Message # 420271

अगर राम ने चाहा,
तो फिर मिलेगी जिंदगी ...
सारे दोस्त फिर साथ होंगे,
एक बार फिर खिलेगी जिंदगी ...

अभी शायद वक्त ठीक नहीं,
रात निकलने के बाद सुबह होगी ...
अभी वजूद लहूलुहान है,
देखते हैं कब तक जख्म छीलेगी जिंदगी ...

यूँ तो साँसें ले रहा हूँ,
साइंटिफिकली अब तक जिंदा हूँ मैं ...
पर अगर दोस्त प्यार से छू भी लें,
तो जीवितों की तरह फिर जी लेगी जिंदगी ...

एक बार अपने हाथ बढ़ाकर,
मेरे कांपते हाथों को जो थाम ले कोई ...
तो भावनाओं के कपड़ों को उम्मीदों से,
फिर से सी लेगी ये जिंदगी ...

सूखे पेड़ के तने सा हूँ,
फिर से हरा हो जाऊँगा ...
सौ बरस की नीरस जिंदगी नहीं चाहिए,
प्यार के कुछ क्षणों में ही जीवन पा लेगी जिंदगी॥

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