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बरमूडा ट्रायएंगल से जुड़ी ऐसी 13 बातें, जो कई मिथकों को तोड़ती हैं

बरमुडा ट्रायएंगल - एक ऐसा क्षेत्र जिसकी कहानियां पिछले कई दशकों से लोगों के लिए कौतूहल का विषय रही हैं, जिसके किस्से आज भी बराबर सुनाए जाते हैं. एक त्रिभुज की तरह दिखने वाला ये भौगोलिक क्षेत्र पिछले कई दशकों से कई विमानों और पानी के जहाजों के अस्तित्व के राज़ अपने अंदर समेटे हुए है. अटलांटिक महासागर में स्थित इस क्षेत्र में मियामी, सैन जुआन और बरमूडा के उत्तरी अटलांटिक द्वीप को शामिल किया जाता है.
ऐसा माना जाता है कि बरमूडा ट्रायएंगल के बारे में अजीबोगरीब घटनाओं को सबसे पहले क्रिस्टोफ़र कोलंबस ने नोटिस किया था. अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने पाया कि उनका Compass ठीक से काम नहीं कर रहा है और कुछ दूरी पर उन्हें अजीबोगरीब लाइट्स दिखाई पड़ी थी.
20वीं शताब्दी में इस क्षेत्र के आसपास रहस्यमयी तरीके से गायब होने वाले किसी भी विमान या शिप को अलौकिक ताकतों से जोड़कर देखा गया. ज़ाहिर है, सच्चाई और अफ़वाहों के महीन धागे पर डोलते इस क्षेत्र के किस्से किसी रोमांचक फ़िल्म से कम नहीं हैं.

1. 1964 में सबसे पहले हुआ था बरमूडा ट्रायएंगल शब्द का इस्तेमाल
1964 में पहली बार इस जगह को बरमुडा ट्रायएंगल नाम दिया गया था. इस शब्द के पीछे एक लेखक विंसेंट एच. गैड्डीस का दिमाग था. विसेंट ने मैगजीन Argosy के लिए एक आर्टिकल लिखा था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि इस क्षेत्र में कई जहाज़ और विमान बिना किसी नामोनिशान के गायब हो गए हैं. इसके अगले साल विंसेंट ने इस आर्टिकल को अपनी किताब Invisible Horizons: True Mysteries of the Sea में भी शामिल किया. इस किताब में 9 ऐसी रहस्यमयी घटनाओं के बारे में भी लिखा गया था, जो बरमूडा ट्रायएंगल से जुड़ी हुई थी. ये किताब काफ़ी चर्चित रही और कई अखबारों और मैगजींस ने भी इसके बाद ही बरमू़डा ट्रायएंगल के ऊपर लिखना शुरू किया था. हालांकि इस शब्द को दुनिया में लोकप्रियता 1974 में आई किताब बरमूडा ट्रायएंगल के बाद ही मिली थी.

2. साल-1945, फ्लाइट 19 और बरमूडा ट्रायएंगल
ये सभी जानते हैं कि बरमूडा ट्रायएंगल कई रहस्यमयी घटनाओं की वजह रहा है. यहां कई विमान और जहाज़ लापता हुए हैं, जिनके बारे में आज तक पता नहीं चल सका है. हालांकि इनमें सबसे मशहूर घटना 1945 की है. अमेरिका की फ्लाइट 19 में मौजूद 14 क्रूमैन कुछ मेसेज भेजने के बाद एकाएक लापता हो गए. उसी दिन फ्लाइट 19 को ढूंढने 13 एयरमैन और मरीन का जत्था गया था, लेकिन अमेरिकी प्रशासन उस समय हैरत में पड़ गया, जब ये लोग भी लौट कर वापस नहीं आ पाए. ये दो घटनाएं इतनी रहस्यमयी थी कि दशकों बाद भी इनकी प्रासंगिकता बनी हुई है.

