Message # 433399

ना जाने
कब खो जाऐं ये पल
ना जाने कि
कब बच्चे बड़े हो जाऐं

मैं झिडकती ही रह जाऊँ
और
वो सब कुछ झिड़क कर
घर से निकल जाऐं

आज झिडकती हूँ कि
रखो सारा सामान
तरतीब से
कल तरसूँ कि
काश आ कर वो
सब कुछ बिखेर जाऐं

ये करो ये ना करो,
आज देती हूँ हिदायत
कल सोचूं
जो करो सो करो
बस ज़ोर से
मेरे गले लग जाओ

फिर
क्यों ना उन्हें आज ही
जी लेने दूँ ज़िंदगी
चाहे घर ही पूरा
क्यों ना उलट पुलट जाए

इसी बहाने
मैं भी जी लूँगी ज़िंदगी
दिल शायद फिर दिल से जीना सीख जाए

मैं भी बन जाऊँ बच्चा अपने बच्चों के साथ
इससे पहले कि वो
बड़े हो जाऐं.....🌱

For all parents......

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