Message # 421743

ओस की बूंदों से सजी हुई हरी घास सी थी वो
मौत पर जिंदगी की जीत के विश्वास सी थी वो ...
उसे याद करना एक अलग अहसास से गुजरना है
महारानी पद्मावती के खूबसूरत इतिहास सी थी वो ...

मासूमियत का गहना जंचता था उस पर बहुत
एक नन्हे बच्चे के टॉफी पाने के प्रयास सी थी वो ...
उसके आने से हो जाता था प्रकाश हर तरफ
गहन रात्रि के बाद सूर्योदय के आभास सी थी वो ...

वक्त के साथ कर दिया उसने दूर बहुत मुझ को
मेरे लिए थी, है और रहेगी बड़ी ही पास सी वो॥

 
198
 
323 days
 
Heart catcher
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