3. दशकों बाद भी यहां रहस्यमयी तरीके से गायब हो रहे हैं विमान
जब भी हम बरमूडा ट्रायएंगल के बारे में बात करते हैं, तो फ्लाइट 19 जैसी दशकों पुरानी घटनाओं का ही ज़िक्र होता है. लेकिन ये क्षेत्र आज भी विमानों और पानी के जहाज़ो के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है.
उदाहरण के तौर पर 2003 में एक कपल अपनी 16 फुट बोट में फ़िशिंग के लिए Beach से निकला, लेकिन फ़िर कभी वापस नहीं आ पाया. हफ़्तों जांच के बाद भी इनके बारे में कुछ पता न चल सका.
2008 में एक विमान Santiago से होते हुए न्यूयॉर्क के लिए रवाना हुआ. इस विमान में 12 लोग सवार थे. फ्लाइट को रवाना हुए 35 मिनट ही बीते थे कि ये रडार से ओझल हो गया. विमान को ढूंढने के लिए एक बड़ा ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन न तो विमान और न ही यात्रियों का कुछ पता लग पाया.
2015 में भी एक कार्गो शिप फ्लोरिडा से पोर्टो रिको के लिए रवाना हुआ था. इस शिप में 33 यात्री सवार थे. यात्रा के दौरान इस शिप को एक तूफ़ान का सामना करना पड़ा और प्रशासन का इस शिप से संपर्क टूट गया. कई हफ़्तों की गहन जांच के बाद हालांकि अटलांटिक में शिप तो मिला लेकिन किसी भी यात्री का नामो-निशान नहीं मिला.

4. इस जगह को लेकर कई Theories आई हैं सामने
बरमूडा ट्राएंगल को लेकर कई लोगों से लेकर विशेषज्ञों तक अलग-अलग राय है. कुछ लोगों का मानना है कि जो जहाज़ और विमान इस क्षेत्र में गायब हो जाते हैं, वो एक एंटी मैटर दुनिया में चले जाते हैं. ज़ाहिर है, इसका मतलब है कि कई लोग इस दुनिया के पार भी एक Parallel World में भरोसा करते हैं.
कई लोगों का ये भी मानना है कि बरमूडा ट्राएंगल दरअसल एक ऐसी जगह है, जिसे दूसरे Dimension में जाने के लिए एलियंस इस्तेमाल करते हैं. वहीं कुछ का मानना है कि बरमूडा ट्राएंगल में गायब हुए जहाज़ और विमान दरअसल भविष्यकाल या भूतकाल के गर्त में समा जाते हैं.

5. कुछ लोगों का नहीं है Conspiracies Theories में भरोसा
कई लोग ऐसे भी हैं, जो बरमूडा ट्रायएंगल से जुड़ी Conspiracy थ्योरीज़ में विश्वास नहीं करते हैं. इन लोगों का मानना है कि इस क्षेत्र में होने वाली हर घटना कहीं न कहीं प्रकृति से ही जुड़ी हुई है. गौरतलब है कि बरमूडा ट्रायएंगल में होने वाली हज़ारों दुर्घटनाओं और असमय मौत के लिए तूफ़ान को ज़िम्मेदार माना जाता है. इसके अलावा गल्फ़ स्ट्रीम्स को भी यहां होने वाली मौतों के लिए ज़िम्मेदार माना जाता रहा है.
ऐसे विमान जो यहां पानी में लैंड करने की कोशिश करते हैं, या फिर ऐसी बोट्स जिनमें इंजन की समस्या होती है, वे कई दफ़ा बहाव के कारण अपनी निश्चित दिशा से भटक जाते हैं. इसके अलावा Freak Waves को भी रहस्यमयी तरीके से गायब हुए विमानों और जहाज़ो के लिए ज़िम्मेदार माना जाता है. गौरतलब है कि Freak Waves भी वो लहरें हैं, जो एक शांत समुद्र में एकाएक अपनी मौजूदगी दर्ज कराती हैं. कई बार ये लहरें बहाव पर भी निर्भर करती हैं.

