Message # 436473

काशः वो ही बताए उसका गम कब तक पाल के रखूँ,
कहाँ तक मन के कोने में उसकी यादें संभाल के रखूँ ...
बहुत परेशान सा रहता है उसे याद कर कर के ये दिल,
अब वो ही बताए कि इस दिल को कहाँ निकाल के रखूँ ...

उसे याद करके कई बार तो आने को हो जाते हैं आँसू,
रो लूँ उसे याद करके कि अबतक की तरह टाल के रखूँ ...
उसके सपने, उसकी यादें, उसके ही एहसास़ अबतक हैं,
मेरे लिए रोमांच भरे वो पल रूपी ज़ेवर कहाँ संभाल के रखूँ ...

सूखे होठों पर उसका एहस़ास पाने की चाह लिए हुए,
बिना लिप बाम लगाए कब तक इन्हें इंतजार में ढ़ाल के रखूँ ..
या तो आ के मिल जाए कभी या दे दे अपनी यादों से रिहाई,
समझ नहीं आता कबतक अपनी लाश पे कफन डाल के रखूँ॥

 
396
 
426 days
 
Heart catcher
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