबूरी काफी हैं.....
सच्चे मन से चरणों में,
शीश झुकाना काफी है.....
सब का करते हैं सांई,
दिलदारी से कल्याण.....
चाहे पहर कोई भी हो,
सुबह, दोपहर या शाम.....
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