6. नई थ्योरी : Hexagonal Clouds
बरमूडा ट्राएंगल को लेकर हालिया थ्योरी Hexagonal Clouds को लेकर जुड़ी हुई है. इस अजीबोगरीब थ्योरी के मुताबिक, Meteorologists ने उत्तरी अटलांटिक समुद्र के ऊपर नोटिस किया था.
इस थ्योरी के मुताबिक, हेक्सागॉनल बादल एयर बॉम्ब का निर्माण करते हैं. ये वो ब्लास्ट्स होते हैं जो आकाश से होते हुए समुद्र की तरफ़ बढ़ते हैं. इसके चलते वे विशालकाय लहरों का निर्माण भी करते हैं. कुछ लोगों का मानना है कि इन एयर बॉम्बस की वजह से कई बार हवाएं 170 किलोमीटर की रफ्तार से दौड़ने लगती हैं. हालांकि ये नई थ्योरी अब भी हेक्सागॉनल बादलों के निर्माण को लेकर एक स्पष्ट राय नहीं बना पाई है. वहीं नासा का मानना है कि हेक्सागॉनल बादल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही आकार ले पाते हैं

7. ब्रुस जर्नोन का बरमूडा ट्रायएंगल अनुभव बेहद दिलचस्प रहा है
ब्रुस जर्नोन नाम के एक शख़्स का बरमूडा ट्रायएंगल को लेकर अनुभव दुनिया भर में काफ़ी चर्चित रहा है. ब्रुस अपने पिता के साथ बिमिनी के लिए उड़ान भर रहे थे. सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन तभी एक इलेक्ट्रॉनिक धुंध ने उनका ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया.
जर्नोन ने इस धुंध को बयां करते हुए कहा था कि ये एक अजीबोगरीब बादल था जो मियामी shore पर मंडरा रहा था. हमने उसे इ्ग्नोर करने की कोशिश की और हमें लगा कि हम ऐसा कर चुके हैं. लेकिन हमें थोड़ी ही देर बाद एहसास हुआ कि हम इस धुंध के खिलाफ़ नहीं बल्कि इस धुंध की तरफ़ ही उड़ रहे थे. सबसे अजीब ये था कि ये धुंध अब एक अजीबोगरीब सुरंग की तरह दिखाई पड़ रही थी. हमारा नेविगेशन सिस्टम बंद हो चुका था और हमें कुछ दिखाई नहीं दे रहा था और ऐसा लग रहा था कि हम मुसीबत में फंस चुके हैं.
लेकिन हैरानी की बात ये थी कि ये इलेक्ट्रॉनिक धुंध जर्नोन और उसके पिता को नुकसान पहुंचाने की जगह उनके रुट के लिए शॉर्टकर्ट में तब्दील हो गई. इस रहस्यमयी धुंध ने भले ही उनकी यात्रा को प्रभावित किया हो लेकिन वे 75 मिनट में पहुंचने की जगह अपने गंतव्य तक केवल 45 मिनट में पहुंच चुके थे

8. दुनिया के सबसे खतनाक समुद्र की लिस्ट में बरमूडा ट्रायएंगल को शुमार नहीं किया गया है
2013 में दुनिया के सबसे खतरनाक समंदरों की एक लिस्ट तैयार की गई थी. हैरानी की बात ये थी कि इस लिस्ट में बरमूडा ट्राएंगल जगह नहीं बना पाया था. इस लिस्ट में दक्षिण चीनी समुद्र, Black Sea, पूर्वी Mediterranean जैसे समुद्र शामिल थे. इस रिपोर्ट से ये भी सामने आया था कि समुद्र के ट्रैफिक में खासी बढ़ोतरी हुई है खासकर दक्षिण पूर्वी एशिया में ये समस्या काफ़ी ज्यादा है. गौरतलब है कि पिछले एक दशक में दक्षिण चीन समुद्र में शिपिंग के सबसे ज़्यादा दुर्घटनाएं देखी गई हैं

9. अमेरिका का कोस्ट गार्ड नहीं मानता बरमूडा ट्राएंगल को कोई खतरा
अमेरिका का कोस्ट गार्ड भी बरमू़डा ट्रायएंगल को पानी के जहाजों के लिए कोई खतरा नहीं मानता है. कोस्ट गार्ड के मुताबिक, ये क्षेत्र केवल एक ऐसी जगह है जिससे कई सारे मिथक जुड़े हुए हैं और इससे जुड़ी ज़्यादातर घटनाएं केवल अफ़वाहें और प्रोपेगेंडे
कोस्टगार्ड का मानना है कि इसे कई लोग एक प्रोपगेंडा के तौर पर इस्तेमाल करते हैं. उदाहरण के तौर पर, 1972 में SS VA Fogg में धमाका होने और डूबने के बाद तलाशी के दौरान कई लाशों की बरामदगी हुई थी लेकिन बरमुडा ट्रायएंगल के समर्थन में प्रोपेगेंडा करने वाली एक रिपोर्ट का कहना था कि सिवाए इस शिप के कप्तान के, सभी लाशें गायब हो चुकी थी

