Message # 437635

कल रात TV शुरू किया और न्यूज़ चैनल लगाया तो देखा कि समलैंगिकता और अनुच्छेद 377 को निरस्त करने पर बहस चल रहीं थी । कुछ लोग धर्म का हवाला देकर समलैंगिकता का विरोध कर रहें थे तो कुछ समलैंगिकता के अप्राकृतिक होने की वजह से विरोध कर रहें थे ।

ऐसा नहीं कि हर कोई समलैंगिकता का विरोध कर रहा था, कुछ बुद्धिजीवी टाइप के लोग समर्थन में भी थे । वे लोग freedom of choice, equality और fundamental rights का झंडा बुलंद कर रहें थे ।

सच कहूं तो कल मेरी आँखें खुल गई और मुझे ज्ञात हुआ कि,
"भारत में गांड मराना भी अब मौलिक अधिकारों में शामिल हैं ।"
😂😂😂😂
भोसडीके बुद्धिजीवी ।

Comments

@☺️DDLJ143☺️:
bhaiji,
Kindly check & mark on "pending Duplis" plz
👍🏼 Good day 👍🏼
 
SPARSH
 
168 days
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