Message # 419133

☹🙁☹

संता :-- अज्ज पता नहीं, स्वेरे-स्वेरे, किस मनहूस की शक्ल देखी थी, सारा दिन बहोत बुरा गुजरा .....

बंता :-- ओ किवें ???

संता :-- दरवज्जा खोला , ते कुंडी हत्थ विच आ गई ,
.... नलका खोला, ते टूटी हत्थ विच आ गई !!!!
.....ब्रीफ़-केस खोलण लग्या सी ते ओद्दा हैंडल ही हत्थ विच आ गया ......
बंता :-- ते फेर ???

संता :-- फ़ेर की प्राव्हा,, हुण समझ नहीं आ रया... पेशाब करां के ना करां❓

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