10. बरमूडा ट्राएंगल को किसी प्रोपगेंडा से कम नहीं समझते कुछ संदेहवादी लोग
कुछ शंकाशील, संशयात्मक और संदेहवादी लोगों का मानना है कि बरमुडा ट्राएंगल कुछ नहीं बल्कि अफ़वाहों का पुलिंदा भर है और जब जब इससे जुड़ी घटनाओं की तह तक पहुंचने की कोशिश हुई है, तब तब ये किस्से सच्चाई से कोसो दूर नज़र आए. लेकिन चूंकि बरमूडा ट्राएंगल Urban legend बन चुका है और इससे जुड़े प्रोपगेंडा से लोग पैसे कूटने में कामयाब रहे हैं, ऐसे में साल दर साल इससे जुड़े तथ्यों को मेनस्ट्रीम मीडिया सनसनीखेज़ बनाकर परोसता रहा है और इससे जुड़ी रिसर्च की गई सामग्री को अक्सर दरकिनार कर दिया जाता है.

11. ये थ्योरी तो कमाल है
कुछ Conspiracy Theorists ये भी मानते हैं कि बरमूडा ट्राएंगल के बीचोंबीच सरकार ने एक टेस्टिंग बेस का निर्माण किया है. इस टेस्टिंग सेंटर को अंडरवॉटर एरिया 51 भी कहा जाता है. माना जाता है कि ये टॉप सीक्रेट सुविधा है औऱ सामान्य लोगों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. कई लोगों का ये भी मानना है कि इस जगह पर सरकार एलियंस या दूसरी दुनिया के लोगों के साथ काम करती है.

12. बरमुडा ट्राएंगल मिस्ट्री: सॉल्वड.
Lawrence Kusche एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी में लाइब्रेरियन थे और वे बरमूडा ट्राएंगल की रहस्यमयी कहानियों से काफी प्रभावित थे. अपनी जिज्ञासा को शांत करने के लिए उन्होंने इस मामले की खुद तहकीकात करने की ठानी थी.
उन्होंने अपनी रिसर्च के लिए बरमुडा ट्राएंगल से जुड़ी कई रिपोर्ट्स को तलाश किया था और बरमुडा़ ट्राएंगल से जुड़ी उस किताब का भी गहन अध्ययन किया था जिसकी वजह से इसे जबरदस्त अटेंशन मिली थी. इस बुक का नाम था बरमुडा ट्राएंगल जिसे चार्ल्स बर्लिट्ज ने लिखा था.
लॉरेंस ने गहन जांच के बाद अपनी रिसर्च को 1975 में आई किताब में छापा था. इस किताब का नाम था - बरमुडा ट्राएंगल मिस्ट्री: सॉल्वड. उनका कहना था कि चार्ल्स की किताब और चश्मदीदों के बयानों में फर्क था. इसके अलावा कई रहस्यमयी घटनाएं जिनका ज़िक्र चार्ल्स की किताब में है, वह दरअसल बरमुडा ट्राएंगल में हुई ही नहीं थी बल्कि ये घटनाएं इस क्षेत्र के काफ़ी बाहर बताई जाती है.

13. अमेरिका की मेरिन इंश्योरेंस उठा चुकी है इस क्षेत्र के अस्तित्व पर ही सवाल
1992 में लंदन में स्थित मैरिन इंश्योरेंस मार्केट ने एक इंटरव्यू में बताया था कि बरमूडा़ ट्राएंगल में गायब हो जाने वाले विमानों और जहाजों की संख्या बाकी क्षेत्रों की तुलना में अलग नहीं है. गौरतलब है कि ऐसा माना जाता रहा है कि बरमूडा ट्राएंगल में गायब हुए विमान और डूबे हुए जहाजों की संख्या बाकी क्षेत्रों से कहीं ज्यादा है और इंश्योरेंस कंपनियां यहां जाने वाले विमानों और जहाजों के लिए ज़्यादा चार्ज करती थी.

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